पाठ : क्या लिखूँ (प्रश्न-उत्तर)
मेरे उत्तर मेरे तर्क
1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
सही उत्तर: (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
तर्क: लेखक के अनुसार निबंध लिखने के लिए मन के भाव (हैट) मुख्य वस्तु हैं, जबकि विषय (खूँटी) केवल एक सहारा मात्र है। लेखक का मानना है कि यदि मन में आवेग हो, तो किसी भी विषय पर अपने मनोभावों को भरा जा सकता है।
2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मान्टेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्त्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
सही उत्तर: (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
तर्क: मान्टेन ने अपने निबंधों में वही लिखा जो उन्होंने स्वयं देखा, सुना और अनुभव किया। ऐसे निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ होते हैं जिनमें लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास प्रकट होता है।
3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
सही उत्तर: (घ) अभिलाषा और अनुभव
तर्क: तरुणों (युवाओं) के लिए भविष्य उज्ज्वल होता है क्योंकि वे आगे की अभिलाषा रखते हैं, जबकि वृद्धों को अपने बीते हुए सुखद समय का अनुभव और स्मृति प्रिय लगती है।
4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्त्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
सही उत्तर: (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
तर्क: लेखक ने खुसरो का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि उन्होंने एक ही पद्य में चार अलग-अलग विषयों को शामिल कर लिया था। लेखक भी इसी पद्धति का अनुसरण कर एक ही निबंध में दो अलग-अलग विषयों को समेटना चाहते थे।
5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
सही उत्तर: (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है
तर्क: लेखक के अनुसार मानव इतिहास में ऐसा कोई काल नहीं हुआ जब सुधारों की जरूरत न रही हो। जैसे-जैसे नए दोष उत्पन्न होते हैं, वैसे-वैसे नए सुधार होते जाते हैं और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।
मेरी समझ मेरे विचार
प्रश्न 1: निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर: निबंध लेखन की मानसिक स्थिति को लेकर ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में स्पष्ट अंतर है:
- ए.जी. गार्डिनर के विचार: उनके अनुसार, लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति की आवश्यकता होती है जब मन में उमंग और हृदय में स्फूर्ति आती है। ऐसी स्थिति में विषय महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि मन के आवेग मुख्य होते हैं। वे मानते हैं कि जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है, वैसे ही मनोभावों को व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय उपयुक्त है।
- लेखक के विचार: लेखक (बख्शी जी) स्वीकार करते हैं कि उन्होंने कभी उस मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं किया जिसमें भाव स्वतः उमड़ आते हैं। उन्हें निबंध लिखने के लिए बहुत सोचना, चिंता करना और कठिन परिश्रम करना पड़ता है। उनके लिए निबंध लेखन एक अनायास प्रक्रिया न होकर एक श्रमसाध्य कार्य है।
प्रश्न 2: लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर: लेखक ने वर्तमान के प्रति तरुणों और वृद्धों के अलग-अलग दृष्टिकोणों को उनकी असंतुष्टि का मुख्य कारण बताया है:
- तरुणों की असंतुष्टि का कारण: तरुण अभी जीवन के संघर्ष से दूर होते हैं, इसलिए उन्हें भविष्य अत्यंत उज्ज्वल और मनमोहक लगता है। वे वर्तमान को बदलकर उसे भविष्य के अपने स्वप्नों जैसा बनाना चाहते हैं, इसलिए वे क्रांति के समर्थक होते हैं। वर्तमान की धीमी गति उन्हें असंतुष्ट करती है।
- वृद्धों की असंतुष्टि का कारण: वृद्ध अपनी युवावस्था से दूर आ चुके होते हैं, इसलिए उन्हें अपना अतीत ही सुखद और गौरवशाली लगता है। वे अतीत की स्मृतियों को खींचकर वर्तमान में देखना चाहते हैं और अतीत के गौरव के संरक्षक होते हैं। वर्तमान में अतीत जैसी गरिमा न देख पाना उनकी असंतुष्टि का कारण है।
प्रश्न 3: नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
उत्तर:
- विषय: नमिता ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ विषय पर निबंध लिखवाना चाहती है, जबकि अमिता का आग्रह ‘समाज-सुधार’ पर लिखने का है।
- कठिनाइयाँ: लेखक को इन विषयों पर लिखने में कई चुनौतियाँ दिखीं:
- लेखक को लगा कि ‘दूर के ढोल सुहावने’ जैसे विषय पर पाँच पेज का निबंध लिखना कठिन है।
- ‘समाज-सुधार’ एक ऐसा विषय है जिस पर अनादि काल से बहस हो रही है और विद्वानों में भी इसके प्रति मतभेद हैं; ऐसे गहन विषय को सीमित पृष्ठों में समेटना लेखक को कठिन लगा।
- लेखक के पास उस समय न तो कोई पुस्तकालय था और न ही कोई विश्वकोश जिससे वे सामग्री जुटा सकें; उन्हें केवल अपने ज्ञान के भरोसे ही दो घंटों में दो निबंध तैयार करने थे।
प्रश्न 4: निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-कौन सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर: निबंधशास्त्र के आचार्यों द्वारा सुझाई गई प्रमुख युक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
- लघुता: निबंध छोटा होना चाहिए, क्योंकि छोटे निबंध में रचना की सुंदरता बनी रहती है।
- सामग्री और शैली: निबंध के दो प्रधान अंग हैं— सामग्री (विचार समूह) और शैली (अभिव्यक्ति का ढंग)।
- रूपरेखा: निबंध लिखने से पहले उसकी एक स्पष्ट रूपरेखा बना लेनी चाहिए।
- भाषा का प्रवाह: भाषा में प्रवाह के लिए वाक्य छोटे और एक-दूसरे से संबद्ध होने चाहिए। कुछ विद्वान अस्पष्टता या दुरूहता को भी गंभीरता लाने के लिए आवश्यक मानते हैं।
प्रश्न 5: मान्टेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर: मान्टेन की पद्धति के अनुसार देखने, सुनने और अनुभव करने की निबंध लेखन में निम्नलिखित उपयोगिताएँ हैं:
- सच्ची अनुभूति: यह पद्धति लेखक को किसी विषय पर तर्कपूर्ण विवेचना के बजाय अपनी ‘सच्ची अनुभूति’ लिखने के लिए प्रेरित करती है।
- स्वच्छंद रचना: ऐसे निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ होते हैं जहाँ लेखक अपनी दृष्टि से संसार को देखता है और अपने भावों से ग्रहण करता है।
- सजीवता और उल्लास: व्यक्तिगत अनुभव से लिखे गए निबंधों में लेखक का उल्लास और सच्चे भावों की अभिव्यक्ति होती है, जो उसे विद्वता की गरिमा या कल्पना के बोझ से मुक्त रखती है। इससे निबंध पाठक के लिए अधिक जीवंत और आत्मीय बन जाता है।