चीनी क्रांति और आधुनिक चीन का उदय
20वीं सदी की शुरुआत में चीन ने राजशाही के पतन, गृहयुद्ध और अंततः साम्यवादी शासन के स्थापना का एक लंबा सफर तय किया।
1. क्रांति का सूत्रपात और सनयात सेन
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मंचू राजवंश का पतन: 1911 ई. में चीनी क्रांति के साथ ही मंचू राजवंश का अंत हुआ और गणतंत्र शासन पद्धति की स्थापना हुई।
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सनयात सेन: इन्हें ‘चीन का राष्ट्रपिता’ माना जाता है।
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योगदान: उन्होंने 1905 ई. में ‘तुंग-मेंग दल’ और ‘कोवीनेड लीग सोसायटी’ की स्थापना की। 1912 ई. में उन्होंने ‘कुओमिनतांग पार्टी’ बनाई।
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तीन सिद्धांत: उनके दर्शन के तीन मुख्य आधार थे – राष्ट्रवाद, लोकतंत्रवाद और सामाजिक न्याय।
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मृत्यु: 1925 ई. में उनकी मृत्यु हो गई।
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नेतृत्व: युआन शीह काई के समर्थन में सनयात सेन ने अपना नेतृत्व वापस ले लिया था। दल के पुनर्गठन के लिए उन्होंने माइकेल बोरोदिन और सैन्य संगठन के लिए जनरल गैलेन को आमंत्रित किया था।
2. गृहयुद्ध और राजनीतिक संघर्ष
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च्यांग काई शेक का नेतृत्व: 1926 ई. में सनयात सेन की मृत्यु के बाद च्यांग काई शेक ने कुओमिनतांग पार्टी का नेतृत्व संभाला।
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संघर्ष: 1927 ई. में कुओमिनतांग पार्टी से साम्यवादी अलग हो गए और 1928 ई. में चीन में गृहयुद्ध शुरू हो गया।
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दमनकारी नीतियां: च्यांग काई शेक ने साम्यवादियों के दमन हेतु ‘ब्लूशर्ट’ नामक आतंकवादी दल का गठन किया। उन्होंने नानकिंग में अपनी केंद्रीय सरकार स्थापित की और बाद में फारमोसा (ताइवान) में अपनी सरकार बनाई।
3. माओत्से तुंग और साम्यवादी क्रांति
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उदय: माओत्से तुंग का जन्म 1893 ई. में हूनान में हुआ था। 1925 ई. में हूनान के विशाल किसान आंदोलन का नेतृत्व उन्होंने ही किया।
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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी: इसकी स्थापना 1921 ई. में हुई थी।
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जनवादी गणराज्य: माओत्से तुंग के नेतृत्व में 1 अक्टूबर, 1949 को चीन में जनवादी गणराज्य की स्थापना हुई।
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प्रथम अध्यक्ष: माओत्से तुंग।
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प्रथम प्रधानमंत्री: चाऊ-एन-लाई।
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राजधानी: हूनान।
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4. चीन के प्रति अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
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एशिया का मरीज: चीन को ‘एशिया का मरीज’ कहा जाता था।
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खुले द्वार की नीति (Open Door Policy):
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चीन के द्वार खोलने का श्रेय ब्रिटेन को दिया जाता है।
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इस नीति का प्रतिपादक जॉन ‘हे’ था।
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मुख्य तिथियाँ और तथ्य एक नज़र में:
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1911: चीनी क्रांति और मंचू राजवंश का पतन।
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1921: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना।
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1949: जनवादी गणराज्य चीन की स्थापना।