1. संघ की राजभाषा और आयोग

  • संवैधानिक प्रावधान: संविधान के भाग-17 के अनुच्छेद 343 के अनुसार, संघ की राजभाषा ‘हिन्दी’ और लिपि ‘देवनागरी’ है।

  • राजभाषा आयोग: अनुच्छेद 344 के अंतर्गत राष्ट्रपति को राजभाषा पर सलाह हेतु आयोग गठन का अधिकार है।

    • प्रथम राजभाषा आयोग: 1955 में बी. जी. खरे की अध्यक्षता में गठित।

    • प्रतिवेदन: 1956 में प्रस्तुत किया गया।

2. संविधान की आठवीं अनुसूची (मान्यता प्राप्त भाषाएँ)

वर्तमान में आठवीं अनुसूची में कुल 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है:

  1. असमिया | 2. बंगला | 3. गुजराती | 4. हिन्दी | 5. कन्नड | 6. कश्मीरी | 7. मलयालम | 8. मराठी | 9. उड़िया | 10. पंजाबी | 11. संस्कृत | 12. सिन्धी | 13. तमिल | 14. तेलुगू | 15. उर्दू | 16. कोंकणी | 17. मणिपुरी | 18. नेपाली | 19. मैथिली | 20. संथाली | 21. डोगरी | 22. बोडो

अनुसूची में भाषाएँ जोड़ने का इतिहास:

  • 21वाँ संविधान संशोधन (1967): सिन्धी भाषा को जोड़ा गया।

  • 71वाँ संविधान संशोधन (1992): मणिपुरी, कोंकणी एवं नेपाली को जोड़ा गया।

  • 92वाँ संविधान संशोधन (2003): मैथिली, संथाली, डोगरी एवं बोडो को जोड़ा गया।

3. राज्यों की भाषा (अनुच्छेद 345)

  • प्रत्येक राज्य का विधान मंडल आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में से किसी एक या अधिक को अपने सरकारी कार्यों हेतु राज्य की राजभाषा के रूप में चुन सकता है।

  • प्राधिकृत भाषा: राज्यों के परस्पर संबंधों तथा संघ एवं राज्यों के बीच संबंधों के लिए ‘संघ की राजभाषा’ को ही प्राधिकृत भाषा माना जाएगा।

4. न्यायालयों और विधान मंडलों की भाषा

  • जब तक संसद द्वारा कानून बनाकर अन्यथा प्रावधान न किया जाए, तब तक:

    • उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की भाषा अंग्रेजी होगी।

    • संसद तथा राज्य विधान मंडलों द्वारा पारित सभी कानून भी अंग्रेजी में ही होंगे।

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