आधुनिक तुर्की का उदय और मुस्तफा कमाल पाशा
तुर्की का इतिहास 20वीं सदी में साम्राज्यवादी पतन से एक आधुनिक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने तक का एक महत्वपूर्ण सफर है।
1. तुर्की: ‘यूरोप का मरीज’ और राजनीतिक हलचल
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उपनाम: भौगोलिक और राजनीतिक अस्थिरता के कारण तुर्की को लंबे समय तक ‘यूरोप का मरीज’ कहा जाता था।
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प्रारंभिक आंदोलन:
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पान इस्लामिज्म: इसका नारा अब्दुल हमीद द्वितीय ने दिया था।
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एकता और प्रगति समिति: इसका गठन 1889 ई. में हुआ था।
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युवा तुर्क आंदोलन: इसकी शुरुआत 1908 ई. में अब्दुल हमीद द्वितीय के शासनकाल में हुई।
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2. मुस्तफा कमाल पाशा: आधुनिक तुर्की के निर्माता
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जन्म: इनका जन्म 1891 ई. में सेलेनिका में हुआ था।
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सैन्य जीवन: कमाल पाशा ने ‘गल्लीपोती युद्ध’ में एक सेनापति के रूप में शानदार सफलता प्राप्त की। 1919 ई. में उन्होंने अपने सैनिक पद से इस्तीफा दे दिया।
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राष्ट्रीय नेतृत्व: 1919 ई. में हुए ‘अखिल तुर्क कांग्रेस’ के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता उन्होंने ही की थी। वे ‘रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी’ के संस्थापक थे।
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उपनाम: उन्हें ‘अतातुर्क’ (तुर्की का पिता) के नाम से जाना जाता है।
3. युद्ध के बाद की संधियाँ और गणतंत्र का उदय
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सेब्र की संधि (10 अगस्त, 1920): प्रथम विश्वयुद्ध के बाद तुर्की पर थोपी गई यह एक अपमानजनक संधि थी, जिसे कमाल पाशा ने मानने से इनकार कर दिया।
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लोजान की संधि: 1923 ई. में तुर्की और यूनान के बीच यह संधि हुई।
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गणतंत्र की स्थापना: 23 अक्टूबर, 1923 को तुर्की गणतंत्र की घोषणा हुई और कमाल पाशा नए गणतंत्र के प्रथम राष्ट्रपति बने।
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संविधान: 20 अप्रैल, 1924 को तुर्की में नए संविधान की घोषणा की गई।
4. मुस्तफा कमाल पाशा के महत्वपूर्ण सुधार
कमाल पाशा ने तुर्की को आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष बनाने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए:
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धार्मिक सुधार: 3 मार्च, 1924 को खिलाफत को समाप्त कर दिया गया। 1924 ई. में तुर्की को आधिकारिक रूप से धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया।
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सामाजिक सुधार: 25 नवंबर, 1925 को टोपी पहनने और औरतों द्वारा बुरका पहनने पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया।
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सांस्कृतिक और प्रशासनिक:
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कैलेंडर: 26 दिसंबर, 1925 से ‘ग्रिगोरियन कैलेंडर’ को लागू किया गया।
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शिक्षा/विकास: 1932 में तुर्की भाषा परिषद की स्थापना की गई, 1933 में प्रथम पंचवर्षीय योजना लागू हुई, और इस्ताम्बुल (पुराना नाम: कुस्तुनतुनिया) में एक मेडिकल कॉलेज खोला गया।
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5. अंतिम समय
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आधुनिक तुर्की के शिल्पकार मुस्तफा कमाल पाशा का निधन 1938 ई. में हुआ।