भौतिक विज्ञान: प्रकाश (Light)
1. प्रकाश की प्रकृति एवं मूल सिद्धांत
परिभाषा: प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है, जो विद्युत चुम्बकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) के रूप में संचारित होती है। इसका ज्ञान हमें आँखों द्वारा प्राप्त होता है।
- तरंगदैर्घ्य (Wave-length): दृश्य प्रकाश का तरंगदैर्घ्य 3900 Å (ऐंगस्ट्रॉम) से 7800 Å (ऐंगस्ट्रॉम) के बीच होता है।
- अनुप्रस्थ तरंग: विद्युत चुम्बकीय तरंगें अनुप्रस्थ (Transverse) होती हैं, इसलिए प्रकाश भी एक अनुप्रस्थ तरंग है।
- दोहरी प्रकृति (Dual Nature): प्रकाश कुछ घटनाओं में तरंग (Wave) की तरह और कुछ में कण (Particle) की तरह व्यवहार करता है। इसे ही प्रकाश की दोहरी प्रकृति कहते हैं।
सिद्धांतों का वर्गीकरण:
- विद्युत चुम्बकीय तरंग-सिद्धान्त: यह प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन, सीधी रेखा में गमन, विवर्तन (Diffraction), व्यतिकरण (Interference) और ध्रुवण (Polarisation) की व्याख्या करता है।
- फोटॉन सिद्धान्त (आइन्स्टीन): इसके अनुसार प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे बंडलों या पैकेटों के रूप में चलता है, जिन्हें फोटॉन कहते हैं। यह सिद्धान्त ‘प्रकाश-विद्युत प्रभाव’ (Photo-electric Effect) तथा ‘कॉम्पटन-सिद्धान्त’ की सफल व्याख्या करता है, जो प्रकाश की कण प्रकृति को सिद्ध करते हैं।
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2. प्रकाश का वेग और माध्यमों में चाल
- प्रकाश के वेग की गणना सबसे पहले रोमर ने की थी।
- वायु तथा निर्वात में प्रकाश की चाल सबसे अधिक 3 × 108 m/s होती है।
- समय अंतराल: सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक आने में औसतन 499 सेकंड (8 मिनट 19 सेकंड) का समय लगता है, जबकि चन्द्रमा से परावर्तित प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 1.28 सेकंड का समय लगता है।
विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल की तालिका:
| माध्यम | प्रकाश की चाल (मीटर/सेकंड) |
|---|---|
| निर्वात (Vacuum) | 3 × 108 |
| जल (Water) | 2.25 × 108 |
| तारपीन का तेल | 2.04 × 108 |
| काँच (Glass) | 2 × 108 |
| रॉक साल्ट (Rock Salt) | 1.96 × 108 |
| नाइलोन (Nylon) | 1.96 × 108 |
3. प्रकाश के प्रति वस्तुओं का व्यवहार
- प्रदीप्त वस्तुएँ (Luminous Bodies): जो स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित होती हैं; जैसे—सूर्य, विद्युत बल्ब आदि।
- अप्रदीप्त वस्तुएँ (Non-luminous Bodies): जिनका अपना प्रकाश नहीं होता परन्तु प्रकाश पड़ने पर दिखाई देती हैं; जैसे—मेज, कुर्सी आदि।
- पारदर्शक वस्तुएँ (Transparent Bodies): जिनमें से होकर प्रकाश की किरणें आसानी से आर-पार निकल जाती हैं; जैसे—काँच, जल।
- अर्ध-पारदर्शक वस्तुएँ (Translucent Bodies): जिन पर प्रकाश पड़ने से उसका कुछ भाग अवशोषित होता है और कुछ भाग बाहर निकलता है; जैसे—तेल लगा हुआ कागज।
- अपारदर्शक वस्तुएँ (Opaque Bodies): जिनसे होकर प्रकाश की किरणें बाहर नहीं निकल पातीं; जैसे—धातु, लकड़ी।
4. प्रकाश की प्रमुख परिघटनाएँ
क) प्रकाश का विवर्तन (Diffraction)
प्रकाश को किसी तीक्ष्ण अवरोध के किनारों पर थोड़ा मुड़कर उसकी छाया में प्रवेश करने की घटना को विवर्तन कहते हैं।
ख) प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering)
जब प्रकाश धूल या अन्य सूक्ष्म कणों वाले माध्यम से गुजरता है, तो कणों द्वारा प्रकाश सभी दिशाओं में प्रसारित (फैल) हो जाता है। इसे प्रकीर्णन कहते हैं।
- नियम: बैंगनी रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे अधिक तथा लाल रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे कम होता है।
- उदाहरण: स्वच्छ आकाश का रंग नीला दिखाई देना प्रकाश के प्रकीर्णन का ही कारण है।
ग) प्रकाश का परावर्तन (Reflection)
प्रकाश के किसी चिकने या चमकदार पृष्ठ से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौटने की घटना को परावर्तन कहते हैं। इसके दो नियम हैं:
- आपतित किरण (Incident ray), आपतन बिन्दु पर अभिलंब (Normal)