1. रसायन विज्ञान और दैनिक जीवन (Chemistry & Daily Life)
- सेकेरीन (Saccharin): इसका निर्माण टॉइलीन (Toluene) से होता है। यह एक श्वेत क्रिस्टलीय ऐरोमैटिक यौगिक है जो साधारण चीनी (शर्करा) की तुलना में 550 गुना अधिक मीठा होता है, लेकिन इसका कैलोरी मान (Calorie value) शून्य होता है। इसलिए यह मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए शर्करा के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है।
- टेल्कम पाउडर (Talcum Powder): टेल्कम पाउडर के निर्माण में मुख्य रूप से थियोफेस्टस खनिज का उपयोग किया जाता है।
- क्रीम (Cream): क्रीम भी मूल रूप से एक प्रकार का दूध ही है, जिसमें वसा (Fat) की मात्रा बढ़ जाती है और पानी की मात्रा काफी कम हो जाती है।
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2. पदार्थ के गुण और अवस्था परिवर्तन (Properties & State Changes)
- शुष्क बर्फ (Dry Ice): ठोस कार्बन डाइऑक्साइड (Solid CO2) को ही शुष्क बर्फ कहा जाता है। इसे गर्म करने पर यह बिना द्रव अवस्था में बदले सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है, इस प्रक्रिया को ऊर्ध्वपातन (Sublimation) कहते हैं।
- बर्फ और जिलेटिन: व्यावसायिक रूप से बर्फ जमाते समय उसमें जिलेटिन मिलाया जाता है, ताकि बर्फ के पिघलने की दर को धीमा किया जा सके (जल्दी पिघलने से रोका जा सके)।
- द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface Tension): यदि किसी द्रव में कोई घुलनशील पदार्थ (जैसे नमक आदि) मिलाया जाए, तो उस द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface Tension) बढ़ जाता है।
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3. जल और मृदा उपचार (Water & Soil Treatment)
- पानी की स्थाई कठोरता (Permanent Hardness): जल की स्थाई कठोरता को दूर करने के लिए पोटेशियम क्लोराइड (KCl) सबसे अधिक उपयुक्त और प्रभावी पदार्थ माना जाता है।
- मृदा का क्षारकत्व (Soil Alkalinity): कृषि योग्य भूमि या मिट्टी में अत्यधिक क्षारीयता को कम करने (घटाने) के लिए जिप्सम का प्रयोग किया जाता है।
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4. पर्यावरण और प्राकृतिक क्रियाएँ (Environment & Natural Processes)
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation): वायुमण्डल में मौजूद मुक्त नाइट्रोजन गैस को नाइट्रेट्स (Nitrates) में बदलने की प्राकृतिक या रासायनिक क्रिया को ‘नाइट्रोजन स्थिरीकरण’ कहा जाता है। यह पौधे (विशेषकर दलहनी फसलें) मिट्टी से सीधे नाइट्रोजन ग्रहण नहीं कर सकते, इसलिए वे इसे नाइट्रेट के रूप में अवशोषित करते हैं।
- क्लोरोफॉर्म का प्रभाव (Phosgene Gas Formation): यदि क्लोरोफॉर्म (CHCl3) को सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायुमंडल में खुला छोड़ दिया जाए, तो वह वायु से ऑक्सीकृत होकर एक अत्यंत विषैली गैस ‘फॉस्जीन’ (COCl2) में परिवर्तित हो जाती है।
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5. प्रयोगशाला और शोध (Laboratory & Research)
- रेडियो सक्रिय कार्बन (Carbon-14 / 14C): पुरातत्त्व अवशेषों, प्राचीन चट्टानों या फॉसिल्स (जीवाश्मों) की सही आयु का सटीक निर्धारण करने के लिए रेडियो सक्रिय कार्बन (14C) का उपयोग किया जाता है, जिसे ‘कार्बन डेटिंग’ (Carbon Dating) विधि कहते हैं।
- पिक्रिक ऐसिड (Picric Acid): यह एक अत्यधिक क्रियाशील कार्बनिक यौगिक है, जिसका उपयोग वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में एक महत्वपूर्ण अभिकर्मक (Reagent) के रूप में किया जाता है।