1. योजना आयोग (Planning Commission)
-
संवैधानिक स्थिति: इसके संबंध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं है।
-
स्थापना: 15 मार्च, 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव के माध्यम से की गई।
-
अध्यक्ष: प्रधानमंत्री, योजना आयोग के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
वित्त आयोग: संवैधानिक प्रावधान और संरचना
वित्त आयोग एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय है, जिसका विवरण निम्नलिखित है:
| विवरण | प्रावधान / संबंधित अनुच्छेद |
| केंद्रीय वित्त आयोग का गठन | अनुच्छेद 280 |
| राज्य वित्त आयोग का गठन | अनुच्छेद 243 (झ) |
| गठन का अधिकार | राष्ट्रपति (केंद्रीय वित्त आयोग हेतु) |
| संरचना (सदस्य) | 1 अध्यक्ष + 4 अन्य सदस्य (राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त) |
महत्वपूर्ण बिंदु:
-
केंद्रीय वित्त आयोग (अनुच्छेद 280): यह आयोग केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे और अन्य वित्तीय मामलों पर राष्ट्रपति को अनुशंसाएं देने के लिए उत्तरदायी है।
-
राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243-झ): यह आयोग राज्य और स्थानीय निकायों (पंचायतों) के बीच वित्तीय स्थिति की समीक्षा और संसाधनों के वितरण के लिए गठित किया जाता है।
अब तक गठित वित्त आयोग (Finance Commissions) की सूची
| वित्त आयोग | नियुक्ति वर्ष | अध्यक्ष का नाम | अवधि (कार्यकाल) |
| पहला | 1951 ई० | के० सी० नियोगी | 1952 – 1957 |
| दूसरा | 1956 ई० | के० संथानाम | 1957 – 1962 |
| तीसरा | 1960 ई० | ए० के० चन्दा | 1962 – 1966 |
| चौथा | 1964 ई० | डा० पी० वी० राजमन्नार | 1966 – 1969 |
| पाँचवाँ | 1968 ई० | महावीर त्यागी | 1969 – 1974 |
| छठा | 1972 ई० | पी० ब्रह्मानन्द रेड्डी | 1974 – 1979 |
| सातवाँ | 1977 ई० | जे० पी० सेलट | 1979 – 1984 |
| आठवाँ | 1982 ई० | वाई० पी० चौहान | 1984 – 1989 |
| नौवाँ | 1987 ई० | एन० के० पी० साल्वे | 1989 – 1995 |
| दसवाँ | 1992 ई० | के० सी० पन्त | 1995 – 2000 |
| ग्यारहवाँ | 1998 ई० | प्रो० ए० एम० खुसरो | 2000 – 2005 |
| बारहवाँ | 2003 ई० | डॉ० सी० रंगराजन | 2005 – 2010 |
| तेरहवाँ | 2007 ई० | डा० विजय एल० केलकर | 2010 – 2015 |
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
-
सिफारिश: लोक सेवा आयोग की स्थापना की सिफारिश 1924 ई. में ली आयोग (Lee Commission) द्वारा की गई थी।
-
स्थापना: 1919 के भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत भारत में सर्वप्रथम 1926 ई. में लोक सेवा आयोग की स्थापना की गई थी।
2. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
-
नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
-
सदस्य संख्या: सदस्यों की संख्या निर्धारित करने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है। वर्तमान में यह संख्या 10 है।
-
कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले पूर्ण हो)।
3. राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC)
-
नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
-
कार्यकाल: 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले पूर्ण हो)।
-
हटाने का प्रावधान:
-
राज्यपाल को इन्हें पद से हटाने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
-
इन्हें कार्यकाल के बीच केवल राष्ट्रपति ही हटा सकते हैं।
-
आधार: संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत, उच्चतम न्यायालय के प्रतिवेदन (जाँच) के उपरांत या निर्धारित निरर्हताओं (अयोग्यता) के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
-
नोट: संघ स्तर पर नियुक्ति और हटाने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, जबकि राज्य स्तर पर नियुक्ति राज्यपाल करते हैं परंतु हटाने की अंतिम संवैधानिक शक्ति राष्ट्रपति के पास है।
परिसीमन आयोग
1. संवैधानिक प्रावधान
-
अनुच्छेद 82: संविधान में प्रावधान है कि प्रत्येक जनगणना की समाप्ति पर लोक सभा एवं राज्य के निर्वाचन क्षेत्रों का विभाजन और समायोजन संसद द्वारा विहित अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
-
42वाँ संविधान संशोधन (1976): इसके द्वारा परिसीमन पर वर्ष 2000 तक रोक लगा दी गई थी।
-
84वाँ संविधान संशोधन (2001): इसके द्वारा अनुच्छेद 82 और 170(3) में संशोधन किया गया। अब लोक सभा एवं विधान सभा की सीटों की संख्या में वर्ष 2026 तक कोई वृद्धि या कमी नहीं की जाएगी।
2. परिसीमन आयोग का गठन
-
सदस्य: इसमें देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के निर्वाचन आयुक्त सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
-
अब तक गठित आयोग:
-
प्रथम परिसीमन आयोग: 1952
-
द्वितीय परिसीमन आयोग: 1962
-
तृतीय परिसीमन आयोग: 1973
-
चतुर्थ परिसीमन आयोग: 2002
-
3. परिसीमन आयोग (2002) – प्रमुख विवरण
-
अध्यक्ष: न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह।
-
गठन: 12 जुलाई, 2002।
-
मंजूरी: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10 जनवरी, 2008 को।
-
आधार: 2001 की जनगणना।
-
आरक्षित सीटों में परिवर्तन:
| आरक्षित सीट श्रेणी | वर्तमान (पुरानी) संख्या | नए परिसीमन के बाद संख्या |
| अनुसूचित जाति (SC) | 79 | 85 |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 41 | 48 |
| अनारक्षित सीटें | – | 410 |
4. अपवाद: वे राज्य जहाँ परिसीमन नहीं हो सका
कुछ राज्यों में परिसीमन आयोग 2002 के आदेश लागू नहीं हो पाए:
-
असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश एवं नगालैंड: पूर्वोत्तर के इन चार राज्यों में स्थानीय विरोध और अदालती स्थगन आदेशों के कारण परिसीमन नहीं हो सका।
-
झारखंड: सरकारी नीति के विपरीत आरक्षित सीटों की संख्या कम होने के कारण परिसीमन पूरा नहीं हो सका।