🌌 सौरमंडल (The Solar System): एक संपूर्ण एवं व्यवस्थित अध्ययन

सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले विभिन्न ग्रहों, क्षुद्रग्रहों (Asteroids), धूमकेतुओं (Comets), उल्काओं (Meteors) तथा अन्य आकाशीय पिंडों के समूह को सौरमंडल कहते हैं। सौरमंडल निकाय के कुल द्रव्य (Mass) का लगभग 99.999% भाग सूर्य में ही निहित है, इसलिए सौरमंडल में सूर्य का ही प्रभुत्व है। इसके अतिरिक्त, सौरमंडल की समस्त ऊर्जा का स्रोत भी सूर्य ही है।

1. ब्रह्मांड के बारे में बदलता दृष्टिकोण (Geocentric vs Heliocentric)

समय के साथ ब्रह्मांड के केंद्र को लेकर मानव का दृष्टिकोण इस प्रकार बदला:

  • भूकेन्द्रीय सिद्धान्त (Geocentric Theory):

    • प्रतिपादक: मिस्र-यूनानी खगोलशास्त्री क्लाडियस टॉलमी (140 ई०)

    • मान्यता: प्रारंभ में पृथ्वी को सम्पूर्ण ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता था और माना जाता था कि सूर्य सहित सभी आकाशीय पिंड इसकी परिक्रमा करते हैं।

  • सूर्यकेन्द्रीय सिद्धान्त (Heliocentric Theory):

    • प्रतिपादक: पोलैंड के खगोलशास्त्री निकोलस कॉपरनिकस (1473-1543 ई०)

    • मान्यता: इन्होंने दर्शाया कि सूर्य ब्रह्मांड के केंद्र पर है तथा सभी ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं।

  • केप्लर के नियम: 16वीं शताब्दी में टायकोब्रेह के सहायक जोहानेस केप्लर (1571-1630 ई०) ने ग्रहीय कक्षाओं के नियमों की खोज की, लेकिन इसमें भी सूर्य को ही केंद्र माना गया।

  • आधुनिक दृष्टिकोण (20वीं शताब्दी): 20वीं शताब्दी के आरंभ में हमारी मंदाकिनी ‘दुग्धमेखला’ (Milky Way) की तस्वीर साफ हुई। यह पाया गया कि सूर्य ब्रह्मांड का केंद्र नहीं, बल्कि इस मंदाकिनी के एक कोने (सिरे) पर स्थित है। इसके साथ ही सूर्य का ब्रह्मांड के केंद्र पर होने का गौरव समाप्त हो गया।

2. सौरमंडल का प्रधान: सूर्य (The Sun)

  • स्थिति: हमारी मंदाकिनी दुग्धमेखला के केंद्र से लगभग 30,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक कोने में स्थित है।

  • परिक्रमण गति: सूर्य दुग्धमेखला के केंद्र के चारों ओर 250 किमी/सेकंड की गति से परिक्रमा कर रहा है।

  • ब्रह्मांड वर्ष (Cosmos Year): दुग्धमेखला के केंद्र के चारों ओर एक बार घूमने में सूर्य को 25 करोड़ वर्ष का समय लगता है, जिसे ‘ब्रह्मांड वर्ष’ कहते हैं।

  • अक्षीय घूर्णन: सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है। इसका मध्य भाग 25 दिनों में और ध्रुवीय भाग 35 दिनों में एक घूर्णन पूरा करता है।

  • रासायनिक संरचना (गैसीय गोला):

    • हाइड्रोजन ($H_2$): 71%

    • हीलियम ($He$): 26.5%

    • अन्य तत्व: 2.5%

  • तापमान: सूर्य के केंद्रीय भाग (क्रोड या Core) का तापमान $1.5 \times 10^7\ ^\circ\text{C}$ होता है, जबकि बाहरी सतह का तापमान $6000^\circ\text{C}$ है।

  • ऊर्जा का स्रोत (नाभिकीय संलयन): वैज्ञानिक हैंस वेथ (Hans Bethe) के अनुसार, $10^7\ ^\circ\text{C}$ के उच्च ताप पर सूर्य के केंद्र पर चार हाइड्रोजन नाभिक मिलकर एक हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं। यह नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) ही सूर्य की अक्षय ऊर्जा का स्रोत है।

  • सूर्य की परतें व वायुमंडल:

    • प्रकाश-मंडल (Photosphere): सूर्य की दीप्तिमान (चमकती हुई) सतह को प्रकाश-मंडल कहते हैं।

    • वर्णमंडल (Chromosphere): प्रकाश-मंडल के किनारे प्रकाशमान नहीं होते क्योंकि सूर्य का वायुमंडल प्रकाश का अवशोषण कर लेता है। यह लाल रंग का होता है।

    • सूर्य किरीट (Corona): सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का जो भाग दिखाई देता है, उसे ‘सूर्य किरीट’ कहते हैं। इसे ‘सूर्य का मुकुट’ भी कहा जाता है और यह X-Rays (एक्स-रे) उत्सर्जित करता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय इसी भाग से प्रकाश प्राप्त होता है।

  • सूर्य के धब्बे (Sunspots) एवं चुम्बकीय झंझावत:

    • सूर्य की सतह पर चलते हुए गैसों के खोल (धब्बे) होते हैं, जिनका तापमान आस-पास के क्षेत्र से $1500^\circ\text{C}$ कम होता है।

    • इनका एक पूरा चक्र 22 वर्षों का होता है (पहले 11 वर्ष यह बढ़ता है और बाद के 11 वर्ष यह घटता है)।

    • जब यह धब्बा दिखाई देता है, तो पृथ्वी पर चुम्बकीय झंझावत (Magnetic Storms) उत्पन्न होते हैं। इससे पृथ्वी पर चुंबकीय सुई की दिशा बदल जाती है और रेडियो, टेलीविजन, बिजली से चलने वाली मशीनों आदि में खराबी/गड़बड़ी उत्पन्न हो जाती है।

  • सूर्य से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े:

    • उम्र: लगभग 5 बिलियन वर्ष

    • भविष्य की ऊर्जा अवधि: भविष्य में सूर्य द्वारा ऊर्जा देते रहने का समय $10^{11}$ वर्ष है।

    • प्रकाश की गति: सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में 8 मिनट 16.6 सेकंड का समय लगता है।

    • सौर ज्वाला का ध्रुवीय नाम: सौर ज्वाला को उत्तरी ध्रुव पर ओरोरा बोरियलिस और दक्षिणी ध्रुव पर ओरोरा ऑस्ट्रेलिस कहा जाता है।

    • व्यास: 13 लाख 92 हजार किमी (पृथ्वी के व्यास का लगभग 110 गुना)।

    • आकार: सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है।

    • सूर्यताप का हिस्सा: पृथ्वी को सूर्य की कुल ऊर्जा (सूर्यताप) का मात्र 2 अरबवां भाग मिलता है।

3. सौरमंडल के पिंडों का वर्गीकरण

अंतर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (IAU – International Astronomical Union) के प्राग सम्मेलन (अगस्त – 2006) के अनुसार सौरमंडल के पिंडों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  1. परम्परागत ग्रह: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण (Uranus) एवं वरुण (Neptune)।

  2. बौने ग्रह: प्लूटो (यम), चेरॉन, सेरस, 2003 यूबी 313 (इरिस)।

  3. लघु सौरमंडलीय पिंड: धूमकेतु (Comets), उपग्रह (Satellites) एवं अन्य छोटे खगोलीय पिंड।

🪐 ग्रहों की नई परिभाषा और यम (Pluto) का निष्कासन

IAU के प्राग सम्मेलन (2006) के अनुसार कोई पिंड ‘ग्रह’ तभी कहलाएगा जब वह 3 शर्तें पूरी करे:

  1. जो सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करता हो।

  2. उसमें पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण बल हो ताकि वह गोल स्वरूप ग्रहण कर सके।

  3. उसके आस-पास का क्षेत्र साफ हो (यानी उसकी कक्षा के आस-पास अन्य पिंडों की भीड़-भाड़ न हो)।

नोट: प्लूटो (Yam/Pluto) की कक्षा वृत्ताकार नहीं थी और यह वरुण (Neptune) की कक्षा को काटती थी। आकार में भी यह चंद्रमा से छोटा था। इसलिए 24 अगस्त, 2006 को वैज्ञानिकों ने इसका ग्रह होने का दर्जा समाप्त कर दिया और इसे बौने ग्रह (संख्या: 134340) की श्रेणी में डाल दिया। इसके बाद पारंपरिक ग्रहों की संख्या 9 से घटकर 8 रह गई।

4. ग्रहों के सामान्य गुण और तुलनात्मक वर्गीकरण

  • भौतिक बनावट के आधार पर दो भाग:

    • (i) पार्थिव या आन्तरिक ग्रह (Terrestrial / Inner Planet): बुध, शुक्र, पृथ्वी एवं मंगल। इन्हें पार्थिव ग्रह इसलिए कहते हैं क्योंकि ये बनावट में पृथ्वी के सदृश (समान) होते हैं।

    • (ii) बृहस्पतीय या बाह्य ग्रह (Jovian / Outer Planet): बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण।

  • दृश्यता: कुल 8 ग्रहों में से केवल 5 ग्रहों को नंगी आँखों से देखा जा सकता है— बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि।

  • आकार के अनुसार ग्रहों का क्रम (घटते क्रम में):

    $$\text{बृहस्पति} > \text{शनि} > \text{अरुण} > \text{वरुण} > \text{पृथ्वी} > \text{शुक्र} > \text{मंगल} > \text{बुध}$$

    (अर्थात सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति और सबसे छोटा ग्रह बुध है)

  • घनत्व के अनुसार ग्रहों का क्रम (बढ़ते क्रम में):

    $$\text{शनि} < \text{यूरेनस} < \text{बृहस्पति} < \text{नेप्च्यून} < \text{मंगल} < \text{शुक्र}$$
  • घूर्णन की दिशा का अपवाद: शुक्र (Venus) एवं अरुण (Uranus) को छोड़कर अन्य सभी ग्रहों के घूर्णन (Rotation) और परिक्रमण (Revolution) की दिशा एक ही (पश्चिम से पूर्व/वामावर्त) है। शुक्र और अरुण पूर्व से पश्चिम (दक्षिणावर्त – Clockwise) घूमते हैं।

5. सभी 8 ग्रहों का व्यक्तिगत एवं विस्तृत विवरण

1. बुध (Mercury)

  • यह सूर्य का सबसे नजदीकी और सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है।

  • यह सूर्य निकलने के दो घंटे पहले दिखाई पड़ता है।

  • विशिष्ट गुण: इसमें चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) का होना इसका सबसे प्रमुख लक्षण है।

  • इसके पास कोई उपग्रह (चंद्रमा) नहीं है।

  • यह सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय (88 दिन) में पूरी करता है।

2. शुक्र (Venus)

  • यह पृथ्वी का सबसे निकटतम, सबसे चमकीला और सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है।

  • इसे ‘साँझ का तारा’ या ‘भोर का तारा’ कहा जाता है क्योंकि यह शाम को पश्चिम में और सुबह पूर्व में दिखाई देता है।

  • चक्रण: अन्य ग्रहों के विपरीत दक्षिणावर्त (Clockwise/Anticlockwise error correction in source: स्रोत में इसे दक्षिणावर्त लिखकर ब्रैकेट में anticlockwise लिखा गया है, वास्तविक रूप में यह पूर्व से पश्चिम यानी दक्षिणावर्त/Clockwise घूमता है) चक्कर लगाता है।

  • इसे ‘पृथ्वी का भगिनी ग्रह’ (Sister Planet) कहते हैं क्योंकि यह घनत्व, आकार और व्यास में पृथ्वी के समान है।

  • इसके पास भी कोई उपग्रह नहीं है।

3. पृथ्वी (Earth)

  • यह आकार में पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है और सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन है।

  • व्यास: इसका विषुवतीय व्यास 12,756 किमी और ध्रुवीय व्यास 12,714 किमी है।

  • झुकाव: पृथ्वी अपने अक्ष पर $23.5^\circ$ झुकी हुई है, और इसका अक्ष इसकी कक्षा के सापेक्ष $66.5^\circ$ का कोण बनाता है।

  • घूर्णन (दैनिक गति): अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर 1610 किमी/घंटा की चाल से 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकंड में एक चक्कर पूरा करती है। इससे दिन और रात होते हैं।

  • परिक्रमण (वार्षिक गति/सौर वर्ष): सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (लगभग 365 दिन 6 घंटे) का समय लगता है।

  • लीप वर्ष (Leap Year): हर वर्ष बढ़ने वाले इन 6 घंटों को हर चौथे वर्ष में एक दिन (24 घंटे) जोड़कर समायोजित किया जाता है। लीप वर्ष 366 दिन का होता है, जिससे फरवरी में 28 के स्थान पर 29 दिन होते हैं।

  • ऋतु परिवर्तन: पृथ्वी के अपने अक्ष पर झुके होने और सूर्य के सापेक्ष इसकी स्थिति में परिवर्तन (वार्षिक गति) के कारण ऋतु परिवर्तन होता है। वार्षिक गति के कारण ही दिन-रात छोटे-बड़े होते हैं।

  • अन्य नाम: जल की प्रचुर उपस्थिति के कारण इसे ‘नीला ग्रह’ (Blue Planet) भी कहते हैं।

  • निकटतम तारा: सूर्य के बाद पृथ्वी का सबसे निकट का तारा प्रॉक्सिमा सेंचुरी है, जो अल्फा सेंचुरी समूह का हिस्सा है। यह पृथ्वी से 4.22 प्रकाश वर्ष दूर है।

  • इसका एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा है।

4. मंगल (Mars)

  • इसे ‘लाल ग्रह’ (Red Planet) कहा जाता है। इसका लाल रंग आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण है।

  • इसके दिन का मान और अक्ष का झुकाव पृथ्वी के ही समान है (यह $25^\circ$ के कोण पर झुका है), जिसके कारण यहाँ पृथ्वी की तरह ही ऋतु परिवर्तन होता है।

  • यह अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक बार पूरा चक्कर लगाता है।

  • इसके दो उपग्रह हैं— फोबोस (Phobos) और डीमोस (Deimos)

  • इसे सूर्य की परिक्रमा करने में 687 दिन लगते हैं।

  • रिकॉर्ड: सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ‘ओलिपस मेसी’ और सौरमंडल का सबसे ऊँचा पर्वत ‘निक्स ओलम्पिया’ (जो माउंट एवरेस्ट से तीन गुना अधिक ऊँचा है), इसी ग्रह पर स्थित हैं।

5. बृहस्पति (Jupiter)

  • यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है।

  • यह अपनी धुरी पर चक्कर लगाने में सबसे कम समय यानी मात्र 10 घंटा (9.9 घंटे) लेता है, जबकि सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 12 वर्ष लगते हैं।

  • इसके उपग्रहों की संख्या 63 बताई गई है, जिसमें ग्यानीमीड (Ganymede) सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह है। यह पीले रंग का उपग्रह है।

6. शनि (Saturn)

  • यह आकार में सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है और आकाश में पीले तारे के समान दिखाई देता है।

  • मुख्य विशेषता: इसके तल के चारों ओर वलय (Rings) का होना है, जो मोटी प्रकाश वाली कुंडली जैसी दिखती हैं।

  • इसके उपग्रहों की संख्या 60 है (दिए गए स्रोतों के अनुसार सबसे अधिक)।

  • शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन (Titan) है, जो आकार में बुध ग्रह के बराबर है।

  • फोबे (Phoebe) उपग्रह: शनि का यह उपग्रह इसकी कक्षा में घूमने की विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है।

7. अरुण (Uranus)

  • यह आकार में तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। इसकी खोज 1781 ई० में विलियम हर्शेल द्वारा की गई थी।

  • इसके चारों ओर 9 वलय हैं, जिनमें से 5 मुख्य वलयों के नाम हैं— अल्फा ($\alpha$), बीटा ($\beta$), गामा ($\gamma$), डेल्टा ($\delta$) एवं इप्सिलॉन ($\epsilon$)

  • घूर्णन: यह अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर (शुक्र के समान दक्षिणावर्त) घूमता है। इसलिए यहाँ सूर्योदय पश्चिम की ओर और सूर्यास्त पूर्व की ओर होता है।

  • लेटा हुआ ग्रह: यह अपनी धुरी पर सूर्य की ओर इतना अधिक झुका हुआ है कि लेटा हुआ सा दिखाई देता है, इसलिए इसे ‘लेटा हुआ ग्रह’ कहते हैं।

  • इसके सभी उपग्रह भी पृथ्वी की विपरीत दिशा में परिभ्रमण करते हैं। इसका तापमान $-18^\circ\text{C}$ है।

  • इसके 27 उपग्रह हैं, जिनमें सबसे बड़ा उपग्रह टाइटेनिया (Titania) है।

8. वरुण (Neptune)

  • इसकी खोज 1846 ई० में जर्मन खगोलज्ञ जहान गाले ने की थी।

  • नई खगोलीय व्यवस्था में यह सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह है।

  • यह हरे रंग का ग्रह है, जिसके चारों ओर अति शीतल मीथेन ($CH_4$) का बादल छाया हुआ है।

  • इसके 13 उपग्रह हैं, जिनमें ट्रिटॉन (Triton) सबसे प्रमुख है।

6. पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह: चन्द्रमा (The Moon)

  • सेलेनोलॉजी (Selenology): चन्द्रमा की सतह और उसकी आंतरिक स्थिति का अध्ययन करने वाला विज्ञान।

  • शान्ति सागर (Sea of Tranquility): चन्द्रमा पर स्थित धूल के मैदान को ‘शान्ति सागर’ कहते हैं। यह चन्द्रमा का पिछला भाग है जो अंधकारमय होता है।

  • सर्वोच्च बिंदु: चन्द्रमा का उच्चतम पर्वत लीबनिट्ज पर्वत है, जो 35,000 फुट (10,668 मीटर) ऊँचा है। यह चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित है।

  • इसे ‘जीवाश्म ग्रह’ (Fossil Planet) भी कहा जाता है।

  • घूर्णन और परिक्रमण काल की समानता: चन्द्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा लगभग 27 दिन 8 घंटे में पूरी करता है और अपने अक्ष पर भी एक चक्कर इतने ही समय में लगाता है। यही कारण है कि पृथ्वी से चन्द्रमा का सदैव एक ही भाग (केवल 57% भाग) दिखाई पड़ता है।

  • झुकाव: चन्द्रमा का अक्ष तल पृथ्वी के अक्ष के साथ $58.48^\circ$ का कोण बनाता है। चन्द्रमा पृथ्वी के अक्ष के लगभग समानान्तर है।

  • आकार व द्रव्यमान: इसका व्यास 3,480 किमी है तथा इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग $1/81$ है। पृथ्वी के समान इसका परिक्रमण पथ भी दीर्घवृत्ताकार है।

  • चन्द्रमास या साइनोडिक मास (Synodic Month): सूर्य के संदर्भ में चन्द्रमा की परिक्रमा की अवधि 29.53 दिन (29 दिन, 12 घंटे, 44 मिनट और 2.8 सेकंड) होती है। इस समय को एक चन्द्रमास कहते हैं।

  • नाक्षत्र मास (Sidereal Month): नक्षत्र समय के दृष्टिकोण से चन्द्रमा लगभग 27.5 दिन (27 दिन, 7 घंटे, 43 मिनट और 11.6 सेकंड) में पुनः उसी स्थिति में आ जाता है। इस अवधि को नाक्षत्र मास कहते हैं।

  • ज्वार-भाटा शक्ति: ज्वार उठाने के लिए अपेक्षित सूर्य और चन्द्रमा की शक्तियों का अनुपात $11:5$ है।

  • उम्र और बनावट: अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लाई गई चट्टानों से सिद्ध हुआ है कि चन्द्रमा भी पृथ्वी जितना ही पुराना है (लगभग 460 करोड़ वर्ष)। इसकी चट्टानों में टाइटेनियम भारी मात्रा में पाया गया है।

7. बौने ग्रह एवं लघु सौरमंडलीय पिंड

A. बौने ग्रह (Dwarf Planets)

  • यम (Pluto): खोज 1930 ई० में क्लाइड टॉमबॉ (Clyde Tombaugh) ने की थी। अगस्त 2006 में ग्रह की श्रेणी से हटाकर इसे बौने ग्रहों में शामिल किया गया और नया नाम 134340 दिया गया।

  • सेरस (Ceres): इसकी खोज इटली के खगोलशास्त्री पियाजी ने की थी। IAU की नई परिभाषा के तहत इसे बौने ग्रहों की श्रेणी में ‘संख्या 1’ नाम से जाना जाएगा। इसका व्यास बुध के व्यास का $1/5$ भाग है।

  • अन्य बौने ग्रह: चेरॉन (Charon) एवं 2003 UB 313 (इरिस – Eris)।

B. लघु सौरमंडलीय पिंड (Small Solar System Bodies)

  • क्षुद्र ग्रह (Asteroids):

    • स्थिति: मंगल और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच स्थित छोटे-छोटे आकाशीय पिंड जो सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये ग्रहों के विस्फोट के बाद टूटे हुए टुकड़े हैं।

    • प्रभाव: क्षुद्र ग्रह जब पृथ्वी से टकराते हैं, तो धरातल पर विशाल गर्त (गड्ढा) बनता है। महाराष्ट्र की लोनार झील ऐसा ही एक विशाल गर्त है।

    • फोर वेस्टा (4-Vesta): यह एकमात्र ऐसा क्षुद्र ग्रह है जिसे नंगी आँखों से देखा जा सकता है

  • धूमकेतु / पुच्छल तारे (Comets):

    • ये सौरमंडल के छोर पर विद्यमान छोटे-छोटे अरबों गैस और धूल के संग्रह हैं। ये आकाश में लंबी और चमकदार पूँछ के साथ प्रकाश के चमकीले गोले के रूप में दिखाई देते हैं।

    • ये केवल तभी दिखाई देते हैं जब सूर्य की ओर बढ़ते हैं, क्योंकि सूर्य की किरणें इनकी गैस को चमकीला बना देती हैं। इनकी पूँछ हमेशा सूर्य से दूर (विपरीत दिशा में) दिखाई देती है।

    • हैले (Halley) धूमकेतु: इसका परिक्रमण काल 76 वर्ष है। यह अंतिम बार 1986 में देखा गया था और अब अगली बार यह वर्ष 2062 ($1986 + 76$) में दिखाई देगा।

  • उल्का (Meteors):

    • ये आकाश में क्षणभर के लिए चमकीली लकीर (धारी) के रूप में दमकते हैं और फिर लुप्त हो जाते हैं। इन्हें सामान्य बोलचाल में ‘टूटता हुआ तारा’ भी कहा जाता है।

    • वास्तव में ये क्षुद्र ग्रहों के टूटे टुकड़े या धूमकेतुओं द्वारा पीछे छोड़े गए धूल के कण होते हैं।

📊 सौर परिवार की प्रामाणिक सांख्यिकीय सारणी

दिए गए आंकड़ों के आधार पर सौरमंडल के सभी 8 ग्रहों की घूर्णन, परिक्रमण और उपग्रहों की विस्तृत स्थिति निम्न प्रकार है:

ग्रहों के नाम व्यास (किमी) अपने अक्ष पर परिभ्रमण समय (Rotation) सूर्य के चारों ओर परिक्रमण समय (Revolution) उपग्रहों (चंद्रमा) की संख्या
🪐 बुध (Mercury) 4,878 58.6 दिन 88 दिन 0
🪐 शुक्र (Venus) 12,104 243 दिन 224.7 दिन 0
🌍 पृथ्वी (Earth) 12,756 – 12,714 23.9 घण्टे 365.26 दिन 1
🔴 मंगल (Mars) 6,796 24.6 घण्टे 687 दिन 2
🟤 बृहस्पति (Jupiter) 1,42,984 9.9 घण्टे 11.9 वर्ष 63
🟡 शनि (Saturn) 1,20,536 10.3 घण्टे 29.5 वर्ष 60
🔵 अरुण (Uranus) 51,118 17.2 घण्टे 84.0 वर्ष 27
🟢 वरुण (Neptune) 49,100 17.1 घण्टे 164.8 वर्ष 13

🔍 सारणी से जुड़े मुख्य व रोचक निष्कर्ष:

  1. आकार का चरम: व्यास के आधार पर बृहस्पति हमारे सौरमंडल का सबसे विशाल ग्रह है और बुध सबसे छोटा ग्रह है।

  2. सबसे तेज़ घूर्णन (Fastest Spin): बृहस्पति अपने अक्ष पर सबसे तीव्र गति से घूमता है, यह मात्र 9.9 घण्टे में अपना एक दिन पूरा कर लेता है।

  3. सबसे धीमा घूर्णन (Slowest Spin): शुक्र ग्रह को अपने अक्ष पर एक चक्कर (घूर्णन) पूरा करने में सबसे अधिक समय यानी 243 दिन लगते हैं (इसका एक दिन इसके एक वर्ष से भी बड़ा हो जाता है)।

  4. बिना उपग्रह वाले ग्रह: सौरमंडल में बुध और शुक्र ही ऐसे दो ग्रह हैं जिनका अपना कोई भी चंद्रमा या उपग्रह नहीं है।

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