कम्प्यूटर: एक परिचय

आज का युग ‘कम्प्यूटर का युग’ है, जहाँ जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कम्प्यूटर का समावेश है।

कम्प्यूटर की परिभाषा

कम्प्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक संयंत्र है जो वृहत् पैमाने पर गणना करने में सक्षम है। यह एक ऐसी युक्ति है जिसके द्वारा स्वचालित रूप से विभिन्न प्रकार के आँकड़ों (Data) को संसाधित (Process) एवं संचयित (Store) किया जाता है।

  • प्रथम कम्प्यूटर: वर्तमान स्वरूप का पहला कम्प्यूटर ‘मार्क-1’ था, जो 1937 ई० में निर्मित हुआ था।

कम्प्यूटर के प्रमुख कार्य

कम्प्यूटर मुख्य रूप से चार तकनीकी कार्यों को संपादित करता है:

  1. आँकड़ों का संकलन/निवेशन (Input): डेटा को प्राप्त करना।

  2. आँकड़ों का संचयन (Storage): डेटा को सुरक्षित रखना।

  3. आँकड़ों का संसाधन (Processing): डेटा पर क्रिया करना।

  4. आँकड़ों का निर्गमन/पुनर्निर्गमन (Output): परिणाम या जानकारी को प्रदर्शित करना।

  • नोट: ये आँकड़े लिखित, मुद्रित, श्रव्य (Audio), दृश्य (Video), रेखांकित या यांत्रिक चेष्टाओं के रूप में हो सकते हैं।

कम्प्यूटर की संरचना: हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर

घटक विवरण उदाहरण
हार्डवेयर (Hardware) कम्प्यूटर और उससे संलग्न सभी भौतिक यंत्रों व उपकरणों का समूह। केन्द्रीय संसाधन एकक (CPU), आंतरिक/बाह्य स्मृति, इनपुट-आउटपुट उपकरण।
सॉफ्टवेयर (Software) कम्प्यूटर के संचालन के लिए निर्मित प्रोग्रामों का समूह। सिस्टम और एप्लीकेशन प्रोग्राम।

कम्प्यूटर के विभिन्न भाग और सुरक्षा

1. मुख्य हार्डवेयर इकाइयाँ

  • सीपीयू (CPU – Central Processing Unit): इसे कम्प्यूटर का ‘मस्तिष्क’ कहा जाता है। यह समस्त गणनाओं और निर्देशों को संसाधित करता है।

  • मदर बोर्ड (Mother Board): यह एक सर्किट बोर्ड है, जिसमें कम्प्यूटर के सभी आवश्यक उपकरण (जैसे CPU, RAM आदि) संयोजित (Pluggable) किए जाते हैं।

2. मेमोरी (Memory) के प्रकार

  • रैम (RAM – Random Access Memory): इसे कम्प्यूटर की ‘याददाश्त’ (Memory) कहा जाता है। इसकी गणना ‘मेगाबाइट्स’ (MB) में होती है।

  • रोम (ROM – Read Only Memory): यह हार्डवेयर का वह भाग है जिसमें सूचनाएँ स्थायी रूप से सुरक्षित रहती हैं। यह कम्प्यूटर को प्रोग्राम संचालित करने के निर्देश देता है।

3. स्टोरेज और डेटा ट्रांसफर उपकरण

  • हार्ड डिस्क (Hard Disk): इसमें कम्प्यूटर के लिए आवश्यक प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर स्टोर किए जाते हैं।

  • फ्लॉपी डिस्क ड्राइव (Floppy Disk Drive): इसका उपयोग सूचनाओं को सुरक्षित करने या एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में डेटा का आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता है।

  • सीडी रोम (CD-ROM – Compact Disc): यह आकार में छोटा होते हुए भी बड़ी मात्रा में आँकड़ों, चित्रों और ध्वनियों को संग्रहीत करने में सक्षम है।

4. इनपुट और आउटपुट उपकरण

  • की-बोर्ड (Key Board): कम्प्यूटर की लेखन प्रणाली के लिए उपयोग किया जाता है। सामान्यतः 101 कीज़ वाला की-बोर्ड अच्छा माना जाता है।

  • माउस (Mouse): स्क्रीन पर विभिन्न प्रोग्रामों को कर्सर के माध्यम से संचालित करने हेतु प्रयुक्त होता है।

  • मॉनीटर (Monitor): इस पर कम्प्यूटर में निहित जानकारियों को देखा जाता है।

    • विशेषता: अच्छे रंगीन मॉनीटर में 256 रंग आते हैं। इसमें ‘डॉट पिच’ का उपयोग होता है; डॉट पिच का नंबर जितना कम होता है, स्क्रीन पर छवि उतनी ही साफ और गहरी होती है।

  • साउंड कार्ड (Sound Card): यह आवाज सुनने और मल्टीमीडिया के उपयोग के लिए आवश्यक है।

  • प्रिंटर (Printer): कम्प्यूटर के आँकड़ों को कागज पर मुद्रित करने के लिए। प्रमुख प्रकार: डॉट मैट्रिक्स, इंक जेट, बबल जेट और लेजर जेट।

5. कम्प्यूटर वायरस (Computer Virus)

कम्प्यूटर वायरस एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक कोड है, जो जानबूझकर कम्प्यूटर में समाहित सूचनाओं को नष्ट करने या गलत सूचनाएँ देने के लिए बनाया जाता है।

  • वायरस का प्रसार:

    • टेलीफोन लाइन के माध्यम से।

    • फ्लॉपियों के आदान-प्रदान से।

    • नेटवर्क से जुड़े होने पर यह संपूर्ण नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है।

  • प्रभाव: यह एकत्रित जानकारी को नष्ट कर सकता है और महीनों या वर्षों तक बिना पहचाने गए कम्प्यूटर में सक्रिय रहकर उसे क्षति पहुँचा सकता है।

  • रोकथाम: इसके बचाव के लिए विशेष ‘इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा-व्यवस्था’ विकसित की गई है।

  • मुख्य वायरस के नाम: माइकेलेएंजलो, डार्क एवेंजर, किलो, फिलिप, सी ब्रेन, ब्लडी, चेंज मुंगू, एवं देसी।

कम्प्यूटर की भाषा कंप्यूटर प्रोग्रामर के द्वारा कम्प्यूटर के साथ संवाद करने के लिए प्रयोग किये जाने वाला एक कोड है। कम्प्यूटर भाषा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के बीच संचार स्थापित करती है। कम्प्यूटर की भाषा दो स्तर की होती है। निम्न स्तरीय भाषा, उच्च स्तरीय भाषा।

निम्न स्तरीय भाषा (Low Level Language)

वह भाषाएँ (Languages) जो अपने संकेतो को मशीन संकेतो में परिवर्तित के लिए किसी भी अनुवादक (Translator) को शामिल नही करता, निम्न स्तरीय भाषा कहलाती है। इसका उपयोग करने के लिए कम्प्यूटर के हार्डवेयर (Hardware) के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। इनका संपादन उच्च स्तरीय भाषा से तेज होता है। ये दो प्रकार की होती है –

(क) मशीन भाषा (Machine Language)

कम्प्यूटर प्रणाली सिर्फ अंको के संकेतो को समझ सकता है, जो कि बाइनरी (1 या 0) होता है। अत: कम्प्यूटर को निर्देश सिर्फ बाइनरी कोड 1 या 0 में ही दिया जाता है और जो निर्देश बाइनरी कोड (Binary Code) में दिया जाता है उन्हें मशीन भाषा (Machine Language) कहा जाता है। मशीनी भाषा (Machine Level Language) मशीन के लिए सरल होती है और प्रोग्रामर के लिए कठिन होती है।

(ख) असेम्बली भाषा (Assembly Language)

असेम्बली भाषा में निर्देश अंग्रेजी के शब्दों में दिए जाते है, जैसे की NOV, ADD, SUB आदि, इसे निमोनिक कोड कहा जाता है। मशीन भाषा की तुलना में असेम्बली भाषा को समझना आसान होता है परन्तु कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है और यह सिर्फ बाइनरी कोड को समझता है, इसलिए जो प्रोग्राम असेम्बली भाषा में लिखा होता है, उसे मशीन स्तरीय भाषा में अनुवाद करना होता है।

उच्च स्तरीय भाषा (High Level Language)

ये भाषा मशीन पर निर्भर करती है तथा यह भाषा अंग्रेजी भाषा के कोड के समान होती है, इसलिए इसे कोड करना या समझना आसान होता है। इसमें Translator उच्च स्तरीय भाषा के Program को मशीन कोड में translate करता है। इसके उदाहरण है – फॉरटरैन, बेसिक, कोबोल, पास्कल , सी (C), सी++, जावा, VISUAL BASIC, Visual Basic.net, HTML आदि इसी भाषा के प्रकार है। इसको दो पीढ़ियों में बाँटा गया है – तृतीय पीढ़ी भाषा (Third Generation Language), चतुर्थ पीढ़ी भाषा (Fourth Generation Language)।

(क) तृतीय पीढ़ी भाषा (Third Generation Language)

ये पहली भाषाएँ थी जिन्होंने प्रोग्रामरो को मशीनी तथा असेम्बली भाषाओ में प्रोग्राम लिखने से बनाया। तृतीय पीढ़ी की भाषाएँ मशीन पर निर्भर नहीं थी अतः प्रोग्राम लिखने के लिए मशीन के आर्किटेक्चर को समझने की आवश्यकता नही थी। इसके अतिरिक्त प्रोग्राम पोर्टेबल हो गए, जिस कारण प्रोग्राम को उनके कम्पाइलर व इन्टरप्रेटर के साथ एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में कॉपी किया जा सकता था। तृतीय पीढ़ी के कुछ अत्यधिक लोकप्रिय भाषाओ में फॉरटरैन, बेसिक, कोबोल, पास्कल, सी, सी++ आदि सम्मिलित है। 

(i) फोरट्रान (Fortran) – फोरट्रान का पूरा नाम फार्मूला ट्रांसलेशन (Formula Translation) है। जिस का संक्षिप्त रूप फोरट्रान (Fortran) होता है। फोरट्रान भाषा का विकास आईबीएम के जेडब्ल्यू बेकस ने 1957 में किया था। जो गणित के सूत्रों को सरलता से और कम समय में हल करने के लिए प्रयोग में लाई जाती है इसका उपयोग वैज्ञानिकों के द्वारा भी अनेक प्रकार के अनुसंधान कार्यों में किया जाता है।

(ii) कोबोल (Cobol) – कोबोल का पूरा नाम कॉमन बिजनेस ओरिएंटेड लैंग्वेज (common business oriented language) होता है। इसके संक्रिया में लिखे गए वाक्यों के समूह को पैराग्राफ और पैराग्राफ से मिलकर एक सेक्शन बनाया जाता हैं तथा कई सेक्सन मिलकर डिवीजन बनाते हैं। इस भाषा का उपयोग अधिकतर व्यावसायिक क्षेत्रों में किया जाता है।

(iii) बेसिक (Basic) – बेसिक का पूरा नाम बिगनर्स ऑल पर्पस सिंबॉलिक इंस्ट्रक्शन कोड (beginner’s all purpose symbolic instruction code) होता है। इसका विकास John G. Kemeny and Thomas E. Kurtaz द्वारा किया गया। इसका उपयोग माइक्रो कंप्यूटर में वित्त डेटा ग्राफिक्स उत्पादक कंप्यूटर हेतु होता है।

(iv) C (सी) – सी (C) एक सामान्य उपयोग में आने वाली कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा है। इसका विकास डेनिस रिची ने बेल्ल टेलीफोन प्रयोगशाला में सन् 1972 में किया था जिसका उद्देश्य यूनिक्स संचालन तंत्र का निर्माण करना था। यह भाषा विभिन्न सॉफ्टवेयर फ्लेटफार्मों पर बहुतायत में उपयोग की जाती है।

(v) C++ –  इसे ब्यार्ना स्त्रौस्त्रप द्वारा विकसित सी भाषा की वृद्धि के रूप में बेल लेबोरेटरीज में 1979 में शुरू किया गया था। एक स्थैतिक टाइप, स्वतंत्र-प्रपत्र, बहु-प्रतिमान संकलित, सामान्य प्रयोजन प्रोग्रामिंग भाषा है। यह एक मध्यस्तरीय भाषा के रूप में जानी जाती है, क्योंकि यह दोनों उच्च स्तर और निम्न स्तर की भाषा सुविधाओं का एक संयोजन है। इस भाषा का मूल नाम सी विथ क्लासेस था, जिसे 1983 में बदल कर सी++ कर दिया गया। यह एक आब्जेक्ट उन्मुखी (ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड) भाषा है।

(vi) अलगोल (Algol) – इसका पूरा नाम एल्गोरिथमिक लैंग्वेज (Algorithmic Language) होता है। अलगोल इसका संक्षिप्त रूप होता है। इस भाषा का उपयोग बीजगणित की गणना करने के किया जाता है।

(vii) पास्कल (Pascal) – इस भाषा को अलगोल भाषा का ही परिवर्तित रूप माना जाता है। इस भाषा में सभी चरों को परिभाषित किया गया है, जिस कारण यह अलगोल से अलग होती है। इसका विकासनिकलस रूथने किया था किन्तु इसका नाम फ्रांसीसी वैज्ञानिक ब्लेज पास्कलके नाम पर रखा गया है। आजकल भाषा का विकास अच्छे प्रोग्राम इन स्ट्रक्चर के लिए किया गया है।

(viii) कोमाल (COMAL) – यह Common Algorithmic Language का संक्षिप्त रूप है। इसका प्रयोग मुख्यतः माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए किया जाता है।

(ix) लोगो (LOGO) – इसका प्रयोग छोटे बच्चों को ग्राफिक रेखा अनुकृतियाँ सिखाने के लिए किया जाता है।

(x) प्रोलॉग (PROLOG) – यह Programming in Language का संक्षिप्त रूप है। इसका विकास फ्रांस में 1973 ई0 में किया गया था। इसका विकास कृत्रिम बुद्धि के कार्यों के लिए हुआ था।

(xi) फ़ोर्थ (FORTH) – इसका आविष्कार चार्ल्स मूरे ने किया था। 

(xii) PILOT

(xiii) LIPS

(xiv) UNIX

(xv) SNOBOL

(ख) चतुर्थ पीढ़ी भाषा (Fourth Generation Language)

सामान्यत: चतुर्थ पीढ़ी की भाषाओं में विजुअल (Visual) वातावरण होता है जबकि तृतीय पीढ़ी की भाषाओ में टेक्सचुअल (Textual) वातावरण होता था। टेक्सचुअल वातावरण में प्रोग्रामर Source Code को निर्मित करने के लिए अंग्रेजी के शब्दों का उपयोग करते है। चतुर्थ पीढ़ी की भाषाओ के एक पंक्ति का कथन तृतीय पीढ़ी के 8 पंक्तियों के कथन के बराबर होता है। Microsoft Visual studio और Java Studio इसके दो उदाहरण है।

(i) Microsoft Visual studio – यह एक एकीकृत विकास वातावरण (IDE) है जिसे Microsoft के द्वारा डेस्कटॉप एप्लिकेशन, GUI (ग्राफ़िकल यूज़र इंटरफ़ेस), कंसोल, वेब एप्लिकेशन, मोबाइल एप्लिकेशन, क्लाउड और वेब सेवाएँ आदि के लिए विकसित किया गया है।

(ii) जावा (java)- जावा एक प्रोग्रामिंग भाषा है जिसे मूलतः जेम्स गोसलिंग द्वारा विकसित किया गया। यह भाषा अपना अधिकांश वाक्य विन्यास (सिंटेक्स) C (सी) और C++ से प्राप्त करती है लेकिन इसके पास एक सरल ऑब्जेक्ट मॉडल और कुछ निम्न स्तर की सुविधायें मौजूद हैं। जावा के प्रयोगों को विशिष्ट रूप से बाईटकोड (क्लास फाइल) के लिए संकलित किया जाता है।

कम्प्यूटर की भाषाएँ (Languages of Computer)

कम्प्यूटर की भाषाओं को मुख्य रूप से तीन वर्गों में विभाजित किया गया है:

1. मशीनी कूट भाषा (Machine Code Language)

  • इसमें प्रत्येक आदेश को 0 और 1 के क्रम में व्यक्त किया जाता है (आदेश कोड + स्थिति कोड)।

  • आरंभिक दिनों में इसी भाषा का प्रयोग होता था। यह अत्यधिक समय लेने वाली प्रक्रिया थी।

2. एसेम्बली भाषा (Assembly Language)

  • इसमें याद रखने योग्य नेमोनिक (Mnemonic) कोड का प्रयोग किया गया।

  • उदाहरण: ADDITION के लिए ADD, SUBSTRACTION के लिए SUB, JUMP के लिए JMP।

  • इसे निम्न स्तरीय भाषा कहा जाता है, क्योंकि यह एक निश्चित संरचना वाले कम्प्यूटर तक ही सीमित थी।

3. उच्चस्तरीय भाषाएँ (High Level Languages)

  • इनका विकास मनुष्य की बोलचाल और लिखने की भाषा के करीब पहुँचने के उद्देश्य से किया गया। इनके विकास का श्रेय IBM कंपनी को जाता है।

प्रमुख उच्चस्तरीय भाषाएँ:

  • फॉस्ट्रन (FORTRAN):

    • विकास: 1957 ई० में जे० डब्ल्यू बेकस (IBM) द्वारा।

    • उद्देश्य: गणितीय सूत्रों को आसानी से और कम समय में हल करना।

  • कोबोल (COBOL – Common Business Oriented Language):

    • उद्देश्य: व्यावसायिक कार्यों के लिए विकसित।

    • संरचना: इसमें लिखे गए वाक्यों के समूह को ‘पैराग्राफ’, पैराग्राफ के समूह को ‘सेक्शन’ और सेक्शन के समूह को ‘डिवीजन’ कहा जाता है।

  • यहाँ आपके द्वारा प्रदान की गई अतिरिक्त जानकारी को पिछले भाग के साथ संयोजित करते हुए व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है:

    उच्चस्तरीय भाषाओं (High Level Languages) का विस्तृत विवरण

    उच्चस्तरीय भाषाएँ मनुष्य के बोलचाल और लिखने की भाषा के काफी करीब होती हैं। इनके विकास का मुख्य उद्देश्य प्रोग्रामिंग को सरल और प्रभावी बनाना था।

    भाषा पूर्ण नाम/विशेषता मुख्य उपयोग/विवरण
    BASIC Beginners All-purpose Symbolic Instruction Code इसमें प्रोग्राम के किसी निश्चित भाग को निष्पादित (Execute) किया जा सकता है।
    ALGOL Algorithmic Language जटिल बीजगणितीय गणनाओं के लिए निर्मित।
    PASCAL यह ALGOL का परिवर्द्धित (Advanced) रूप है। इसमें सभी चरों (Variables) को पहले परिभाषित करना अनिवार्य है।
    COMAL Common Algorithmic Language मुख्य रूप से माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए उपयोग की जाती है।
    LOGO छोटी उम्र के बच्चों को ग्राफिक्स और रेखाकृतियों की शिक्षा देने के लिए।
    PROLOG Programming in Logic विकास 1973 ई० में फ्रांस में हुआ। यह ‘कृत्रिम बुद्धि’ (Artificial Intelligence) और तार्किक प्रोग्रामिंग के लिए सक्षम है।
    FORTH इसका आविष्कार चार्ल्स मूरे ने किया था। यह कम्प्यूटर के सभी प्रकार के कार्यों में उपयोग की जाती है।

    उच्चस्तरीय भाषाओं में सामान्य विशेषता

    इन सभी उच्चस्तरीय भाषाओं में एक समानता यह है कि लगभग सभी में अंग्रेजी वर्णमाला (A, B, C, D…) और इंडो-अरेबियन अंकों (0, 1, 2, 3…) का प्रयोग किया जाता है।

    अन्य प्रमुख उच्चस्तरीय भाषाएँ

    उपरोक्त भाषाओं के अतिरिक्त, निम्नलिखित भाषाएँ भी प्रमुख हैं:

    • PILOT, C, C++, LISP, UNIX, एवं SNOBOL

    संक्षिप्त सारांश (पिछले भाग के साथ कुल जानकारी)

    • परिचय: कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जो डेटा को स्वचालित रूप से संसाधित करती है। प्रथम कम्प्यूटर ‘मार्क-1’ (1937) था।

    • कार्य: डेटा संकलन, संचयन, संसाधन और निर्गमन।

    • संरचना: हार्डवेयर (भौतिक उपकरण) और सॉफ्टवेयर (प्रोग्रामों का समूह)।

    • भाषाओं के प्रकार:

      1. मशीनी भाषा: 0 और 1 के कोड पर आधारित (प्रथम पीढ़ी)।

      2. एसेम्बली भाषा: नेमोनिक कोड (जैसे ADD, SUB) का उपयोग, इसे ‘निम्न स्तरीय भाषा’ माना जाता है।

      3. उच्च स्तरीय भाषा: मनुष्य की भाषा के निकट (जैसे FORTRAN, COBOL, BASIC आदि)।

     

  • यहाँ कम्प्यूटर से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का व्यवस्थित एवं सारगर्भित विवरण प्रस्तुत है:

    1. कम्प्यूटर का इतिहास और विकास

    • हिंदी नाम: संगणक।

    • जनक: चार्ल्स बेबेज को ‘कम्प्यूटर का पितामह’ कहा जाता है।

    • महत्वपूर्ण योगदान: वॉन न्यूमेन का कम्प्यूटर के विकास में सर्वाधिक योगदान है।

    • महत्वपूर्ण तिथियाँ:

      • आधुनिक कम्प्यूटर की खोज: 1946 ई०।

      • कम्प्यूटर क्रांति: 1960 ई० से।

      • भारत की नई कम्प्यूटर नीति: नवंबर 1984 में घोषित।

    2. कम्प्यूटर साक्षरता

    • अर्थ: यह जानना कि कम्प्यूटर क्या कर सकता है और क्या नहीं।

    • दिवस: 2 दिसंबर को ‘कम्प्यूटर साक्षरता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

    3. वैश्विक स्थिति

    • सर्वाधिक कम्प्यूटर वाला देश: संयुक्त राज्य अमेरिका (प्रथम)।

    • अन्य प्रमुख देश (क्रमशः): जापान, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस।

    • भारत का स्थान: 19वाँ।

    4. भारत में कम्प्यूटर: प्रमुख मील के पत्थर

    • प्रथम निर्मित कम्प्यूटर: ‘सिद्धार्थ’ (निर्माण: इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया)।

    • प्रथम कम्प्यूटर स्थापना: 16 अगस्त, 1986 को बंगलौर के प्रधान डाकघर में।

    • प्रथम कम्प्यूटरीकृत डाकघर: नई दिल्ली।

    • प्रथम प्रदूषण रहित कम्प्यूटरीकृत पेट्रोल पम्प: मुम्बई।

    • प्रथम कम्प्यूटर विश्वविद्यालय: राजीव गांधी कम्प्यूटर विश्वविद्यालय (निजी क्षेत्र के अंतर्गत)।

    • प्रथम कम्प्यूटर आरक्षण पद्धति: नई दिल्ली में लागू।

    • सिलिकॉन घाटी (भारत): बंगलौर।

    • इंटरनेट पर वेबसाइट बनाने वाली प्रथम पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP)।

    5. कम्प्यूटर के प्रकार

    कम्प्यूटर मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

    1. डिजिटल कम्प्यूटर: जो गणितीय गणनाएँ करता है।

    2. एनालॉग कम्प्यूटर।

    3. हाइब्रिड कम्प्यूटर।

    6. तकनीकी तथ्य एवं आविष्कार

    • इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) चिप: इसका विकास जे० एस० किल्बी ने किया।

    • चुम्बकीय डिस्क: इस पर आयरन ऑक्साइड की परत होती है।

    • WWW (World Wide Web): इसके आविष्कारक और प्रवर्तक टिम बर्नर्स ली हैं।

    आपके द्वारा प्रदान की गई अतिरिक्त जानकारी को पिछले सभी भागों के साथ एकीकृत करते हुए, यहाँ कम्प्यूटर से संबंधित सभी तथ्यों का पूर्ण और व्यवस्थित विवरण प्रस्तुत है:

    कम्प्यूटर: एक व्यापक संकलन

    1. आधारभूत परिभाषाएँ एवं मापन इकाइयाँ

    • असेम्बलर (Assembler): यह असेम्बली भाषा को यंत्र (मशीनी) भाषा में परिवर्तित करने वाला प्रोग्राम है।

    • डाटा की सबसे छोटी इकाई: ‘बिट’ (Bit)। यह ‘बाइनरी इकाई’ के प्रारंभिक एवं अंतिम अक्षरों (0 और 1) से बना है।

    • बाइट (Byte): एक बाइट आठ द्विआधारी अंकों (bits) का समूह होता है।

    • स्मृति मापन (Memory Units):

      • 1 किलोबाइट (KB) = 1024 बाइट।

      • 1 मेगाबाइट (MB) = 1024 KB।

    • मेमोरी: आधुनिक कम्प्यूटर में प्रायः ‘सेमीकंडक्टर मेमोरी’ का उपयोग किया जाता है।

    2. कम्प्यूटर के प्रकार और विशेषताएँ

    • वर्गीकरण (सिद्धांत के आधार पर):

      • डिजिटल: जो गणितीय गणना करते हैं।

      • एनालॉग: जो आंकलन के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।

      • हाइब्रिड: एनालॉग और डिजिटल का संयुक्त स्वरूप।

    • वर्गीकरण (आकार और क्षमता के आधार पर):

      • माइक्रो कम्प्यूटर: सूक्ष्मतम आकार के कम्प्यूटर।

      • मिनी कम्प्यूटर: मध्यम आकार के कम्प्यूटर।

      • सुपर कम्प्यूटर: सामान्य कम्प्यूटर से 10 गुना तेज कार्य करने वाले बड़े कम्प्यूटर। इनमें करीब 40 हजार माइक्रो कम्प्यूटर के बराबर क्षमता होती है। इनकी गति मेगाफ्लॉप में मापी जाती है।

    • प्रमुख सुपर कम्प्यूटर:

      • अनुपम: भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा विकसित।

      • विश्व का प्रथम सुपर कम्प्यूटर: ‘क्रे० के० 1-एस’ (1979, के रिसर्च कंपनी, अमेरिका)।

      • डीप ब्ल्यू (Deep Blue): यह 32 कम्प्यूटरों के बराबर क्षमता वाला सुपर कम्प्यूटर है जो 1 सेकंड में 20 करोड़ शतरंज की चालें सोच सकता है। इसने विश्व चैंपियन गैरी कास्पोरोव को हराया था।

      • T-3A: विश्व का सबसे तेज कम्प्यूटर।

    3. हार्डवेयर और घटक

    • माइक्रोप्रोसेसर: इसे ‘पेन्टियम’ (Pentium) ब्रांड नाम से बेचा जाता है। इंटेल का अधुनातन (latest) प्रोसेसर ‘Pentium-IV’ है।

    • कम्प्यूटर बोर्ड: इसमें कुल आठ संयोजक (Connectors) होते हैं।

    • इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) चिप: इसका विकास जे० एस० किल्बी ने किया।

    • चुम्बकीय डिस्क: इस पर आयरन ऑक्साइड की परत होती है।

    • पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर: इसमें ‘निर्वात ट्यूब’ (Vacuum Tube) का उपयोग होता था।

    4. इंटरनेट और नेटवर्किंग

    • इंटरनेट: विश्व का सबसे बड़ा कम्प्यूटर नेटवर्क।

    • महत्वपूर्ण घटक:

      • सर्च इंजन: याहू, गूगल, MSN।

      • आर्क (Archie): सूचना खोजने में सबसे सहायक (मैकगिल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित)।

      • मोडम (Modem): टेलीफोन लाइन पर कार्य करने वाला उपकरण जो कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ता है।

      • गेटवे: जब एक इंटरनेट नेटवर्क दूसरे नेटवर्क से जुड़ता है।

      • साइट: वह संगणक जहाँ विशेष प्रकार की सूचनाएँ उपलब्ध हों।

      • USENET: विश्वविद्यालयों को एक साथ जोड़ने की प्रणाली।

    • प्रक्रियाएँ:

      • डाउनलोड: दूर के नेटवर्क से अपने कंप्यूटर में सूचना लाना (मोडम द्वारा)।

      • अपलोड: अपने कंप्यूटर से दूसरे को सूचना भेजना।

    • प्रथम भारतीय उपस्थिति:

      • समाचार पत्र: द हिन्दू (इंटरनेट पर प्रथम)।

      • पत्रिका: इण्डिया टुडे (इंटरनेट पर प्रथम)।

    5. ऐतिहासिक एवं अन्य तथ्य

    • प्रथम इलेक्ट्रोनिक डिजिटल कम्प्यूटर: एनीयक (ENIAC)।

    • WWW (World Wide Web): आविष्कारक एवं प्रवर्तक – टिम बर्नर्स ली।

    • कम्प्यूटर पीढ़ियाँ: कुल 5 पीढ़ियाँ विकसित की गई हैं।

    आपके द्वारा प्रदान की गई कम्प्यूटर से संबंधित समस्त जानकारियों को विषयवार वर्गीकृत और व्यवस्थित रूप में नीचे प्रस्तुत किया गया है:

    कम्प्यूटर: एक व्यापक व्यवस्थित संकलन

    1. मापन इकाइयाँ एवं शब्दावली

    • मेमोरी मापन: * 1 किलोबाइट (KB) = 1024 बाइट।

      • 1 मेगाबाइट (MB) = 1024 KB।

      • 1 गीगाबाइट (GB) = 1024 MB।

    • शब्दावली: * बिट (Bit): डेटा की सबसे छोटी इकाई (0 और 1)।

      • बाइट (Byte): 8 द्विआधारी अंकों (bits) का समूह।

      • बग (Bug): कम्प्यूटर प्रोग्राम में मौजूद अशुद्धि।

      • मेन्यू (Menu): कम्प्यूटर पर प्रोग्रामों की सूची।

      • फाइल: रिकॉर्ड्स का संग्रह।

      • डेटा प्रोसेसिंग: वाणिज्यिक उपयोग के लिए जानकारी तैयार करना।

      • क्रैश (Crash): हार्ड डिस्क या किसी प्रोग्राम का अचानक खराब होना/समाप्त होना।

    2. प्रोग्रामिंग भाषाएँ और उनके अनुप्रयोग

    • भाषाओं का वर्गीकरण:

      • FORTRAN: प्रोग्रामिंग हेतु विकसित सर्वप्रथम उच्चस्तरीय भाषा।

      • COBOL: उच्चस्तरीय भाषा जो अंग्रेजी के समान है; सर्वाधिक डॉक्युमेंटेशन के लिए उपयुक्त।

      • BASIC: अन्य भाषाओं (FORTRAN, ALGOL, PASCAL) को सिखाने के लिए ‘नींव का पत्थर’।

      • SNOBOL: सूचना के आगमन एवं कार्यक्रमों की खोज हेतु विशिष्ट भाषा।

      • PROLOG: पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटर की भाषा।

      • भाषा प्रदेश: हिन्दी कमांड स्वीकार करने वाली कम्प्यूटर भाषा।

    • अनुवादक (Translator): कम्पाइलर वह प्रोग्राम है जो उच्चस्तरीय भाषा को निम्नस्तरीय भाषा में अनुवादित करता है।

    3. कम्प्यूटर के विकास एवं पीढ़ियाँ

    • पीढ़ियाँ:

      • चतुर्थ पीढ़ी: माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित।

      • पंचम पीढ़ी: प्रोलॉग भाषा का उपयोग।

    • महत्वपूर्ण तथ्य:

      • IC चिप: विकास जे० एस० किल्बी ने किया; इस पर सिलिकॉन की परत होती है।

      • आधुनिक कम्प्यूटर: डिजिटल कम्प्यूटर कार्य पद्धति में गणना और सिद्धांत पर आधारित हैं।

      • प्रथम डिजिटल कम्प्यूटर: यूनीवेक (UNIVAC)।

    4. भारतीय कम्प्यूटर परिदृश्य

    • सुपर कम्प्यूटर:

      • परम 10000: सी-डैक (पुणे) द्वारा 28 मार्च 1998 को निर्मित। क्षमता: 1 खरब गणना प्रति सेकंड। विकास का मुख्य श्रेय: डॉ० विजय पी० भास्कर (C-DAC कार्यकारी निदेशक)।

      • फ्लोसावर: नेशनल एयरोनौटिक्स लेबोरेटरीज (बंगलौर) द्वारा विकसित प्रथम भारतीय सुपर कम्प्यूटर।

    • विशेष तथ्य: वैज्ञानिकों के अनुसार संस्कृत भाषा को कम्प्यूटरीकृत करना सबसे आसान है।

    5. कम्प्यूटर साहित्य एवं इतिहास

    • प्रथम घरेलू कम्प्यूटर: कमोडोर VIC/20।

    • महत्वपूर्ण पुस्तकें:

      • पर्सनल कम्प्यूटर पर प्रथम पुस्तक: टेड नेल्सन द्वारा।

      • ‘सोल ऑफ न्यू मशीन’ (टैसी किडर): पुलित्जर पुरस्कार विजेता।

    • प्रथम पत्रिका: कम्प्यूटर एण्ड ऑटोमेशन।

    6. इंटरनेट, सुरक्षा एवं अन्य तकनीकी तथ्य

    • सुरक्षा एवं वायरस:

      • कम्प्यूटर वायरस: मानव निर्मित ‘डिजिटल परजीवी’, जिसे ‘फाइल संक्रामक’ भी कहा जाता है।

      • Y-2K संकट: इसे ‘मिलियन बग’ कहा जाता है; यह तारीखों (Year 2000) से संबंधित समस्या थी।

      • परमाणु परीक्षण: कम्प्यूटर पर किए गए परीक्षणों को ‘सबक्रिटिकल परीक्षण’ कहते हैं।

    • उपकरण एवं नेटवर्क:

      • लेजर प्रिंटर: सर्वाधिक तेज गति का प्रिंटर।

      • IBM: एक प्रसिद्ध कम्प्यूटर कंपनी।

    कम्प्यूटर शब्दावली: संक्षिप्त रूप (Abbreviations)

    संक्षिप्त रूप (Short Form) पूर्ण नाम (Full Form)
    ALGOL Algorithmic Language
    ALU Arithmetic Logic Unit
    ASCII American Standard Code for Information Interchange
    BASIC Beginner’s All Purpose Symbolic Instruction Code
    BCD Binary Coded Decimal Code
    CAD Computer Aided Design
    C-DOT Centre for Development of Telematics
    CD Compact Disk
    CLASS Computer Literacy And Studies in School
    COBOL Common Business Oriented Language
    COMAL Common Algorithmic Language
    CPU Central Processing Unit
    DOS Disk Operating System
    DTP Desk Top Publishing
    DTS Desk Top System
    ENIAC Electronic Numerical Integrator and Computer
    FAX Far Away Xerox
    FLOPS Floating Operations per Second
    FORTRAN Formula Translation
    HLL High Level Languages
    HTML Hyper Text Markup Language
    IBM International Business Machines
    IC Integrated Circuit
    ISH Information Super Highway
    LAN Local Area Network
    LDU Liquid Display Unit
    LISP List Processing
    LLL Low Level Language
    MICR Magnetic Ink Character Reader
    MIPS Millions of Instructions Per Second
    MODEM Modulator-Demodulator
    MOPS Millions of Operation Per Second
    NICNET National Information Centre Network
    OMR Optical Mark Reader
    PC-DOS Personal Computer Disk Operating System
    PROM Programmable Read Only Memory
    RAM Random Access Memory
    ROM Read Only Memory
    RPG Report Program Generator
    SNOBOL String Oriented Symbolic Language
    VDU Visual Display Unit
    VLSI Very Large Scale Integration
    WAN Wide Area Network
    WWW World Wide Web
    E-Commerce Electronic Commerce
    E-Mail Electronic Mail

    महत्वपूर्ण अतिरिक्त जानकारी

    • कम्प्यूटर साक्षरता (Computer Literacy): इसका अर्थ है यह समझना कि कम्प्यूटर क्या कर सकता है और क्या नहीं।

    • संक्षिप्त शब्दों का उपयोग: ये संक्षिप्त रूप कम्प्यूटर के विभिन्न हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग और प्रोग्रामिंग भाषाओं को समझने के लिए मानक रूप से उपयोग किए जाते हैं।

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