डच (Dutch) का भारत आगमन

  • पुर्तगालियों के बाद भारत में डच लोग आए। 1596 ई० में कार्नेलियन हाऊटमैन पहला डच यात्री था जो भारत के पूर्व में सुमात्रा पहुँचा।
  • डचों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी (कारखाना) 1605 ई० में मसूलीपट्टम में बनाई। उनकी दूसरी कोठी पुलीकट में स्थापित हुई, जहाँ उन्होंने ‘पेगोडा’ नाम के सोने के सिक्के ढाले और इसे ही अपनी सभी गतिविधियों का मुख्य केंद्र बनाया।
  • 1759 ई० में अंग्रेजों और डचों के बीच वेदरा का युद्ध हुआ, जिसमें डचों की हार हुई और भारत में उनका पतन (अंत) हो गया।

अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की शुरुआत

  • 31 दिसम्बर, 1600 ई० को इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को अधिकार-पत्र (व्यापार की अनुमति) दिया। शुरुआत में इसमें 217 साझेदार थे और इसके पहले गवर्नर टॉमस स्मिथ थे।
  • मुगल दरबार में जाने वाला पहला अंग्रेज कैप्टन हॉकिन्स था। वह राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में 1609 ई० में सम्राट जहाँगीर के दरबार में पहुँचा था।

अंग्रेजों के व्यापारिक केंद्र और विस्तार

  • 1611 ई० में अंग्रेजों ने दक्षिण-पूर्वी समुद्री तट पर मसूलीपट्टम में अपनी पहली व्यापारिक कोठी खोली।
  • 1613 ई० में जहाँगीर की अनुमति से अंग्रेजों ने सूरत (पश्चिमी तट) में थॉमस एल्डवर्थ के नेतृत्व में कोठी स्थापित की। (इससे पहले 1608 में भी सूरत में कोशिश की गई थी)।
  • 1615 ई० में राजा जेम्स प्रथम ने सर टॉमस रो को अपना दूत बनाकर जहाँगीर के पास भेजा। वे फरवरी 1619 ई० तक भारत में रहे और जहाँगीर व खुर्रम (शाहजहाँ) से व्यापार में कुछ छूट प्राप्त करने में कामयाब रहे।
  • 1632 ई० में गोलकुंडा के सुल्तान ने अंग्रेजों को एक ‘सुनहला फरमान’ दिया, जिसके बदले वे साल में 500 पेगोडा देकर गोलकुंडा के बंदरगाहों पर आजादी से व्यापार कर सकते थे।
  • 1639 ई० में फ्रांसिस डे ने चन्द्रगिरी के राजा से मद्रास को पट्टे (किराये) पर लिया और वहाँ एक किलेबंद कोठी बनाई, जिसका नाम ‘फोर्ट सेंट जॉर्ज’ रखा गया। यही बाद में कोरोमंडल तट पर अंग्रेजों का मुख्य कार्यालय बना।
  • 1661 ई० में पुर्तगाली राजकुमारी केथरीन और ब्रिटेन के राजकुमार चार्ल्स द्वितीय के विवाह पर पुर्तगालियों ने बम्बई को दहेज के रूप में अंग्रेजों को दे दिया।
  • 1668 ई० में चार्ल्स द्वितीय ने बम्बई को 10 पौंड के सालाना किराये पर ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया। 1687 ई० में अंग्रेजों ने अपना मुख्यालय सूरत से बदलकर बम्बई बना लिया। बम्बई शहर की स्थापना गेराल्ड औंगीयार (सूरत के अध्यक्ष और बम्बई के गवर्नर) ने की थी।

यूरोपीय कंपनियों की स्थापना का विवरण

कम्पनी स्थापना वर्ष
पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कम्पनी 1498 ई०
इंडिया अंग्रेजी ईस्ट कम्पनी 1600 ई०
डच ईस्ट इंडिया कम्पनी 1602 ई०
डैनिश ईस्ट इंडिया कम्पनी 1616 ई०
फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कम्पनी 1664 ई०
स्वीडिश ईस्ट इंडिया कम्पनी 1731 ई०

बंगाल और कलकत्ता का विकास

  • 1651 ई० में बंगाल के शासक शाहशुजा ने सबसे पहले अंग्रेजों को व्यापारिक छूट दी, जिसे ‘निशान’ कहा जाता था।
  • 1698 ई० में कंपनी ने 1200 रुपये देकर तीन गाँवों—सूतानुती, कालीकाट और गोविन्दपुर की जमींदारी खरीदी और यहाँ फोर्ट विलियम का निर्माण किया। चार्ल्स आयर इसके पहले अध्यक्ष (प्रेसिडेंट) बने। यही क्षेत्र आगे चलकर कलकत्ता (कोलकाता) शहर कहलाया, जिसकी नींव जॉर्ज चारनौक ने रखी थी।

फ्रांसीसी और अंग्रेज-फ्रांसीसी संघर्ष (कर्नाटक युद्ध)

  • फ्रांसीसियों ने अपनी पहली कोठी फ्रेंको कैरों द्वारा 1668 ई० में सूरत में बनाई। 1674 ई० में फ्रांसिस मार्टिन ने पांडिचेरी की स्थापना की।
  • प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48 ई०): यह ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध से प्रभावित था और 1748 ई० में ‘ए-ला-शापल की संधि’ के साथ समाप्त हुआ।
  • दूसरा कर्नाटक युद्ध (1749-1754 ई०): इसमें फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले की हार हुई और उसे वापस बुला लिया गया। उसकी जगह गोडेहू को नया गवर्नर बनाया गया। जनवरी 1755 ई० में पांडिचेरी की संधि से युद्ध रुका।
  • तीसरा कर्नाटक युद्ध (1756-1763 ई०): यह यूरोप के ‘सप्तवर्षीय युद्ध’ का हिस्सा था और पेरिस की संधि के साथ खत्म हुआ।
  • 1760 ई० में वांडिवाश की लड़ाई में अंग्रेजी सेना ने (सर आयरकूट के नेतृत्व में) फ्रांसीसियों को बुरी तरह पराजित किया।
  • 1761 ई० में अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों से पांडिचेरी छीन लिया। 1763 ई० की पेरिस संधि के बाद अंग्रेजों ने चन्द्रनगर को छोड़कर बाकी इलाके फ्रांसीसियों को लौटा दिए।
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