1. अम्ल (Acid): परिभाषा एवं सिद्धांत

सामान्य गुण: अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं और इनका जलीय विलयन नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है। अम्लों में प्रतिस्थाप्य (Replaceable) हाइड्रोजन उपस्थित होता है।

अम्ल से जुड़े प्रमुख रासायनिक सिद्धांत:

  • आरहेनियस के अनुसार: अम्ल वे यौगिक हैं, जो जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H+) देते हैं।
  • ब्रॉन्सटेड एवं लॉरी सिद्धांत: अम्ल वह पदार्थ है, जो किसी दूसरे पदार्थ को प्रोटॉन प्रदान करने की क्षमता रखता है।
  • लुईस का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत: अम्ल वह यौगिक है, जिसमें इलेक्ट्रॉन की एक निर्जन जोड़ी (Lone pair of electrons) स्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है।

प्राकृतिक स्रोत एवं उनमें पाए जाने वाले अम्ल:

प्राकृतिक स्रोत पाया जाने वाला अम्ल
सिरका / अचार ऐसीटिक अम्ल (Acetic Acid)
संतरा, नीबू सिट्रिक / साइट्रिक अम्ल (Citric Acid)
इमली, अंगूर टार्टरिक अम्ल (Tartaric Acid)
टमाटर ऑक्सैलिक अम्ल (Oxalic Acid)
दही (खट्टा दूध) लैक्टिक अम्ल (Lactic Acid)
सेव (सेब) मैलिक अम्ल (Malic Acid)
सोडावाटर एवं अन्य पेय कार्बोनिक अम्ल (Carbonic Acid)
चींटी का डंक, नेटल का डंक मेथेनॉइक / फॉर्मिक अम्ल (Methanoic Acid)

अम्लों के प्रमुख उपयोग एवं तथ्य:

  • पाचन क्रिया: मानव पेट (आमाशय) में भोजन पचाने के लिए HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) का उपयोग होता है।
  • शुद्धीकरण: सोना एवं चाँदी के शुद्धीकरण में HNO3 (नाइट्रिक अम्ल) का प्रयोग किया जाता है।
  • लोहे की सफाई: लोहे पर जस्ते की परत चढ़ाने (Galvanization) से पहले लोहे को साफ करने के लिए H2SO4 एवं HNO3 का प्रयोग होता है।
  • दाग हटाना: कपड़ों से जंग के धब्बे हटाने के लिए ऑक्जैलिक अम्ल का प्रयोग किया जाता है।
  • अम्लों की प्रबलता का घटता क्रम: HCl > HNO3 > H2SO4 > CH3COOH

अम्लराज (Aqua Regia): यह 3:1 के अनुपात में सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) एवं सांद्र नाइट्रिक अम्ल (HNO3) का ताजा मिश्रण होता है। यह अत्यंत शक्तिशाली होता है और सोना (Gold) एवं प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को भी गलाने में समर्थ होता है।

2. भस्म (Base) या क्षारक

सामान्य गुण: ऐसा यौगिक जो अम्ल से प्रतिक्रिया कर लवण (Salt) एवं जल देता है, भस्म कहलाता है। स्वाद में कड़वे होते हैं और लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।

भस्म से जुड़े प्रमुख रासायनिक सिद्धांत:

  • ब्रॉन्सटेड लॉरी सिद्धांत: वह यौगिक जिसमें प्रोटॉन ग्रहण करने की क्षमता हो, भस्म कहलाता है।
  • लुईस का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत: वह यौगिक जिसमें इलेक्ट्रॉन की एक निर्जन जोड़ी (Lone pair) प्रदान (दान) करने की क्षमता होती है, भस्म कहलाता है।

भस्म के प्रकार:

  1. जल में विलेय भस्म (क्षार / Alkali): वे भस्म जो जल में पूरी तरह घुल जाते हैं, क्षार कहलाते हैं। (जैसे- KOH, NaOH)।
  2. जल में अविलेय भस्म: ये अम्ल के साथ क्रिया करके लवण और जल तो बनाते हैं, लेकिन क्षार के अन्य गुण (जैसे लिटमस बदलना) प्रदर्शित नहीं करते। (जैसे- ZnO, Cu(OH)2, FeO, Fe2O3)।

प्रमुख भस्मों के औद्योगिक एवं घरेलू उपयोग:

  • कैल्शियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)2]: घरों में चूना पोतने (पुताई) में, गारा एवं प्लास्टर बनाने में, ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) के निर्माण में, चमड़े के ऊपर से बाल साफ करने में, कठोर जल को मृदु बनाने में और अम्ल से हुई जलन पर पट्टी करने में।
  • कास्टिक सोडा / सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH): साबुन बनाने में, पेट्रोलियम को साफ करने में, दवाइयों के निर्माण में, कपड़ा एवं कागज उद्योग में तथा कारखानों को साफ करने में।
  • मिल्क ऑफ मैग्नीशिया / मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइड [Mg(OH)2]: इसका उपयोग एंटासिड के रूप में पेट की अम्लीयता (एसिडिटी) को दूर करने में किया जाता है।

3. लवण (Salt)

परिभाषा: अम्ल एवं भस्म की उदासीनीकरण (Neutralization) अभिक्रिया के फलस्वरूप लवण एवं जल का निर्माण होता है।

समीकरण: NaOH + HCl → NaCl + H2O

प्रमुख लवणों के उपयोग:

  • साधारण नमक / सोडियम क्लोराइड (NaCl): भोजन के रूप में एवं अचार के परिरक्षण (Preservation) में।
  • खाने का सोडा / सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3): पेट की एसिडिटी दूर करने में तथा अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) में।
  • धोवन सोडा / सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3 • 10H2O): कपड़ों की धुलाई में।
  • पोटेशियम नाइट्रेट (KNO3): बारूद (Gunpowder) बनाने के मुख्य घटक के रूप में।

4. pH स्केल (pH Scale)

परिभाषा: किसी विलयन की अम्लीयता या क्षारीयता को मापने के लिए pH स्केल का प्रयोग किया जाता है। किसी विलयन में हाइड्रोजन आयनों के सांद्रण के व्युत्क्रम के लघुगणक (Logarithm) को उस विलयन का pH मान कहते हैं।

सूत्र: pH = -log [H+]

  • अम्लीय विलयन: pH मान 7 से कम होता है।
  • उदासीन विलयन: pH मान 7 के बराबर होता है।
  • क्षारीय विलयन: pH मान 7 से अधिक होता है।
  • मानव शरीर का परास: हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच सुचारू रूप से कार्य करता है।

सामान्य पदार्थों का pH मान (तालिका):

पदार्थ pH मान प्रकृति
समुद्री जल 8.4 क्षारीय
मानव रक्त 7.4 हल्का क्षारीय
लार (Saliva) 6.5 हल्का अम्लीय
दूध 6.4 हल्का अम्लीय
मूत्र (Urine) 6.0 अम्लीय
शराब (Wine) 2.8 अम्लीय
सिरका 2.4 अम्लीय
नींबू का रस 2.2 अम्लीय

pH से जुड़े दो महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय प्रभाव:

  1. अम्लीय वर्षा (Acid Rain): जब वर्षा के जल का pH मान 5.6 से कम हो जाता है, तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है, जो जलीय जीवों और स्मारकों के लिए हानिकारक है।
  2. दंत क्षय (Tooth Decay): मुँह के अंदर का pH मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का सड़ना (क्षय) शुरू हो जाता है। दाँतों का सबसे बाहरी आवरण (इनैमल) कैल्शियम फॉस्फेट का बना होता है, जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। यह जल में तो नहीं घुलता, लेकिन मुँह का माध्यम अधिक अम्लीय (pH < 5.5) होने पर धीरे-धीरे संक्षारित होने लगता है।
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