1. सीमेन्ट (Cement)

सीमेन्ट मुख्य रूप से कैल्सियम सिलिकेटों और ऐल्युमिनियम सिलिकेटों का जटिल मिश्रण है, जिसमें जल मिलाने पर जमने का गुण होता है। जल के साथ इसका जमना जलयोजन (Hydration) की रासायनिक प्रक्रिया के कारण होता है।

  • खोज: सन् 1824 ई. में ब्रिटिश इंजीनियर जोसेफ एस्पडीन ने चूना पत्थर और चिकनी मिट्टी से इसे पहली बार बनाया। इसका रंग पोर्टलैंड (इंग्लैंड) के प्राकृतिक चूना पत्थर जैसा होने के कारण इसे ‘पोर्टलैंड सीमेन्ट’ कहा गया।
  • कच्चे माल: चूना पत्थर (खड़िया), चिकनी मिट्टी (मृत्तिका/लाल मिट्टी या शेल) और जिप्सम।

सीमेन्ट का रासायनिक संघटन (Composition)

घटक पदार्थ प्रतिशत मात्रा
CaO (कैल्सियम ऑक्साइड / चूना) 60–70%
SiO2 (सिलिका) 20–25%
Al2O3 (ऐल्युमिना) 5–10%
Fe2O3 (आयरन ऑक्साइड) 2–3%
MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइड) 2%
Na2O (सोडियम ऑक्साइड) 1.5%
K2O (पोटैशियम ऑक्साइड) 1.5%
SO3 (सल्फर ट्राईऑक्साइड) 1%

जिप्सम का महत्व: सीमेन्ट के निर्माण के समय इसमें 2-5% तक जिप्सम (CaSO4 • 2H2O) मिलाया जाता है, ताकि इसके प्रारंभिक जमाव (Setting) की प्रक्रिया को धीमा किया जा सके। धीमे जमाव के कारण ही सीमेन्ट अत्यधिक मजबूत और दृढ़ बनता है।

2. काँच (Glass)

काँच अक्रिस्टलीय ठोस के रूप में एक अतिशीतित द्रव (Supercooled Liquid) है। इसकी कोई निश्चित क्रिस्टलीय संरचना और निश्चित गलनांक नहीं होता। यह एक मिश्रण है, यौगिक नहीं, इसलिए इसका कोई निश्चित रासायनिक सूत्र नहीं होता।

  • साधारण काँच का औसत संघटन: Na2SiO3 • CaSiO3 • 4SiO2
  • काँच का अनीलीकरण (Annealing): काँच की वस्तुओं को बनाने के बाद उन्हें टूटने से बचाने के लिए विशेष भट्टियों में धीरे-धीरे ठंडा करने की प्रक्रिया को अनीलीकरण कहते हैं।
  • विशेष तथ्य: बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने में रेशेदार काँच (Fibrous Glass) का प्रयोग होता है। फोटोक्रोमैटिक काँच में सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr) की उपस्थिति के कारण यह धूप में स्वतः काला हो जाता है।

काँच के प्रकार, संघटन एवं उपयोग

काँच का प्रकार मुख्य संघटन मुख्य उपयोग
फ्लिन्ट काँच पोटैशियम कार्बोनेट, लेड ऑक्साइड व सिलिका कैमरा, दूरबीन के लेन्स व विद्युत बल्ब
पाइरेक्स काँच सोडियम सिलिकेट, बेरियम सिलिकेट प्रयोगशाला के उपकरण व परखनली
सोडा काँच सोडियम कार्बोनेट, कैल्सियम कार्बोनेट व सिलिका ट्यूब लाइट, बोतलें, दैनिक बर्तन
कुक्स काँच सिरियम ऑक्साइड, सिलिका धूप-चश्मों के लेन्स (UV किरणों से बचाव)
पोटाश काँच पोटैशियम कार्बोनेट, कैल्सियम कार्बोनेट व सिलिका अधिक ताप तक गर्म किए जाने वाले बर्तन
प्रकाशीय काँच पोटैशियम कार्बोनेट, रेड लेड तथा सिलिका चश्मा, सूक्ष्मदर्शी, टेलिस्कोप एवं प्रिज्म

काँच के विभिन्न रंग (धात्विक यौगिक मिलाने पर)

  • गहरा नीला: कोबाल्ट ऑक्साइड
  • हरा: सोडियम क्रोमेट या फेरस ऑक्साइड या क्रोमिक ऑक्साइड
  • नारंगी लाल: सिलेनियम ऑक्साइड
  • भूरा: फेरिक ऑक्साइड
  • रुबी लाल: गोल्ड क्लोराइड
  • पीला: कैडमियम सल्फेट या मैगनीज डाई ऑक्साइड
  • पीकॉक नीला: क्यूप्रिक लवण
  • चटक लाल: क्यूप्रस ऑक्साइड

3. साबुन और डिटरजेन्ट (Soap & Detergent)

(A) साबुन (Soap)

यह उच्च वसीय अम्लों (जैसे—स्टियरिक, पालमिटिक या ओलिक अम्ल) के सोडियम या पोटैशियम लवणों का मिश्रण होता है। साबुन बनाने की प्रक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं।

  • कड़े साबुन (Hard Soap): ये उच्च वसीय अम्लों के सोडियम लवण (कास्टिक सोडा) होते हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से कपड़ा धोने में होता है।
  • मुलायम साबुन (Soft Soap): ये उच्च वसीय अम्लों के पोटैशियम लवण (कास्टिक पोटाश) होते हैं। इनका उपयोग स्नान करने (नहाने) में होता है।

(B) डिटरजेन्ट (Detergent)

इसमें लंबी श्रृंखला का हाइड्रोकार्बन और अंत में एक ध्रुवीय समूह होता है।

  • लाभ: यह साबुन से बेहतर कार्य करता है क्योंकि यह कठोर जल में उपस्थित Ca2+, Mg2+ और Fe2+ आयनों के साथ अघुलनशील लवण (अवक्षेप) नहीं बनाता।
  • उदाहरण: सोडियम एल्काइल सल्फोनेट, सोडियम एल्काइल बेंजीन सल्फोनेट।
  • माइको सिस्टम धुलाई: जब डिटरजेन्ट में विशेष एन्जाइम मिला दिया जाता है, तो यह कपड़ों की अत्यधिक बारीक और साफ धुलाई करता है, जिसे माइको सिस्टम धुलाई कहते हैं।

4. प्रमुख रासायनिक विस्फोटक (Explosives)

(i) डायनामाइट (Dynamite)

  • आविष्कार: सन् 1867 ई. में अल्फ्रेड नोबल द्वारा किया गया था।
  • निर्माण: यह नाइट्रोग्लिसरीन को किसी अक्रिय पदार्थ (जैसे लकड़ी के बुरादे) में अवशोषित करके बनाया जाता है। जिलेटिन डायनामाइट में नाइट्रोसेलुलोस होता है।
  • आधुनिक डायनामाइट: आजकल इसमें नाइट्रोग्लिसरीन के स्थान पर सोडियम नाइट्रेट का प्रयोग किया जाता है।

(ii) ट्राइ नाइट्रो टाल्वीन (T.N.T.)

  • यह टाल्वीन (C6H5CH3) के साथ सान्द्र H2SO4 एवं सान्द्र HNO3 की क्रिया से निर्मित होता है।
  • इसकी विस्फोटक गति 6900 मीटर प्रति सेकंड होती है।

(iii) ट्राई नाइट्रो-फिनॉल (T.N.P. / पिक्रिक अम्ल)

  • यह फिनॉल एवं सान्द्र HNO3 अम्ल की रासायनिक क्रिया से बनता है। इसे प्रयोगशालाओं में पिक्रिक एसिड भी कहते हैं।

(iv) ट्राई नाइट्रोग्लिसरीन (T.N.G.)

  • यह एक रंगहीन तैलीय द्रव है, जिसे ‘नोबल का तेल’ भी कहा जाता है।
  • यह मुख्य रूप से डायनामाइट बनाने के काम आता है और इसे सान्द्र सल्फ्यूरिक (H2SO4) व सान्द्र नाइट्रिक (HNO3) अम्ल की ग्लिसरीन के साथ क्रिया कराकर बनाया जाता है।

(v) आर.डी.एक्स (R.D.X.)

  • पूरा नाम: Research and Developed Explosive
  • रासायनिक नाम: साइक्लो ट्राइमिथाइलीन ट्राईनाइट्रोमाइन (इसे प्लास्टिक विस्फोटक भी कहते हैं)।
  • अंतरराष्ट्रीय नाम: यू.एस.ए. में इसे ‘साइक्लोनाइट’, जर्मनी में ‘हेक्सोजन’ तथा इटली में ‘टी-4’ कहा जाता है।
  • विशेषताएं: इसकी खोज 1899 ई. में जर्मनी के हंस हेनिंग ने की थी। इसका तापमान और आग की गति बढ़ाने के लिए इसमें एल्युमिनियम चूर्ण मिलाया जाता है। इसकी विस्फोटक ऊष्मा 1510 किलो कैलोरी/किग्रा होती है।

(vi) गन पाउडर (Gun Powder)

  • खोज: रोजर बैकन द्वारा की गई थी।
  • प्रथम प्रयोग: सन् 1346 ई. में अंग्रेजों द्वारा यूनान के युद्ध में पहली बार इसका इस्तेमाल किया गया था।

5. उर्वरक (Fertilizers)

मृदा (मिट्टी) को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर उपजाऊ बनाने के लिए बाहर से मिलाए जाने वाले रासायनिक पदार्थ उर्वरक कहलाते हैं। इन्हें तीन भागों में बांटा गया है:

(A) नाइट्रोजन के उर्वरक (Nitrogenous Fertilizers)

  • यूरिया (H2NCONH2): इसमें सर्वाधिक 46% नाइट्रोजन पाई जाती है। यह एमाइड के रूप में होता है।
  • अमोनियम सल्फेट [(NH4)2SO4]: इसमें लगभग 25% अमोनिया के रूप में नाइट्रोजन होती है। यह आलू की फसल के लिए अत्यधिक लाभकारी है। (नोट: इसका प्रयोग चूना रहित भूमि में नहीं किया जाता।)
  • कैल्सियम नाइट्रेट: यह नाइट्रोजन का सबसे अच्छा उर्वरक माना जाता है, जिसे बाजार में ‘नार्वेजियन साल्टपीटर’ के नाम से जाना जाता है।
  • कैल्सियम सायनामाइड (CaCN2): इसका प्रयोग फसलों की बुआई से पहले किया जाता है। कार्बन के साथ इसके व्यावसायिक मिश्रण को बाजार में ‘नाइट्रोलिम’ कहा जाता है।

(B) पोटैशियम के उर्वरक (Potassic Fertilizers)

  • पौधों को पोटैशियम तत्व प्रदान करने वाले उर्वरक।
  • उदाहरण: पोटैशियम क्लोराइड (KCl), पोटैशियम नाइट्रेट (KNO3), पोटैशियम सल्फेट (K2SO4)।

(C) फास्फोरस के उर्वरक (Phosphatic Fertilizers)

  • पौधों को फास्फोरस तत्व प्रदान करने वाले उर्वरक।
  • उदाहरण: सुपर फास्फेट ऑफ लाइम, फास्फेटी धातुमल।
  • विशेष: सुपर फास्फेट को हड्डियों को पीसकर तैयार किया जाता है, जिसमें 16-20% P2O5 (फास्फोरस पेंटाऑक्साइड) उपस्थित होता है।
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