1. भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) [अनुच्छेद 266 (1)]

यह निधि सरकार के समस्त राजस्वों, लिए गए ऋणों और ऋणों की अदायगी से प्राप्त धन का संचय है। इस निधि पर निम्नलिखित व्यय भारित (Charged) होते हैं, जिन्हें संसद द्वारा मतदान की आवश्यकता नहीं होती:

  • संवैधानिक पदाधिकारी:

    • राष्ट्रपति का वेतन, भत्ता और अन्य व्यय।

    • राज्यसभा के सभापति और उपसभापति, तथा लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन एवं भत्ते।

    • सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते तथा पेंशन।

    • भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के वेतन, भत्ते तथा पेंशन।

  • अन्य दायित्व:

    • भारत सरकार पर देय ऋण भार।

    • न्यायालय द्वारा भारत सरकार के विरुद्ध दी गई डिक्री (Decree) या पंचाट (Award) के भुगतान का दायित्व।

    • कोई भी अन्य व्यय जिसे संविधान या संसद द्वारा विधि बनाकर इस निधि पर ‘भारित’ घोषित किया गया हो।

2. भारत की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund of India) [अनुच्छेद 267]

यह निधि अप्रत्याशित खर्चों के निपटान के लिए बनाई गई है:

  • सृजन का अधिकार: संविधान का अनुच्छेद 267 संसद और राज्य विधान मंडलों को क्रमशः भारत या राज्य की आकस्मिकता निधि सर्जित करने की शक्ति देता है।

  • स्थापना: इस निधि का गठन वर्ष 1950 में किया गया था।

  • नियंत्रण: यह निधि पूरी तरह से कार्यपालिका के नियंत्रणाधीन होती है।

  • उपयोग की प्रक्रिया:

    • इसका उपयोग तब किया जाता है जब कोई ‘अनवेक्षित व्यय’ (Unforeseen expenditure) करना हो।

    • संसद या विधान मंडल द्वारा अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान के माध्यम से व्यय को प्राधिकृत करने तक, कार्यपालिका इस निधि से अग्रिम धन निकाल सकती है।

  • विनियमन: इस निधि में कितनी राशि रखी जानी चाहिए, इसका निर्धारण संबंधित विधान मंडल कानून द्वारा करता है।

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