1. संवैधानिक ढांचा और आधार
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प्रणाली: भारत में केन्द्र-राज्य संबंध ‘संघवाद’ पर आधारित हैं, जिसे कनाडा के संविधान से प्रेरित होकर अपनाया गया है।
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शक्तियों का विभाजन: संविधान द्वारा विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है।
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न्यायपालिका की स्थिति: न्यायपालिका को इस विभाजन की परिधि से बाहर रखा गया है।
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सातवीं अनुसूची: केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों के बँटवारे के लिए तीन सूचियाँ निर्धारित की गई हैं।
2. शक्तियों का विभाजन (तीन सूचियाँ)
| सूची | विषय की प्रकृति | कानून बनाने का अधिकार | विषयों की संख्या | प्रमुख उदाहरण |
| संघ सूची | राष्ट्रीय महत्त्व | केवल संसद | 98 | रक्षा, युद्ध, विदेशी मामले, अणु शक्ति, रेल, जनगणना, विदेशी ऋण। |
| राज्य सूची | स्थानीय महत्त्व | राज्य विधान मंडल | 62 | पुलिस, लोक व्यवस्था, कृषि, वन, कारागार, सिंचाई, भू-राजस्व। |
| समवर्ती सूची | दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण | संसद एवं राज्य विधान मंडल (विरोध की स्थिति में संसद मान्य) | 52 | शिक्षा, परिवार नियोजन, जनसंख्या नियंत्रण, समाचार पत्र, कारखाना। |
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अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ: जो विषय किसी भी सूची में शामिल नहीं हैं, उन पर कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है।
3. राज्य सूची के विषयों पर संसद की कानून बनाने की शक्ति
सामान्यतः राज्य सूची पर केवल राज्य का अधिकार होता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में संसद भी कानून बना सकती है:
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अनुच्छेद 249: यदि राज्य सभा अपने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पारित करे कि राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषय पर कानून बनाना आवश्यक है। यह कानून एक बार में एक वर्ष के लिए प्रभावी होता है, जिसे बार-बार बढ़ाया जा सकता है।
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राज्यों की सहमति: यदि संबंधित राज्य सहमत हों, तो संसद कानून बना सकती है।
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आपातकाल: राष्ट्रीय आपातकाल या राष्ट्रपति शासन के दौरान संसद को यह अधिकार प्राप्त हो जाता है।
4. वित्तीय स्रोत (राजस्व)
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केन्द्र के प्रमुख स्रोत: निगम कर, सीमा शुल्क, निर्यात शुल्क, कृषि भूमि को छोड़कर अन्य संपत्ति पर संपदा शुल्क, विदेशी ऋण, रेल, रिजर्व बैंक और शेयर बाजार।
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राज्य के प्रमुख स्रोत: व्यक्ति कर, कृषि, भूमि पर कर, संपदा शुल्क, भूमि एवं भवनों पर कर, पशुओं एवं नौकायान पर कर, विक्रय कर, वाहनों पर चुंगी।
5. विवाद समाधान हेतु आयोग
केन्द्र एवं राज्यों के मध्य विवादों को सुलझाने के लिए मुख्य रूप से चार आयोग गठित किए गए:
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प्रशासनिक सुधार आयोग
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राजमन्नार आयोग
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भगवान सहाय समिति
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सरकारिया आयोग: इसका गठन 1983 में हुआ था। इसने 1987 में अपनी 1600 पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंपी।