आखिरी चट्टान तक
(प्रश्न-उत्तर)

मेरे उत्तर मेरे तर्क

1. प्रश्न: लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?

(क) विवेकानंद चट्टान से

(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से

(ग) पश्चिमी क्षितिज से

(घ) सैंड हिल से

सही उत्तर: (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से

तर्क: यद्यपि लेखक पहले ‘सैंड हिल’ पर रुके थे, लेकिन वहाँ से अरब सागर की ओर का विस्तार एक दूसरे ऊँचे टीले की ओट में था। सूर्यास्त को पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में देखने के लिए लेखक सैंड हिल से आगे बढ़कर कई टीलों को पार करते हुए एक ऊँचे टीले पर पहुँचे, जहाँ से उन्हें खुला विस्तार दिखाई दिया।

2. प्रश्न: “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?

(क) मौन हो जाना

(ख) विस्मित हो जाना

(ग) भ्रमित हो जाना

(घ) आशंकित होना

सही उत्तर: (ख) विस्मित हो जाना

तर्क: तीनों समुद्रों के संगम स्थल पर जल के असीम विस्तार और प्रकृति की भव्यता को देखकर लेखक अपनी चेतना खो बैठे और स्वयं को उस दृश्य का ही एक हिस्सा (चट्टानों के बीच एक छोटी चट्टान) समझने लगे। यह प्रकृति के प्रति उनके गहरे आश्चर्य और विस्मय के भाव को प्रकट करता है।

3. प्रश्न: “मैंने, सिर्फ़ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?

(क) करुणा

(ख) विनम्रता

(ग) आत्मीयता

(घ) संतुष्टि

सही उत्तर: (घ) संतुष्टि

तर्क: लेखक थकने के बावजूद एक के बाद एक कई रेत के टीले पार करते रहे ताकि सूर्यास्त का स्पष्ट दृश्य देख सकें। जब अंततः वे सबसे ऊँचे टीले पर पहुँचकर खुले विस्तार को देख पाए, तो उन्हें अपने कठिन प्रयत्न की सार्थकता का अनुभव हुआ और वे एक विजेता की तरह संतुष्ट होकर बैठ गए।

4. प्रश्न: “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—

(क) बलखाती लहरों का

(ख) सागर की व्यापकता का

(ग) सूर्यास्त के दृश्य का

(घ) पश्चिमी क्षितिज का

सही उत्तर: (ख) सागर की व्यापकता का

तर्क: लेखक जब कन्याकुमारी की आखिरी चट्टान पर खड़े होकर तीनों दिशाओं में क्षितिज तक फैले पानी को देख रहे थे, तब उन्होंने सागर की इस असीम और अंतहीन व्यापकता को ‘शक्ति के विस्तार’ के रूप में महसूस किया।

5. प्रश्न: लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—

(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।

(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।

(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।

(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।

सही उत्तर: (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है

तर्क: यह यात्रा-वृत्तांत केवल भौगोलिक दृश्यों का वर्णन नहीं है, बल्कि इसमें लेखक के मन में उठने वाली भावनाओं, विस्मय, रोमांच और शांति का समावेश है। लेखक की प्रवाहमयी भाषा पाठकों को ऐसा अनुभव कराती है जैसे वे स्वयं लेखक के साथ यात्रा कर रहे हों,।

मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1: यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?

उत्तर: लेखक के सैंड हिल से आगे बढ़ने का मुख्य कारण सूर्यास्त का पूर्ण और अबाधित दृश्य देखना था। सैंड हिल पर पहुँचने के बाद लेखक ने अनुभव किया कि यद्यपि वहाँ से सामने का विस्तार तो दिखाई दे रहा था, परंतु अरब सागर की दिशा में एक अन्य ऊँचा टीला था, जिसने उस ओर के दृश्य को ओट (आड़) में ले रखा था। लेखक चाहते थे कि वे सूर्यास्त को पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में देख सकें, इसलिए वे उस अवरोध को पार करने के लिए सैंड हिल से आगे के टीलों की ओर चल दिए।

प्रश्न 2: लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?

उत्तर: लेखक ने कन्याकुमारी के जन-जीवन और वहाँ के लोगों के विषय में निम्नलिखित बातें बताई हैं:

  • शिक्षित बेरोजगारी: लेखक को एक ग्रेजुएट नवयुवक ने बताया कि कन्याकुमारी की आठ हज़ार की आबादी में लगभग चार-पाँच सौ शिक्षित बेरोजगार युवक हैं, जिनमें से सौ के करीब ग्रेजुएट हैं।
  • व्यवसाय: इन युवकों का मुख्य काम नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना और आपस में बहस करना है। कुछ युवक अपनी जीविका के लिए छोटे-मोटे काम करते हैं, जैसे वह ग्रेजुएट युवक फोटो-एल्बम बेच रहा था।
  • जीवनशैली: स्थानीय युवक विवेकानंद चट्टान को अपनी प्रेरणा का स्रोत मानते हैं। वे अक्सर दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं और सीपियों का गूदा खाते हैं।
  • हस्तशिल्प: स्थानीय नवयुवतियाँ टोकरियों में शंख और मालाएँ लेकर पर्यटकों को दिखाती हैं और उनके साथ मोल-तोल करती हैं।

प्रश्न 3: “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: ‘प्रयत्न की सार्थकता’ का अभिप्राय उस लक्ष्य की प्राप्ति से है जिसके लिए लेखक शारीरिक थकान के बावजूद संघर्ष कर रहे थे। लेखक एक के बाद एक कई रेत के टीलों को इस आशा में पार करते रहे कि उन्हें पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखाई दे सके। जब अंततः वे सबसे ऊँचे टीले पर पहुँचे और उन्हें सामने समुद्र में उतरती रेत की लंबी ढलान और खुला आकाश दिखाई दिया, तो उन्हें लगा कि उनकी चढ़ाई और परिश्रम सफल हो गया है। इसी उपलब्धि और मानसिक संतोष को उन्होंने प्रयत्न की सार्थकता कहा है।

प्रश्न 4: यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।

उत्तर: लेखक ने कन्याकुमारी की यात्रा के दौरान कई ऐसे दृश्यों का अनुभव किया जो उनके लिए बिल्कुल अनूठे और नए थे:

  • बहुरंगी रेत: समुद्र तट पर लेखक ने अनगिनत अनाम रंगों की रेत देखी, जिसमें एक-एक इंच पर रंग बदल रहे थे। उन्होंने काली घटा और घनी लाल आँधी के सम्मिश्रण जैसी रेत पहले कभी नहीं देखी थी।
  • सागर का संगम और शक्ति: विवेकानंद चट्टान पर खड़े होकर तीनों समुद्रों (अरब सागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी) के संगम को देखना और “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” को महसूस करना उनके लिए एक दिव्य अनुभव था।
  • विचित्र नाव: उन्होंने रबर के पेड़ के मात्र तीन तनों को साथ जोड़कर बनाई गई मल्लाखों की छोटी नाव देखी, जो लहरों के बीच से उन्हें चट्टान तक ले गई।

प्रश्न 5: यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।

उत्तर: लेखक की मानसिक दृढ़ता को दर्शाने वाले दो प्रमुख अंश निम्नलिखित हैं:

  1. टीलों की चढ़ाई के दौरान: “टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था। हर अगले टीले पर पहुँचने पर लगता कि शायद अब एक ही टीला और है…”। यह अंश दिखाता है कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए वे शारीरिक कष्ट को अनदेखा कर निरंतर आगे बढ़ते रहे।
  2. समुद्र की लहरों से संघर्ष: जब बढ़ते पानी के कारण तट का रास्ता खतरनाक हो गया, तो लेखक डरे नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए निर्णय लिया और दौड़ पड़े। एक ऊँची चट्टान से टकराकर खरोंच आने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और चट्टान की नोकों पर पैर रखते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुँच गए।

व्याकरण की बात

क्रिया-विशेषण की पहचान और रेखांकन

निर्देश: जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द ‘विशेषण’ कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द ‘क्रिया-विशेषण’ कहलाते हैं (जैसे— धीरे-धीरे, जल्दी-जल्दी आदि)। नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।

वाक्य:

(क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।

(ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।

(ग) मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।

उदाहरण (जिसके आधार पर उत्तर लिखना है):

वाक्य क्रिया-विशेषण क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है
मैं जल्दी-जल्दी चलने लगा। जल्दी-जल्दी ‘चलने लगा’ क्रिया की विशेषता

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