पुनर्जागरण (Renaissance): आधुनिक युग का सूत्रपात

पुनर्जागरण का शाब्दिक अर्थ है ‘पुनर्जन्म’, जिसकी शुरुआत इटली के फ्लोरेंस नगर से हुई।

1. पुनर्जागरण के अग्रदूत और विचारक

  • दाँते (1260-1321): इन्हें पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है। इन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘डिवाइन कॉमेडी’ तत्कालीन इटली की बोलचाल की भाषा ‘टस्कन’ में लिखी।

  • पेट्रॉक (1304-1367): इन्हें ‘मानववाद का संस्थापक’ माना जाता है।

  • बोकेशियो (1313-1375): इन्हें ‘इटालियन गद्य का जनक’ कहा जाता है। इनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘डेकामेरॉन’ है।

  • मैकियावेली (1469-1567): आधुनिक विश्व के प्रथम राजनीतिक विचारक। इनकी पुस्तक ‘द प्रिन्स’ राज्य का नया स्वरूप प्रस्तुत करती है।

2. महान कलाकार

पुनर्जागरण की पूर्ण अभिव्यक्ति इटली के तीन कलाकारों में मिलती है:

  • लियोनार्दो द विंची: बहुमुखी प्रतिभा के धनी। इनकी अमर कृतियाँ ‘द लास्ट सपर’ और ‘मोनालिसा’ हैं।

  • माइकल एंजलो: महान मूर्तिकार और चित्रकार। कृतियाँ: ‘द लास्ट जजमेंट’, ‘द फाल ऑफ मैन’ और सिस्तान के गिरजाघर की छत के चित्र।

  • राफेल: इनकी सर्वश्रेष्ठ कृति ‘मेडोना’ (ईसा मसीह की माता) का चित्र है।

  • अन्य: जियाटो को चित्रकला का जनक माना जाता है।

3. साहित्य और विज्ञान में प्रगति

  • साहित्य: फ्रांसिस बेकन (सर्वश्रेष्ठ निबंधकार), इरासमस (पुस्तक: द प्रेज ऑफ फौली, पादरियों पर प्रहार), टॉमस मूर (पुस्तक: यूटोपिया, आदर्श समाज), शेक्सपीयर (कृति: रोमियो एंड जूलियट)।

  • विज्ञान:

    • रोजर बेकन: आधुनिक प्रयोगात्मक विज्ञान के जन्मदाता।

    • कोपरनिकस: इन्होंने सर्वप्रथम खंडन किया कि पृथ्वी सौरमंडल का केंद्र है।

    • गैलीलियो: कोपरनिकस के सिद्धांत का समर्थन किया।

    • केपलर: गणितीय आधार पर ग्रहों की गति को स्पष्ट किया।

    • न्यूटन: गुरुत्वाकर्षण के नियम की खोज की।

धर्म-सुधार आंदोलन (Reformation)

16वीं सदी में शुरू हुआ यह आंदोलन ईसाई धर्म की कुरीतियों के विरुद्ध था।

  • प्रवर्तक: मार्टिन लूथर (जर्मनी)। इन्होंने बाइबिल का अनुवाद जर्मन भाषा में किया।

  • प्रातःकालीन तारा: जॉन विकलिफ को धर्म-सुधार का प्रातःकालीन तारा कहा जाता है, जिनके अनुयायी ‘लोलार्डस’ कहलाते थे।

भौगोलिक खोजें

  • अमेरिका: क्रिस्टोफर कोलंबस ने खोज की। इटली के अमेरिगो वेस्पुची के नाम पर इसका नाम ‘अमेरिका’ पड़ा।

  • विश्व भ्रमण: मैगलन ने पहली बार समुद्री मार्ग से पूरे विश्व का चक्कर लगाया। इन्होंने ही प्रशांत महासागर का नामकरण किया था।

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