पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन से संबंधित जानकारी का व्यवस्थित विवरण नीचे दिया गया है:
1. पंचायती राज: परिचय और इतिहास
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शुभारंभ: स्वतंत्र भारत में पंचायती राज का औपचारिक उद्घाटन 2 अक्टूबर, 1959 को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले में किया गया।
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विस्तार: इसके बाद 11 अक्टूबर, 1959 को आंध्र प्रदेश में पंचायती राज की शुरुआत हुई।
पंचायती राज हेतु गठित प्रमुख समितियाँ
| समिति का नाम | गठन वर्ष |
| बलवन्त राय मेहता समिति | 1957 ई. |
| अशोक मेहता समिति | 1977 ई. |
| पी. बी. के. रा. समिति | 1985 ई. |
| एल. एम. सिंधवी समिति | 1986 ई. |
2. 73वाँ संविधान संशोधन (पंचायती राज)
यह संशोधन पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है।
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प्रावधान: संविधान का भाग-9, अनुच्छेद 243 (क से ण तक) और 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।
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मुख्य बातें:
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त्रिस्तरीय ढाँचा: ग्राम स्तर पर ‘ग्राम पंचायत’, प्रखण्ड (ब्लॉक) स्तर पर ‘पंचायत समिति’ और जिला स्तर पर ‘जिला परिषद्’।
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आरक्षण: महिलाओं के लिए प्रत्येक स्तर पर 1/3 स्थान आरक्षित।
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कार्यकाल: 5 वर्ष निर्धारित। पंचायत भंग होने की स्थिति में 6 माह के भीतर पुनः निर्वाचन अनिवार्य।
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वित्त: राज्य की संचित निधि से अनुदान का प्रावधान।
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विशेष तथ्य: 73वें संशोधन के बाद पंचायती राज अधिनियम बनाने वाला प्रथम राज्य कर्नाटक था।
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प्रभावी तिथि: 25 अप्रैल, 1993।
3. 74वाँ संविधान संशोधन (नगरपालिकाएं)
यह संशोधन शहरी स्थानीय स्वशासन (नगरपालिकाओं) से संबंधित है।
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प्रावधान: संविधान का भाग-9 क, अनुच्छेद 243 (त से य, छ तक) और 12वीं अनुसूची जोड़ी गई।
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मुख्य बातें:
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आरक्षण: महिलाओं के लिए 1/3 स्थान आरक्षित। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था।
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कार्यकाल: 5 वर्ष; विघटन की स्थिति में 6 माह के भीतर चुनाव।
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नगरपालिका के प्रकार:
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नगर पंचायत: ग्रामीण क्षेत्र जो नगर में बदल रहे हों।
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नगर परिषद्: छोटे नगरों के लिए।
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नगर निगम: बड़े नगरों के लिए (प्रथम नगर निगम की स्थापना 1687 ई. में मद्रास में हुई थी)।
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प्रभावी तिथि: 1 जून, 1993।
4. संशोधन संबंधी अन्य घटनाक्रम
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64वाँ संविधान संशोधन प्रस्ताव: 1989 ई.।
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73वाँ संविधान संशोधन (अधिनियम): 1993 ई.।