1. मुख्य वित्तीय समितियाँ
A. प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)
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सदस्य संख्या: 30 सदस्य (सभी लोक सभा से, राज्य सभा का प्रतिनिधित्व नहीं)।
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निर्वाचन: प्रति वर्ष आनुपातिक प्रतिनिधित्व एवं एकल संक्रमणीय मत द्वारा।
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कार्यकाल: 1 वर्ष।
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मुख्य कार्य: सरकारी खर्च में कमी लाना, संगठन में कुशलता और प्रशासन में सुधार के सुझाव देना।
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विशेष: इसके प्रतिवेदन पर सदन में बहस नहीं होती, लेकिन यह समिति वर्ष भर कार्य करती है।
B. लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee)
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सदस्य संख्या: 22 सदस्य (15 लोक सभा से + 7 राज्य सभा से)।
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कार्यकाल: 1 वर्ष।
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विशेष: इसे प्राक्कलन समिति की ‘जुड़वा बहन’ कहा जाता है। 1967 से स्थापित परंपरा के अनुसार, इसका अध्यक्ष विपक्ष का सदस्य होता है। राज्य सभा के सदस्य सह-सदस्य होते हैं और उन्हें मत देने का अधिकार नहीं है।
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मुख्य कार्य:
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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के प्रतिवेदनों की जाँच।
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सरकार के विनियोग लेखाओं की जाँच।
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संसद द्वारा स्वीकृत राशि से अधिक व्यय होने पर कारणों की जाँच।
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वित्तीय अपव्यय, भ्रष्टाचार और अकुशलता के प्रमाणों की खोज।
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C. सरकारी उपक्रमों की समिति (Committee on Public Undertakings)
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सदस्य संख्या: 22 सदस्य (15 लोक सभा से + 7 राज्य सभा से), निर्वाचित।
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अध्यक्ष: लोक सभा अध्यक्ष द्वारा नामजद।
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मुख्य कार्य: सरकारी उपक्रमों के प्रतिवेदनों, लेखाओं और CAG की रिपोर्ट की जाँच करना।
2. अन्य महत्वपूर्ण संसदीय समितियाँ
| समिति का नाम | संरचना / मुख्य बातें |
| कार्य मंत्रणा समिति | लोक सभा: अध्यक्ष सहित 15 सदस्य (अध्यक्ष पदेन अध्यक्ष)। राज्य सभा: सभापति पदेन सभापति। |
| गैरसरकारी सदस्यों के विधेयक/संकल्प समिति | केवल लोक सभा में गठित। 15 सदस्य। लोक सभा उपाध्यक्ष पदेन अध्यक्ष। |
| नियम समिति | लोक सभा: अध्यक्ष सहित 15 सदस्य। राज्य सभा: सभापति एवं उपसभापति सहित 16 सदस्य। अध्यक्ष/सभापति पदेन अध्यक्ष होते हैं। |
| SC/ST कल्याण समिति | कुल 30 सदस्य (20 लोक सभा से + 10 राज्य सभा से)। |
| ग्रंथालय समिति | कुल 9 सदस्य (लोक सभा अध्यक्ष द्वारा मनोनीत 6 लोक सभा सदस्य + राज्य सभा सभापति द्वारा मनोनीत 3 राज्य सभा सदस्य)। प्रति वर्ष गठन। |
नोट: सभी समितियाँ संसदीय प्रक्रिया और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और कुशलता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।