इटली का एकीकरण: उदय और संघर्ष
इटली के एकीकरण की प्रक्रिया कई दशकों के संघर्ष, कूटनीति और जन-आंदोलनों का परिणाम थी। 19वीं सदी के पूर्वार्द्ध में इटली कुल 13 राज्यों में विभाजित था।
1. वैचारिक पृष्ठभूमि और नेतृत्व
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जन्मदाता: इटली की एकता का जन्मदाता नेपोलियन को माना जाता है।
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मुख्य नायक: इटली के एकीकरण का श्रेय प्रमुख रूप से तीन व्यक्तियों को दिया जाता है:
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जोसेफ मेजिनी: इन्हें इटली के एकीकरण का जनक माना जाता है। इनका जन्म जेनेवा में हुआ था। उन्होंने 1831 ई. में ‘यंग इटली’ की स्थापना की। उनका प्रसिद्ध कथन था— “यदि समाज में क्रांति लानी हो, तो क्रांति का नेतृत्व नवयुवकों के हाथ में दे दो।”
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काउण्ट कावूर: इन्होंने इटली की समस्या को एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बना दिया। 1871 ई. में इटली के एकीकरण को पूर्ण करने का श्रेय इन्हीं को दिया जाता है।
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गैरीबाल्डी: इन्हें ‘इटली के एकीकरण की तलवार’ कहा जाता है। इन्होंने ‘लाल कुरती’ (Red Shirts) नामक सेना का संगठन किया था।
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2. एकीकरण की प्रक्रिया
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अगुआई: एकीकरण की प्रक्रिया में सार्डीनिया-पीडमौंट राज्य ने मुख्य भूमिका निभाई।
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शासक: सार्डिनिया का शासक विक्टर एमैनुएल था।
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शुरुआत: एकीकरण की शुरुआत लोम्बार्डी और सार्डिनिया राज्यों के आपसी मेल से हुई।
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बाधा: इटली के एकीकरण में सबसे बड़ा बाधक ऑस्ट्रिया था।
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प्रमुख संस्थाएं: ‘कार्बोनरी सोसायटी’ का संस्थापक गिवर्टी था।
3. प्रमुख ऐतिहासिक तिथियाँ
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2 अप्रैल, 1860: इस दिन को इटली राष्ट्र का जन्म माना जाता है।
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1871 ई.: रोम को संयुक्त इटली की राजधानी घोषित किया गया। 1871 ई. में काउण्ट कावूर के प्रयासों से एकीकरण की प्रक्रिया पूर्ण हुई।
संक्षेप में: मेजिनी की विचारधारा, कावूर की कूटनीति और गैरीबाल्डी की सैन्य शक्ति ने मिलकर इटली को एक संगठित राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।