जापानी साम्राज्यवाद का उदय और पतन
जापान का आधुनिक इतिहास साम्राज्यवाद की तीव्र आकांक्षाओं और एक वैश्विक शक्ति के रूप में उसके उदय और अंत की कहानी है।
1. आधुनिक जापान की नींव
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अमेरिकी हस्तक्षेप: 1863 ई. में अमेरिकी नाविक पेरी ने बल-प्रयोग के माध्यम से जापान के द्वार अमेरिकी व्यापार के लिए खोले।
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आधुनिकीकरण: जापान में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत मूतसुहितो ने की थी।
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सैन्य सुधार: 1872 ई. में जापान में सैनिक सेवा को अनिवार्य कर दिया गया।
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जापान की पहचान: जापान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘पीत आतंक’ (Yellow Peril) के नाम से संबोधित किया जाता था।
2. साम्राज्यवादी विस्तार
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चीन और मंचूरिया: जापान के साम्राज्यवाद का सबसे पहला शिकार चीन बना। अपनी साम्राज्यवादी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जापान ने 1931 ई. में चीन के मंचूरिया क्षेत्र पर आक्रमण किया।
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रूस-जापान युद्ध: 1905 ई. में जापान ने रूस को हराकर विश्व को चकित कर दिया। इस युद्ध की समाप्ति 5 सितंबर, 1905 को पोर्ट्समाउथ की संधि के द्वारा हुई।
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राष्ट्रसंघ से अलगाव: अपनी विस्तारवादी नीतियों के कारण 20 मार्च, 1933 को जापान ने ‘राष्ट्रसंघ’ (League of Nations) की सदस्यता का त्याग कर दिया।
3. द्वितीय विश्वयुद्ध और जापान
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धुरी राष्ट्र: द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने जर्मनी और इटली के साथ मिलकर ‘धुरी राष्ट्र’ (Axis Powers) का साथ दिया।
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परमाणु हमले: युद्ध के अंतिम दौर में अमेरिका ने जापान पर दो परमाणु हमले किए:
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6 अगस्त, 1945: हिरोशिमा पर पहला अणु बम गिराया गया।
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आत्मसमर्पण: हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने की विभीषिका के कारण अंततः जापान ने हार स्वीकार की। द्वितीय विश्वयुद्ध में 10 सितंबर, 1945 को जापान ने आधिकारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया।