पाठ - गिरिधर कविराय की कुण्डलिया
(प्रश्न-उत्तर)

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा ( )बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) “बिना विचारे” काम करने के क्या परिणाम होते हैं?

  • दूसरों से प्रशंसा मिलती है।
  • मन में शांति बनी रहती है।
  • अपना काम बिगड़ जाता है।
  • खान-पान सम्मान मिलता है।

उत्तर – अपना काम बिगड़ जाता है।

(2) “चित्त में चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?

  • प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुःख
  • बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता
  • खान-पान, सम्मान और राग-रंग का अभाव
  • दुनिया द्वारा की जाने वाली निंदा और उपहास

उत्तर – बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता

(3) “बीती ताहि बिसािर दे आगे की सुिध लेइ” पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है?

  • भविष्य की सफलता के लिए अतीत की गलतियों से सीखने की
  • अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की
  • अतीत और भविष्य दोनों घटनाओं को समान रूप से याद रखने की
  • अतीत और भविष्य दोनों को भूलकर केवल वर्तमान में जीने की

उत्तर – अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की

(4) “जो बिन आवै सहज में ताही में चित देइ” पंक्ति का क्या अर्थ है?

  • हमें कठिनाइयों और चुनौतियों से बचना चाहिए।
  • हमें आराम की तलाश करने में मन लगाना चाहिए।
  • हमें असंभव और कठिन कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
  • हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए।

उत्तर – हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए।

 

पंक्तियों पर चर्चा

प्रश्न: नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए—

(क) “बिना विचारे जो करै सो पाछे पिछताय।

काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥”

उत्तर: इन पंक्तियों का अर्थ है कि जो व्यक्ति किसी भी कार्य को बिना सोचे-समझे करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। इससे न केवल उसका अपना काम बिगड़ता है, बल्कि दुनिया के लोग भी उस पर हँसते हैं और उसका उपहास करते हैं।

(ख) “बीती तािह बिसािर दे आगे की सुिध लेइ।

जो बिन आवै सहज में ताही में िचत देइ॥”

उत्तर: कवि कहते हैं कि जो बीत गया उसे भुला देना चाहिए और भविष्य की चिंता या ध्यान रखना चाहिए। जो कार्य वर्तमान में सरलता से संपन्न हो सके, उसी में अपना मन लगाना चाहिए。

 

 मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए उनके सही अर्थों से मिलान यहाँ दिया गया है:

स्तंभ 1 स्तंभ 2 (सही अर्थ)
1. जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥ बिना विचार के किए गए कार्य के कारण मन अशांत रहता है। अच्छा खान-पान, सम्मान या जीवन की खुशियाँ भी उस व्यक्ति को सुख नहीं दे पातीं।
2. कह गिरधर कविराय दुःख कछु टरत न टारे। खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना विचारे॥ जो कार्य बिना विचार किए किया जाता है, वह लंबे समय तक मन में खटकता रहता है और उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना मुश्किल होता है।
3. ताही में चित देइ बात जोई बिन आवै। दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥ ऐसे कार्य कीजिए कि किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले और मन में किसी प्रकार का दोष या अपराधबोध न हो।
4. कह गिरधर कविराय यहै करु मन परतीती। आगे को सुख होइ समझि बीती सो बीती॥ अपने मन को इस बात पर विश्वास करना सिखाओ कि भविष्य की खुशी को समझते हुए अतीत के दुखों को भुलाकर आगे बढ़ना चाहिए।

 

सोच-विचार के लिए

(क) कविता में बिना विचार किए कार्य करने के क्या नुकसान बताए गए हैं?

उत्तर: बिना विचार किए कार्य करने से व्यक्ति का काम बिगड़ जाता है, समाज में उसकी हँसी होती है और उसके मन को शांति नहीं मिलती। उसे खान-पान और सुख-सुविधाओं में भी आनंद नहीं आता।

(ख) कुंडलिया में जो बातें सैंकड़ों साल पहले कही गई थीं, क्या वे आपके लिए भी उपयोगी हैं? कैसे?

उत्तर: हाँ, ये बातें आज भी अत्यंत उपयोगी हैं क्योंकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जल्दबाजी में लिए गए निर्णय अक्सर गलत साबित होते हैं। उदाहरण के लिए, बिना सोचे-समझे किसी अनजान व्यक्ति को ऑनलाइन पैसे भेजना भारी नुकसान पहुँचा सकता है।

(ग) “खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै।।” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए।

उत्तर: ‘मनहिं न भावै’ का अर्थ है ‘मन को अच्छा न लगना’। उदाहरण: जब हम किसी गलती के कारण दुखी होते हैं, तो स्वादिष्ट पकवान भी मन को नहीं भाते।

 

 शीर्षक

प्रश्न: इस पाठ को आप क्या शीर्षक देना चाहेंगे?

उत्तर: इस पाठ का उपयुक्त शीर्षक “बिना विचारे जो करै” या “सोच-समझकर काम” हो सकता है क्योंकि यह कविता विवेकपूर्ण निर्णय लेने की शिक्षा देती है।

 

शब्दों से जुड़े शब्द

प्रश्न: रिक्त स्थानों में ‘चित्त’ या ‘मन’ से जुड़े शब्द कुंडलियों में से चुनकर लिखिए—

उत्तर: जिय, परतीती, चैन, भावै।

 

काल से जुड़े शब्द

प्रश्न: ‘बीती’ और ‘आगे’ शब्द किस काल को व्यक्त करते हैं?

उत्तर: ‘बीती’ शब्द भूतकाल को और ‘आगे’ शब्द भविष्य काल को व्यक्त करता है।

 

कविता की रचना 

कवि की लेखन शैली और कुंडलियों की विशेषताओं का मिलान:

कविता की विशेषताएँ कविता की पंक्तियाँ
1. पंक्ति के अंतिम शब्द की ध्वनि आपस में मिलती-जुलती है। ताही में चित देइ बात जोई बिन आवै। दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥
2. कवि के नाम का उल्लेख किया गया है। कह गिरधर कविराय यहै करु मन परतीती॥
3. एक-दूसरे के विपरीत विचार एक साथ आए हैं। बीती तािह बिसािर दे आगे की सुिध लेइ।
4. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले एक से अधिक शब्द एक ही पंक्ति में आए हैं। बिना विचारे जो करै सो पाछे पिछताय। (‘ब’ और ‘प’ वर्ण की आवृत्ति)

 

सोच-समझकर (साइबर सुरक्षा संदेश)

छात्रों को संदेश मिलने पर क्या करना चाहिए:

  • बैंक खाता बंद होने का संदेश: बैंक से सीधा संपर्क करें, ओटीपी न दें।
  • लॉटरी जीतने का संदेश: ऐसी किसी लॉटरी पर भरोसा न करें, यह साइबर धोखाधड़ी हो सकती है।
  • चाचा के नाम से पैसे माँगना: व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करें और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करें।
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