प्रश्न 1. इस अध्याय में अध्ययन की गई सभ्यता के अनेक नाम क्यों हैं? इनके महत्त्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर – इस सभ्यता को मुख्य रूप से तीन नामों से जाना जाता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना ऐतिहासिक महत्त्व है:
- हड़प्पा सभ्यता: यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि लगभग एक शताब्दी पहले (1920-21) हड़प्पा इस सभ्यता से संबंधित खोजा गया पहला नगर था।
- सिंधु घाटी सभ्यता: खोज के शुरुआती दौर में अधिकांश पुरास्थल सिंधु नदी के मैदानों में पाए गए थे।
- सिंधु-सरस्वती सभ्यता: बाद के शोधों से पता चला कि पुरास्थलों की सबसे अधिक सघनता सरस्वती (घग्गर-हाकरा) नदी की द्रोणी में है, इसलिए यह नाम भौगोलिक रूप से अधिक सटीक माना जाता है।
प्रश्न 2. सिंधु-सरस्वती सभ्यता की उपलब्धियों का सार देते हुए संक्षिप्त रिपोर्ट (150 से 200 शब्द) लिखिए।
उत्तर – सिंधु-सरस्वती सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन और अग्रणी सभ्यताओं में से एक थी, जिसकी सबसे बड़ी उपलब्धि इसका नियोजित नगरीकरण था। इन नगरों में ग्रिड प्रणाली पर आधारित चौड़ी सड़कें और एक उन्नत जल-निकासी प्रणाली थी जो स्वच्छता के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। जल प्रबंधन के क्षेत्र में धौलावीरा के विशाल पत्थर काटकर बनाए गए जलाशय और मोहनजो-दड़ो का ‘महासनानागार’ इनके उत्कृष्ट इंजीनियरिंग कौशल के प्रतीक हैं।
आर्थिक रूप से, ये लोग उन्नत कृषि करते थे और विश्व में कपास उगाने वाले प्रथम लोग थे। शिल्प कला में ये कान्र्नेलियन के सुंदर मोतियों और हाथी दाँत की वस्तुओं के निर्माण में दक्ष थे। इनका व्यापार न केवल भारत के भीतर बल्कि मेसोपोटामिया और ओमान जैसी विदेशी सभ्यताओं के साथ लोथल जैसे बंदरगाहों के माध्यम से फैला हुआ था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बी.बी. लाल के अनुसार, यह समाज शोषण के बजाय आपसी सामंजस्य पर आधारित था, जहाँ अमीर और गरीब के घरों के निर्माण की गुणवत्ता में अधिक अंतर नहीं था।
प्रश्न 3. कल्पना कीजिए कि आपको हड़प्पा से कालीबंगा तक यात्रा करनी है। आपके पास विभिन्न विकल्प क्या हैं? प्रत्येक विकल्प में लगने वाले समय का अनुमान लगाएँ।
उत्तर :
- पैदल यात्रा: यह सबसे आम विकल्प था, जिसमें दूरी तय करने में 2 से 3 सप्ताह लग सकते थे।
- बैलगाड़ी: खुदाई में मिली खिलौना गाड़ियों से संकेत मिलता है कि बैलगाड़ियाँ परिवहन का मुख्य साधन थीं। इससे यात्रा पैदल की तुलना में अधिक आरामदायक होती और इसमें लगभग 10-12 दिन लगते।
- नाव (जलमार्ग): चूंकि दोनों नगर नदियों (रावी और सरस्वती) के तंत्र से जुड़े थे, अतः नाव द्वारा यात्रा सबसे तीव्र और सुगम रही होगी。 इसमें लगभग 5-7 दिन का समय लग सकता था।
प्रश्न 4. कल्पना कीजिए कि यचद हड़प्पा के किसी पुरुष या महिला को हम आज के भारत के सामान्य रसोईघर में ले आते हैं, तो उन्हें सबसे बड़े चार या पाँच आश्चर्य क्या लगेंगे?
उत्तर – हड़प्पावासी के लिए आधुनिक रसोईघर में निम्नलिखित आश्चर्यजनक होंगे:
- एलपीजी/इंडक्शन चूल्हा: वे आग जलाने के लिए केवल लकड़ी या उपलों का उपयोग जानते थे।
- स्टेनलेस स्टील/प्लास्टिक के बर्तन: उन्होंने केवल मिट्टी (टेराकोटा) और कांसे के बर्तन देखे थे।
- विद्युत उपकरण: मिक्सर, माइक्रोवेव और रेफ्रिजरेटर उनके लिए बिल्कुल जादुई होंगे।
- नल से आता पानी: वे कुओं या जलाशयों से पानी लाने के अभ्यस्त थे।
- मसालों और तेल के पैकेट: उनके समय में भोजन पूरी तरह प्राकृतिक और स्थानीय स्रोतों पर आधारित था。
प्रश्न 5. इस अध्याय के चित्रों के आधार पर उन आभूषणों/हाव-भावों/वस्तुओं की सूची बनाइए, जो अभी भी 21वीं शताब्दी में भी परिचित प्रतीत होते हैं।
उत्तर
- आभूषण: कंधों तक पहनी जाने वाली चूड़ियाँ (नर्तकी की मूर्ति की तरह), जो आज भी राजस्थान और गुजरात की ग्रामीण महिलाओं में प्रचलित हैं।
- हाव-भाव: ‘नमस्ते’ की मुद्रा में बैठी मिट्टी की मूर्ति।
- प्रतीक: स्वास्तिक का चिह्न, जो आज भी अत्यंत पवित्र माना जाता है。
- वस्तुएं: मिट्टी के मटके, पासे (Dice), खेल-बोर्ड (शतरंज जैसा), दर्पण, हाथी दाँत का कंघा और मिट्टी की सीटी।
प्रश्न 6. धौलावीरा के जलाशयों की प्रणाली क्या सोच प्रतिबिंबित करती है?
उत्तर – धौलावीरा के जलाशय उनकी दूरदर्शिता और कुशल जल प्रबंधन की सोच को दर्शाते हैं। चूंकि यह क्षेत्र शुष्क था, उन्होंने वर्षा जल को संचित करने के लिए चट्टानों को काटकर विशाल जलाशय बनाए और उन्हें भूमिगत नालियों से जोड़ा। यह जल की हर बूंद को बचाने की उनकी नागरिक जिम्मेदारी और उन्नत तकनीकी समझ को प्रकट करता है।
प्रश्न 7. मोहनजो-दड़ो में ईंटों से निर्मित 700 कुओं की गणना की गई है। ऐसा लगता है कि उनका नियमित रूप से रख-रखाव किया जाता रहा और अनेक शताब्दियों तक उनका उपयोग किया जाता रहा। इसके निहितार्थों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर – इतनी बड़ी संख्या में कुओं का होना दो मुख्य बातों को दर्शाता है:
- स्वच्छता और स्वास्थ्य: प्रत्येक घर या मुहल्ले के लिए अलग कुआँ होना यह दर्शाता है कि वे व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते थे।
- सामाजिक स्थिरता: कुओं का सदियों तक रख-रखाव यह बताता है कि वहाँ एक स्थायी नागरिक प्रशासन या स्थानीय निकाय था, जो यह सुनिश्चित करता था कि बुनियादी सुविधाएँ निरंतर बनी रहें。
प्रश्न 8. समान्यतः यह कहा जाता है कि हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। इस कथन के महत्व पर चर्चा कीजिए। क्या आप इससे सहमत हैं? वर्तमान भारत के महानगरों के नागरिकों से इसकी तुलना कीजिए।
उत्तर – हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। हड़प्पावासियों में नागरिकता का भाव आधुनिक महानगरों से भी अधिक संगठित प्रतीत होता है:
- समानता: अमीरों और गरीबों के घरों के निर्माण की गुणवत्ता एक समान थी, जो एक सामंजस्यपूर्ण समाज का संकेत है।
- अनुशासन: उन्होंने कभी सड़कों पर अतिक्रमण नहीं किया और अपनी नालियों को मुख्य जल-निकासी तंत्र से जोड़कर रखा, ताकि पड़ोसियों को परेशानी न हो।
- तुलना: वर्तमान महानगरों में हम अक्सर अतिक्रमण, कचरा प्रबंधन की समस्या और संसाधनों के लिए असमानता देखते हैं। इसके विपरीत, हड़प्पावासी संसाधनों के सहयोगपूर्ण उपयोग और नागरिक नियमों के पालन में बहुत आगे थे।
हड़प्पा सभ्यता का कालक्रम (समय-रेखा) क्या है?
इस सभ्यता का मुख्य समय 2600 सा.सं.पू. से 1900 सा.सं.पू. तक माना जाता है।
सभ्यता से संबंधित खोजा गया पहला नगर कौन-सा था?
वर्ष 1920-21 में खोजा गया हड़प्पा नगर इस सभ्यता का पहला उत्खनित स्थल था।
बी.बी. लाल ने हड़प्पा समाज की किस विशेषता पर बल दिया है?
उन्होंने बताया कि यह एक सामंजस्यपूर्ण समाज था जहाँ शोषण के बजाय आपसी सहयोग दिखता है।
‘सप्त सैंधव’ क्षेत्र किन नदियों द्वारा सिंचित था?
यह क्षेत्र सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित था।
सरस्वती नदी को वर्तमान में किन नामों से जाना जाता है?
इसे भारत में घग्गर और पाकिस्तान में हाकरा के नाम से जाना जाता है।
नगरों के उस भाग को क्या कहते हैं जहाँ अकिजात वर्ग (Elite class) रहता था?
नगर के उस ऊँचे और सुरक्षित भाग को ‘ऊपरी नगर’ या किला कहा जाता था।
मोहनजो-दड़ो के ‘महासनानागार’ का आकार क्या था?
इसका आकार 12 × 7 मीटर था।
हड़प्पावासी सड़कों के नीचे जल-निकासी के लिए क्या बनाते थे?
वे सड़कों के नीचे नालियाँ बनाते थे जिनसे घरों का अपशिष्ट जल बहता था।
धौलावीरा में पाया गया सबसे बड़ा जलाशय कितना लंबा है?
वहाँ पाया गया सबसे बड़ा जलाशय 73 मीटर लंबा है।
मिट्टी से बना ‘हल’ (लघु प्रतिरूप) कहाँ से प्राप्त हुआ है?
यह हरियाणा के बनावली नामक स्थान से प्राप्त हुआ है।
विश्व में सबसे पहले कपास उगाने का श्रेय किन्हें जाता है?
यह श्रेय हड़प्पावासियों को जाता है।
हड़प्पावासी लाल रंग के मनके (मोती) बनाने के लिए किस पत्थर का उपयोग करते थे?
वे कान्र्नेलियन (Carnelian) पत्थर का उपयोग करते थे।
लोथल में पाई गई विशाल बंदरगाह जैसी संरचना (बेसिन) की लंबाई क्या है?
इसकी लंबाई 217 मीटर है (फुटबॉल के दो मैदानों से अधिक)।
हड़प्पा की मुहरें किस मुलायम पत्थर से बनी होती थीं?
ये सटीऐटाइट (Steatite) पत्थर से बनी होती थीं।
मुहरों पर सामान्यतः किसके चित्र पाए गए हैं?
इन पर जानवरों के चित्र और लेखन प्रणाली के कुछ संकेत मिलते हैं।
‘नर्तकी’ की प्रसिद्ध कास्य प्रतिमा कहाँ से प्राप्त हुई है?
यह मोहनजो-दड़ो से प्राप्त हुई है।
किस स्थल से ‘प्यासै कौए’ की कहानी जैसा चित्रण वाला पात्र मिला है?
यह चित्रण लोथल से प्राप्त एक पात्र पर मिला है।
हड़प्पा सभ्यता के पतन का एक प्रमुख पर्यावरणीय कारण क्या था?
जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा में कमी और शुष्कता का आना।
किस नदी के सूखने से कालीबंगा जैसे नगर अचानक छोड़ दिए गए?
सरस्वती नदी के मध्य बेसिन के सूखने के कारण।
हड़प्पावासी किस धातु में टिन मिलाकर कांसा (Bronze) बनाते थे?
वे ताँबे में टिन मिलाकर कांसा बनाते थे।
लेखक के अनुसार ‘सभ्यता’ की कोई चार अनिवार्य विशेषताएँ बताइए।
सभ्यता की विशेषताओं में शासन/प्रशासन का रूप, सुनियोजित नगरीकरण (जल प्रबंधन), शिल्प और उपकरणों का उत्पादन, तथा व्यापार व लेखन कला शामिल हैं।
हड़प्पा सभ्यता को ‘सिंधु-सरस्वती सभ्यता’ कहना क्यों अधिक सटीक है?
क्योंकि पुरास्थलों की सबसे अधिक सघनता सरस्वती (घग्गर-हाकरा) नदी की द्रोणी में पाई गई है, जो सिंधु क्षेत्र से भी अधिक विस्तृत है।
हड़प्पाकालीन नगरों की सड़क व्यवस्था कैसी थी?
नगरों में चौड़ी सड़कें थीं जो सामान्यतः चारों दिशाओं की ओर उन्मुख होती थीं और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं (ग्रिड प्रणाली)।
मोहनजो-दड़ो के महासनानागार को जल-रोधी कैसे बनाया गया था?
ईंटों के ऊपर जल-रोधी सामग्री के रूप में प्राकृतिक बिटुमेन (डामर) की परत चढ़ाई गई थी ताकि पानी का रिसाव न हो।
हड़प्पावासियों के भोजन में शामिल विविधताओं का वर्णन करें।
वे जौ, गेहूँ, बाजरा, दालें और सब्जियाँ खाते थे। इसके अलावा मांस, मछली और दूध के उत्पाद (दही, हल्दी, अदरक युक्त) भी उनके भोजन का हिस्सा थे।
धौलावीरा की जल संचयन प्रणाली क्यों विशिष्ट थी?
वहाँ पत्थरों और चट्टानों को काटकर कम से कम छह विशाल जलाशय बनाए गए थे, जिन्हें भूमिगत नालियों से जोड़कर वर्षा जल का संचयन किया जाता था।
हड़प्पाकालीन शिल्प और व्यापारिक वस्तुओं की सूची बनाइए।
शिल्प में कान्र्नेलियन के मोती, हाथी दाँत के कंघे, शंख की चूड़ियाँ, ताँबे के उपकरण और पत्थर के बाट प्रमुख थे।
लोथल के बंदरगाह (बेसिन) का व्यापारिक महत्व क्या था?
यह बेसिन नावों के माध्यम से वस्तुओं के आयात-निर्यात के लिए उपयोग होता था, जिससे मेसोपोटामिया और ओमान जैसे सुदूर देशों से व्यापार सुगम हुआ।
हड़प्पा सभ्यता को ‘शांतिपूर्ण सभ्यता’ क्यों माना जाता है?
क्योंकि खुदाई में युद्ध के हथियारों या किसी संगठित सेना के कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिलते हैं।
पतन के बाद हड़प्पावासियों की जीवनशैली में क्या बदलाव आया?
नगर खाली होने के बाद लोग छोटी-छोटी बस्तियों में बिखर गए और उन्होंने नगरीय जीवन के बजाय ग्रामीण जीवन-शैली को अपना लिया।
सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नियोजित नगरीकरण और जल प्रबंधन प्रणाली का सविस्तार वर्णन करें।
हड़प्पाकालीन नगर ग्रिड प्रणाली पर आधारित थे, जहाँ सड़कें चौड़ी और व्यवस्थित थीं। नगरों को ऊपरी और निचले भागों में बाँटा गया था। जल प्रबंधन के लिए प्रत्येक घर में अलग स्नानघर थे जो सड़क के नीचे बनी ढकी हुई नालियों से जुड़े थे। धौलावीरा जैसे स्थलों पर पत्थरों को काटकर बनाए गए विशाल जलाशय और वर्षा जल संचयन की उन्नत तकनीक उनकी नागरिक कुशलता का प्रमाण है।
हड़प्पावासियों के आर्थिक जीवन, कृषि और शिल्प कौशल की विस्तृत विवेचना कीजिए।
हड़प्पावासी उन्नत कृषि करते थे (हल का उपयोग, कपास का प्रथम उत्पादन) और अधिशेष अनाज नगरों को भेजते थे। शिल्प में वे अत्यधिक कुशल थे; कान्र्नेलियन पत्थरों में छेद करने की तकनीक, हाथी दाँत की नक्काशी और शंख से आभूषण बनाना उन्हें अद्वितीय बनाता था। वे ताँबे और कांसे के उपयोग में भी दक्ष थे।
हड़प्पा की मुहरों और उनकी व्यापारिक प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डालिए।
हजारों की संख्या में मिली सटीऐटाइट की मुहरें व्यापारिक पहचान के लिए उपयोग होती थीं। इन पर जानवरों के चित्र और अपठित लिपि के संकेत मिलते हैं। लोथल जैसे बंदरगाहों से ओमान, मेसोपोटामिया और ईरान तक समुद्री व्यापार होता था। मोती, कपास और आभूषणों के बदले वे संभवतः ताँबे जैसी धातुओं का आयात करते थे।
हड़प्पा सभ्यता के पतन के संभावित कारणों और उसके बाद के परिवर्तनों का विश्लेषण करें।
लगभग 1900 सा.सं.पू. के बाद जलवायु परिवर्तन से वर्षा में कमी आई और सरस्वती जैसी महत्वपूर्ण नदियाँ सूख गईं। इससे कृषि उत्पादकता प्रभावित हुई और नगरों को खाद-आपूर्ति कम हो गई। परिणामस्वरूप, लोग नगर छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों की ओर चले गए। यद्यपि नगर लुप्त हो गए, लेकिन उनकी संस्कृति और तकनीक के कुछ अंश भारतीय सभ्यता के अगले चरणों में भी जीवित रहे।
पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर हड़प्पावासियों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का चित्रण कीजिए।
पुरातत्वविदों को प्राप्त मूर्तियों (नर्तकी, पुरोहित राजा, नमस्ते मुद्रा वाली मूर्ति) और खिलौनों (मिट्टी की सीटी, खेल-बोर्ड) से उनके सामाजिक जीवन का पता चलता है। वे आभूषणों (चूड़ियाँ, हार) के शौकीन थे। स्वास्तिक जैसे प्रतीकों और मातृदेवी की पूजा के संकेतों से उनकी सांस्कृतिक मान्यताओं का पता चलता है, जो वर्तमान भारतीय संस्कृति में भी परिचित प्रतीत होते हैं।