भारतीय संविधान के अनुसार संघीय कार्यपालिका (राष्ट्रपति) से संबंधित समस्त जानकारी को यहाँ व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है:
1. संवैधानिक स्थिति एवं परिचय
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कार्यपालिका शक्ति: भारतीय संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है।
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शासन प्रणाली: भारत में ‘संसदीय व्यवस्था’ है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रपति ‘नाममात्र की कार्यपालिका’ है, जबकि प्रधानमंत्री और उनका मंत्रिमंडल ‘वास्तविक कार्यपालिका’ है।
2. योग्यताएं एवं पात्रता
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योग्यताएं:
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भारत का नागरिक हो।
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न्यूनतम 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
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लोक सभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
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चुनाव के समय किसी प्रकार का ‘लाभ का पद’ धारण न करता हो।
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अपवाद: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, संघ या किसी राज्य की मंत्रिपरिषद् का सदस्य ‘लाभ का पद’ नहीं माना जाता है।
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पुनर्निर्वाचन: एक ही व्यक्ति जितनी बार चाहे राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित हो सकता है।
3. निर्वाचन प्रक्रिया
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निर्वाचक मंडल: राज्य सभा, लोक सभा और राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य। (नवीनतम व्यवस्था के अनुसार दिल्ली और पांडिचेरी विधान सभा के निर्वाचित सदस्य भी शामिल हैं)।
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नामांकन: उम्मीदवार के लिए निर्वाचक मंडल के 50 सदस्य प्रस्तावक और 50 सदस्य अनुमोदक होने चाहिए।
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विधि: समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत पद्धति।
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विवाद समाधान: निर्वाचन से संबंधित विवादों का निपटारा उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है। यदि निर्वाचन अवैध घोषित होता है, तो उसके द्वारा किए गए कार्य अवैध नहीं माने जाते।
4. पदावधि एवं त्यागपत्र
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सामान्य कार्यकाल: पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष।
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पद पर बने रहना: उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक राष्ट्रपति पद पर बना रहता है।
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शपथ: मुख्य न्यायाधीश (या अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश) के सम्मुख।
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त्यागपत्र: उपराष्ट्रपति को संबोधित करके पद त्याग सकते हैं।
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महाभियोग (अनुच्छेद 61): ‘संविधान के अतिक्रमण’ के आधार पर।
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प्रक्रिया: 14 दिन पूर्व लिखित सूचना (सदन के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर)। संबंधित सदन के 2/3 बहुमत से पारित होने के बाद दूसरे सदन में जांच, और वहां भी 2/3 बहुमत से पारित होने पर महाभियोग प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।
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5. रिक्ति की स्थिति
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रिक्त होने पर चुनाव: 6 महीने के भीतर भरना अनिवार्य है।
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पद समाप्ति: यदि कार्यकाल समाप्ति के कारण रिक्ति है, तो चुनाव पहले हो जाना चाहिए। यदि विलंब हो, तो निवर्तमान राष्ट्रपति पद पर बना रहता है (इस स्थिति में उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य नहीं करते)।
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कार्यवाहक राष्ट्रपति (ऐतिहासिक): वी.वी. गिरि, न्यायमूर्ति मुहम्मद हिदायतुल्ला और बी.डी. जत्ती।
6. वेतन, भत्ते एवं पेंशन
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वेतन: 1.5 लाख रुपये मासिक (आयकर मुक्त)।
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विशेष अधिकार: कार्यकाल के दौरान वेतन-भत्तों में कोई कटौती नहीं।
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पेंशन: 9 लाख रुपये वार्षिक।
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सुविधाएं: निःशुल्क निवास स्थान व संसद द्वारा स्वीकृत अन्य भत्ते।
1. नियुक्ति संबंधी अधिकार
राष्ट्रपति निम्नलिखित उच्च पदों पर नियुक्तियां करते हैं:
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प्रधानमंत्री एवं उनकी सलाह पर मंत्रिपरिषद के सदस्य।
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न्यायिक अधिकारी: सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।
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संवैधानिक एवं वैधानिक पद: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, महान्यायवादी, मुख्य चुनाव आयुक्त (व अन्य आयुक्त), वित्त आयोग के सदस्य, संघीय लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष व सदस्य।
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अन्य: राज्यों के राज्यपाल, अंतर्राज्यीय परिषद के सदस्य, संघीय क्षेत्रों के मुख्य आयुक्त, विभिन्न आयोगों (भाषा, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, अनुसूचित क्षेत्र प्रशासन) के सदस्य, तथा भारत के राजदूत व अन्य राजनयिक।
2. विधायी शक्तियाँ
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सत्र संचालन: संसद के सत्र आहूत करना, सत्रावसान करना और लोक सभा को भंग करने का अधिकार।
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अभिभाषण: संसद के किसी एक या दोनों सदनों को संबोधित करना। चुनाव के बाद प्रथम सत्र और प्रतिवर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में सम्मिलित रूप से अभिभाषण करना।
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विधेयक: संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद ही कानून बनते हैं।
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पूर्व सहमति आवश्यक: कुछ विशिष्ट विधेयकों (जैसे- नए राज्यों का निर्माण, सीमाओं में परिवर्तन, संचित निधि से व्यय, कराधान से संबंधित, राज्यों के बीच व्यापार पर निर्बन्धन लगाने वाले विधेयक) को पेश करने हेतु राष्ट्रपति की पूर्व सहमति अनिवार्य है।
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मनोनयन: राज्य सभा में कला, साहित्य, पत्रकारिता, विज्ञान व सामाजिक कार्यों के क्षेत्र से 12 व्यक्तियों को मनोनीत करना। (नोट: लोक सभा में आंग्ल-भारतीयों के मनोनयन का प्रावधान अब समाप्त हो चुका है)।
3. अध्यादेश एवं अन्य शक्तियाँ
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अध्यादेश (अनुच्छेद 123): संसद के स्थगन के समय अध्यादेश जारी करना। इसका प्रभाव संसद सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह तक रहता है।
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सैनिक शक्ति: सैन्य बलों का सर्वोच्च कमांडर।
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राजनैतिक शक्ति: अंतरराष्ट्रीय संधियां एवं समझौते राष्ट्रपति के नाम से होते हैं। विदेशों में भारतीय राजदूतों की नियुक्ति और विदेशी राजदूतों की नियुक्ति का अनुमोदन करना।
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क्षमादान (अनुच्छेद 72): अपराध के लिए दोषी व्यक्ति के दंड को क्षमा, प्रविलम्बन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति।
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परामर्शदात्री शक्ति (अनुच्छेद 143): सार्वजनिक महत्व के प्रश्नों पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श लेना (परामर्श मानना बाध्यकारी नहीं)।
4. आपातकालीन शक्तियाँ (भाग-18, अनुच्छेद 352-360)
राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद के परामर्श से तीन प्रकार के आपातकाल लागू कर सकते हैं:
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राष्ट्रीय आपात (अनुच्छेद 352): युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर।
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राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356): राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर।
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वित्तीय आपात (अनुच्छेद 360): (न्यूनतम अवधि 2 माह)।
5. जेबी वीटो (Pocket Veto)
संविधान में विधेयक पर निर्णय लेने की समय-सीमा का अभाव होने के कारण राष्ट्रपति विधेयक को अनिश्चित काल के लिए अपने पास रख सकते हैं।
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उदाहरण: 1986 में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने ‘भारतीय डाकघर संशोधन विधेयक’ पर कोई निर्णय नहीं लिया था।
6. राष्ट्रपति से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद: भारत के प्रथम राष्ट्रपति, जो लगातार दो बार निर्वाचित हुए।
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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: लगातार दो बार उपराष्ट्रपति और एक बार राष्ट्रपति रहे।
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वी.वी. गिरि: इनके निर्वाचन के समय ‘दूसरे चक्र की मतगणना’ करनी पड़ी थी।
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नीलम संजीव रेड्डी: एक बार चुनाव हारने के बाद निर्विरोध राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।
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प्रतिभा देवी सिंह पाटिल: भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति।
| क्र. सं. | राष्ट्रपति का नाम | कार्यकाल |
| 1. | डॉ० राजेन्द्र प्रसाद | 26.01.1950 – 13.05.1962 |
| 2. | डॉ० एस. राधाकृष्णन | 13.05.1962 – 13.05.1967 |
| 3. | डॉ० जाकिर हुसैन | 13.05.1967 – 03.05.1969 |
| 4. | वी०वी० गिरि | 24.08.1969 – 24.08.1974 |
| 5. | फखरूद्दीन अली अहमद | 24.08.1974 – 11.02.1977 |
| 6. | नीलम संजीव रेड्डी | 25.07.1977 – 25.07.1982 |
| 7. | ज्ञानी जैल सिंह | 25.07.1982 – 25.07.1987 |
| 8. | आर० वैन्कटरमण | 25.07.1987 – 25.07.1992 |
| 9. | डॉ० शंकर दयाल शर्मा | 25.07.1992 – 25.07.1997 |
| 10. | के० आर० नारायण | 25.07.1997 – 25.07.2002 |
| 11. | डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम | 25.07.2002-25.07.2007 |
| प्रतिभा पाटिल | 25.07.2007-25-07-2012 | |
महत्वपूर्ण तथ्य (आपके टेक्स्ट के अनुसार):
राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रधान होता है।
राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक कहलाता है।
राष्ट्रपति पद की योग्यता: संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार तय की जाती है।