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1. कार्बन और उसकी अपरूपता (Allotropy)
- कार्बन (C): यह एक अधातु है। इसकी परमाणु संख्या 6 है और इसे आधुनिक आवर्त सारणी के वर्ग IV A (Group 14) में रखा गया है।
- अपरूपता: ऐसे पदार्थ जिनके रासायनिक गुण समान होते हैं लेकिन भौतिक गुण भिन्न होते हैं, ‘अपरूप’ कहलाते हैं। कार्बन के दो मुख्य क्रिस्टलीय अपरूप हैं: हीरा एवं ग्रेफाइट।
हीरा और ग्रेफाइट में तुलनात्मक अंतर
गुण / विशेषता हीरा (Diamond) ग्रेफाइट (Graphite) प्रसंकरण (Hybridization) इसमें कार्बन sp3 प्रसंकरित रहता है। इसमें कार्बन sp2 प्रसंकरित रहता है। विद्युत चालकता यह ताप एवं विद्युत का कुचालक होता है। यह विद्युत का सुचालक होता है (अपवाद)। कठोरता व संरचना दुनिया का सबसे कठोर पदार्थ है। रवे धनाकार होते हैं। मुलायम होता है। कागज पर रगड़ने पर काला निशान बनाता है (इसे ‘काला शीशा’ भी कहते हैं)। अपवर्तनांक व चमक अपवर्तनांक 2.417 होता है, जिससे पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण अत्यधिक चमकता है। आपेक्षिक घनत्व 2.2 होता है। यह चमकदार नहीं बल्कि धूसर-काला होता है। विशेष तथ्य व उपयोग शुद्ध हीरा पारदर्शक होता है। काले हीरे को ‘बोर्ड’ (Boart) कहते हैं, जिसका उपयोग शीशा (काँच) काटने में होता है। इसका उपयोग पेंसिल के लेड बनाने, परमाणु भट्टी में मंदक/इलेक्ट्रोड के रूप में और कार्बन आर्क बनाने में होता है। 2. हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)
परिभाषा: कार्बन एवं हाइड्रोजन के संयोग से बने यौगिकों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं। इनका प्राकृतिक स्रोत पेट्रोलियम (कच्चा तेल) है, जो अवसादी चट्टानों (Sedimentary rocks) में पाया जाता.
हाइड्रोकार्बन के प्रकार:
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated – एल्केन): इसमें प्रत्येक कार्बन की चारों संयोजकताएँ एकल बंध (C-C) द्वारा संतुष्ट होती हैं।
- सामान्य सूत्र: CnH2n+2
- उदाहरण: मीथेन (CH4), ईथेन (C2H6), प्रोपेन, ब्यूटेन।
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated): इनमें कार्बन परमाणुओं के बीच द्विबंध (C=C) या त्रिबंध (C≡C) पाया जाता है।
- एल्कीन (द्विबंध): सामान्य सूत्र CnH2n होता है। प्रथम सदस्य: एथीन (C2H4)।
- एल्काइन (त्रिबंध): सामान्य सूत्र CnH2n-2 होता है। सबसे सरल सदस्य: एथाइन (C2H2 या एसिटिलीन)।
- ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन: बेंजीन (C6H6) सबसे सरल ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन है, जिसकी संरचना एक वलय (Ring) जैसी होती है।
समावयवता (Isomerism): जब दो या दो से अधिक यौगिकों के अणुसूत्र (Molecular Formula) समान होते हैं, लेकिन उनके गुण और संरचना भिन्न होती है, तो इसे समावयवता कहते हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं— (i) संरचनात्मक समावयवता और (ii) त्रिविम समावयवता।
3. बहुलकीकरण (Polymerisation) और प्लास्टिक
बहुलकीकरण: जब एक ही यौगिक के दो या अधिक छोटे अणु (Monomer) आपस में जुड़कर एक बड़ा अणु (Polymer) बनाते हैं, तो उसे बहुलकीकरण कहते हैं। (प्राकृतिक बहुलक: स्टार्च एवं सेल्यूलोज)।
प्लास्टिक के प्रकार
प्लास्टिक का प्रकार विशेषताएँ प्रमुख उदाहरण एवं उपयोग (i) थर्मोप्लास्टिक गर्म करने पर मुलायम और ठंडा करने पर कठोर हो जाता है। यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जा सकती है। * पॉलीथीन: एथीन के बहुलकीकरण से; तार के आवरण और पैकिंग थैलियों में।
* पॉलीस्टॉइरीन: अम्ल की बोतलें और सेल कवर बनाने में।
* PVC (पॉलीविनाइल क्लोराइड): बरसाती (Raincoat), सीट कवर और पतली चादरें बनाने में।
* टेफ्लॉन: नॉन-स्टिक बर्तनों में।(ii) थर्मोसेटिंग प्लास्टिक इसे केवल पहली बार गर्म करते समय इच्छित आकार में ढाला जा सकता है। दोबारा गर्म करने पर यह मुलायम नहीं होता (अनुत्क्रमणीय)। * बैकेलाइट: फिनॉल और फॉर्मेल्डिहाइड को NaOH की उपस्थिति में गर्म करके बनता है। उपयोग: रेडियो, टीवी के केस, बिजली के स्विच और बाल्टी बनाने में.
* मेलामाइम: क्रॉकरी आदि बनाने में।4. रबड़ (Rubber) और रासायनिक रेशे (Fibres)
(A) रबड़ के प्रकार:
- प्राकृतिक रबड़: यह आइसोप्रीन (Isoprene) का प्राकृतिक बहुलक होता है और यह एक थर्मोप्लास्टिक है। यह आसानी से कार्बन डाइसल्फाइड (CS2) में घुल जाता है।
- वल्कनीकरण (Vulcanisation): प्राकृतिक रबड़ को कठोर और निश्चित आकार देने के लिए उसे सल्फर (गंधक) के साथ मिलाकर गर्म किया जाता है। इससे दस्ताने और रबड़ बैंड बनाए जाते हैं।
- टायर-ट्यूब निर्माण: प्राकृतिक रबड़ बहुत मुलायम होता है, इसे और अधिक कड़ा बनाने के लिए इसमें कार्बन मिलाया जाता है, जिसका उपयोग टायर और ट्यूब बनाने में होता है।
- संश्लिष्ट/कृत्रिम रबड़ (Synthetic Rubber):
- नियोप्रिन: यह 2-क्लोरोब्यूटाडाइन का बहुलक है। उपयोग: विद्युत रोधी पदार्थ, इलेक्ट्रिक केबल, कनवेयर बेल्ट और तेल ले जाने वाले पाइप में।
- थाईकॉल: यह डाइक्लोरो ईथेन और पॉलीसल्फाइड की क्रिया से बनता है। विशेष तथ्य: इसे ऑक्सीजन मुक्त करने वाले रसायनों के साथ मिलाकर रॉकेट इंजनों में ठोस ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।
(B) रासायनिक रेशे (Synthetic Fibres):
- नायलॉन (Nylon): यह मानव द्वारा संश्लिष्ट (1935 ई.) किया गया पहला पूर्ण कृत्रिम रेशा है। यह एक पॉलीएमाइड रेशा है। इसका उपयोग मछली पकड़ने के जाल, पैराशूट के कपड़े, टायर, टूथब्रश और पर्वतारोहण की रस्सियों में होता है। (नामकरण: New York का ‘NY’ + London का ‘LON’)।
- रेयॉन (Rayon): यह सेल्यूलोज (लकड़ी की लुगदी) से बना कृत्रिम रेशा है, जो रासायनिक रूप से सूत (कॉटन) के समान होता है। उपयोग: कपड़ा, कालीन और चिकित्सा की जाली (Gauze) बनाने में।
- पॉलिएस्टर (Polyester): इसमें अनेक एस्टर समूह पाए जाते हैं। इसका उपयोग कपड़े, नावों के पाल और दमकल के होज पाइप (आग बुझाने वाले पाइप) बनाने में होता है।
- कार्बन फाइबर: यह संश्लिष्ट रेशों को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में गर्म करके बनाया जाता है। इसका संक्षारण (जंग) नहीं होता। उपयोग: अंतरिक्ष यान तथा खेलकूद की सामग्री बनाने में।
5. पेट्रोलियम उद्योग और प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)
कच्चे पेट्रोलियम को उसके घटकों के भिन्न-भिन्न क्वथनांकों (Boiling Points) के आधार पर प्रभाजी आसवन द्वारा शुद्ध किया जाता है। इसके मुख्य उत्पाद निम्नलिखित हैं:
क्र.सं. पेट्रोलियम उत्पाद ताप-परिसर (Temp) कार्बन अणुओं की संख्या मुख्य उपयोग 1. प्राकृतिक गैस / रसोई गैस 30°C से नीचे C1 से C4 घरेलू रसोई गैस (LPG) के रूप में 2. पेट्रोल या गैसोलीन 20°C से 100°C C5 से C10 मोटर वाहन ईंधन और स्पिरिट के रूप में 3. नेफ्था 100°C से 180°C C7 से C10 संश्लिष्ट रेशों (Synthetic fibres) के उत्पादन में 4. किरासन तेल (Kerosene) 175°C से 250°C C10 से C16 लैम्प, लालटेन और स्टोव जलाने के ईंधन में 5. डीजल 250°C से 350°C C15 से C20 भारी वाहनों के डीजल इंजन में ईंधन के रूप में 6. स्नेहक तेल (Lubricant Oil) 350°C से 450°C C20 से C30 मशीनों में घर्षण कम करने (स्नेहक) व दवा में 7. पेट्रोलियम जेली (Vaseline) 450°C से 500°C C30 से C35 स्नेहक एवं कॉस्मेटिक्स/दवा बनाने में 8. पाराफीन मोम (Paraffin Wax) 500°C से ऊपर C35 से C40 मोमबत्ती एवं जलरोधी (Waterproof) सामग्री बनाने में 9. कोलतार / डामर (Bitumen) अवशिष्ट (बचा हुआ भाग) उच्च कार्बन श्रृंखला सड़क बनाने में