जर्मनी में नाजीवाद का उदय और एडोल्फ हिटलर
जर्मनी में नाजीवाद का उदय प्रथम विश्वयुद्ध के बाद की राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता का परिणाम था, जिसका नेतृत्व एडोल्फ हिटलर ने किया।
1. हिटलर का प्रारंभिक जीवन और नाजी दल की स्थापना
-
जन्म: एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 को वॉन (ऑस्ट्रिया) में हुआ था।
-
राजनीतिक शुरुआत: 10 नवंबर, 1918 को जर्मन सम्राट कैसर विलियम द्वितीय द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद जर्मनी में सत्ता का एक बड़ा शून्य पैदा हुआ। हिटलर ने ‘जर्मन वर्क्स पार्टी’ की स्थापना की, जिसे बाद में 1920 ई. में ‘नेशनल सोशलिस्ट पार्टी’ (नाजी दल) के रूप में जाना गया।
-
आत्मकथा: हिटलर ने जेल में अपनी आत्मकथा लिखी, जिसका नाम ‘माइन काम्फ’ (My Kampf / मेरा संघर्ष) है।
2. सत्ता का केंद्रीकरण
-
प्रधानमंत्री पद: 1933 ई. में हिटलर जर्मनी का प्रधानमंत्री (चांसलर) बना। उस समय जर्मनी के राष्ट्रपति हिण्डेनवर्ग थे।
-
प्रचार तंत्र: नाजी दल के प्रचार और जनसंपर्क का पूरा कार्य गोयबल्स संभालता था।
-
विचारधारा: हिटलर ने ‘एक राष्ट्र, एक नेता’ का नारा दिया। उसकी ‘शामी विरोधी’ (Anti-Semitic) नीति का मुख्य अर्थ यहूदी विरोधी नीति था।
-
सुरक्षा तंत्र: 4 अप्रैल, 1933 को जर्मन सुरक्षा परिषद् की स्थापना की गई।
3. सैन्य विस्तार और द्वितीय विश्वयुद्ध
-
पुनःशस्त्रीकरण: हिटलर ने 16 मार्च, 1935 को जर्मनी में आधिकारिक रूप से पुनःशस्त्रीकरण की घोषणा की।
-
विस्तारवादी नीति: हिटलर की साम्राज्यवादी और विस्तारवादी नीति का पहला शिकार ऑस्ट्रिया बना।
-
युद्ध का सूत्रपात: अपनी विस्तारवादी आकांक्षाओं को आगे बढ़ाते हुए, हिटलर ने 1 सितंबर, 1939 को पोलैंड पर आक्रमण किया, जो द्वितीय विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण बना।
4. अंत
-
मृत्यु: युद्ध में जर्मनी की हार सुनिश्चित होने पर, 30 अप्रैल, 1945 को एडोल्फ हिटलर ने आत्महत्या कर ली।