पाठ - चिड़िया (प्रश्न-उत्तर)
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा ( )बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. कविता के आधार पर बताइए कि इनमें से कौन-सा गुण पक्षियों के जीवन में नहीं पाया जाता है?
- प्रेम-प्रीति
- मिल-जुलकर रहना
- लोभ और पाप
- निर्भय विचरण
उत्तर – लोभ और पाप
2. “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” कविता की यह पंक्ति किन भावों की ओर संकेत करती है?
- असमानता और विभाजन
- प्रतिस्पर्धा और संघर्ष
- समानता और एकता
- स्वार्थ और ईर्ष्या।
उत्तर – समानता और एकता
(3): “वे कहते हैं, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में” कविता में पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं?
- आकाश में उड़ते रहना
- बंधन में रहना
- स्वच्छंद रहना (सटीक उत्तर)
- संचय करना
उत्तर – स्वच्छंद रहना
पंक्तियों पर चर्चा
प्रश्न: नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए—
(क) “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखाती है!”
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि चिड़िया अपनी गतिविधियों और मधुर बोली के माध्यम से मनुष्य को आपसी प्रेम और स्नेह से रहने का तरीका सिखाती है।
(ख) “उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं”
उत्तर: कवि कहते हैं कि पक्षियों के मन में मनुष्यों की तरह लालच या छल-कपट नहीं होता। वे भविष्य की चिंता (परवाह) में पड़कर अनावश्यक संचय नहीं करते।
(ग) “सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं”
उत्तर: इसका आशय यह है कि पक्षी बिना किसी डर के अनंत आकाश में स्वतंत्रता पूर्वक घूमते हैं, वे किसी बंधन में बँधे नहीं हैं।
मिलकर करें मिलान
यहाँ संदर्भ का सही भाव के साथ मिलान दिया गया है:
| संदर्भ | सही भाव |
|---|---|
| 1. चिड़िया की बोली | प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश |
| 2. सोने की कड़ियाँ | बंधन और लालच |
| 3. निर्भय विचरण | स्वतंत्रता और निर्बाध जीवन |
| 4. मुक्ति-मंत्र | बंधन से मुक्ति |
| 5. दिनभर काम | श्रम और संतोष |
शीर्षक
प्रश्न: इस कविता के लिए ‘चिड़िया’ के अतिरिक्त कोई अन्य उपयुक्त शीर्षक सुझाइए।
उत्तर: इस कविता का अन्य शीर्षक “स्वतंत्रता का संदेश” या “जीना सीखो हमसे” हो सकता है क्योंकि यह कविता चिड़िया के माध्यम से जीवन जीने का आदर्श तरीका बताती है।
सोच-विचार के लिए
(क) “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर: यह भावना हमें एकता और भाईचारे की सीख देती है। यदि मनुष्य भी पक्षियों की तरह मिल-जुलकर काम करें और संसाधनों का साझा उपयोग करें, तो समाज से ईर्ष्या और संघर्ष समाप्त हो जाएगा।
(ख) “जो मिलता है अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं” पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है?
उत्तर: मनुष्य अक्सर अपनी आवश्यकता से कहीं अधिक जमा (लालच) करने की कोशिश करता है और दूसरों के हक का माल भी हड़पना चाहता है, जबकि पक्षी केवल अपने श्रम की कमाई और वर्तमान की भूख शांत करने तक सीमित रहते हैं।
(ग) “हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?” पक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है?
उत्तर: पक्षी प्राकृतिक रूप से स्वतंत्र हैं और किसी स्वार्थ या नियमों के बंधन में नहीं हैं। इसके विपरीत, मनुष्य अपने ही बनाए लालच, मोह-माया और ईर्ष्या की ‘सोने की कड़ियों’ (बेड़ियों) में जकड़ा हुआ है।
शब्दों से जुड़े शब्द
प्रश्न: कविता में आए क्रिया शब्दों (काम वाले शब्द) को ढूँढकर उनसे नए वाक्य बनाइए।
गाती: कोयल मधुर गीत गाती है।
उड़ते: पक्षी नीले आसमान में उड़ते हैं।
छोड़ो: हमें बुरी आदतों को छोड़ो और अच्छे मार्ग पर चलो।
सीखो: हमें बड़ों का सम्मान करना सीखो (सीखना चाहिए)।
शब्दों की बात
(एक शब्द अनेक अर्थ)
प्रश्न: दिए गए शब्दों का अलग-अलग अर्थ में प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए—
(क) कर:
(हाथ): हमें अपने कर कमलों से दान देना चाहिए।
(टैक्स): समय पर कर जमा करना नागरिक का कर्तव्य है।
(ख) जल:
(पानी): जीवन के लिए जल अनिवार्य है।
(जलना): आग में उसका हाथ जल गया।
(ग) फल:
(खाने वाला फल): मुझे आम का फल पसंद है।
(परिणाम): मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है।
(घ) आम:
(फल): आम फलों का राजा है।
(साधारण): वह एक आम आदमी है।
आज की पहेली
- दिखने में हरा, लाल मिर्च खाने वाला, मिट्ठूलाल: तोता
- कुहू-कुहू बोलने वाली, काली पर कौआ नहीं: कोयल
- सफेद-काले डैन (पंख), पानी में खेलने वाला: बत्तख/हंस