1. रसायन विज्ञान (Chemistry): एक परिचय
परिभाषा: रसायन विज्ञान विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत पदार्थों के गुण, संघटन (Composition), संरचना तथा उनमें होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है।
- शब्द की उत्पत्ति: ‘Chemistry’ शब्द की उत्पत्ति मिस्र के प्राचीन शब्द ‘कीमिया’ (Chemea) से हुई है, जिसका अर्थ है- काला रंग। मिस्र के लोग काली मिट्टी को ‘केमि’ (Chemi) कहते थे। प्रारंभ में रसायन विज्ञान के अध्ययन को ‘केमिटेकिंग’ (Chemeteching) कहा जाता था।
- रसायन विज्ञान के जनक: लेवायसिये (Lavoisier) को रसायन विज्ञान का जनक कहा जाता है।
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2. पदार्थ (Matter) एवं उसका वर्गीकरण
परिभाषा: दुनिया की कोई भी वस्तु जो स्थान घेरती हो, जिसका अपना द्रव्यमान (Mass) होता हो और जो अपनी संरचना में परिवर्तन का विरोध करती हो, पदार्थ कहलाती है। जैसे- जल, हवा, बालू आदि।
- प्राचीन मत: प्रारंभ में भारतीय और यूनानी विचारकों का अनुमान था कि प्रकृति की सभी वस्तुएँ पाँच तत्त्वों (पंचतत्व) के संयोग से बनी हैं- क्षिति (पृथ्वी), जल, पावक (अग्नि), गगन (आकाश) एवं समीर (वायु)।
- महर्षि कणाद का सिद्धांत: भारत के महान ऋषि कणाद के अनुसार सभी पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म कणों से बने हैं, जिन्हें ‘परमाणु’ कहा गया है।
(A) भौतिक वर्गीकरण (Physical Classification)
भौतिक अवस्था के आधार पर पदार्थ मुख्य रूप से तीन (और आधुनिक खोजों के अनुसार पाँच) अवस्थाओं में पाया जाता है:
- ठोस (Solid): जिसका आकार एवं आयतन दोनों निश्चित हो। जैसे- लोहे की छड़, लकड़ी की कुर्सी, बर्फ का टुकड़ा।
- द्रव (Liquid): जिसका आकार अनिश्चित लेकिन आयतन निश्चित हो। जैसे- पानी, अल्कोहल, तारपीन का तेल, मिट्टी का तेल।
- गैस (Gas): जिसका आकार एवं आयतन दोनों अनिश्चित हो। जैसे- हवा, ऑक्सीजन।
नोट: गैसों का कोई पृष्ठ (Surface) नहीं होता, इनका विसरण (Diffusion) बहुत अधिक होता है तथा इन्हें आसानी से संपीड़ित (Compress) किया जा सकता है।
- चौथी अवस्था: प्लाज्मा (Plasma)।
- पांचवीं अवस्था: बोस-आइंस्टाइन कंडनसेट (Bose-Einstein Condensate)।
अवस्था साम्य (State Equilibrium): ताप एवं दाब में परिवर्तन करके पदार्थ की अवस्था को बदला जा सकता है। इसका त्रिक-साम्य इस प्रकार होता है: ठोस ⇌ द्रव ⇌ गैस (जैसे- जल तीनों भौतिक अवस्थाओं में रह सकता है)। हालांकि लकड़ी और पत्थर इसके अपवाद हैं, जो केवल ठोस में रहते हैं।
(B) रासायनिक वर्गीकरण (Chemical Classification)
- तत्त्व (Element): वह शुद्ध पदार्थ जिसे किसी भी ज्ञात भौतिक या रासायनिक विधि से न तो दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में विभाजित किया जा सकता है और न ही अन्य सरल पदार्थों के योग से बनाया जा सकता है। जैसे- सोना, चाँदी, ऑक्सीजन।
- यौगिक (Compound): वह शुद्ध पदार्थ जो रासायनिक रूप से दो या दो से अधिक तत्त्वों के एक निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग से बनते हैं।
विशेषता: यौगिक के गुण उसके अवयवी तत्वों के गुणों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। जैसे- जल (H2O) हाइड्रोजन (जो खुद जलता है) और ऑक्सीजन (जो जलाने में सहायक है) से बनता है, लेकिन इनका यौगिक जल आग को बुझा देता है।
- मिश्रण (Mixture): वह पदार्थ जो दो या दो से अधिक तत्त्वों या यौगिकों को किसी भी अनुपात में मिलाने से प्राप्त होता है। इसे सरल यांत्रिक विधियों द्वारा पुनः अलग किया जा सकता है। इसके दो प्रकार हैं:
- समांग मिश्रण (Homogeneous Mixture): निश्चित अनुपात में अवयवों को मिलाने से बनता है। इसके प्रत्येक भाग के गुणधर्म एक समान होते हैं। जैसे- चीनी या नमक का जलीय विलयन, हवा।
- विषमांग मिश्रण (Heterogeneous Mixture): अनिश्चित अनुपात में अवयवों को मिलाने से बनता है। इसके प्रत्येक भाग के गुण और संघटक भिन्न-भिन्न होते हैं। जैसे- बारूद, कुहासा (कोहरा)।
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3. मिश्रण को अलग करने की प्रमुख विधियाँ
| विधि का नाम | कार्यप्रणाली / विवरण | उदाहरण |
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| क्रिस्टलीकरण (Crystallisation) | इसके द्वारा अकार्बनिक ठोस मिश्रण को उचित विलायक में घोलकर, गर्म करके छाना जाता है और धीरे-धीरे ठंडा करके शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त किए जाते हैं। | शर्करा (चीनी) और नमक के मिश्रण को इथाइल अल्कोहल में 348 K पर गर्म करके अलग करना। |
| आसवन (Distillation) | जब दो द्रवों के क्वथनांकों (Boiling Points) में अंतर अधिक होता है, तो इस विधि का प्रयोग करते हैं। इसमें पहला भाग वाष्पीकरण और दूसरा भाग संघनन (Condensation) होता है। | द्रवों के मिश्रण को पृथक करना। |
| ऊर्ध्वपातन (Sublimation) | इस विधि द्वारा दो ऐसे ठोसों के मिश्रण को अलग करते हैं, जिसमें एक ठोस गर्म करने पर बिना द्रव बने सीधे गैस (ऊर्ध्वपातित) बन जाता है। | कपूर, नेफ्थलीन, अमोनियम क्लोराइड (नौसादर), ऐंथ्रासीन का शुद्धीकरण। |
| आंशिक आसवन (Fractional Distillation) | इस विधि से उन मिश्रित द्रवों को अलग किया जाता है जिनके क्वथनांकों में अंतर बहुत कम होता है। | कच्चे या खनिज तेल से शुद्ध डीजल, पेट्रोल, मिट्टी का तेल (केरोसिन), कोलतार आदि अलग करना। |
| वर्णलेखन (Chromatography) | यह मिश्रण के विभिन्न घटकों की अवशोषण (Absorption) क्षमता के भिन्न होने के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिससे वे अधिशोषक पर अलग-अलग दूरी पर रुक जाते हैं। | जटिल रासायनिक घटकों को अलग करना। |
| भाप आसवन (Steam Distillation) | इस विधि से उन कार्बनिक मिश्रणों को शुद्ध किया जाता है जो जल में अघुलनशील हैं परन्तु भाप के साथ वाष्पशील होते हैं और अपने क्वथनांक पर अपघटित हो जाते हैं। | एसीटोन, मेथिल अल्कोहल आदि का शुद्धीकरण। |
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4. पदार्थ की अवस्था परिवर्तन (Change in State)
- द्रवणांक (Melting Point): नियत वायुमंडलीय दाब पर वह निश्चित ताप जिस पर कोई ठोस पदार्थ द्रव अवस्था में परिवर्तित होता है। जब तक संपूर्ण ठोस गल नहीं जाता, तब तक ताप स्थिर रहता है।
- हिमांक (Freezing Point): किसी विशेष दाब पर वह नियत ताप जिस पर कोई द्रव ठोस रूप में जमता है।
नियम: सामान्यतः किसी पदार्थ का द्रवणांक और हिमांक का मान बराबर होता है (जैसे बर्फ का द्रवणांक और हिमांक 0°C है)। अशुद्धियाँ मिलाने पर पदार्थ का हिमांक और द्रवणांक दोनों कम हो जाते हैं।
द्रवणांक पर दाब का प्रभाव (Effect of Pressure on Melting Point):
- जिन पदार्थों का आयतन गलने पर बढ़ जाता है, दाब बढ़ाने पर उनका द्रवणांक भी बढ़ जाता है। जैसे- मोम, ताँबा आदि।
- जिन पदार्थों का आयतन गलने पर घट जाता है (सिकुड़ते हैं), दाब बढ़ाने पर उनका द्रवणांक घट जाता है। जैसे- बर्फ, ढलवाँ लोहा आदि।
गलने और जमने पर आयतन में परिवर्तन:
- अधिकांश क्रिस्टलीय पदार्थ गलने पर आयतन में बढ़ते हैं, जिससे ठोस अपने ही गले हुए द्रव में डूब जाता है।
- अपवाद: ढलवाँ लोहा, बर्फ, एण्टीमनी, बिस्मथ, पीतल आदि गलने पर आयतन में सिकुड़ते हैं। यही कारण है कि बर्फ का टुकड़ा अपने ही गले हुए पानी पर तैरता (प्लवन करता) रहता है क्योंकि जमी हुई बर्फ का आयतन पानी से अधिक (और घनत्व कम) होता है।
- साँचे में ढलाई: साँचों में केवल वे ही पदार्थ ढाले जा सकते हैं जो ठोस बनने (जमने) पर आयतन में बढ़ते हैं, ताकि वे साँचे के आकार को पूर्णतः ग्रहण कर सकें (जैसे- मुद्रण धातु या Type Metal)। यही कारण है कि सोने या चाँदी की मुद्राएँ ढाली नहीं जातीं, बल्कि उन पर मुहर (Stamp) लगाकर बनाई जाती हैं।
- मिश्र धातुओं का गलनांक: मिश्र धातुओं का द्रवणांक उन्हें बनाने वाले मूल पदार्थों के गलनांक से कम होता है, क्योंकि अशुद्धियाँ मिलाने पर गलनांक घट जाता है।
हिमकारी मिश्रण (Freezing Mixture): किसी ठोस को द्रवणांक पर गलाने के लिए गुप्त ऊष्मा की आवश्यकता होती है। जब बर्फ में नमक मिलाया जाता है, तो बर्फ गलने के लिए जल से ऊष्मा लेती है, जिससे मिश्रण का तापमान अत्यंत कम हो जाता है। घर पर आइसक्रीम जमाने के लिए नमक का 1 भाग और बर्फ के 3 भाग का मिश्रण उपयोग करते हैं, जिससे -22°C तक का निम्न ताप प्राप्त किया जा सकता है।
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5. वाष्पीकरण, वाष्पन एवं क्वथन (Vaporization & Boiling)
द्रव से वाष्प (Gas) में बदलने की क्रिया वाष्पीकरण कहलाती है। यह दो प्रकार से होती है:
(A) वाष्पन (Evaporation):
क्वथनांक से कम तापमान पर द्रव की ऊपरी सतह से द्रव के वाष्प में बदलने की धीमी प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं। यह निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
- क्वथनांक का कम होना: द्रव का क्वथनांक जितना कम होगा, वाष्पन उतनी ही तेजी से होगा।
- द्रव का ताप: ताप अधिक होने पर वाष्पन की दर बढ़ जाती है।
- खुले पृष्ठ का क्षेत्रफल: द्रव की सतह का क्षेत्रफल जितना अधिक होगा, वाष्पन उतना ही तेज होगा।
- सतह की वायु एवं दाब:
- द्रव के पृष्ठ पर वायु बदलने (हवा चलने) पर वाष्पन तेज होता है।
- द्रव के पृष्ठ पर वायुमंडलीय दाब जितना कम होगा, वाष्पन उतनी ही तेजी से होगा।
- यदि द्रव के पृष्ठ पर पहले से वाष्प दाब अधिक है, तो वाष्पन की दर घट जाएगी।
(B) क्वथनांक (Boiling Point):
दिए गए किसी निश्चित दाब पर वह नियत ताप जिस पर कोई द्रव उबलकर (Boil होकर) तेजी से द्रव अवस्था से वाष्प अवस्था में परिवर्तित होता है, द्रव का क्वथनांक कहलाता है।
- दाब का प्रभाव: दाब बढ़ाने से द्रव का क्वथनांक बढ़ जाता है (जैसे प्रेशर कुकर में) और दाब घटाने से द्रव का क्वथनांक घट जाता है (जैसे पहाड़ों पर)।