भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था, उसके उत्पादन, सुधारों और संस्थागत ढांचे पर दी गई विस्तृत जानकारी को व्यवस्थित रूप में नीचे प्रस्तुत किया गया है:

1. भारतीय कृषि: आर्थिक महत्व

  • मेरुदण्ड: यह भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है, जिस पर 52% जनसंख्या आजीविका के लिए निर्भर है। यह निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा व्यवसाय है।

  • GDP में योगदान: कृषि का राष्ट्रीय आय में हिस्सा 1950-51 के 55.4% से घटकर 2009-10 में 14.6% रह गया।

  • अनुसंधान: भारत अपने कृषि GDP का केवल 0.3% शोध पर खर्च करता है (अमेरिका में यह 4% है)।

  • राष्ट्रीय किसान आयोग: गठन जनवरी 2004 में हुआ, प्रथम अध्यक्ष: सोमपाल।

2. प्रमुख फसलें एवं उत्पादन (शीर्ष राज्य)

फसल अग्रणी राज्य
चावल पश्चिम बंगाल
गेहूँ उत्तर प्रदेश (द्वितीय: पंजाब, तृतीय: हरियाणा)
गन्ना उत्तर प्रदेश
चीनी भारत विश्व में प्रथम (विश्व का 15.1%)
चाय उत्पादन एवं उपभोग में भारत प्रथम (विश्व का 27.5%)
कॉफी कर्नाटक (कुल उत्पादन का 56.5% यहीं होता है; विश्व में छठा स्थान)
तिलहन/मूंगफली गुजरात
दलहन/मोटा अनाज राजस्थान

3. भूमि सुधार एवं जोत का वर्गीकरण

  • सुधार के तीन मुख्य स्तंभ:

    1. मध्यस्थों का उन्मूलन।

    2. काश्तकारी सुधार (लगान का नियमन, अधिकार की सुरक्षा)।

    3. कृषि का पुनर्गठन (जोतों की सीमा-बंदी और चकबंदी)।

  • जोतों का वर्गीकरण:

    • सीमान्त जोत: 1 हेक्टेयर से कम।

    • लघु जोत: 1 से 4 हेक्टेयर।

    • बृहत् जोत: 4 हेक्टेयर से अधिक।

  • विशेष: भारत में सर्वाधिक संख्या सीमान्त जोत की है। चकबंदी सर्वप्रथम 1920 में बड़ौदा में लागू हुई।

4. कृषि वित्त एवं संस्थागत स्रोत

  • गैर-संस्थागत: महाजन, साहूकार, रिश्तेदार, व्यापारी, आढ़तिए।

  • संस्थागत: सहकारी समितियां (1904 से प्रारंभ), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सरकारी बैंक।

    • अल्पकालीन ऋण: प्राथमिक सहकारी समितियाँ।

    • दीर्घकालीन ऋण: राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक।

5. प्रमुख कृषि उत्पाद बोर्ड

बोर्ड स्थापना वर्ष मुख्यालय
टी (चाय) बोर्ड 1954 कोलकाता
तम्बाकू बोर्ड 1976 गुंटूर
मसाला बोर्ड 1987 कोच्चि
कॉफी बोर्ड बंगलौर
रबड़ बोर्ड कोट्टायम
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड 1965 आनन्द

6. हरित क्रांति

  • प्रारंभ: तीसरी पंचवर्षीय योजना।

  • सर्वाधिक प्रभाव: गेहूँ पर (पैदावार में 500% की वृद्धि)।

7. महत्वपूर्ण शब्दावली एवं नीतियां

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): सरकार द्वारा फसलों के लिए घोषित न्यूनतम मूल्य, जो रबी और खरीफ फसलों के विपणन वर्ष के अनुसार तय किया जाता है।

  • राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना: अक्टूबर 1999 से प्रभावी।

  • खाद्यान्न बनाम अखाद्यान्न: भारत में अखाद्यान्न का हिस्सा लगभग दो-तिहाई और खाद्यान्न का हिस्सा एक-तिहाई है।

यह डेटा 2009-10 के आर्थिक सर्वेक्षण (Eco Survey) पर आधारित है। क्या आप कृषि से संबंधित किसी अन्य विशिष्ट संस्था या सुधार प्रक्रिया के बारे में जानकारी चाहते हैं?

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