1. संवैधानिक विकास के प्रमुख चरण (1773–1947)

अधिनियम प्रमुख प्रावधान
1773 का रेग्यूलेटिंग एक्ट कंपनी पर संसदीय नियंत्रण; बंगाल के गवर्नर को ‘गवर्नर जनरल’ का पद; कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना।
1784 का पिट्स इंडिया एक्ट दोहरे प्रशासन की शुरुआत (व्यापारिक हेतु ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ और राजनीतिक हेतु ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोलर’)।
1793 का चार्टर अधिनियम बोर्ड के सदस्यों का वेतन भारतीय राजस्व से देने की व्यवस्था।
1813 का चार्टर अधिनियम कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार छीना (चीन व चाय को छोड़कर); ब्रिटिश नागरिकों के लिए व्यापार खोला।
1833 का चार्टर अधिनियम व्यापारिक अधिकार पूर्णतः समाप्त; बंगाल के गवर्नर जनरल को ‘भारत का गवर्नर जनरल’ बनाया गया; विधि आयोग की नियुक्ति।
1853 का चार्टर अधिनियम पदों को भरने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की शुरुआत; नामजदगी का सिद्धांत समाप्त।
1858 का भारत शासन अधिनियम शासन ब्रिटिश क्राउन के अधीन; भारत सचिव का पद सृजित; भारत परिषद् (15 सदस्य) का गठन।
1861 का भारत शासन अधिनियम गवर्नर जनरल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति; विभागीय प्रणाली की शुरुआत।
1892 का भारत शासन अधिनियम अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की शुरुआत; बजट पर बहस करने की शक्ति।
1909 (मार्ले-मिन्टो सुधार) मुस्लिम समुदाय के लिए पृथक् प्रतिनिधित्व (सांप्रदायिक निर्वाचन)।
1919 (माण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) केंद्र में द्विसदनात्मक विधायिका; प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली; लोक सेवा आयोग का गठन।

2. भारत शासन अधिनियम, 1935 (विशेष विवरण)

यह अधिनियम भारतीय संविधान का सबसे प्रमुख आधार है। इसकी मुख्य विशेषताएँ:

  • अखिल भारतीय संघ: प्रस्तावित संघ (हालांकि देशी रियासतों के शामिल न होने से लागू नहीं हो पाया)।

  • प्रांतीय स्वायत्तता: प्रांतों में द्वैध शासन का अंत कर उन्हें स्वतंत्र संवैधानिक आधार दिया गया।

  • केंद्र में द्वैध शासन: कुछ संघीय विषयों को गवर्नर-जनरल के अधीन रखा गया।

  • न्यायालय: संघीय न्यायालय की व्यवस्था (अंतिम शक्ति प्रिवी कौंसिल को)।

  • अन्य: भारत परिषद् का अंत; बर्मा को भारत से अलग किया गया; सांप्रदायिक निर्वाचन का विस्तार (हरिजनों, ईसाइयों तक)।

3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

यह अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा 18 जुलाई, 1947 को स्वीकृत हुआ:

  • दो अधिराज्य: 15 अगस्त, 1947 को भारत और पाकिस्तान का निर्माण।

  • सत्ता का हस्तांतरण: सत्ता संविधान सभाओं को सौंपी गई।

  • गवर्नर जनरल: दोनों अधिराज्यों के लिए अलग-अलग गवर्नर जनरल की नियुक्ति (मंत्रिमंडल की सलाह पर)।

  • रियासतों की स्वतंत्रता: ब्रिटिश सर्वोपरिता का अंत; उन्हें किसी भी अधिराज्य में शामिल होने की स्वतंत्रता।

  • संविधान निर्माण तक शासन: जब तक नया संविधान न बने, शासन 1935 के अधिनियम के अनुसार ही चलेगा।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • 1935 के अधिनियम का प्रभाव: भारतीय संविधान के 395 अनुच्छेदों में से लगभग 250 अनुच्छेद इसी अधिनियम से सीधे या मामूली बदलाव के साथ लिए गए हैं।

  • द्वैध शासन: 1919 में प्रांतों में शुरू हुआ और 1935 के एक्ट द्वारा समाप्त किया गया।

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