1. रासायनिक बंधन (Chemical Bonding) एवं इसके प्रकार
परिभाषा: परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के पुनर्वितरण (Redistribution) के फलस्वरूप बनने वाले बंधन को परमाणु बंधन (Atomic bond) कहते हैं। यह मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
(A) वैद्युत संयोजी बंधन / आयनिक बंधन (Electrovalent / Ionic Bond)
जब रासायनिक बंधन का निर्माण एक परमाणु से दूसरे परमाणु में इलेक्ट्रॉन के पूर्ण स्थानांतरण (Transfer) द्वारा होता है, तो उसे वैद्युत संयोजी बंधन कहते हैं।
उदाहरण: Na+ + Cl– → Na+Cl– (NaCl)
आयनिक यौगिकों के प्रमुख गुण:
- ये ध्रुवीय घोलकों (Polar Solvents) में प्रायः घुलनशील होते हैं। ध्रुवीय घोलक वे होते हैं जिनका परावैद्युत् स्थिरांक (Dielectric Constant) उच्च होता है, जैसे—जल।
- इनके द्रवणांक (Melting Point) एवं क्वथनांक (Boiling Point) उच्च होते हैं।
- इनका जलीय घोल विद्युत का सुचालक होता है।
- इनमें आयनन (Ionization) की मात्रा प्रायः उच्च होती है।
जालक ऊर्जा (Lattice Energy): किसी क्रिस्टल (रवा) के आयनों को एक दूसरे से अनंत दूरी तक अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा को जालक ऊर्जा कहते हैं।
(B) सहसंयोजी बंधन (Covalent Bond)
जब दो समान (सदृश) या असमान (असदृश) परमाणु अपनी बाह्यतम कक्षा के इलेक्ट्रॉनों का आपस में साझा (Sharing) करके संयोग करते हैं, तब उनके बीच बने बंधन को सहसंयोजी बंधन कहते हैं। (जैसे— Cl •• Cl या Cl2)।
सहसंयोजी यौगिकों के प्रमुख गुण:
- सहसंयोजी बंधन दृढ (Rigid) और दिशात्मक (Directional) होते हैं। अतः ये त्रिविम समावयवता (Stereoisomerism) प्रदर्शित करते हैं।
- ये यौगिक आणविक रूप में रहते हैं, आयनिक रूप में नहीं; इसलिए ये घोल की अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं।
- ताप और दाब की सामान्य अवस्था में ये प्रायः गैस, वाष्पशील द्रव या मुलायम ठोस होते हैं।
- इनका द्रवणांक एवं क्वथनांक निम्न (कम) होता है।
विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एवं बंध की प्रकृति:
- जब दो परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता के बीच काफी अधिक अंतर हो, तब उनके बीच आयनिक बंधन बनता है।
- जब दो परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता के बीच कम अंतर हो, तब ध्रुवीय सहसंयोजक (Polar Covalent) बंधन बनता है।
- जब दो परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता के बीच अंतर शून्य (0) के बराबर हो, तब शुद्ध सहसंयोजी बंधन बनता है।
(C) उपसहसंयोजी बंधन (Coordinate / Dative Bond)
ऐसा बंधन जो दो परमाणुओं के बीच एक इलेक्ट्रॉन जोड़ी की साझेदारी से बनता है, किन्तु साझेदारी का इलेक्ट्रॉन युग्म सिर्फ एक ही परमाणु द्वारा दिया जाता है।
- इलेक्ट्रॉन जोड़ी प्रदान करने वाले परमाणु को प्रदाता (Donor) कहते हैं।
- इलेक्ट्रॉन जोड़ी स्वीकार करने वाले परमाणु को स्वीकारक (Acceptor) कहते हैं।
- उदाहरण: H2SO4 (सल्फ्यूरिक अम्ल) के निर्माण में सल्फर (S) दो उपसहसंयोजी बंध बनाता है।
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2. हाइड्रोजन बंधन (Hydrogen Bonding)
जब हाइड्रोजन (H) अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक तत्वों जैसे—फ्लोरीन (F), ऑक्सीजन (O), या नाइट्रोजन (N) के साथ संयोग करता है, तो अणु ध्रुवीय हो जाते हैं (जैसे—HF, H2O, NH3)।
सहसंयोजक बंधन का इलेक्ट्रॉन युग्म अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व (जैसे F) की ओर खिंच जाता है, जिससे F पर आंशिक ऋण आवेश (δ–) और H पर आंशिक धन आवेश (δ+) आ जाता है। तब एक अणु का धनात्मक सिरा दूसरे अणु के ऋणात्मक सिरे को आकर्षित करता है:
… Hδ+ — Fδ- … Hδ+ — Fδ- …
इस स्थिर वैद्युत आकर्षण बल को हाइड्रोजन बंधन कहते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- यह सहसंयोजक बंधन से काफी कमजोर होता है।
- यह केवल जल (H2O), हाइड्रोजन सायनाइड (HCN) और HF में पाया जाता है। H2S में हाइड्रोजन बंधन नहीं पाया जाता।
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3. बंधों की तुलना और मजबूती का क्रम
| विशेषता | बढ़ता हुआ क्रम (समीकरण) |
|---|---|
| बंधन ऊर्जा (Bond Energy) का क्रम | एकल बंध < द्विबंध < त्रिबंध |
| बंधों की क्रियाशीलता (Reactivity) का क्रम | एकल बंध < द्विबंध < त्रिबंध |
| बंध दूरी / लंबाई (Bond Length) का क्रम | त्रिबंध < द्विबंध < एकल बंध |
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4. सिग्मा बंध (σ-bond) एवं पाई बंध (π-bond)
- सिग्नमा बंध (σ-bond): जब दो परमाणुओं के कक्षकों (Orbitals) का एक ही रैखिक अक्ष पर आमने-सामने (Head-on/Axial) अतिव्यापन (Overlapping) होता है, तो उससे निर्मित मजबूत बंधन को सिग्मा बंध कहते हैं।
- पाई बंध (π-bond): जब दो परमाणु कक्षकों का पार्श्वीय (Sideways / Lateral) अतिव्यापन होता है, तो उससे निर्मित अपेक्षाकृत कमजोर बंधन को पाई बंध कहते हैं।
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5. प्रसंकरण / संकरण (Hybridisation) और अणुओं की आकृति
परमाणु कक्षकों के आपस में मिलकर समान ऊर्जा वाले नए कक्षक बनाने की प्रक्रिया को संकरण कहते हैं। संकरण के प्रमुख प्रकार एवं उनकी आकृतियाँ निम्नलिखित हैं:
| क्र.सं. | संकरण का प्रकार (Hybridisation) | अणु की ज्यामितीय आकृति (Shape) |
|---|---|---|
| 1 | sp | रेखीय (Linear) |
| 2 | sp2 | त्रिकोणीय (Trigonal Planar) |
| 3 | sp3 | त्रिकोणीय पिरामिडी / चतुष्फलकीय (Trigonal Pyramidal / Tetrahedral) |
| 4 | sp3d | त्रिकोणीय द्विपिरैमिडीय (Trigonal Bipyramidal) |
| 5 | sp3d2 | अष्टफलकीय (Octahedral) |
| 6 | sp3d3 | पंचभुजीय द्विपिरैमिडी (Pentagonal Bipyramidal) |