प्लवन (Flotation) और आर्कमिडीज का सिद्धांत
1. उत्प्लावक बल (Buoyant Force)
जब किसी वस्तु को द्रव में डुबोया जाता है, तो द्रव उस वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है, जिसे उत्प्लावक बल या उत्क्षेप (Upthrust) कहते हैं।
- यह बल वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के गुरुत्व-केंद्र पर कार्य करता है, जिसे उत्प्लावन केंद्र (Centre of Buoyancy) कहते हैं।
- इसका अध्ययन सर्वप्रथम वैज्ञानिक आर्कमिडीज ने किया था।
2. आर्कमिडीज का सिद्धांत
जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूरी अथवा आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो उसके भार में आभासी कमी होती है। यह कमी वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होती है।
3. प्लवन के नियम (Laws of Flotation)
- संतुलित अवस्था में तैरते समय वस्तु अपने भार के बराबर द्रव विस्थापित करती है।
- वस्तु का गुरुत्व-केंद्र और हटाए गए द्रव का गुरुत्व-केंद्र (उत्प्लावन केंद्र) एक ही ऊर्ध्वाधर रेखा में होने चाहिए।
4. घनत्व और आपेक्षिक घनत्व
- घनत्व (Density): द्रव्यमान / आयतन (S.I. मात्रक: किग्रा/मी3)
- आपेक्षिक घनत्व (Relative Density): वस्तु का घनत्व / 4°C पर पानी का घनत्व। यह एक अनुपात है, इसलिए इसका कोई मात्रक नहीं होता।
- मापन: आपेक्षिक घनत्व हाइड्रोमीटर से और दूध की शुद्धता दुग्धमापी (Lactometer) से मापी जाती है।
5. व्यावहारिक उदाहरण
| परिघटना | वैज्ञानिक कारण |
|---|---|
| समुद्री जल में तैरना | समुद्री जल का घनत्व सामान्य जल से अधिक होता है। |
| बर्फ का पानी में तैरना | बर्फ के आयतन का 1/10 भाग पानी के ऊपर रहता है। बर्फ पिघलने पर पानी का स्तर नहीं बढ़ता। |
6. स्थायी संतुलन (Stable Equilibrium)
तैरती हुई वस्तु के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं:
- मित केंद्र (Meta Centre): उत्प्लावन-केंद्र से जाने वाली ऊर्ध्व रेखा, वस्तु के गुरुत्व-केंद्र से जाने वाली प्रारंभिक ऊर्ध्व रेखा को जिस बिंदु पर काटती है, उसे मित केंद्र कहते हैं।
- शर्त: स्थायी संतुलन के लिए ‘मित केंद्र’ हमेशा ‘गुरुत्व-केंद्र’ के ऊपर होना चाहिए।