इटली में फासीवाद का उदय और मुसोलिनी
फासीवाद (Fascism) का उदय सर्वप्रथम इटली में हुआ, जिसने 20वीं सदी के यूरोपीय इतिहास को गहराई से प्रभावित किया। इसका नेतृत्व बेनिटो मुसोलिनी ने किया था।
1. फासीवाद का जन्म और विचारधारा
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जन्मदाता: फासीवाद का जनक मुसोलिनी को माना जाता है, जिनका जन्म 1883 ई. में रोमाग्ना में हुआ था।
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पार्टी की स्थापना: मुसोलिनी के दल का नाम ‘फासिस्टवाद’ था, जिसकी स्थापना मिलान में की गई थी।
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विशेषताएं: फासीवादी दल कट्टर राष्ट्रवाद का समर्थन करते थे। इस दल के स्वयंसेवक अपनी पहचान के रूप में काली कमीज (Black Shirts) पहनते थे।
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उपनाम: मुसोलिनी को ‘ड्यूस’ (Il Duce) के नाम से संबोधित किया जाता था।
2. प्रशासनिक ढांचा और संगठन
मुसोलिनी ने राज्य की शक्ति को केंद्रीकृत करने के लिए कई संगठनात्मक उपाय किए:
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सैन्य नेतृत्व: मुसोलिनी ने डियाज को सेना का अधिकारी नियुक्त किया।
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निगम प्रणाली: मुसोलिनी द्वारा कुल 22 निगमों का गठन किया गया था।
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राष्ट्रीय निगम परिषद्: इस परिषद् का अध्यक्ष स्वयं मुसोलिनी था और इसमें कुल 500 सदस्य थे।
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ग्रैंड कौंसिल: ‘ग्रैंड कौंसिल ऑफ फासिस्ट पार्टी’ के सदस्यों की संख्या 25 निर्धारित थी।
3. आक्रामक विदेश नीति और सैन्य विस्तार
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सैन्य अभियान: मुसोलिनी ने अक्टूबर 1922 ई. में रोम पर और 1935 ई. में अबीसीनिया (इथियोपिया) पर आक्रमण किया।
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रोम-बर्लिन-टोकियो धुरी: 1936 ई. में मुसोलिनी ने जर्मनी और जापान के साथ मिलकर ‘रोम-बर्लिन-टोकियो धुरी’ (Axis Powers) का निर्माण किया।
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द्वितीय विश्वयुद्ध: 10 जून, 1939 ई. को द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मुसोलिनी ने मित्रराष्ट्रों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की।
4. फासीवाद का अंत
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इटली में फासीवाद का अंत 28 अप्रैल, 1945 ई. को माना जाता है।