1. ईंधन और एक अच्छे ईंधन के गुण (Fuels & Their Properties)

परिभाषा: वह पदार्थ जो हवा या ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर बिना किसी अनावश्यक या विषैले सह-उत्पाद (by-product) के प्रचुर मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करता है, ईंधन कहलाता है।

एक अच्छे ईंधन के मुख्य लक्षण:

  • वह आर्थिक रूप से सस्ता और स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध होना चाहिए।
  • उसका ऊष्मीय मान (Calorific value) उच्च होना चाहिए।
  • पूर्ण दहन के बाद न्यूनतम मात्रा में अवशिष्ट पदार्थ (जैसे राख) बचना चाहिए।
  • जलने के दौरान या बाद में कोई हानिकारक, दमघोंटू या विषैली गैस उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
  • उसका सुरक्षित भंडारण (Storage) और परिवहन (Transport) आसान होना चाहिए।
  • उसका दहन नियंत्रित (Controlled) होना चाहिए और उसका प्रज्वलन ताप (Ignition temperature) एक निश्चित और उपयुक्त स्तर पर होना चाहिए।

2. ऊष्मीय मान (Calorific Value) और हाइड्रोजन

परिभाषा: किसी ईंधन के 1 ग्राम को वायु या ऑक्सीजन में पूरी तरह जलाने (पूर्ण दहन) पर जो ऊष्मा की मात्रा प्राप्त होती है, उसे उस ईंधन का ऊष्मीय मान कहते हैं।

  • हाइड्रोजन – भविष्य का ईंधन: सभी ज्ञात ईंधनों में हाइड्रोजन का ऊष्मीय मान सबसे अधिक होता है। सुरक्षित भंडारण और परिवहन की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध न होने के कारण वर्तमान में इसका आम उपयोग (घरेलू या सामान्य वाहनों में) नहीं किया जाता।
  • मुख्य उपयोग: इसका मुख्य उपयोग रॉकेट ईंधन (तरल हाइड्रोजन) और उच्च ताप उत्पन्न करने वाले विशेष औद्योगिक ज्वालकों (Torches) में होता है। इसे ‘भविष्य का ईंधन’ भी कहा जाता है।

3. अपस्फोटन (Knocking) और ऑक्टेन संख्या

  • अपस्फोटन (Knocking): कुछ ईंधनों का वाहनों के इंजन सिलेंडर में नियत समय से पहले ही ज्वलन (Premature ignition) हो जाता है। इससे ईंधन की रासायनिक ऊर्जा पूरी तरह कार्य में नहीं बदलती, बल्कि धात्विक ध्वनि (Metallic sound) उत्पन्न करने में नष्ट हो जाती है। इसी अवांछित ध्वनि को अपस्फोटन कहते हैं। यह इंजन की कार्यक्षमता और ईंधन की गुणवत्ता को घटाता है।
  • अपस्फोटरोधी यौगिक (Anti-knock Compound): अपस्फोटन को कम करने के लिए ईंधनों में विशेष एंटी-नॉक एजेंट मिलाए जाते हैं। सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी अपस्फोटरोधी यौगिक टेट्रा एथिल लेड [TEL – Tetraethyl Lead] है।
  • ऑक्टेन संख्या (Octane Number): पेट्रोल/गैसोलीन ईंधन के अपस्फोटन के गुण को ऑक्टेन संख्या द्वारा मापा जाता है। ऑक्टेन संख्या जितनी अधिक होगी, ईंधन का अपस्फोटन उतना ही कम होगा और वह उतना ही उत्तम श्रेणी का ईंधन माना जाएगा।

4. ईंधन का वर्गीकरण (Classification of Fuels)

भौतिक अवस्था के आधार पर ईंधन को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा गया है:

(A) ठोस ईंधन: कोयला (Coal) के प्रकार

कार्बन की प्रतिशत मात्रा और शुद्धता के आधार पर कोयला चार मुख्य श्रेणियों में पाया जाता है:

कोयले का प्रकार कार्बन की मात्रा विशेषताएँ व उपयोग
1. पीट (Peat) कोयला 50% से 60% यह सबसे निम्न कोटि का कोयला है; जिसे जलाने पर अत्यधिक मात्रा में राख और गाढ़ा धुआँ निकलता है।
2. लिग्नाइट (Lignite) 65% से 70% इसे ‘भूरा कोयला’ (Brown Coal) भी कहा जाता है। इसमें जलवाष्प (नमी) की मात्रा अधिक होती है।
3. बिटुमिनस (Bituminous) 70% से 85% इसे ‘मुलायम कोयला’ भी कहा जाता है। भारत में पाया जाने वाला अधिकांश कोयला इसी श्रेणी का है और इसका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू व औद्योगिक कार्यों में होता है।
4. एन्थ्रासाइट (Anthracite) 85% से अधिक यह कोयले की सबसे उत्तम, कठोर और सर्वश्रेष्ठ कोटि है। यह बिना धुएँ के अत्यधिक ऊष्मा देता है।

(B) द्रव ईंधन (Liquid Fuels)

इसके अंतर्गत पेट्रोल, डीजल, किरासन (मिट्टी का तेल), अल्कोहल, ईथर और स्पिरिट आते हैं।

  • पावर अल्कोहल (Power Alcohol): जब परिशुद्ध एथिल अल्कोहल को पेट्रोल (गैसोलीन) में ईंधन के रूप में मिला दिया जाता है, तो इस मिश्रण को पावर अल्कोहल कहते हैं। यह स्वचालित वाहनों के लिए ऊर्जा का एक बेहतरीन वैकल्पिक पर्यावरण-अनुकूल स्रोत है।

(C) गैसीय ईंधन (Gaseous Fuels)

1. प्राकृतिक गैस (Natural Gas) & LPG

  • प्राकृतिक गैस: यह पेट्रोलियम के कुँओं से स्वतः निकलती है। इसमें लगभग 95% हाइड्रोकार्बन होता है, जिसमें अकेले 80% मात्रा मीथेन (CH4) गैस की होती है।
  • LPG (द्रवित पेट्रोलियम गैस / Liquefied Petroleum Gas): घरों में रसोई ईंधन के रूप में प्रयुक्त होने वाली गैस। यह मुख्य रूप से ब्यूटेन और प्रोपेन हाइड्रोकार्बन का उच्च दाब पर तैयार मिश्रण होती है, जिसे सिलेंडरों में भरा जाता है।
  • सुरक्षा उपाय (रिसाव का पता लगाना): चूंकि एल.पी.जी. प्राकृतिक रूप से अत्यधिक ज्वलनशील परंतु गंधहीन होती है, इसलिए इसके खतरनाक रिसाव (Leakage) को तुरंत पहचानने के लिए इसमें सल्फर का एक तीक्ष्ण गंध वाला यौगिक मिथाइल मरकैप्टेन (CH3SH) मिलाया जाता है।

2. गोबर गैस / बायोगैस (Bio-gas)

  • गीले गोबर (पशुओं के अपशिष्ट) के हवा की अनुपस्थिति (अवायवीय दशा) में सड़ने (Fermentation) से ज्वलनशील मीथेन गैस बनती है।
  • बायो-खाद: गैस के निष्कर्षण के बाद संयंत्र में बचे हुए शेष अर्द्ध-ठोस पदार्थ (Slurry) का उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले नाइट्रोजन-युक्त कार्बनिक खाद के रूप में खेतों में किया जाता है।

3. प्रोड्यूसर गैस (Producer Gas)

  • निर्माण: लाल तप्त कोक पर वायु (ऑक्सीजन और नाइट्रोजन) प्रवाहित करके इसका निर्माण किया जाता है।
  • रासायनिक संघटन: इसमें मुख्य रूप से 70% नाइट्रोजन (N2), 25% कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और 4% कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) होती है। इसमें उपस्थित CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) ही मुख्य ईंधन का कार्य करता है।
  • ऊष्मीय मान: 1100 से 1750 kcal/kg।
  • उपयोग: काँच, चीनी मिट्टी और इस्पात (Steel) उद्योगों में भट्टियों को गर्म करने वाले ईंधन के रूप में।

4. जल गैस (Water Gas)

  • रासायनिक संघटन: इसमें हाइड्रोजन (H2) 49%, कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) 45% और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) 4.5% उपस्थित होती है।
  • ऊष्मीय मान: 2500 से 2800 kcal/kg (प्रोड्यूसर गैस से बेहतर)।
  • उपयोग: व्यावसायिक स्तर पर हाइड्रोजन और कृत्रिम अल्कोहल के औद्योगिक निर्माण में तथा अपचायक (Reducing agent) के रूप में।

5. कोल गैस (Coal Gas)

  • निर्माण: यह कोयले के भंजक आसवन (Destructive Distillation of Coal) के सह-उत्पाद के रूप में बनाई जाती है।
  • विशेषता: यह एक रंगहीन और अत्यंत तीक्ष्ण गंध वाली गैस है जो हवा के संपर्क में आने पर विस्फोटक मिश्रण का निर्माण करती है।
  • रासायनिक संघटन: इसमें लगभग 54% हाइड्रोजन (H2), 35% मीथेन (CH4), 11% कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), 5% अन्य हाइड्रोकार्बन और 3% कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उपस्थित होती है।
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