मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए—
(1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
- भलाई के कार्य करते रहना (*)
- दीपावली के दीपक जलाना
- बल्ब आदि जलाकर अधंकार दूर करना
- तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना
उत्तर :- भलाई के कार्य करते रहना
(2) “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी” यह वाक्य किससे कहा गया है?
- तूफान से
- मनुष्यों से (*)
- दीपकों से
- तिमिर से
उत्तर :- मनुष्यों से
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर :- अपने मित्रों के साथ चर्चा करें।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुन कर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
| 1. अमावस | 4. अमावस्या , जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। |
| 2. पूर्णिमा | 1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। |
| 3. विद्युत-दिये | 2. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण। |
| 4. युग | 3. समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं — सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलि युग। |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुन कर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
“दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी,
जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।।
रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।”
उत्तर :- कवि कहते हैं कि दिये और तूफान की कहानी सदियों से चली आ रही है। जिस प्रकार दिया अपने प्रकाश से संसार को राह दिखाने का प्रयास करता है और तूफान दिये को बुझाने की कोशिश करता है उसी प्रकार दयालु व्यक्ति सभी पर अपनी कृपा करता है और लोगों का भला करना चाहता है, लेकिन दुर्जन व्यक्ति उसके रास्ते को रोकने की कोशिश करता है। अच्छाई और बुराई की लड़ाई सदा से चली आ रही है और आगे भी जारी रहेगी। यदि इस संसार में एक भी सज्जन व्यक्ति जीवित है तो बुराई की अंधेरी रात समाप्त जरूर होगी और सत्य, दया, करुणा की उम्मीद लेकर आने वाली सुबह जरूर मिलेगी।
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
(क) कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?
उत्तर :-
- अमावस
- निशा
- तिमिर की सरिता
- तिमिर की शिला
- पवन
- तूफ़ान
(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
उत्तर :- कविता में स्नेह से भरे दीपक जलाने की बात कही गई है, जो चारों ओर रोशनी फैलाएं। कविता में यह आशा की गई है कि मनुष्य निराशा के बीच भी आशा का दीपक जलाकर रखे, जो उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दे। कवि का मानना है कि प्रेम, सद्भावना और मानवीय सौहार्द से ही मानव और विश्व का कल्याण संभव है। यह कविता नई पीढ़ी को महापुरुषों के पदचिह्नों पर चलने और एक सुंदर भविष्य की नींव रखने के लिए प्रेरित करती है।
(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
उत्तर :- कविता में “जलाने” और “बुझाने” का उपयोग प्रतीकात्मक रूप से किया गया है, जिसका अर्थ है जीवन में सकारात्मकता और प्रेरणा को बढ़ावा देना और नकारात्मकता और निराशा को दूर करना।
कविता की रचना
“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।”
इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। आप हाथों से ताल भी दे सकते हैं। दोनों पंक्तियों को गाने या बोलने में समान समय लगा या अलग-अलग? आपने अवश्य ही अनुभव किया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने या गाने में लगभग एक-समान समय लगता है। केवल इन दो पंक्तियों को ही नहीं, इस कविता की प्रत्येक पंक्ति को गाने में या बोलने में लगभग समान समय ही लगता है। इस विशेषता के कारण यह कविता और अधिक प्रभावशाली हो गई है। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देंगी।
(क) इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशषेताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटा गया है आदि।
उत्तर :-
- कविता में लयात्मकता है।
- कविता में तुकांतता है।
- कविता में तत्सम शब्दों का भरपूर प्रयोग है।
- बाल मनोविज्ञान पर आधारित कविता है।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर :- छात्र इस रचनात्मक गतिविधि को स्वयं करें।
मिलान
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए—
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
| 1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। | 3. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। |
| 2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। | 4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए। |
| 3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। | 2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? |
| 4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। | 1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। |
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) “दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी”
दीपक और तूफ़ान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
उत्तर :- दीपक और तूफान की कहानी सदा से चली आ रही है। अर्थात अच्छाई और बुराई के बीच का संघर्ष हमेशा रहा है। दीपक प्रकाश और आशा का प्रतीक है, जबकि तूफान चुनौतियों और कठिनाइयों का प्रतीक है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाईयाँ आ जाएँ, हमें अपनी आशा और विश्वास को बनाए रखना चाहिए।
(ख) “जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण -सी जल रही और जलती रहेगी”
दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
उत्तर :- दीपक की यह सोने जैसी लौ अच्छाई हो सकती है, जो अनगिनत वर्षों से समाज में कायम है। अच्छाई को हराने की कई बार कोशिश हुई है लेकिन अच्छाई की सदैव जीत हुई है।
शब्दों के रूप
“कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”
‘अमावस’ का अर्थ है ‘अमावस्या ’।
इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। ऐसे ही कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनसे मिलते-जुलते दूसरे शब्द कविता से खोजकर लिखिए। ऐसे ही कुछ अन्य शब्द आपस में चर्चा करके खोजिए और लिखिए।
उत्तर :-
- दिया = दीप
- उजेला = उजाला
- अनगिन = अनगिनत
- धरा = धरती
- सिल = शिला
- दिन = दिवस
अर्थ की बात
(क) “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर” इस पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए।
उत्तर :- छात्र इस रचनात्मक गतिविधि को स्वयं करें।
(ख) कविता में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। यदि वे शब्द बदल दिए जाएँ तो कविता का अर्थ भी बदल सकता है और उसकी सुंदरता में भी अंतर आ सकता है।
उत्तर :- छात्र इस रचनात्मक गतिविधि को स्वयं करें।
नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा—
उत्तर :-
1. बहाते चलो तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका) = नैया
कभी तो तिमिर का मिलेगा।। (तट, तीर, किनारा) = किनारा
2. रहेगा पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि) = धरा
कभी तो निशा को मिलेगा।। (प्रात:, सुबह, सवेरा) = सवेरा
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे) = अँधेरे
चुनौती बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली) = प्रथम
प्रतीक
(क) “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”
निशा का अर्थ है— रात।
सवेरा का अर्थ है— सुबह।
आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोग ‘रात’ और ‘सुबह’ के लिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि ‘निशा’ और ‘सवेरा’ का इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है।
(संकेत— निशा से जुड़ा है ‘अँधेरा’ और सवेरे से जुड़ा है ‘उजाला’)
उत्तर :-
निशा से जुड़े शब्द :- बुराई, अँधेरा, अज्ञान, द्वेष
सवेरा से जुड़े शब्द :- अच्छाई, उजाला, ज्ञान, प्रेम
(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में मिलकर इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उपयुक्त स्थान पर लिखिए।
दिये अँधेरा अमावस पूर्णिमा दिवस तिमिर नाव किनारा
शिला ज्योति उजेला तूफ़ान लौ स्वर्ण जलना बुझना
उत्तर :-
सवेरा = दिये, पूर्णिमा, नाव, किनारा, ज्योति, उजेला, लौ, स्वर्ण, जलना
निशा = अँधेरा, अमावस, तिमिर, शिला, तूफ़ान, बुझना
(ग) अपने समूह में मिलकर ‘निशा’ और ‘सवेरा’ के लिए कुछ और शब्द सोचिए और लिखिए।
(संकेत— नीचे दिए गए चित्र देखि ए और इन पर विचार कीजिए।)
उत्तर :- छात्र इस रचनात्मक गतिविधि को स्वयं करें।
पंक्ति से पंक्ति
“जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
कविता की इस पंक्ति को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं—
“तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।”
अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए—
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
उत्तर :- तुम निरंतर वह नाव बहाते चलो।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।
उत्तर :- ये दिये स्नेह भर-भर जलाते चलो।
3. बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
उत्तर :- इन्हें बुझाओ, यों न पथ मिल सकेगा।
4. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
उत्तर :- मगर विश्व पर आज क्यों दिवस में ही निशा-सी अमावस घिरी आ रही है।
सा/सी/से का प्रयोग
“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
इन पंक्तियों में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची है। इनमें ‘सी’ शब्द पर ध्यान दीजिए। यहाँ ‘सी’ शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग कि या गया है। ‘सा/सी/से’ का प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए कि या जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (-) का प्रयोग कि या जाता है। अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ ‘सा/सी/से’ का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:-
- उसका मुख चाँद-सा सुंदर है।
- तुम गाय-सी सीधी हो।
- वह उल्लू-सा चालाक है।
- मैं फूल-सा कोमल हूँ।
- वे चीते-से फुर्तीले हैं।
आपकी बात
(क) “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”
यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया संदुर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रति दिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए।
उत्तर:-
- मैं कभी कोई गंदगी नहीं करता।
- मैं कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में डालता हूँ।
- मैं हमेशा दूसरों की मदद करता हूँ।
- मैं माता-पिता के काम में उनकी मदद करता हूँ।
- मैं अपने मित्रों को काम करने में मदद करता हूँ।
(ख) इस कविता में निराश न होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे? अपने समूह में बताइए।
उत्तर:- यदि मुझे अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो मैं उसके साथ दिल खोल कर बाते करूंगा। मैं उससे कहूँगा कि वो चिंता करना छोड़ दे। चिंता से किसी बात का समाधान नही होता। मैं उसे मेहनत करने के लिए कहूँगा। मैं उससे कहूँगा कि समस्या के बारे में अपने माता-पिता से बात करे।
(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।
उत्तर :- हाँ, मेरे बड़े भाई ने मुझे पतंग उड़ाने के लिए मुझे प्रेरित किया। जब मुझे पतंग उड़ानी नहीं आती थी तो वह मुझे समझाता था कि पतंग कैसे उड़ाते हैं और मुझे धीरे-धीरे पतंग उड़ानी आ गई।
अमावस्या और पूर्णिमा
(क) “भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह
कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”
आप अमावस्या और पूर्णिमा के बारे में पहले ही पढ़ चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है? आप आकाश में रात को चंद्रमा अवश्य देखते होंगे। क्या चंद्रमा प्रति दिन एक-सा दिखाई देता है? नहीं। चंद्रमा घटता-बढ़ता दिखाई देता है। आइए जानते हैं कि ऐसा कैसे होता है। आप जानते ही हैं कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है जबकि पृथ्वी सूर्य की। आप यह भी जानते हैं कि चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता। वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है। लेकिन पृथ्वी के कारण सूर्य के कुछ प्रकाश को चंद्रमा तक जाने में रुकावट आ जाती है। इससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जो प्रति दिन घटती-बढ़ती रहती है। सूरज का जो प्रकाश बिना रुकावट चंद्रमा तक पहुँच जाता है, उसी से चंद्रमा चमकदार दिखता है। इसी छाया और उजले भाग की आकृति में आने वाले परिवर्तन को चंद्रमा की कला कहते हैं। चंद्रमा की कला धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा दिखने लगता है। इसके बाद कला धीरे-धीरे घटती रहती है और अमावस्या वाली रात चाँद दिखाई नहीं देता। चंद्रमा की कलाओं के घटने के दिनों को ‘कृष्ण पक्ष’ को कहते हैं ‘कृष्ण ’ शब्द का एक अर्थ काला भी है। इसी प्रकार चंद्रमा की कलाओं के बढ़ने के दिनों को ‘शुक्ल पक्ष’ कहते हैं। ‘शुक्ल ’ शब्द का एक अर्थ ‘उजला’ भी है।
(ख) अब नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या , पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए और ये नाम उपयुक्त स्थानों पर लिखिए— (यदि पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)
उत्तर :- छात्र इस रचनात्मक गतिविधि को स्वयं करें।
तिथिपत्र
आपने तिथिपत्र (कैलेंडर) अवश्य देखा होगा। उसमें साल के सभी महीनों की तिथि यों की जानकारी दी जाती है। नीचे तिथिपत्र के एक महीने का पृष्ठ दिया गया है। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर :- 31 दिन।
(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनाँक और वार को पड़ रही है?
उत्तर :-
पूर्णिमा = दिनांक 6 जनवरी 2023 को शुक्रवार के दिन पड़ रही है।
अमावस्या = दिनांक 21 जनवरी 2023 को शनिवार के दिन पड़ रही है।
(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है?
उत्तर :- कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में 15 दिनों का अंतर है।
(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर :- इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल 15 दिन हैं?
(ङ) ‘वसंत पंचमी’ की तिथि बताइए।
उत्तर :- ‘वसंत पंचमी’ 26 जनवरी 2023 को है।
आज की पहेली
समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।
‘पवन ’ शब्द का अर्थ है हवा।
नीचे एक अक्षर-जाल दिया गया है। इसमें ‘पवन ’ के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं। आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते हैं, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।
| बा | द | ल | ई | ब |
| प | अ | नि | ल | या |
| व | क | स | मी | र |
| न | ह | वा | यु | ब |
| मा | रु | त | स | ड़ |
- अनिल
- समीर
- हवा
- वायु
- मारुत
- पवन
- वात
खोजबीन के लिए
कविता संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू .आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
• हम सब सुमन एक उपवन के
• बढ़े चलो
• रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 1
• रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 2
ऊपर लिखी कविताएँ निम्न प्रकार हैं –
(क) हम सब सुमन एक उपवन के
हम सब सुमन एक उपवन के
एक हमारी धरती सबकी
जिसकी मिट्टी में जन्मे हम
मिली एक ही धूप हमें है
सींचे गए एक जल से हम।
पले हुए हैं झूल-झूल कर
पलनों में हम एक पवन के
हम सब सुमन एक उपवन के।।
रंग रंग के रूप हमारे
अलग-अलग है क्यारी-क्यारी
लेकिन हम सबसे मिलकर ही
इस उपवन की शोभा सारी
एक हमारा माली हम सब
रहते नीचे एक गगन के
हम सब सुमन एक उपवन के।।
सूरज एक हमारा, जिसकी
किरणें उसकी कली खिलातीं,
एक हमारा चांद चांदनी
जिसकी हम सबको नहलाती।
मिले एकसे स्वर हमको हैं,
भ्रमरों के मीठे गुंजन के
हम सब सुमन एक उपवन के।।
काँटों में मिलकर हम सबने
हँस हँस कर है जीना सीखा,
एक सूत्र में बंधकर हमने
हार गले का बनना सीखा।
सबके लिए सुगन्ध हमारी
हम श्रंगार धनी निर्धन के
हम सब सुमन एक उपवन के।। (कवि : द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी)
(ख) बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
हाथ में ध्वजा रहे, बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं, दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
सामने पहाड़ हो, सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं, तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
प्रात हो कि रात हो, संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो, चंद्र से बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
एक ध्वज लिए हुए, एक प्रण किए हुए
मातृ भूमि के लिए, पितृ भूमि के लिए
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
अन्न भूमि में भरा, वारि भूमि में भरा
यत्न कर निकाल लो, रत्न भर निकाल लो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो! (कवि : द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी)
किसी अन्य पाठ के प्रश्नोत्तर के लिए नीचे देखें
पुस्तक : मल्हार