पाठ से

मेरी समझ से

आइए, अब हम कहानी ‘परीक्षा’ के बारे में कुछ चर्चा कर  लेते हैं।

(क) आपकी समझ से नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए –
(1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा?

  • सादगी
  • बल
  • उदारता
  •  नीतिकुशलता (*)

उत्तर :- नीतिकुशलता (*)

(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था?

  • परमात्मा की याद
  •  बदनामी का भय
  •  राज-काज संभालने योग्य शक्‍ति न रहना (*)
  •  चालीस व र्ष की नौकरी पूरा हो जाना

उत्तर :- राज-काज संभालने योग्य शक्‍ति न रहना (*)

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर :- महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य इसलिए दिया क्योंकि दीवान नीतिकुशल व्यक्ति थे। अपने इसी गुण के कारण वे राज्य का सारा कार्य चालीस वर्षों तक संभाल सके। अब उनकी उम्र अधिक हो गई थी। दीवान का मानना था कि अब उनमें राज-काज संभालने की उतनी शक्ति नहीं थी जितनी कभी हुआ करती थी।

शीर्षक

(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम प्रेमचंद ने ‘परीक्षा’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए।

उत्तर :- कहानी की मुख्य कथा देवगढ़ रियासत के नए दीवान की खोज के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके लिए सुजान सिंह परीक्षा आयोजित करते हैं।  इस परीक्षा के माध्यम से दीवान सुजान सिंह यह सुनिश्चित करते हैं कि नया दीवान केवल ज्ञानी ही नहीं, बल्कि दयालु, उदार, आत्मबल से परिपूर्ण और नीतिकुशल भी हो। ‘परीक्षा’ शब्द कहानी के मूल भाव को व्यक्त करता है, जहाँ हर पात्र और स्थिति एक परीक्षण की तरह है, जो व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव और चरित्र को उजागर करती है।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए?

उत्तर :- दीवान का चुनाव।

हमने यह नाम इसलिए सोचा क्योंकि इस कहानी की रूपरेखा राज्य के लिए नए दीवान के चुनाव के इर्द-गिर्द रहती है।

पंक्‍तियों पर चर्चा

कहानी में से चुनकर यहाँ कुछ पंक्‍तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

“इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो हैं, वे कीर्ति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं।”

उत्तर :- कहानी की ये पंक्तियाँ बताती हैं कि राज्य के लिए चुने जाने वाले नए दीवान में विशेष गुणों का होना आवश्यक था, जैसे – वह दयालु हो, परोपकारी हो, अपनी वीरता को सही स्थान पर प्रदर्शित करे, प्रजा की भलाई के लिए सोचे। लेकिन सरदार सुजानसिंह के अनुसार ऐसे गुणी व्यक्ति आज संसार में बहुत कम हैं। उनमें से अधिकतर अपने सही स्थान पर मान-सम्मान प्राप्त कर रहे हैं।

सोच-विचार के लिए

कहानी को एक बार फिर से पढ़िए, निम्नलिखि‍त के बारे में पता लगाइए और लिखिए—

(क) नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयत्न किए?

उत्तर :-  नौकरी की चाह में आए लोगों ने खुद को योग्य साबित करने के लिए निम्नलिखित प्रयत्न किए-

  • देर से उठने वाले लोग सुबह उठने लगे
  • नौकरों से सम्मान से बात करने लगे
  • जिन लोगों को पढ़ना पसंद नहीं था, वे किताबें पढ़ने लगे

(ख) “उसे किसान की सूरत दखते ही सब बातें ज्ञात हो गई।” खिलाड़ी को कौन-कौन सी बातें पता चल गई?

उत्तर :- चोट खाए खिलाड़ी को किसान की सूरत देखते ही पता चल गया कि किसान को अपनी गाड़ी निकालने में सहायता की ज़रूरत है। वह फँसा हुआ है और उसे मदद की आवश्यकता है।

(ग) “मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या ।” किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी आँखों में ईर्ष्या थी? क्यों?

उत्तर :- कर्मचारियों और प्रजा की आँखों में सत्कार था, क्योंकि वे पंडित जानकीनाथ को दीवान के पद के लिए योग्य मानते थे। पंडित जानकीनाथ के साथ दीवान के चुनाव की दौड़ में शामिल अन्य उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या थी, क्योंकि वे उस दीवान के पद को प्राप्त करना चाहते थे, किन्तु सफल न हो सके।

खोजबीन

कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि —

(क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।

उत्तर :- उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं?

(ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।

उत्तर :- लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, कि सी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद्ध हो गया तो कौन पूछता है?

कहानी की रचना

“लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।”
इन वाक्यों को पढ़कर आँखों के सामने थकान से चूर खिलाड़ियों का चित्र दिखाई देने लगता है। यह चित्रात्मक भाषा है। ध्यान देंगे तो इस पाठ में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें आपको दिखाई देंगी।

कहानी को एक बार ध्यान से पढ़िए। आपको इस कहानी में और कौन-कौन सी विशेष बातें दिखाई दे रही हैं? अपने समूह में मिलकर उनकी सूची बनाइए।

उत्तर :- कहानी में हमें निम्नलिखित विशेष बातें दिखाई दीं-

  • कहानी की भाषा सरल है।
  • कहानी में मुहावरों और कहावतों का प्रयोग हुआ है।
  • कहानी के पात्र सजीव हैं।
  • कहानी परोपकार करना सिखाती है।
  • कहानी की भाषा चित्रात्मक है।

समस्या और समाधान

इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उसके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि —

(क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तर :- महाराज के सामने नए नीतिकुशल दीवान को नियुक्त करने की समस्या थी। उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी वर्तमान दीवान सरदार सुजानसिंह को दी क्योंकि वे लोगों को परखने में कुशल थे।

(ख) दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तर :- बढ़ती उम्र के कारण दीवान सुजान सिंह राज-काज की जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पा रहे थे और उन्होंने पद छोड़ने का निश्चय किया था।  दीवान सरदार सुजानसिंह के सामने महाराज और राज्य के लिए एक प्रतिभाशाली, दयालु और प्रजा का भला चाहने वाला नया दीवान चुनने की समस्या थी। दीवान सुजान सिंह ने देश के प्रसिद्ध समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया कि देवगढ़ रियासत में एक योग्य दीवान की आवश्यकता है। इस परीक्षा में सिर्फ योग्य उम्मीदवारों के आचरण, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय गुणों की जांच की गई, जिसके परिणामस्वरूप पंडित जानकी नाथ को नया दीवान चुना गया।

(ग) नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तर :- नौकरी के लिए आए लोगों के सामने समस्या थी कि उनको अच्छा बनकर दिखाना था और किसी भी प्रकार नौकरी लेनी थी। इसके लिए उन्होंने झूठा दिखावा शुरू कर दिया। उन्होंने मीठा और नम्र व्यवहार शुरू कर दिया। प्रात:काल उठना, पुस्तकें पढ़ना, खेलना इत्यादि शुरू कर दिया।

मन के भाव

स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।”
इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिची हुई है। ये सभी नाम हैं, लेकिन दिखाई देने वाली वस्तुओं , व्यक्तियों या जगहों के नाम नहीं हैं । ये सभी शब्द मन के भावों के नाम हैं ।  आप कहानी में से ऐसे ही अन्य नामों को खोजकर नीचे  दिए गए रिक्‍त स्थानों में लिखिए।

उत्तर :- कहानी में आए अन्य भावों के नाम हैं-

  • नम्रता
  • ईर्ष्या
  • आत्मबल
  • दया
  • सत्कार
  • दृढ़ संकल्प
  • हिम्मत
  • नेकनामी
  • आदर
  • घृणा
  • साहस
  • उदारता

अभिनय

कहानी में युवक और किसान की बातचीत संवादों के रूप में दी गई है। यह भी बताया गया है कि उन दोनों ने ये बातें कैसे बोलीं। अपने समूह के साथ मिलकर तैयारी कीजिए और कहानी के इस भाग को कक्षा में अभिनय के द्वारा प्रस्तुत कीजिए। प्रत्येक समूह से अभिनेता या अभिनेत्री कक्षा में सामने आएँगे और एक-एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे।

उत्तर :- विद्यार्थी शिक्षक के सहयोग से संवाद सहित अभिनय करेंगे।

विपरीतार्थक शब्द

“विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।”
‘कम’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘अधिक’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द नीचे दिए गए हैं लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए—

उत्तर :-

                      स्तंभ 1                     स्तंभ 2
1. आना 7. जाना
2. गुण 4. अवगुण
3. आदर 9. अनादर
4. स्वस्थ 5. अस्वस्थ
5. कम 6. अधिक
6. दयालु 1. निर्दयी
7. योग्य 8. अयोग्य
8. हार 3. जीत
9. आशा 2. निराशा

कहावत

“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”
यह वाक्य एक कहावत है। इसका अर्थ है कि कोशिश करने पर ही सफलता मिलती है। ऐसी ही एक और कहावत है,“जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ” अर्थात परिश्रम का फल अवश्य मिलता है।
कहावतें ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें लोग अपनी बात को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं ।  आपके घर और पास-पड़ोस में भी लोग अनेक कहावतों का उपयोग करते होंगें ।

नीचे कुछ कहावतें और उनके भावार्थ दिए गए हैं। आप इन कहावतों को कहानी से जोड़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए—

  • अधजल गगरी छलकत जाए— जिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है , वह उसका दिखावा करता है।
  • अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत— समय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ  है ।
  •  एक अनार सौ बीमार — कोई ऐसी एक चीज़ जिसको चाहने वाले अनेक हों।
  •  जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैं— जो अधि‍क बढ़-चढ़कर बोलते हैं ,  वे काम नहीं करते हैं ।
  •  जहाँ चाह, वहाँ राह— जब किसी काम को करने की इच्छा होती  है ,  तो उसका साधन भी मिल जाता है ।

(संकेत— विज्ञापन में तो एक नौकरी की बात कही गई थी, लेकिन उम्मीदवार आ गए हज़ारों ।

इसे कहते हैं— एक अनार सौ बीमार ।)

उत्तर :-

कहावत / मुहावरा अर्थ कहानी से वाक्य प्रयोग –
अधजल गगरी छलकत जाए। जिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है , वह उसका दिखावा करता है। ज्ञान में अधिक रुचि ना होने पर भी कुछ उम्मीदवार बड़े-बड़े ग्रंथों में डूबे रहते और अकड़कर चलते इसे कहते हैं – अधजल गगरी छलकत जाए
अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत समय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ  है । जब पंडित जानकीनाथ का दीवान के लिए चुनाव हुआ तब अन्य उम्मीदवार सोचने लगे कि काश ! हमने उस समय किसान की मदद की होती तो आज हमारा चयन होता लेकिन अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत ।
जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैं जो अधि‍क बढ़-चढ़कर बोलते हैं ,  वे काम नहीं करते हैं । देवगढ़ में आए सभी उम्मीदवार नम्रता की मूर्ति बने हुए थे। परंतु जब किसान पर दया की बात आई तब सब पीछे हट गए। इसे कहते हैं जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैं।
जहाँ चाह, वहाँ राह जब किसी काम को करने की इच्छा होती  है ,  तो उसका साधन भी मिल जाता है । युवक घायल था परंतु दूसरों की मदद करने की उसकी चाह के कारण वो किसान की गाड़ी नाले से बाहर निकाल पाया। इसे कहते हैं- जहाँ चाह वहाँ राह ।

पाठ से आगे

अनुमान या कल्पना से

(क) “दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला”
देश के प्रसिद्ध पत्रों में नौकरी का विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यों लगता है?

उत्तर :- देश के प्रसिद्ध पत्रों में नौकरी का विज्ञापन सरदार सुजानसिंह ने राजा की आज्ञा से निकलवाया होगा क्योंकि राजा ने नए दीवान को चुनने की ज़िम्मेदारी सरदार सुजानसिंह को दी थी।

(ख) “इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया।”
विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?

उत्तर :- विज्ञापन को देखर सभी बेरोजगार लोगों में राज्य का दीवान बनने की लालसा जाग गई। वे कैसे न कैसे राज्य का दीवान बनना चाहते थे। सभी राज्य का दीवान बनने की होड़ में लग गए। राज्य में नए-नए लोग दिखाई देने लग गए और चहलकदमी बढ़ गई।

विज्ञापन

“दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की ज़रूरत है।”
(क) कहानी में इस विज्ञापन की सामग्री को पढ़िए। इसके बाद अपने समूह में मिलकर इस विज्ञापन को अपनी कल्पना का उपयोग करते हुए बनाइए।
(संकेत— विज्ञापन बनाने के लिए आप एक चौकोर कागज़ पर हाशिया बनाइए। इसके बाद इस हाशिए के भीतर के खाली स्थान पर संदुर लिखाई, चित्रों, रंगों आदि की सहायता से सभी आवश्यक जानकारी लिख दीजिए। आप बिना रंगों या चित्रों के भी विज्ञापन बना सकते हैं।)

उत्तर :- अध्यापक और मित्रों की सहायता से एक चार्ट पर विज्ञापन तैयार करें।

(ख) आपने भी अपने आस-पास दीवारों पर, समाचार-पत्रों में या पत्रिकाओं में, मोबाइल फोन या दूरदर्शन पर अनेक विज्ञापन देखे होंगे। अपने किसी मनपसंद विज्ञापन को याद कीजिए।
आपको वह अच्छा क्यों लगता है? सोचकर अपने समूह में बताइए। अपने समूह के बिन्दुओं को लिख लीजिए।

उत्तर :- किसी एक विज्ञापन की विशेषताएँ लिखकर अपने मित्रों में जानकारी को साझा करें।

(ग) विज्ञापनों से लाभ होते हैं, हानि होती हैं, या दोनों ? अपने समूह में चर्चा कीजिए और चर्चा के बिन्दु लिखकर कक्षा में साझा कीजिए।

उत्तर :-

विज्ञापन के लाभ

  1. विज्ञापन नए उत्पादों, सेवाओं, उनकी विशेषताओं, लाभों और कीमतों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
  2. विज्ञापन कंपनियों को अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और एक मजबूत ब्रांड पहचान बनाने में मदद करता है।
  3. विज्ञापन मीडिया और मनोरंजन उद्योग को आय प्रदान करते हैं।
  4. विज्ञापन से रोजगार की गतिविधियों में वृद्धि होती है।
  5. विज्ञापन कंपनियों को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने हेतु प्रेरित करता है।
  6. विज्ञापन सामाजिक संदेश, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने में सहयोग करते हैं।

विज्ञापन की हानियाँ

  1. कुछ कंपनियाँ अपने उत्पादों की खूबियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं, जिससे उपभोक्ता गुमराह हो सकते हैं।
  2. कुछ विज्ञापन अवास्तविक जीवन शैली के आदर्श प्रस्तुत करते हैं, जिससे लोगों में हीन भावना और अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है।
  3. बच्चों पर फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक और अन्य अनुचित उत्पादों के विज्ञापनों का बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
  4. विज्ञापन बनाने में होने वाला खर्च उत्पाद की कीमत में जुड़ जाता है, जिससे उपभोक्ता को ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।

इसलिए, विज्ञापन एक शक्तिशाली उपकरण है जिसके फायदे और नुकसान दोनों हैं। अतः इनका उपयोग पूरी ईमानदारी से किया जाना चाहिए।

आगे की कहानी

‘परीक्षा’ कहानी जहाँ समाप्त होती  है, उसके आगे क्या हुआ होगा। आगे की कहानी अपनी कल्पना से बनाइए।

उत्तर :- सुजानसिंह ने पंडित जानकीनाथ को नया दीवान घोषित कर दिया। सुजानसिंह ने प्रजा को बताया कि पंडित जानकीनाथ में क्या विशेषताएँ हैं। इसके बाद प्रजाजन पंडित जानकीनाथ के लिए नारे लगाने लगे। राजा ने सुजानसिंह का भव्य विदाई समारोह किया और  पंडित जानकीनाथ को दीवान पद पर नियुक्त कर दिया। सुजानसिंह ने रियासत की देखरेख में बिताए पलों को याद किया और सभी का धन्यवाद किया। प्रजा ने नम आँखों से सुजानसिंह को विदाई दी। पंडित जानकीनाथ पहले दीवान की ही भाँति प्रजा का ध्यान रखने लगे और बहुत कम समय में राजा का दिल जीत लिया। रियासत पहले की ही भाँति विकास करने लगी।

आपकी बात

(क) यदि कहानी में दीवान साहब के स्थान पर आप होते तो योग्य व्यक्ति को कैसे चुनते?

उत्तर :- मैं उम्मीदवारों को कुछ दिनों तक रियासत के काम करने देता और देखता कि उनका रहन-सहन, आचार-विचार कैसा है।

(ख) यदि आपको कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाए तो आप उसे कैसे चुनेंगे? उसमें किन-किन गुणों को देखेंगे? गुणों की परख के लिए क्या-क्या करेंगे?

उत्तर :- कक्षा का मॉनिटर में निम्न गुण होने चाहिए-

  • जो पढ़ने में अच्छा हो,
  • सबसे प्यार से बात करता हो,
  • दूसरों की सहायता करता हो।
  • कक्षा के अधिकतर छात्र उसे पसंद करते हों।

नया-पुराना

“कोई नए फैशन का प्रेमी, कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ।”
हमारे आस-पास अनेक वस्तुएँ ऐसी हैं जिन्हें लोग नया फैशन या पुराना चलन कहकर दो भागों में बाँट देते हैं। जो वस्तु आपके माता-पिता या दादा-दादी के लिए नई हो, हो सकता है वह आपके लिए पुरानी हो, या जो उनके लिए पुरानी हो, वह आपके लिए नई हो। अपने परिवार या परिजनों से चर्चा करके नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए—

उत्तर :-

मेरे लिए नई वस्तुएँ मेरे लिए पुरानी वस्तुएँ परिवार के बड़ों के लिए नई वस्तुएंँ परिवार के बड़ों के लिए पुरानी वस्तुएँ
रोबोट खिलौना मोबाइल ड्रोन 5 पैसे
ड्रोन खिलौना टी.वी. कार रेडियो
पुराने सिक्के स्कूटर मोबाइल लट्टू
कपड़े बल्ब चॉकलेट कंचे
 आई फोन खट्टी-मीठी गोलियाँ कंप्यूटर बल्ब

वाद-विवाद

“आपस में हॉकी का खेल हो जाए। यह भी तो आखिर एक विद्या है।”
क्या हॉकी जैसा खेल भी विद्या है? इस विषय पर कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसे आयोजित करने के लिए कुछ सुझाव आगे दिए गए हैं—

  • कक्षा में पहले कुछ समूह बनाएँ फिर पर्ची निकालकर निर्धारित कर लीजिए कि कौन समूह पक्ष में बोलेंगे, कौन विपक्ष में।
  •  आधे समूह  इसके पक्ष में तर्क दीजिए, आधे समूह इसके विपक्ष में ।
  • सभी समूहों को बोलने के लिए 5-5 मिनट का समय दिया जाएगा।
  • ध्यान रखें कि प्रत्येक  समूह का प्रत्येक सदस्य चर्चा करने, तर्क देने  आदि कार्यों में भाग अवश्य लें।

उत्तर :- अध्यापक की मदद से वाद-विवाद करें।

अच्छाई और दिखावा

“हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्धि के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था।”
अपने समूह में निम्नलिखित पर चर्चा कीजिए और चर्चा के बिन्दु अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए—
(क) हर व्यक्ति अपनी बुद्धि के अनुसार स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश करता है। स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए लोग क्या-क्या करते हैं? (संकेत— मेहनत करना, कसरत करना, साफ़-सुथरे रहना आदि )

उत्तर :-

  • नए और आकर्षक कपड़े पहनना।
  • अपने रूप-रंग को निखारना।
  • खूब पैसे कमाना।
  • उच्च पद प्राप्त करना।
  • विनम्र स्वभाव का दिखावा करना।
  • जिम जाकर बॉडी बनाना।

(ख) क्या ‘स्वयं को अच्छा दिखाने’ में और ‘स्वयं के अच्छा होने’ में कोई अंतर है? कैसे?

उत्तर :- हाँ, ‘स्वयं को अच्छा दिखाने’ में और ‘स्वयं के अच्छा होने’ में अंतर है –

  • स्वयं को अच्छा दिखाने वाले लोग अक्सर बाहरी धन, बल और चालाकी का प्रयोग करते हैं।
  • जो स्वयं अच्छे होते हैं वे सामान्य व्यवहार करते हैं। उनका अच्छा स्वभाव उनकी दिखावट से नहीं, बल्कि उनके कर्मों से झलकता है।

परिधान तरह-तरह के

“कोट उतार डाला”
‘कोट’ एक परिधान का नाम है। कुछ अन्य परिधानों के नाम और चित्र नीचे दिए गए हैं।
परिधानों के नामों को इनके सही चित्र के साथ मिलाइए। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं लिखिए—

उत्तर :-

चित्र नाम और क्या कहते हैं
चित्र पुस्तक से देखें दुपट्टा चुन्नी
चित्र पुस्तक से देखें गमछा पटका
चित्र पुस्तक से देखें लहँगा घाघरा
चित्र पुस्तक से देखें फिरन लबादा
चित्र पुस्तक से देखें धोती तहमद
चित्र पुस्तक से देखें अचकन शेरवानी
चित्र पुस्तक से देखें पगड़ी साफा

आपकी परीक्षाएँ

हम सभी अपने जीवन में अनेक प्रकार की परीक्षाएँ लेते और देते हैं। आप अपने अनुभवों के आधार पर कुछ परीक्षाओं के उदाहरण बताइए। यह भी बताइए कि किसने, कब, कैसे और क्यों वह परीक्षा ली।
(संकेत— जैसे, किसी को विश्‍वास दिलाने के लिए उसके सामने साइकिल चलाकर दिखाना, स्कूल या घर पर कोई परीक्षा देना, किसी को किसी काम की चुनौती देना आदि ।)

उत्तर :- मैं गली में साइकिल चलाना सीख रहा था। मेरे कुछ दोस्त मेरे साथ थे। मेरे पिताजी ने साइकिल पकड़ी हुई थी। मैं कभी अपने पैरों को देखता कभी सामने। धीरे-धीरे मैंने साइकिल चलाने का अभ्यास किया और मुझे साइकिल चलानी आ गई। मैं उस परीक्षा में पास हो गया। अब मैं अपने मित्रों के साथ रोज साइकिल चलाता हूँ।

आज की पहेली
आज आपकी एक रोचक परीक्षा है। यहाँ दिए गए चित्र एक जैसे हैं या भि‍न्न? इन चित्रों में कुछ अंतर हैं। देखते हैं आप कितने अंतर कितनी जल्दी खोज पाते हैं।

उत्तर :- छात्र स्वयं अंतर ढूंढें।

झरोखे से

पाठ में दिए गए क्यू .आर. कोड के माध्यम से आप एक और कहानी पढ़ेंगे। इस कहानी में भी कोई किसी की परीक्षा ले रहा है। यह कहानी हमारे देश के बहुत होनहार बालक और उसके गुरु चाणक्य के बारे में है। इसे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक जयशंकर प्रसाद ने लिखा है।

उत्तर :- छात्र क्यू .आर. कोड के माध्यम से कहानी पढ़ें।

खोजबीन के लिए

पुस्‍तक में दिए गए क्‍यू .आर. कोड की सहायता से आप प्रेमचंद के बारे में और जान-समझ सकते हैं, साथ ही उनकी अन्य कहानियों का आनंद भी उठा सकते हैं—
• ईदगाह
• नादान दोस्त
• दो बैलों की कथा

उत्तर :- छात्र क्यू .आर. कोड और पुस्तकालय के माध्यम से प्रेमचंद और उनकी कहानियों के बारे में जाने।

 

किसी अन्य पाठ के प्रश्नोत्तर के लिए नीचे देखें

पुस्तक : मल्हार

पाठ 1 : मातृभूमि (कविता)
पाठ 2 : गोल (संस्मरण)
पाठ 3 : पहली बूँद (कविता)
पाठ 4 : हार की जीत (कहानी)
पाठ 5 : रहीम के दोहे (दोहे)
पाठ 6 : मेरी माँ (आत्मकथा)
पाठ 7 : जलाते चलो (कविता)
पाठ 8 : सत्रिया और बिहू नृत्य (निबंध)
पाठ 9 : मैया मैं नहिं माखन खायो (पद)
पाठ 10 : परीक्षा (कहानी)
पाठ 11 : चेतक की वीरता (कविता)
पाठ 12 : हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान (यात्रा-वृतांत)
पाठ 13 : पेड़ की बात (निबंध)
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