1. वायुमंडल: परिचय एवं संगठन (Introduction & Composition)

  • परिभाषा: पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए वायु के विस्तृत फैलाव को वायुमंडल (Atmosphere) कहते हैं।

  • अध्ययन: * वायुमंडल की ऊपरी परत का अध्ययन: वायुर्विज्ञान (Aerology)

    • वायुमंडल की निचली परत का अध्ययन: ऋतु विज्ञान (Meteorology)

प्रमुख गैसों का मिश्रण (आयतन के अनुसार)

  • नाइट्रोजन ($N_2$): 78.07%

  • ऑक्सीजन ($O_2$): 20.93%

  • आर्गन ($Ar$): 0.93%

  • कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$): 0.03%

महत्वपूर्ण गैसों की विशेषताएँ

  • नाइट्रोजन: वायुमंडल में 128 किमी की ऊँचाई तक विस्तृत। यह वस्तुओं को तेजी से जलने से बचाती है और पेड़-पौधों में प्रोटीन निर्माण का मुख्य आधार है। इसी के कारण वायुदाब, पवनों की शक्ति और प्रकाश के परावर्तन का आभास होता है।

  • ऑक्सीजन: 64 किमी की ऊँचाई तक फैली (16 किमी के ऊपर मात्रा बहुत कम)। यह ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और जलने में सहायक है।

  • कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$): सबसे भारी गैस होने के कारण सबसे निचली परत में (32 किमी तक)। यह ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect) के लिए जिम्मेदार है क्योंकि यह सूर्य की किरणों के लिए पारगम्य और पृथ्वी की किरणों के लिए अपारगम्य है।

  • ओजोन ($O_3$): 10 से 50 किमी की ऊँचाई तक केंद्रित। यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet Radiations) को अवशोषित करती है। इसे “पृथ्वी का सुरक्षा कवच” कहा जाता है।

विशेष नोट: धूल कणों के कारण ही आकाश का रंग नीला दिखाई देता है। जलवाष्प और $CO_2$ पृथ्वी के तापमान को बनाए रखने (कंबल की तरह कार्य करने) के लिए उत्तरदायी हैं।

2. वायुमंडल की संरचना (Structure of the Atmosphere)

वायुमंडल को मुख्य रूप से 5 परतों में विभाजित किया गया है:

1. क्षोभ मंडल (Troposphere)

  • यह वायुमंडल की सबसे निचली परत है।

  • ऊँचाई: ध्रुवों पर 8 किमी और विषुवत रेखा पर लगभग 18 किमी।

  • तापमान गिरावट दर: प्रति 165 मीटर की ऊँचाई पर $1^\circ\text{C}$ या 1 किमी पर $6.4^\circ\text{C}$ की कमी।

  • विशेषता: सभी मौसम संबंधी घटनाएँ (बादल, आँधी, वर्षा) इसी में होती हैं। इसे संवहन मंडल या अधो मंडल भी कहते हैं।

2. समताप मंडल (Stratosphere)

  • ऊँचाई: 18 से 32 किमी तक।

  • विशेषता: इसमें मौसमी घटनाएँ नहीं होतीं, तापमान समान रहता है। यह वायुयान उड़ाने के लिए आदर्श है। ध्रुवों पर इसकी मोटाई सबसे अधिक होती है। यहाँ विशेष प्रकार के बादल बनते हैं जिन्हें मूलाभ मेघ (Mother of pearl cloud) कहते हैं।

3. ओजोन मंडल (Ozonosphere)

  • ऊँचाई: 32 से 60 किमी के मध्य (समताप मंडल का ही हिस्सा)।

  • विशेषता: ओजोन गैस की परत पाई जाती है। ओजोन परत को नष्ट करने वाली गैस CFC (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) है, जिसमें उपस्थित सक्रिय क्लोरीन नुकसान पहुँचाती है। इसकी मोटाई डाबसन (Dobson) इकाई में मापी जाती है। यहाँ ऊँचाई के साथ तापमान प्रति किमी $5^\circ\text{C}$ बढ़ता है।

4. आयन मंडल (Ionosphere)

  • ऊँचाई: 60 से 640 किमी तक।

  • विशेषता: यह परत रेडियो तरंगों (D-layer से लंबी तरंगें और E/F परतों से छोटी तरंगें) को परावर्तित करती है, जिससे रेडियो, टीवी, रडार और संचार उपग्रह (Communication Satellites) काम करते हैं।

5. बाह्य मंडल (Exosphere)

  • ऊँचाई: 640 किमी से ऊपर (कोई ऊपरी सीमा निश्चित नहीं)।

  • विशेषता: यहाँ हाइड्रोजन और हीलियम गैसों की प्रधानता होती है।

3. सूर्यातप और वायुमंडल के गर्म/ठंडे होने की विधियाँ

  • सूर्यातप (Insolation): सूर्य से पृथ्वी तक लघु तरंगों के रूप में पहुँचने वाली सौर विकिरण ऊर्जा। बाहरी सीमा पर प्रति मिनट प्रति वर्ग सेमी $1.94 \text{ कैलोरी}$ ऊष्मा प्राप्त होती है।

  • एल्बिडो (Albedo): किसी सतह को प्राप्त होने वाले और उससे परावर्तित होने वाले सूर्यातप की मात्रा का अनुपात।

वायुमंडल के गर्म और ठंडे होने की 4 विधियाँ:

  1. विकिरण (Radiation): बिना किसी माध्यम के ऊष्मा का स्थानांतरण। पृथ्वी सूर्य की लघु तरंगों से कम और पृथ्वी से लौटने वाली भौमिक विकिरण (Terrestrial Radiation) की लंबी तरंगों से अधिक गर्म होती है।

  2. संचालन (Conduction): दो असमान तापमान वाली वस्तुओं के संपर्क में आने पर ऊष्मा का प्रवाह। वायु ऊष्मा की कुचालक है, इसलिए यह प्रक्रिया वायुमंडल को गर्म करने में सबसे कम महत्वपूर्ण है (केवल निचली परत गर्म होती है)।

  3. संवहन (Convection): गैसीय या तरल पदार्थों में अणुओं की गति द्वारा ऊष्मा का स्थानांतरण। गर्म हवा हल्की होकर ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है। वायुमंडल के गर्म होने में इसकी मुख्य भूमिका है।

  4. अभिवहन (Advection): ऊष्मा का क्षैतिज (Horizontal) दिशा में स्थानांतरण। जैसे- गर्म वायु राशियों का ठंडे क्षेत्रों में जाना (उदा. ‘लू’ पवन)।

4. तापमान का वितरण और तापान्तर

  • समताप रेखा (Isotherm): समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा। ये अक्षांशों के समानान्तर (पूर्व-पश्चिम) खिंची होती हैं। दक्षिणी गोलार्द्ध में जल की अधिकता के कारण इनमें मोड़ कम होते हैं।

  • ताप प्रवणता: समताप रेखाओं के बीच की दूरी से तापमान बदलने की दर का पता चलता है (पास होने पर प्रवणता अधिक, दूर होने पर कम)।

  • तापान्तर (Range of Temperature): अधिकतम और न्यूनतम तापमान का अंतर।

    • दैनिक तापान्तर: एक दिन के अधिकतम और न्यूनतम तापमान का अंतर।

    • वार्षिक तापान्तर: सबसे गर्म और सबसे ठंडे महीने के औसत तापमान का अंतर। विश्व में सर्वाधिक वार्षिक तापान्तर ($65.5^\circ\text{C}$) बरखोयांस्क (साइबेरिया) का है।

  • तापीय विसंगति: किसी स्थान के औसत तापमान और उसके अक्षांश के औसत तापमान का अंतर।

5. वायुमंडलीय दाब और वायुदाब कटिबंध (Atmospheric Pressure)

  • वायुदाब: समुद्रतल पर पारे के 76 सेमी या 760 मिमी ऊँचे स्तम्भ द्वारा पड़ने वाला दाब। इसे बैरोमीटर से मापा जाता है और इसकी इकाई बार (bar) है।

  • समदाब रेखा (Isobar): समुद्रतल पर समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा। दूरी की प्रति इकाई पर दाब घटने को दाब प्रवणता कहते हैं।

प्रमुख मापन यंत्र और उनके आविष्कारक:

यंत्र आविष्कारक
पारद वायु दाबमापी ई० टॉरीसेली
निद्रव वायु दाबमापी लूसियन विडाई
सेल्सियस थर्मामीटर एण्डर्स सेल्सियस
केश आर्द्रतामापी डी० सौस्सर

पृथ्वी के 4 प्रमुख वायुदाब कटिबंध:

  1. विषुवत् रेखीय निम्न वायुदाब पेटी ($10^\circ \text{ N}$ से $10^\circ \text{ S}$): यहाँ वर्षभर सूर्य की किरणें सीधी पड़ने से हवा गर्म होकर ऊपर उठती है। यहाँ क्षैतिज पवनें नहीं चलतीं, इसलिए इसे शांत कटिबंध या डोलड्रम (Doldrums) कहते हैं।

  2. उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी ($30^\circ$ से $35^\circ$ दोनों गोलार्द्धों में): विषुवत रेखा से उठी हवा यहाँ ठंडी होकर नीचे बैठती है। इसे अश्व अक्षांश (Horse Latitude) भी कहते हैं।

  3. उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी ($45^\circ$ से आर्कटिक/अंटार्कटिक वृत्तों के बीच): गतिजन्य कारणों से यहाँ निम्न वायुदाब पाया जाता है।

  4. ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी ($80^\circ$ से ध्रुवों तक): अत्यधिक ठंड के कारण यहाँ हमेशा उच्च वायुदाब रहता है।

6. पवन (Winds) और कॉरिआलिस प्रभाव

  • पवन: उच्च वायुदाब क्षेत्र से निम्न वायुदाब क्षेत्र की ओर क्षैतिज (Horizontal) रूप से गतिशील हवा। (ऊर्ध्वाधर गति को वायुधारा कहते हैं)।

  • कॉरिआलिस प्रभाव (Coriolis Effect): पृथ्वी के घूर्णन के कारण पवनों का अपनी मूल दिशा से विक्षेपित होना।

    • फेरेल का नियम: इस बल के कारण पवनें उत्तरी गोलार्द्ध में दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर मुड़ जाती हैं।

    • यह प्रभाव विषुवत रेखा पर शून्य और ध्रुवों पर अधिकतम होता है।

पवनों के प्रकार

1. प्रचलित / स्थायी पवन (Year-round permanent winds)

  • पछुआ पवन: उपोष्ण उच्च दाब से उपध्रुवीय निम्न दाब की ओर चलने वाली पवन। दक्षिणी गोलार्द्ध में $40^\circ$ से $65^\circ \text{ S}$ के बीच इन्हें गरजता चालीसा, प्रचंड पचासा तथा चीखता साठा कहा जाता है।

  • व्यापारिक पवन: उपोष्ण उच्च दाब से भूमध्यरेखीय निम्न दाब की ओर निरंतर बहने वाली पवन।

  • ध्रुवीय पवन: ध्रुवीय उच्च दाब से उपध्रुवीय निम्न दाब की ओर बहने वाली हवा।

2. मौसमी पवन (Seasonal Winds)

  • मौसम या समय के साथ दिशा बदलने वाली पवनें, जैसे- मानसून पवन, स्थल समीर तथा समुद्र समीर।

3. स्थानीय पवन (Local Winds)

प्रमुख गर्म एवं शुष्क स्थानीय पवनें:

  • चिनुक: संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा (रॉकी पर्वत)। बर्फ पिघलाकर चरागाहों को मुक्त करती है।

  • फ़ॉन: आल्पस पर्वत (स्विट्ज़रलैंड)। बर्फ पिघलाती है, अंगूर जल्दी पकते हैं।

  • हरमट्टन: सहारा रेगिस्तान से गिनी तट की ओर। गिनी तट पर इसे ‘डॉक्टर हवा’ कहते हैं।

  • सिरॉको: सहारा मरुस्थल से भूमध्य सागर पार कर इटली जाने वाली हवा। इसके अन्य नाम: खमसिन (मिस्र), गिबिली (लीबिया), चिली (ट्यूनिशिया)।

  • सिमूम: अरब रेगिस्तान।

  • लू: उत्तरी भारत।

  • अन्य गर्म पवनें: ब्लैक रोलर (उत्तरी अमेरिका), ब्रिक फील्डर (आस्ट्रेलिया), नारवेस्टर (न्यूजीलैंड), शामल (इराक), साण्टा आना (कैलीफोर्निया), कोयमबैग (जावा)।

प्रमुख स्थानीय शीतल (Cold) हवाएँ:

  • मिस्ट्रल: स्पेन एवं फ्रांस।

  • बोरा: एड्रियाटिक तट।

  • बुरान / पुर्गा: रूस / टुंड्रा प्रदेश।

  • पैम्पीरो: अर्जेण्टीना।

  • अन्य ठंडी पवनें: विलीयाव (अलास्का), बाइज (फ्रांस), नार्दर व नॉटी (USA), केप डॉक्टर (दक्षिण अफ्रीका), पैपागायो (मैक्सिको), विली-विली (आस्ट्रेलिया)।

7. जेट प्रवाह, वायु राशियाँ और वाताग्र

  • जेट प्रवाह (Jet Streams): क्षोभमंडल की ऊपरी परत में पश्चिम से पूर्व की ओर तीव्र गति (120 किमी/घंटा) से चलने वाला संकरा, विसर्पी पवन प्रवाह। यह चक्रवातों, तूफानों और मानसून को प्रभावित करता है।

  • वायु राशियाँ (Air Masses): वायुमंडल का वह विशाल भाग जिसमें तापमान और आर्द्रता के लक्षण क्षैतिज दिशा में समान होते हैं।

  • वाताग्र (Fronts): दो विपरीत स्वभाव वाली वायु राशियों के बीच का सीमातल। गर्म हवा ऊपर उठे तो उष्ण वाताग्र और ठंडी हवा गर्म हवा को ऊपर धकेले तो शीत वाताग्र बनता है।

8. आर्द्रता, संघनन और वर्षा

  • आर्द्रता (Humidity): वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प।

    1. निरपेक्ष आर्द्रता: प्रति इकाई आयतन में जलवाष्प की मात्रा ($\text{ग्राम/घन मीटर}$)।

    2. विशिष्ट आर्द्रता: वायु के प्रति इकाई भार में जलवाष्प का भार ($\text{ग्राम/किग्रा}$)।

    3. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity): किसी तापमान पर उपस्थित जलवाष्प तथा उसी तापमान पर वायु की अधिकतम जलवाष्प धारण करने की क्षमता का अनुपात (प्रतिशत में)। संतृप्त वायु की सापेक्ष आर्द्रता 100% होती है।

  • संघनन (Condensation): जलवाष्प (गैस) का तरल या ठोस रूप में बदलना।

  • ओसांक (Dew point): जिस तापमान पर वायु संतृप्त होती है और संघनन शुरू होता है। ओस के लिए ओसांक $0^\circ\text{C}$ से ऊपर और पाला/तुषार के लिए $0^\circ\text{C}$ से नीचे होना चाहिए।

  • कोहरा (Fog): निचली परतों में संघनित जल-पिंड और धूल कण (दृश्यता < 1 किमी)। धुन्ध (Mist) में दृश्यता 1 से 2 किमी होती है।

  • बादल (Clouds): हवा के रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया द्वारा ठंडे होने से बनते हैं। प्रकार: पक्षाभ (ऊंचे/हिम कण), कपासी (गुम्बदनुमा), स्तरी (परतदार)।

वर्षा के प्रकार:

  1. संवहनीय वर्षा: हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, ठंडी होकर कपासी मेघ बनाती है और तेज वर्षा होती है (भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में)।

  2. पर्वतकृत वर्षा: नमी से लदी हवा जब पर्वत की ढलान से ऊपर चढ़कर ठंडी होती है और वर्षा करती है।

  3. चक्रवाती / वाताग्री वर्षा: चक्रवातों के कारण दो विपरीत वायु राशियों के मिलने से होने वाली वर्षा।

9. चक्रवात और प्रतिचक्रवात (Cyclone & Anticyclone)

  • चक्रवात (Cyclone): इसके केन्द्र में निम्न वायुदाब (Low Pressure) और बाहर उच्च वायुदाब होता है। हवाएँ बाहर से भीतर की ओर चलती हैं और वर्षा कराती हैं।

    • दिशा: उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सुई के विपरीत (Anti-clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सुई के अनुकूल (Clockwise)

  • प्रतिचक्रवात (Anticyclone): इसके केन्द्र में उच्च वायुदाब (High Pressure) होता है और हवाएँ केन्द्र से बाहर की ओर चलती हैं। इसमें मौसम साफ होता है।

    • दिशा: उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सुई के अनुकूल (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सुई के विपरीत (Anti-clockwise)

प्रमुख चक्रवाती तूफान:

  • टारनेडो: अमेरिका (मिसीसिपी) और ऑस्ट्रेलिया में आने वाला भयंकर, अल्पकालिक स्थलीय व जलीय तूफान (गति: 325 किमी/घंटा)।

  • हरीकेन्स: अटलांटिक महासागर और पश्चिमी द्वीप समूह का चक्रवात (गति: 121 किमी/घंटा)।

  • टाइफून: प्रशांत महासागर और चीन सागर में चलने वाला चक्रवात (गति: 160 किमी/घंटा)।

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