भारतीय संविधान की 12 अनुसूचियों का व्यवस्थित विवरण निम्नलिखित है:

1. अनुसूचियों का विस्तृत विवरण

अनुसूची मुख्य विषय
प्रथम भारतीय संघ के घटक राज्यों (28) एवं संघ शासित क्षेत्रों (8) का उल्लेख। (दिल्ली को 69वें संशोधन द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा मिला)।
द्वितीय विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, राज्यपाल, न्यायाधीशों, नियंत्रक-महालेखा परीक्षक आदि) के वेतन, भत्ते और पेंशन का उल्लेख।
तृतीय विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्री, न्यायाधीशों आदि) द्वारा पद ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का प्रारूप।
चौथी राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों का राज्य सभा में प्रतिनिधित्व का विवरण।
पाँचवीं विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजाति के प्रशासन एवं नियंत्रण का प्रावधान।
छठी असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन का प्रावधान।
सातवीं केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का बँटवारा (तीन सूचियाँ)।
आठवीं भारत की 22 मान्यता प्राप्त भाषाओं का उल्लेख।
नौवीं संपत्ति अधिग्रहण की विधियाँ (प्रथम संशोधन, 1951 द्वारा जोड़ी गई)। न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है (2007 के निर्णय के अनुसार)।
दसवीं दलबदल से संबंधित प्रावधान (52वां संशोधन, 1985)।
ग्यारहवीं पंचायती राज संस्थाओं को कार्य करने हेतु 29 विषय (73वां संशोधन, 1993)।
बारहवीं शहरी स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को कार्य करने हेतु 18 विषय (74वां संशोधन, 1993)।

2. सातवीं अनुसूची: शक्तियों का बँटवारा

इसमें तीन सूचियाँ शामिल हैं:

  • संघ सूची: केंद्र सरकार कानून बनाती है। (मूल: 97 विषय, वर्तमान: 98 विषय)।

  • राज्य सूची: राज्य सरकार कानून बनाती है। (राष्ट्रीय हित में केंद्र भी बना सकता है)। (मूल: 66 विषय, वर्तमान: 62 विषय)।

  • समवर्ती सूची: केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। टकराव की स्थिति में केंद्र का कानून मान्य। (मूल: 47 विषय, वर्तमान: 52 विषय)।

3. आठवीं अनुसूची: भाषा विकास क्रम

  • मूल रूप में: 14 भाषाएँ थीं।

  • 1967: सिंधी भाषा जोड़ी गई।

  • 1992: कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली जोड़ी गईं।

  • 2004: मैथिली, संथाली, डोगरी एवं बोडो को शामिल किया गया।

4. महत्वपूर्ण बिंदु

  • नौवीं अनुसूची (न्यायिक समीक्षा): पहले मान्यता थी कि इसमें शामिल कानूनों की समीक्षा नहीं हो सकती, परंतु 11 जनवरी, 2007 के निर्णय के अनुसार, यदि कोई कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उच्चतम न्यायालय उसकी समीक्षा कर सकता है।

  • ग्यारहवीं एवं बारहवीं अनुसूची: ये क्रमशः पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय (नगरपालिका) को शक्तियाँ हस्तांतरित करने हेतु जोड़ी गई हैं।

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