रीढ़ की हड्डी
(प्रश्न-उत्तर)

मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. प्रश्न: एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीषविक किसका प्रतीक है?

(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का

(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का

(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का

(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का

उत्तर एवं तर्क: सही उत्तर (ग) है। एकांकी का मुख्य संदेश व्यक्ति के चरित्र की मजबूती पर आधारित है। उमा का शंकर से यह पूछना कि उसके ‘रीढ़ की हड्डी’ है या नहीं, वास्तव में उसके स्वतंत्र व्यक्तित्व और नैतिक साहस की कमी की ओर इशारा करता है।

2. प्रश्न: ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?

(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर

(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर

(ग) विवाह और अशिक्षा पर

(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर

उत्तर एवं तर्क: सही उत्तर (घ) है। यह एकांकी उन रूढ़िगत और दकियानूसी सामाजिक मान्यताओं पर चोट करती है जहाँ लड़कियों की शिक्षा को छिपाया जाता है और विवाह के लिए उन्हें एक वस्तु की तरह ‘नाप-तोल’ कर देखा जाता है।

3. प्रश्न: “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?

(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता

(ख) अनुभव और विवेक की कमी

(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता

(घ) उदासीनता और एकाकीपन

उत्तर एवं तर्क: सही उत्तर (क) है। शंकर की अपनी कोई स्वतंत्र राय नहीं है और वह लड़कियों के हॉस्टल के पास ताक-झाँक करते हुए पकड़े जाने पर अपमानित होकर भागा था। यह उसके चरित्र के खोखलेपन और साहस के अभाव को दर्शाता है।

4. प्रश्न: “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?

(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना

(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना

(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना

(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना

उत्तर एवं तर्क: सही उत्तर (घ) है। उमा अपनी शिक्षा को छिपाने के बजाय गर्व से स्वीकार करती है। उसके लिए शिक्षा का उद्देश्य डिग्रियाँ बटोरना मात्र नहीं, बल्कि वह आत्म-सम्मान और विवेक पाना है जिससे वह अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ आवाज़ उठा सके。

5. प्रश्न: गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?

(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।

(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।

(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।

(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।

उत्तर एवं तर्क: सही उत्तर (ख) है। रामस्वरूप अपनी बेटी की शिक्षा छिपाकर दिखावा करते हैं ताकि उसका विवाह हो सके, और गोपालप्रसाद अपने वकील बेटे के लिए ‘कम पढ़ी-लिखी’ लड़की चाहने की पुरानी और अनुचित परंपरा के समर्थक हैं। दोनों ही सामाजिक आडंबर और पारंपरिक दबाव में जी रहे हैं।

6. प्रश्न: इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?

(क) औपचारिक और शुष्क

(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण

(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक

(घ) भावुक और संक्षिप्त

उत्तर एवं तर्क: सही उत्तर (ख) है। एकांकी के संवाद अत्यंत सहज और बोलचाल की भाषा में हैं, लेकिन उनमें समाज की विसंगतियों पर गहरा तीखा व्यंग्य छिपा हुआ है, जो पाठकों को सोचने पर विवश करता है।

मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1: बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जब्कि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए। (संकेत– उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)

उत्तर: बाबू रामस्वरूप के व्यक्तित्व में आधुनिकता और रूढ़िवादिता का गहरा अंतर्द्वंद्व दिखाई देता है, जिसके प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

शिक्षा बनाम विवाह: रामस्वरूप ने अपनी बेटी उमा को उच्च शिक्षा दिलाई और उसे बी.ए. पास करवाया, जो उनके प्रगतिशील होने का प्रमाण है। लेकिन जब विवाह की बात आती है, तो वे उसी समाज की रूढ़ियों के आगे झुक जाते हैं जो कम पढ़ी-लिखी लड़की चाहती है।

झूठ का सहारा: वे गोपालप्रसाद के सामने यह झूठ बोलते हैं कि उमा केवल मैट्रिक तक पढ़ी है ताकि उसका रिश्ता तय हो सके। यह उनके आधुनिक विचारों और सामाजिक दबाव के बीच के द्वंद्व को दर्शाता है।

वस्तु की तरह प्रदर्शन: वे अपनी पढ़ी-लिखी बेटी को सजा-धजकर और हाथ में पान की तश्तरी लेकर लड़कों वालों के सामने आने को मजबूर करते हैं। वे चाहते हैं कि वह अपनी शिक्षा छिपाकर केवल अपनी सुंदरता और घरेलू कलाओं (सिलाई, संगीत आदि) का प्रदर्शन करे ताकि वह लड़कों वालों को ‘पसंद’ आ जाए।

प्रश्न 2: ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।

उत्तर: एकांकी में ‘रीढ़ की हड्डी’ (बैकबोन) शब्द का प्रयोग प्रतीकात्मक है और यह दो पात्रों के लिए अलग संदर्भों में आया है:

शंकर के लिए: शंकर के संदर्भ में यह उसकी शारीरिक और चारित्रिक दुर्बलता का प्रतीक है। शंकर की कमर झुकी हुई है और वह सीधा होकर नहीं बैठ पाता। साथ ही, उसका अपना कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं है और वह अनैतिक कार्यों (होस्टल के पास ताक-झाँक) में संलिप्त रहा है। उमा उसे चिढ़ाते हुए कहती है कि उसे अपनी ‘बैकबोन’ की जाँच करानी चाहिए, जिसका अर्थ उसके चरित्र और शारीरिक क्षमता दोनों की कमी से है।

समाज/गोपालप्रसाद के लिए: यह समाज की नैतिक दृढ़ता की कमी का प्रतीक है। गोपालप्रसाद जैसे लोग, जो स्वयं शिक्षित और वकील हैं, लेकिन विवाह को एक ‘बिजनेस’ मानते हैं और बहू के रूप में उच्च शिक्षित लड़की को स्वीकार नहीं करते, समाज की उस कमजोर ‘रीढ़’ को दर्शाते हैं जिसमें मानवीय मूल्यों और समानता का अभाव है।

प्रश्न 3: “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

उत्तर: प्रेमा का यह कथन उस समय के (1939 के आसपास) भारतीय समाज में स्त्री-शिक्षा के प्रति व्याप्त संकीर्ण और नकारात्मक दृष्टिकोण को उजागर करता है:

सीमित शिक्षा: प्रेमा का मानना है कि लड़कियों के लिए केवल ‘आ-ई’ और गिनती सीख लेना या ‘स्त्री-सुबोधिनी’ जैसी धार्मिक-घरेलू पुस्तकें पढ़ लेना ही पर्याप्त था।

शिक्षा को बोझ समझना: उनके अनुसार उच्च शिक्षा (बी.ए., एम.ए.) लड़कियों के लिए एक ‘जंजाल’ या समस्या है जो उनके विवाह में बाधा उत्पन्न करती है।

पारंपरिक भूमिका: यह सोच दर्शाती है कि समाज स्त्रियों को केवल घर की चारदीवारी और गृहस्थी के कामों तक ही सीमित देखना चाहता था और उनकी स्वतंत्र वैचारिक शक्ति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था।

प्रश्न 4: लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?

उत्तर: लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि यह मनुष्य के आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का सबसे सशक्त प्रतीक है:

जिस प्रकार शरीर को सीधा रखने के लिए रीढ़ की हड्डी अनिवार्य है, उसी प्रकार एक सभ्य समाज और सशक्त व्यक्तित्व के लिए चरित्र और स्वाभिमान का होना आवश्यक है। शंकर और उसके पिता गोपालप्रसाद दोनों ही इस ‘नैतिक रीढ़’ से विहीन हैं—एक अपने चरित्र के कारण और दूसरा अपनी दकियानूसी सोच के कारण।

वैकल्पिक शीर्षक: यदि मुझे दूसरा शीर्षक चुनना हो, तो मैं इसे “उमा का स्वाभिमान” कहना चाहूँगा।

कारण: पूरी एकांकी का मुख्य बिंदु उमा का वह साहसी निर्णय है जहाँ वह अपमान सहने के बजाय अपनी शिक्षा और मान-सम्मान को प्राथमिकता देती है। वह समाज की अनुचित माँगों के सामने झुकने से इनकार कर देती है और अपनी आवाज़ उठाकर यह सिद्ध करती है कि लड़कियाँ कोई ‘भेड़-बकरी’ या ‘फर्नीचर’ नहीं हैं, बल्कि उनका भी अपना हृदय और आत्म-सम्मान होता है।

तुलना और विचार

प्रश्न 1: “गोपालप्रसाद : भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।” एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-दोनों दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?

उत्तर: एकांकी में कई ऐसे प्रसंग हैं जहाँ लड़कों और लड़कियों की शिक्षा और सामाजिक स्थिति के प्रति भेदभावपूर्ण और भिन्न दृष्टि दिखाई देती है:

शिक्षा का उद्देश्य: गोपालप्रसाद स्पष्ट कहते हैं कि “मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना”, जबकि औरतों का अंग्रेजी अखबार पढ़ना या ‘पॉलिटिक्स’ पर बहस करना गृहस्थी चौपट कर देता है। उनके अनुसार, ऊँची तालीम केवल मर्दों के लिए है।

पात्रों का व्यवहार: रामस्वरूप अपनी बेटी उमा की बी.ए. की पढ़ाई को चोरी या पाप की तरह छिपाते हैं और उसे केवल ‘मैट्रिक’ पास बताते हैं। दूसरी ओर, वे गोपालप्रसाद के बेटे शंकर की मेडिकल शिक्षा को गर्व से बताते हैं।

तुलना के उदाहरण: गोपालप्रसाद तर्क देते हैं कि “मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं,” और रामस्वरूप हँसते हुए इसमें जोड़ते हैं कि “मर्द के दाढ़ी होती है, औरत के नहीं”।

भिन्नता की समझ: यह भिन्नता समाज की उस पितृसत्तात्मक और संकीर्ण सोच को दर्शाती है जहाँ पुरुष की शिक्षा को शक्ति और अधिकार का माध्यम माना जाता है, जबकि स्त्री की शिक्षा को उसके ‘नखरे’ या वैवाहिक जीवन में बाधा समझा जाता है। यहाँ पुरुष ‘खरीदार’ की भूमिका में है और स्त्री एक ‘वस्तु’ की तरह है जिसका ‘नाप-तोल’ किया जा सकता है।

प्रश्न 2: “मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।” एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी? (संकेत– शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि)

उत्तर: उमा के इस कथन और उसके व्यवहार से उसके व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ उभरती हैं:

आत्म-सम्मान और गौरव: उमा स्वयं को ‘बेबस भेड़-बकरी’ या ‘फर्नीचर’ नहीं मानती। वह अपनी शिक्षा (बी.ए. पास) को गर्व से स्वीकार करती है और इसे कोई पाप नहीं मानती।

साहस और निर्भीकता: वह गोपालप्रसाद जैसे प्रभावी व्यक्ति के सामने भी अपनी बात मजबूती से रखती है और उनके बेटे शंकर के अनैतिक आचरण की पोल खोल देती है।

स्वतंत्र वैचारिक शक्ति: उमा दिखावे (पाउडर-क्रीम) का विरोध करती है और यह मानती है कि लड़कियों के भी दिल होते हैं और उन्हें भी चोट लगती है।

व्यक्तित्व में इन विशेषताओं के आने के कारण:

शिक्षा: उमा का कॉलेज में पढ़ना और बी.ए. करना उसके आत्मबल और स्वतंत्र विचारों का मुख्य आधार है। शिक्षा ने उसे अपने अधिकारों के प्रति सचेत किया और समाज की विसंगतियों को समझने का दृष्टिकोण दिया।

कलात्मक अभिरुचि: संगीत (सितार-गायन) और पेंटिंग में उसकी दक्षता उसके व्यक्तित्व की गहराई और संवेदनशीलता को दर्शाती है, जिससे उसमें आंतरिक मजबूती आई।

पारिवारिक परिवेश: हालांकि उसके पिता उसकी शिक्षा छिपाते हैं, लेकिन उन्होंने उसे उच्च शिक्षा दिलाई और घर में एक सहायक (रतन) और कलात्मक माहौल प्रदान किया, जिससे उमा को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला। उसके व्यक्तित्व की यह नैतिक दृढ़ता ही एकांकी के शीर्षक ‘रीढ़ की हड्डी’ को सार्थक बनाती है।

व्याकरण की बात

1. मेरे शब्द

प्रश्न: एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।

उत्तर: पाठ के आधार पर चुने गए पाँच शब्द, उनके वाक्य और अर्थ निम्नलिखित हैं:

अधेड़

वाक्य: “अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वे अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं।”

अनुमानित अर्थ: पुरानी उम्र का।

शब्दकोश अर्थ: ढलती उम्र का या जिसकी आधी उम्र बीत गई हो。

दकियानूसी

वाक्य: “गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके दकियानूसी खयालों पर।”

अनुमानित अर्थ: पुराने विचारों वाला।

शब्दकोश अर्थ: पुराने विचारों का या रूढ़िवादी。

फ़ितरती

वाक्य: “आवाज़ से मालूम होता है कि काफी अनुभवी और फ़ितरती महाशय हैं।”

अनुमानित अर्थ: चालाक।

शब्दकोश अर्थ: चालबाज या प्रकृतिगत चतुर。

तशरीफ़

वाक्य: “इधर तशरीफ़ लाइये— इधर।”

अनुमानित अर्थ: सम्मान देना।

शब्दकोश अर्थ: आदर, सम्मान या गौरव。

खासियत

वाक्य: “झुकी कमर इनकी खासियत है।”

अनुमानित अर्थ: पहचान।

शब्दकोश अर्थ: विशेषता, गुण या प्रकृति。

2. भाषा में मुहावरे

प्रश्न: एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए—

उत्तर: रेखांकित मुहावरे और उनके नए वाक्य प्रयोग नीचे दिए गए हैं:

एकांकी का वाक्य = “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ।”

नया वाक्य: पुलिस को सामने देख नामी गुंडा भी भीगी बिल्ली बन गया।

एकांकी का वाक्य = “लेकिन वह तुम्हारी लाड़ली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”

नया वाक्य: खिलौना न मिलने पर छोटा बच्चा मुँह फुलाकर कोने में बैठ गया।

एकांकी का वाक्य = “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज़ की दवा हो?”

नया वाक्य: अगर तुम मुश्किल समय में दोस्त के काम न आ सको, तो फिर तुम किस मर्ज़ की दवा हो?

एकांकी का वाक्य = “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”

नया वाक्य: अधिक लाड-प्यार ने इकलौते बेटे को बहुत सिर चढ़ा दिया है।

एकांकी का वाक्य = “मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।”

नया वाक्य: सख्ताई करने पर चोर ने सारा सच उगल दिया।

एकांकी का वाक्य = “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”

नया वाक्य: बेवजह की बहस में मुझे शामिल करके आपने मुझे काँटों में घसीट लिया है।

एकांकी का वाक्य = “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”

नया वाक्य: भरी सभा में किसी की इज्जत उतारना बहुत ही ओछा काम है।

एकांकी का वाक्य = “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”

नया वाक्य: नकल करते पकड़े जाने पर छात्र परीक्षा हॉल से मुँह छिपाकर भागा।

3. संदर्भ में शब्द

प्रश्न: “बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।” एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।

उत्तर: इस कहावत का सकारात्मक अर्थ में प्रयोग करते हुए नया वाक्य निम्नलिखित है:

सकारात्मक प्रयोग: “पंडित दीनानाथ एक महान गायक थे, पर उनकी बेटी लता मंगेशकर ने तो विश्व भर में ख्याति प्राप्त कर ली; सच ही कहा गया है— बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।”

यह प्रयोग यह दर्शाता है कि संतान अपने माता-पिता की योग्यता और गुणों के मामले में उनसे भी आगे निकल गई है।

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