बहमनी राज्य में सुल्तान के महल तथा दरबार की सुरक्षा के लिए विशेष अंगरक्षक सैनिक दल था जिसे साख-ए-खेल कहा जाता था। यह चार भागों या नौबत में विभाजित थे, जिसके मुख्य अधिकारी सर-ए-नौबत होता था।  बहमनी साम्राज्य के चारों प्रांतों (तरफों या अतरफों) के प्रांतपति (तरफदार) उसके विरुद विशेष से जाना जाते थे-

  • दौलताबाद का तरफ़दार : मसनद-ए-आली
  • बरार का तरफ़दार : मजलिस-ए-आली
  • बीदर का तरफ़दार : अजाम-ए-हुमायूँ
  • गुलबर्गा का तरफ़दार : मालिक नायब
    • बीजापुर गुलबर्गा तराफ़ में शामिल था। यह सबसे महत्त्वपूर्ण तराफ़ था ।

बहमनी राज्य में कुल 18 शासक हुए, जिन्होंने कुल मिलाकर लगभग 175 वर्ष शासन किया। कुछ प्रमुख शासक निम्न प्रकार हैं।

 

मुहम्मद शाह प्रथम (1358-1375 ई०)

1347 ई० में बहमनी राज्य की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक के शासन काल में हसनगंगू ने की। वह अलाउद्दीन हसन बहमन शाह के नाम से सिंहासन पर बैठा। इसकी राजधानी गुलबर्गा और राजभाषा मराठी थी। इसने अपने साम्राज्य को चार प्रान्तों में गुलबर्गा, दौलताबाद, बरार एवं वीदर में बाँटा। इसकी मृत्यु 11 फरवरी, 1358 ई० को हो गयी।

मुहम्मद प्रथम के मंत्री सैफुद्दीन गौरी ने केन्द्रीय शासन का कार्य कई विभागों में विभक्त किया और उसे आठ मंत्रियों को नियुक्त किया, जो इस प्रकार थे—
1. बकील ए – सल्तनत :  दिल्ली के मलिक नायब के समान ।
2. बजील- ए- कुल : सभी मंत्रियों के कार्यों का निरीक्षण (वकील को छोड़कर) ।
3. अमीर-ए-जुमला : अर्थ विभाग का अध्यक्ष ।
4. वजीर-ए-अशरफ : विदेश नीति एवं दरबार संबंधी कार्यों का निष्पादन करता था ।
5. नाजिर : वह अर्थ विभाग से संबंधित था।
6. पेशवा : वकील-ए-सल्तनत का सहायक था।
7. कोतवाल : नगर का मुख्य पुलिस अधिकारी था ।
8. सद्रे-ए-जहाँ : न्याय विभाग, धर्म तथा दान विभाग का अध्यक्ष ।

 

अलाउद्दीन मुजाहिद शाह (1375-1378 ई०)

अलाउद्दीन हसन के पश्चात उसका पुत्र मुहम्मदशाह प्रथम सुल्तान बना। इसके काल में ही सबसे पहले बारूद का प्रयोग ( बुक्का के विरूद्ध)हुआ ।

 

दाऊद प्रथम (1378 ई०)

 

मुहम्मद शाह द्वितीय (1378-1397 ई०)

 

ताज उद्दीन फिरोज (1397-1422 ई०)

भीमा नदी के तट पर फिरोजाबाद की स्थापना ताज-उद्दीन-फिरोज ने की थी । फिरोज खगोलिकी को प्रोत्साहन देता था और उसने दौलताबाद के पास एक वैधशाला बनवाई थी । इसके काल में 1417 ई० में रूसी यात्री निकितन बहमनी साम्राज्य की यात्रा पर आया।

 

शिहाबुद्दीन अहमद प्रथम (1422-1436 ई०)

शिहाबुद्दीन अहमद प्रथम ने अपनी राजधानी गुलबर्गा से हटाकर बीदर में स्थापित की। इसने बीदर का नया नाम मुहम्मदाबाद रखा ।

 

अलाउद्दीन अहमद-II (1436-1458 ई०)

 

सुल्तान शम्सुद्दीन मुहम्मद-III (1463-1482 ई०)

मुहम्मद-III के शासन-काल में ‘ख्वाजा जहाँ’ की उपाधि से महमूद गँवा को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। महमूद गवाँ ने बीदर में एक महाविद्यालय की स्थापना कराई। रियाजुल इन्शा नाम से महमूद गवाँ के पत्रों का संग्रह किया गया ।

 

कलीमउल्लाह

कलीमउल्लाह बहमनी वंश का अंतिम शासक था। कलीमउल्लाह की मृत्यु के बाद बहमनी राज्य पाँच स्वतंत्र राज्यों में बँट गया। इन स्वतंत्र राज्यों से संबंधित विवरण इस प्रकार है—

राज्य वंश संस्थापक स्थापना वर्ष
1. बीजापुर आदिलशाह युसुफ आदिल शाह 1489 ई०
2. अहमदनगर निजामशाही मलिक अहमद 1490 ई०
3. बरार इमादशाही फतेहउल्लाह इमादशाह 1490 ई०
4. गोलकुण्डा कुतुबशाही कुलीकुतुबशाह 1512 ई०
5. बीदर बरीदशाही अमीर अली बरीद 1526 ई०

 

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