प्रश्न 1 – यदि आप नचिकेता होते तो आप ‍यम से कौन-से प्रश्न पछूते?

उत्तर: यदि मैं नतचकेता होता, तो मैं यम देव से यह पूछता कि मनुष्य अपने जीवन में स्थायी सुख और शांति कैसे प्राप्त कर सकता है?. साथ ही, मैं यह जानना चाहता कि क्या मृत्यु के बाद भी हमारा अस्तित्व बना रहता है और हम अपने कर्मों के फल से कैसे मुक्त होकर ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं? मैं उनसे यह भी पूछता कि इस विशाल ब्रह्मांड में मनुष्य की वास्तविक भूमिका क्या है और वह प्रकृति के साथ सामंजस्य कैसे बिठा सकता है?

प्रश्न 2 – बौद्ध मत के कुछ केंद्री‍य तिचारों को समझाइए। इन पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: बौद्ध मत के मुख्य विचार निम्नलिखित हैं:

      • अहिंसा: किसी भी जीव को शारीरिक या मानसिक नुकसान न पहुँचाना.
      • आंतरिक अनुशासन: बाहरी आडंबरों के बजाय मन की पवित्रता और अनुशासन पर बल.
      • अविद्या और मोह का त्याग: दुखों का मूल कारण अज्ञान (अविद्या) और लगाव (मोह) है, जिसे दूर करना आवश्यक है.
      • स्वयं पर विजय: युद्ध के मैदान में हजारों को हराने से बड़ी उपलब्धि स्वयं पर विजय पाना है.

प्रश्न 3- बुद्ध के उस उद्धरण पर कक्षा में चर्चा कीजिए जो इस प्रकार है — “जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता, जबकि कई लोग यहाँ (पवित्र नदी में) स्‍नान करते हैं” ताकि यह सुनिश्‍चि‍त किया जा सके कि सबको इसका अर्थ समझ में आ गया ।

उत्तर – बुद्ध के इस संदेश का अर्थ है कि केवल किसी पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के पाप नहीं धुलते और न ही वह भीतर से शुद्ध होता है. वास्तविक शुद्धि सत्य और धर्म (धम्म) के मार्ग पर चलने से आती है. यदि किसी व्यक्ति के विचार और आचरण पवित्र नहीं हैं, तो बाहरी जल उसे शुद्ध नहीं कर सकता।

प्रश्न 4 – जैन मत के कुछ मुख्य विचारों को समझाइए।

उत्तर: जैन मत के तीन प्रमुख स्तंभ हैं:

      • अहिंसा: सभी जीवित और संवेदनशील प्राणियों के प्रति दया रखना और उन्हें न सताना.
      • अनेकांतवाद: यह मानना कि सत्य के अनेक पक्ष होते हैं और उसे किसी एक दृष्टिकोण से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता.
      • अपरिग्रह: वस्तुओं का संचय न करना और अपनी आवश्यकताओं को केवल अनिवार्य चीजों तक सीमित रखना।

प्रश्न 5 – कक्षा में आंद्रे बेते के कथन पर विचार-विमर्श कीजिए।

उत्तर: समाजशास्त्री आंद्रे बेते का मानना है कि भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाली हजारों जातियों और जनजातियों ने प्राचीन काल से एक-दूसरे की धार्मिक आस्थाओं को प्रभावित किया है. हिंदू दर्शन न केवल जनजातीय प्रथाओं से प्रभावित हुआ है, बल्कि उसने उन्हें प्रभावित भी किया है, जिससे एक साझा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का निर्माण हुआ है।

प्रश्न 6 – अपने स्‍थानीय क्षेत्र में लोकप्रिय देवी-देवताओं तथा उनसे जुड़े त्‍योहारों की एक सूची बनाइए।

उत्तर:

माँ दुर्गा (दुर्गा पूजा),

भगवान जगन्नाथ (रथ यात्रा – जो मूल रूप से एक जनजातीय देवता थे),

भगवान गणेश (गणेश चतुर्थी) आदि।

प्रश्न 7 – कक्षा की गतिविधि के रूप में अपने क्षेत्र या राज् के दो या तीन जनजातीय समूहों की सूची बनाइए। इनमें से कुछ की परंपरा और विश्वास प्रणालियों के बारे में लिखि‍ए।

उत्तर:

      • टोडा (नीलगिरि): ये पर्वत शिखरों को देवताओं का निवास मानकर उनकी ओर उंगली से संकेत भी नहीं करते.
      • मुंडा और संथाल: ये ‘सिंगबोंगा’ को परमेश्वर मानते हैं जिन्होंने पूरे विश्व की रचना की है.
      • अरुणाचल की जनजातियाँ: ये ‘दोनीपोलो’ (सूर्य और चंद्रमा) की परमात्मा के रूप में पूजा करती हैं.

सही या गलत

  1. वैदिक ऋचाओं को ताड़-पत्र की पांडुलिपियों पर लिखा गया है। — गलत
  2. वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं। — सही.
  3. वैदिक कथन “एकम सत विप्रा बहुधा वदन्ति” में ब्रह्मांड की शक्तियों की एकता की मान्यता प्रकट होती है। — सही.
  4. बौद्ध मत वेदों से अधिक पुराना है। — गलत
  5. जैन मत का उद्भव बौद्ध मत की एक शाखा के रूप में हुआ। — गलत
  6. बौद्ध और जैन मत दोनों ही शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तथा सभी जीवों को नुकसान न पहुँचाने का समर्थन करते हैं। — सही.
  7. जनजातीय विश्वास परंपराएँ आत्मा और छोटे देवताओं तक सीमित हैं। — गलत

‘वेद’ शब्द की व्युत्पत्ति किस शब्द से हुई है और इसका अर्थ क्या है?
‘वेद’ शब्द ‘विद्’ धातु से आया है, जिसका अर्थ ‘ज्ञान’ होता है।

भारत के चार वेदों के नाम लिखिए।
चार वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हैं।

यूनेस्को (UNESCO) ने वैदिक पाठशैली को कब मान्यता दी?
यूनेस्को ने 2008 में इसे ‘मानवीयता के मौखिक और अमूर्त विरासत’ के रूप में मान्यता दी।

ऋग्वेद के अनुसार परम सत्य के बारे में क्या कहा गया है?
ऋग्वेद के अनुसार, “एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति” अर्थात् परम सत्य एक ही है, जिसे मनीषी अनेक नाम देते हैं।

वैदिक समाज में ‘जन’ से क्या तात्पर्य था?
प्रारंभिक वैदिक समाज में ‘जन’ लोगों के बड़े समूह या कबीलों को कहा जाता था, जैसे भरत, पुरु और कुरु।

वैदिक शासन पद्धति में सामूहिक निर्णयों के लिए किन दो संस्थाओं के संकेत मिलते हैं?
वेदों में सामूहिक निर्णय के लिए ‘सभा’ और ‘समिति’ जैसे शब्दों का उल्लेख मिलता है।

‘वेदांत’ दर्शन के अनुसार मानव जीवन और ब्रह्मांड क्या है?
वेदांत के अनुसार सब कुछ एक दिव्य तत्व है, जिसे ‘ब्रह्म’ या ‘तत्’ कहा जाता है।

उपनिषदों में कौन सी दो प्रमुख नई संकल्पनाएँ प्राप्त होती हैं?
उपनिषदों में पुनर्जन्म और कर्म (कर्म-फल) की संकल्पनाएँ मिलती हैं।

‘अहम ब्रह्मास्मि’ महावाक्य का सरल अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है “मैं ब्रह्म हूँ” अर्थात् मैं दिव्य हूँ।

गौतम बुद्ध का जन्म कहाँ हुआ था?
राजकुमार सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) का जन्म लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में हुआ था।

बुद्ध के अनुसार मानवीय कष्ट के दो मूल स्रोत क्या हैं?
बुद्ध के अनुसार ‘अविद्या’ और ‘मोह’ मानवीय कष्ट के मुख्य स्रोत हैं।

बौद्ध ‘संघ’ क्या है?
संघ भिक्षुओं और भिक्षुणियों का एक समुदाय है जिन्होंने स्वयं को बुद्ध के उपदेशों के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है।

‘जैन’ शब्द किस शब्द से बना है और इसका अर्थ क्या है?
यह ‘जिन’ शब्द से आया है, जिसका अर्थ ‘विजेता’ होता है (अविद्या और मोह पर विजय पाने वाला)।

वर्धमान महावीर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
महावीर का जन्म छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वैशाली के समीप हुआ था।

जैन धर्म के अनुसार ‘अपरिग्रह’ का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है ‘असंग्रह’, अर्थात् सांसारिक वस्तुओं का संचय न करना और अपनी जरूरतों को सीमित रखना।

भारत के संविधान में जनजातियों के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?
संविधान में इनके लिए ‘ट्राइब’ (अंग्रेजी) और ‘जनजाति’ (हिंदी) शब्दों का उपयोग किया गया है।

2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत में कितनी जनजातियाँ निवास करती हैं?
वर्ष 2011 के अनुसार भारत में 705 जनजातियाँ निवास करती थीं।

ओडिशा के भगवान जगन्नाथ मूल रूप से किस प्रकार के देवता थे?
परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ मूल रूप से जनजातीय देवता थे।

अरुणाचल प्रदेश की जनजातियाँ ‘दोनीपोलो’ के रूप में किसकी पूजा करती हैं?
वे सूर्य और चंद्रमा के मिले-जुले रूप (परमात्मा) की पूजा करती हैं।

मुंडा और संथाल जनजातियाँ ‘परमेश्वर’ को किस नाम से पुकारती हैं?
वे उन्हें ‘सिंगबोंगा’ कहती हैं, जिन्होंने संपूर्ण विश्व बनाया है।

भारतीय संस्कृति की तुलना एक वृक्ष से क्यों की गई है?
भारतीय संस्कृति एक प्राचीन वृक्ष के समान है जिसकी अनेक जड़ें और शाखाएं हैं। जड़ें (जैसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता) एक सामान्य तने को पोषण देती हैं, जिससे कला, साहित्य और दर्शन जैसी विभिन्न शाखाएं निकलती हैं,।

वैदिक ऋचाओं की रचना और उनके संरक्षण की प्रक्रिया क्या थी?
इनकी रचना ऋषियों और ऋषिकाओं ने संस्कृत के प्रारंभिक रूप में की थी। ये लिखित नहीं थीं, बल्कि मौखिक पाठ के माध्यम से बिना किसी परिवर्तन के 200 पीढ़ियों तक स्मृतिबद्ध रखी गईं।

वैदिक समाज में प्रचलित विभिन्न व्यवसायों का उल्लेख करें।
वैदिक ग्रंथों में किसान, बुनकर, कुम्हार, शिल्पकार, बढ़ई, आरोग्यकर्ता, नाई, पुजारी और नर्तक-नर्तकी जैसे अनेक व्यवसायों का उल्लेख है।

श्वेतकेतु और उसके पिता के संवाद से ‘ब्रह्म’ के बारे में क्या शिक्षा मिलती है?
उसके पिता ने समझाया कि ब्रह्म बरगद के बीज के समान अदृश्य होते हुए भी सर्वव्यापी है। जिस प्रकार मिट्टी से अलग-अलग बर्तन बनते हैं, वैसे ही सब कुछ एक ही तत्व ‘ब्रह्म’ से उत्पन्न हुआ है।

नतचकेता ने यम से क्या प्रश्न पूछा और उसे क्या उत्तर मिला?
नतचकेता ने पूछा कि “शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?”। यम ने उत्तर दिया कि आत्मा अमर है, जिसका न जन्म होता है और न मृत्यु।

गौतम बुद्ध के जीवन को बदलने वाले चार दृश्य कौन से थे?
29 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार एक वृद्ध, एक रोगी, एक शव और एक संन्यासी को देखा, जिससे उनके मन में जीवन के दुखों को खोजने की जिज्ञासा जगी।

बौद्ध दर्शन में ‘अहिंसा’ और ‘विजय’ की क्या परिभाषा दी गई है?
अहिंसा का अर्थ किसी जीव को नुकसान न पहुँचाना है। बुद्ध के अनुसार, युद्ध में हजारों को हराने से बड़ी उपलब्धि स्वयं पर विजय पाना है।

जैन दर्शन के ‘अनेकांतवाद’ के सिद्धांत को स्पष्ट कीजिए।
अनेकांतवाद का अर्थ है कि सत्य के अनेक पक्ष होते हैं और इसे केवल एक दृष्टिकोण या एक कथन द्वारा पूरी तरह नहीं समझाया जा सकता।

जनजातीय समुदायों का प्रकृति के प्रति क्या दृष्टिकोण है?
जनजातीय परंपराएं पर्वतों, नदियों और पेड़ों को पवित्र मानती हैं क्योंकि उनमें चेतना मानी जाती है। जैसे टोडा जनजाति नीलगिरी के शिखर की ओर उंगली से संकेत भी नहीं करती क्योंकि वे उन्हें देवस्थान मानती हैं।

समाजशास्त्री आंद्रे बेते ने जातियों और जनजातियों के संबंध में क्या कहा है?
उन्होंने बताया कि हज़ारों वर्षों से जातियाँ और जनजातियाँ आपस में एक-दूसरे की धार्मिक आस्थाओं को प्रभावित करती रही हैं, जिससे हिंदू दर्शन और जनजातीय विश्वासों का विकास हुआ है।

भारतीय संस्कृति की ‘सांस्कृतिक जड़ों’ के रूप में सिंधु-सरस्वती सभ्यता और वैदिक संस्कृति के अंतर्संबंधों की विवेचना कीजिए।
भारतीय संस्कृति की जड़ें अत्यंत प्राचीन हैं। विद्वानों के अनुसार, कुछ जड़ें सिंधु-सरस्वती सभ्यता की ओर जाती हैं, जबकि वेदों को भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है,। वैदिक ऋचाओं में ‘सप्तसिंधु’ क्षेत्र का उल्लेख है जहाँ ये रची गईं। ये दर्शन न केवल प्राचीन हैं बल्कि समय के साथ विकसित होकर आधुनिक भारतीय समाज की कला, साहित्य और आध्यात्मिक परंपराओं का आधार बने हैं,।

उपनिषदों के प्रमुख दार्शनिक सिद्धांतों और उनके वैश्विक संदेश का विस्तार से वर्णन करें।
उपनिषद ‘ब्रह्म’ और ‘आत्मन’ की एकता पर बल देते हैं, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक जीव में दिव्यता है,। इनका संदेश “सर्वे भवन्तु सुखिनः” (सभी सुखी रहें) के साथ वैश्विक कल्याण और रोगों से मुक्ति की कामना करता है। ‘तत् त्वम् असि’ जैसे सूत्र बताते हैं कि मनुष्य स्वयं उस परम तत्व का हिस्सा है, जो आपसी एकता और सहिष्णुता को बढ़ावा देता है,।

बौद्ध और जैन मतों के उदय के ऐतिहासिक कारणों और उनके प्रमुख नैतिक सिद्धांतों की तुलना कीजिए।
प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. में इन मतों ने वेदों की प्रभुता के बजाय व्यक्तिगत अनुशासन और तर्क पर बल दिया। बुद्ध ने अविद्या और मोह को दुख का कारण बताया, जबकि महावीर ने ‘जिन’ (विजेता) बनने के लिए कठोर अनुशासन सिखाया,। दोनों मत अहिंसा को सर्वोच्च मानते हैं और सभी जीवों के प्रति दया का भाव रखते हैं, चाहे वे मनुष्य हों या सूक्ष्म जीव,,।

भारतीय समाज में ‘जनजातीय जड़ों’ के महत्व और मुख्यधारा के हिंदू दर्शन के साथ उनके ‘आदान-प्रदान’ की प्रक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
भारत में जनजातीय परंपराएं मुख्यधारा के दर्शन के साथ समांतर रूप से विकसित हुई हैं। इनमें प्रकृति पूजा और परमात्मा की संकल्पना (जैसे सिंगबोंगा या दोनीपोलो) प्रमुख है,। भगवान जगन्नाथ और देवी माता के विभिन्न रूप इसके प्रमाण हैं कि जनजातीय देवताओं को व्यापक समाज ने स्वीकार किया। आंद्रे बेते के अनुसार, यह प्रभाव दोनों दिशाओं में रहा है, जिससे भारतीय संस्कृति समृद्ध हुई है।

वटवृक्ष (बरगद) को भारतीय सभ्यता का उत्कृष्ट प्रतीक क्यों माना जाता है? पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
वटवृक्ष अपनी गहरी जड़ों, विशाल तने और चारों ओर फैली शाखाओं के कारण भारतीय सभ्यता का प्रतीक है। यह सदियों तक बना रहता है और अनेक जीवों को आश्रय देता है। इसकी शाखाएं नीचे की ओर आकर नई जड़ें बनाती हैं, जो यह दर्शाती हैं कि कैसे भारतीय दर्शन (हिंदू, बौद्ध, जैन) अलग-अलग शाखाएं होने के बावजूद एक ही मूल तने से जुड़े हैं और निरंतर विस्तारित हो रहे हैं,।

 

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