गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) एवं खगोलीय गतिकी

1. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम

किन्हीं दो पिंडों के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

सूत्र: F = G(M1×M2) / R2
जहाँ G (सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक) का मान 6.67 × 10-11 Nm2/kg2 होता है।

2. गुरुत्व (Gravity) एवं ‘g’ का मान

पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचने वाले बल को ‘गुरुत्व’ कहते हैं। इसके कारण उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण (g) कहते हैं (मान = 9.8 m/s2)।

  • ध्रुवों (Pole) पर: ‘g’ का मान महत्तम होता है।
  • विषुवत रेखा (Equator) पर: ‘g’ का मान न्यूनतम होता है।
  • ऊपर या नीचे जाने पर: ‘g’ का मान घटता है।
  • घूर्णन प्रभाव: पृथ्वी की घूर्णन गति बढ़ने पर ‘g’ घटता है और घटने पर ‘g’ बढ़ता है।

3. लिफ्ट में पिण्ड का भार

लिफ्ट की स्थिति आभासी भार
ऊपर जाने पर बढ़ा हुआ
नीचे जाने पर घटा हुआ
डोरी टूटने पर शून्य (भारहीनता)

4. केप्लर के ग्रहीय गति के नियम

  1. ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) कक्षा में घूमते हैं।
  2. ग्रह का क्षेत्रीय वेग नियत रहता है (सूर्य के निकट वेग अधिक, दूर वेग कम)।
  3. परिक्रमण काल का वर्ग (T2) औसत दूरी के घन (r3) के अनुक्रमानुपाती होता है (T2 ∝ r3)।

5. उपग्रह (Satellite) एवं पलायन वेग

उपग्रह की कक्षीय चाल उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पृथ्वी से उसकी ऊँचाई पर निर्भर करती है।

  • भू-स्थायी उपग्रह: परिक्रमण काल 24 घंटे, ऊँचाई लगभग 36,000 किमी।
  • पलायन वेग (Escape Velocity): वह न्यूनतम वेग जिससे फेंकने पर वस्तु पृथ्वी पर वापस नहीं आती। पृथ्वी के लिए यह 11.2 किमी/सेकंड है।

[Image of Kepler’s laws of planetary motion]

विशेष नोट: पलायन वेग, कक्षीय वेग का √2 गुना होता है। यदि किसी उपग्रह का कक्षीय वेग 41% (√2 गुना) बढ़ा दिया जाए, तो वह अपनी कक्षा छोड़कर अंतरिक्ष में पलायन कर जाएगा।
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