पाठ : तीन बुद्धिमान
(प्रश्न-उत्तर)

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा ( )बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1): लोककथा में पिता ने अपने बेटों से ‘धन संचय करने’ को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है?

  • खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना
  • पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना ⭐
  • ऊँट का व्यापार करना
  • गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना

उत्तर: ‘पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करने’

(2): तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत-कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

  • दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
  • अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। ⭐
  • राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए।
  • ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।

उत्तर: ‘अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए’।

लोककथा ‘तीनों बुद्धिमान भाई’ के ‘मेरी समझ से’ खंड का तीसरा प्रश्न और उसका सही उत्तर स्रोतों के आधार पर नीचे दिया गया है:

(3): राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया?

  • भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।⭐
  • राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था।
  • राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी।
  • भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।

उत्तर:  भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया

लोककथा ‘तीनों बुद्धिमान भाई’ के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, आपके द्वारा पूछे गए चौथे प्रश्न का सही उत्तर नीचे दिया गया है:

प्रश्न (4): लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?

  • दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
  • अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। ⭐
  • राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए।
  • ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।

उत्तर: अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।

पंक्तियों पर चर्चा

(क): “रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।”

उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि ज्ञान और मानसिक कौशल (पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि), भौतिक धन जैसे रुपये-पैसे या सोने-चाँदी से कहीं अधिक मूल्यवान और स्थायी हैं। पिता अपने बेटों को समझा रहे हैं कि यदि वे अपनी समझने और देखने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो यह ऐसा धन है जो कभी खत्म नहीं होगा। इससे वे जीवन के हर मोड़ पर सफल होंगे और कभी भी खुद को दूसरों से कमतर महसूस नहीं करेंगे।

(ख): “हर वस्तु और स्थिति को पूर्णतः समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए।”

उत्तर: यह पंक्ति गहन अवलोकन के महत्व को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि हमें अपने परिवेश में मौजूद हर छोटी-बड़ी चीज़ और हर घटना को सतही तौर पर देखने के बजाय उसे पूरी गहराई से समझने की आदत डालनी चाहिए। जब हम किसी स्थिति का सूक्ष्मता से निरीक्षण करते हैं, तो कोई भी महत्वपूर्ण विवरण हमारी नज़रों से नहीं छूटता, जो सही निर्णय लेने में सहायक होता है।

(ग): “हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।”

उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि कोई भी असाधारण कौशल रातों-रात हासिल नहीं होता; इसके लिए निरंतर अभ्यास और धैर्य की आवश्यकता होती है। यहाँ तीनों भाई बता रहे हैं कि उन्होंने अपने आस-पास की दुनिया को गौर से देखने और तर्कपूर्ण ढंग से सोचने की अपनी इस विशेष योग्यता को विकसित करने के लिए बहुत मेहनत की है और काफी समय समर्पित किया है।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 स्तंभ 2
1. कुछ समय पश्चात पिता चल बसे। 2. थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया।
2. हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे। 5. हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा।
3. घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा। 1. घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तीनों भाइयों को अविश्वास से देखा।
4. बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। 4. बचपन से ही हमें आदत हो गई है कि हम हर छोटी-बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य देते हैं।
5. लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। 3. लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था।

सोच-विचार के लिए

(क) तीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके विषय में कैसे बता दिया था?

उत्तर: तीनों भाइयों ने अपने परिवेश के सूक्ष्म अवलोकन और तार्किक क्षमता से ऊँट के बारे में बताया था। सबसे बड़े भाई ने धूल पर ऊँट के पैरों के चिह्नों को देखकर उसके बड़े आकार का अनुमान लगाया। मँझले भाई ने देखा कि सड़क के केवल दायीं ओर की घास ऊँट ने चरी थी, जबकि बायीं ओर की घास वैसी ही थी, जिससे उसने अनुमान लगाया कि ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता। सबसे छोटे भाई ने जमीन पर ऊँट के बैठने के निशानों के पास महिला के जूतों और छोटे पैरों के निशान देखकर महिला और बच्चे का अनुमान लगाया।

(ख) आपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किस बात को दिया गया है— तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।

उत्तर: इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व अवलोकन और तार्किक सोच को दिया गया है। पाठ के अंत में राजा भी भाइयों की असाधारण पैनी दृष्टि और तीक्ष्ण बुद्धि से चकित रह जाता है। भाइयों ने स्वयं कहा है कि उन्होंने अपने परिवेश को ‘पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने’ के प्रयास में बहुत समय लगाया है। हालाँकि वे सत्यवादी भी थे, लेकिन उनकी मुख्य विशेषता चीजों को गहराई से देखना और समझना थी।

(ग) लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?

उत्तर: शुरुआत में राजा को लगा कि ऊँट के स्वामी के बताए बिना भाइयों ने ऊँट का इतना सटीक वर्णन किया है, तो अवश्य ही उन्होंने उसे चुराया होगा। लेकिन जब राजा ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक छिपाई गई पेटी मंगवाई और भाइयों ने अपनी बुद्धि से उसका सही अनुमान लगा लिया, तब राजा को उनकी निर्दोषता का यकीन हो गया। उनकी तार्किक व्याख्या सुनने के बाद राजा ने उन्हें निर्दोष मान लिया।

(घ) ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता?

उत्तर: ऊँट के स्वामी ने संदेह इसलिए किया क्योंकि उन लोगों ने ऊँट के बारे में ऐसी बारीक बातें (जैसे- आँख की स्थिति, सवार महिला और बच्चा) बता दी थीं जो केवल वही जान सकता था जिसने ऊँट को देखा हो। मेरे विचार से, उसे शक करने के बजाय भाइयों से यह पूछना चाहिए था कि उन्होंने ये निशान कहाँ देखे, जिससे उसे अपने ऊँट की सही दिशा का पता चल जाता।

(ङ) पिता ने बेटों को “दूसरे प्रकार का धन” संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तर: पिता का मानना था कि भौतिक धन (सोना-चाँदी) के स्थान पर तीव्र बुद्धि और पैनी दृष्टि अधिक मूल्यवान है क्योंकि यह ऐसा धन है जिसकी कभी कमी नहीं रहती । इससे पता चलता है कि पिता अत्यंत अनुभवी, बुद्धिमान और दूरदर्शी थे, जो अपने बेटों को जीवन जीने का सही और स्थायी कौशल सिखाना चाहते थे।

(च) राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के बारे में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

उत्तर: पेटी वाली परीक्षा से यह निष्कर्ष निकलता है कि राजा एक न्यायप्रिय और चतुर निर्णयकर्ता था। वह केवल सुनी-सुनाई बातों या बाहरी साक्ष्यों पर भरोसा करने के बजाय स्वयं सत्य का परीक्षण करने में विश्वास रखता था। वह गुणों का पारखी था, इसीलिए सच्चाई सामने आने पर उसने भाइयों को अपने दरबार में रख लिया।

(छ) आप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर: मैं भाइयों की ‘पैनी दृष्टि’ (गहन अवलोकन) और ‘तार्किक विश्लेषण’ की विशेषता को अपनाना चाहूँगा। जैसा कि पाठ में बताया गया है, वे किसी भी वस्तु या स्थिति को पूर्णतः समझने और जानने का प्रयास करते थे। यह गुण न केवल समस्याओं को हल करने में मदद करता है, बल्कि हमें अपने परिवेश के प्रति अधिक जागरूक और सजग बनाता है।

 

अनुमान और कल्पना से

(क) यदि राजा ने बिना जाँच किए भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता, तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?

उत्तर –

  • निर्दोषों को दंड: तीनों भाइयों को उस ऊँट की चोरी और महिला एवं बच्चे की हत्या के झूठे आरोप में कठोर दंड भुगतना पड़ता, जबकि उन्होंने ऊँट को देखा तक नहीं था,।
  • प्रतिभा का अनादर: भाइयों के पास जो ‘बुद्धि का बहुत बड़ा कोष’ और ‘पैनी दृष्टि’ थी, उसे समाज और राजा कभी पहचान नहीं पाते। उनकी तार्किक सोच को प्रशंसा मिलने के बजाय अपराध का साक्ष्य मान लिया जाता।
  • अन्यायपूर्ण अंत: लोककथा का सुखद अंत, जहाँ भाइयों को राजा के दरबार में स्थान मिला, एक दुखद और अन्यायपूर्ण अंत में बदल जाता।
  • सीख का अभाव: इस कथा से जो महत्वपूर्ण सीख मिलती है कि ‘अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए’, वह अधूरी रह जाती। साथ ही, पिता द्वारा दी गई ‘बुद्धि रूपी धन’ संचित करने की सलाह का महत्व भी सिद्ध नहीं हो पाता क्योंकि अंत में बुद्धि उन्हें बचाने के काम नहीं आती।

(ख) यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।

उत्तर: यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता, तो संभवतः राजा का उन पर विश्वास पूरी तरह से नहीं जम पाता। हो सकता है राजा उन्हें निर्दोष मानकर छोड़ तो देता, लेकिन उन्हें अपनी असाधारण पैनी दृष्टि और तीक्ष्ण बुद्धि के लिए वह सम्मान और दरबार में स्थान न मिलता जो अंत में मिला। कथा का अंत सुखद होने के बजाय साधारण होता।

(ग) लोककथा में यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें कौन-कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था?

उत्तर: यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते, तो उन्हें निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था:

  • उन्हें ऊँट के स्वामी के क्रोध और अविश्वास का सामना करना पड़ता क्योंकि वह पहले से ही उन्हें चोर समझ रहा था।
  • उन्हें पहाड़ों और सुनसान-वीरान घाटियों में फिर से भटकना पड़ता, जिससे उनकी थकान और शारीरिक पीड़ा (जैसे पैरों में छाले) बढ़ सकती थी।
  • जंगली जानवरों का डर और खाने-पीने के सामान की कमी भी एक बड़ी चुनौती होती।

(घ) यदि राजा के स्थान पर आप होते तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किस प्रकार के सवाल या गतिविधियाँ करते? अपनी कल्पना साझा करें।

उत्तर: यदि राजा के स्थान पर मैं होता, तो भाइयों की अवलोकन क्षमता जाँचने के लिए कुछ ऐसी गतिविधियाँ करता:

  • मैं उन्हें किसी भीड़भाड़ वाले बाज़ार से गुज़रने को कहता और बाद में किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु के बारे में सूक्ष्म विवरण पूछता।
  • मैं उन्हें एक बंद कमरे में ले जाता जहाँ बहुत सारी वस्तुएँ बिखरी होतीं और फिर एक वस्तु को हटाकर या उसकी स्थिति बदलकर उनसे पूछता कि क्या बदला है।
  • मैं उनसे किसी ऐसी घटना का वर्णन करने को कहता जो उनके सामने घटित हुई हो, ताकि मैं देख सकूँ कि वे स्थितियों को कितनी गहराई से समझते हैं।

 

शब्द से जुड़े शब्द

शब्द ‘बुद्धि’ से संबंधित निम्नलिखित शब्द हैं

  1. मस्तिष्क
  2. तीक्ष्ण
  3. बुद्धिमान
  4. विवेक,
  5. समझ,
  6. चतुराई
  7. ज्ञान

 

कारक

कारक : संज्ञा या सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होकर क्रिया या अन्य पदों से संबंध जोड़ने वाले शब्दों को कारक या परसर्ग कहते हैं। जैसा कि पाठ के उदाहरण में दिया गया है— “भाइयों ने जवाब दिया” वाक्य में ‘ने’ भाइयों और जवाब देने की क्रिया के बीच संबंध जोड़ रहा है।

  1. “हमने तो तुम्हारे ऊँट को देखा तक नहीं”, भाइयों ने परेशान होते हुए कहा।,
  2. “मैं अपने रेवड़ों को पहाड़ों पर लिये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट पर मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।”,
  3. राजा ने उसी समय अपने मंत्री को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया।,
  4. यह सुनकर राजा ने पेटी को पास लाने का आदेश दिया। सेवकों ने तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ने सेवकों से पेटी खोलने के लिए कहा।

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