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पाठ में दिए प्रश्नों के उत्तर
आइए,और अधिक सीखें
प्रश्न 1. किसी स्वस्थ मानव शरीर का सामान्य ताप लगभग होता है।
(क) 98.6 °C
(ख) 37.0 °C
(ग) 32.0 °C
(घ) 27.0 °C
उत्तर – (ख) 37.0 °C है।
प्रश्न 2. 37 °C के समान ताप है—
(क) 97.4 °F
(ख) 97.6 °F
(ग) 98.4 °F
(घ) 98.6 °F
उत्तर (घ) 98.6 °F है, क्योंकि सेल्सियस स्केल पर 37.0 °C फारेनहाइट स्केल पर 98.6 °F के तुल्य होता है।
प्रश्न 3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—
उत्तर –
(क) किसी निकाय की गरमाहट अथवा ठंडापन उसके ताप से निर्धारित की जाती है।
(ख) हिमशीतित जल (बर्फ जैसा ठंडा) का ताप डॉक्टरी तापमापी द्वारा नहीं मापा जा सकता है।
(ग) ताप का मात्रक डिग्री सेल्सियस या फारेनहाइट है।
प्रश्न 4 – प्रायः प्रयोगशाला तापमापी की मापन सीमा होती है—
(क) 10 °C से 100 °C
(ख) -10 °C से 110 °C
(ग) 32 °C से 45 °C
(घ) 35 °C से 42 °C
उत्तर (ख) -10 °C से 110 °C है।
प्रश्न 5 – जल का ताप मापने के लिए चार विद्यार्थियों ने प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग चित्र 7.6 में दर्शाए अनुसार किया। किस विद्यार्थी ने ताप मापन के लिए सही प्रक्रिया अपनाई?
(क) विद्यार्थी 1
(ख) विद्यार्थी 2
(ग) विद्यार्थी 3
(घ) विद्यार्थी 4
उत्तर (ग) विद्यार्थी 3 है।
प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग करते समय उसे ऊर्ध्वाधर (vertical) रखना चाहिए और उसका बल्ब बर्तन की तली या दीवारों को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 6 नीचे दिए गए तापमानों को तापमापियों (चित्र 7.7) के आरेखों पर स्तंभों में लाल रंग भरकर दर्शाइए
उत्तर – यह एक व्यावहारिक प्रश्न है जिसमें आपको चित्रों में रंग भरना है।
प्रश्न 7 – नीचे दर्शाए गए तापमापी के भाग का अवलोकन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(क) यह किस प्रकार का तापमापी है?
(ख) तापमापी का पाठ्यांक क्या है?
(ग) इस तापमापी द्वारा मापा जा सकने वाला न्यूनतम मान क्या है?
उत्तर –
(क) यह एक प्रयोगशाला तापमापी है क्योंकि इसकी लंबाई और स्केल विस्तार अधिक है।
(ख) चित्र के अनुसार पारा स्तंभ 24 °C पर है।
(ग) इस तापमापी पर दिखाई दे रहा न्यूनतम मान -10 °C है।
प्रश्न 8 – प्रयोगशाला तापमापी हमारे शरीर के ताप को मापने के लिए उपयोग में क्यों नहीं लाया जाता है? इसका एक कारण दीजिए।
उत्तर – इसका मुख्य कारण यह है कि जैसे ही प्रयोगशाला तापमापी को शरीर (मुँह) से बाहर निकाला जाता है, इसका पारा स्तंभ तुरंत गिरने लगता है। इससे शरीर का सही ताप नोट करना संभव नहीं होता।
प्रश्न 9 – वैष्णवी अस्वस्थ होने के कारण विद्यालय नहीं जा पाती है। उसकी माता जी ने उसके तीन दिन के तापमान का अंकन रखा है जिसे तालिका 7.4 मेंदर्शाया गया है।
(क) वैष्णवी का अंकित किया गया अधिकतम ताप क्या था?
(ख) किस दिन और किस समय पर वैष्णवी का अधिकतम ताप अंकित किया गया था?
(ग) किस दिन वैष्णवी का ताप सामान्य हो गया?
उत्तर –
(क) अधिकतम ताप: वैष्णवी का अधिकतम अंकित ताप 40.0 °C था।
(ख) समय और दिन: यह अधिकतम ताप पहले दिन, सायं 7 बजे अंकित किया गया था।
(ग) सामान्य ताप: वैष्णवी का ताप तीसरे दिन, अपराह्न 4 बजे सामान्य (37.0 °C) हो गया।
प्रश्न 10 – यदि आपको 22.5 °C ताप मापना है तो नीचे दर्शाए गए तापमापियों में से कौन-सा तापमापी उपयोग में लाएँगे? व्याख्या कीजिए।
उत्तर – इसके लिए तापमापी (ख) का उपयोग करना चाहिए। इसका कारण यह है कि 22.5 °C मापने के लिए ऐसा पैमाना चाहिए जो आधा डिग्री (0.5 °C) भी स्पष्ट रूप से दिखा सके, और तापमापी (ख) के स्केल पर छोटे विभाजन 0.5 °C को दर्शाते हैं।
प्रश्न 11 – चित्र 7.10 में दिखाए गए तापमापी में दर्शाया गया ताप है—
(क) 28.0 °C
(ख) 27.5 °C
(ग) 26.5 °C
(घ) 25.3 °C
उत्तर – (ग) 26.5 °C है।
प्रश्न 12 – किसी प्रयोगशाला तापमापी पर 0 °C और 100 °C के मध्य 50 भाग हैं। इस तापमापी का प्रत्येक भाग कितना ताप मापता है?
उत्तर – कुल अंतर (100 – 0 = 100) को भागों की संख्या (50) से विभाजित करने पर: 100/50 = 2 °C। अतः प्रत्येक छोटा भाग 2 °C मापेगा।
प्रश्न 13 – किसी तापमापी का स्केल बनाइए जिसमें न्यूनतम भाग 0.5 °C ताप मापता है। आप केवल 10 °C और 20 °C के बीच के भाग काे दर्शा सकते हैं।
उत्तर – 10 °C और 20 °C के बीच का अंतर 10 °C है। 0.5 °C का मान प्राप्त करने के लिए इन दोनों अंकों के बीच 20 छोटे भाग बनाने होंगे (क्योंकि 10/20 = 0.5)।
प्रश्न 14 – कोई आपको बताता है कि उसे 101 डिग्री ज्वर है। क्या उसका तात्पर्य सेल्सियस स्केल से है अथवा फारेनहाइट स्केल से है?
उत्तर – इसका तात्पर्य फारेनहाइट स्केल (°F) से है। सेल्सियस स्केल पर 101 डिग्री तापमान उबलते जल के बराबर होता है, जो मानव शरीर के लिए असंभव और घातक है। अतः बुखार को आमतौर पर फारेनहाइट में ही बोला जाता है।
अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर
‘ताप’ (Temperature) किसे कहते हैं?
किसी पिंड की गरमाहट या ठंडक के विश्वसनीय माप को उसका ताप कहते हैं।
ताप मापने वाले उपकरण का नाम क्या है?
ताप मापने वाले उपकरण को तापमापी या थर्मामीटर कहते हैं।
ताप का SI मात्रक क्या है?
ताप का SI मात्रक केल्विन (K) है।
स्वस्थ मानव शरीर का सामान्य ताप सेल्सियस स्केल पर कितना होता है?
यह 37.0 °C होता है।
स्वस्थ मानव शरीर का सामान्य ताप फारेनहाइट स्केल पर कितना होता है?
यह 98.6 °F होता है।
प्रयोगशाला तापमापी की सामान्य मापन सीमा क्या होती है?
इसकी मापन सीमा प्रायः -10 °C से 110 °C के बीच होती है।
ताप का वह स्केल कौन-सा है जिसमें डिग्री (°) के संकेत का प्रयोग नहीं किया जाता?
केल्विन (K) स्केल में डिग्री संकेत का प्रयोग नहीं किया जाता।
अंकीय (Digital) तापमापी में किस पदार्थ का उपयोग नहीं होता जो विषैला है?
अंकीय तापमापी में पारे (Mercury) का उपयोग नहीं होता।
सेल्सियस ताप को केल्विन में बदलने का सूत्र क्या है?
केल्विन = सेल्सियस ताप + 273.15।
पारा (Mercury) कैसा पदार्थ है?
पारा एक अत्यधिक विषैला पदार्थ है।
बिना शरीर को स्पर्श किए ताप मापने वाले तापमापी को क्या कहते हैं?
इसे संपर्क रहित या अवरक्त (Infrared) तापमापी कहते हैं。
प्रयोगशाला तापमापी के बल्ब में सामान्यतः कौन-से द्रव भरे होते हैं?
इसमें सामान्यतः अल्कोहल (प्रायः लाल रंग का) या पारा भरा होता है।
मानव शरीर का ताप किन सीमाओं के बाहर नहीं जाता?
सामान्यतः यह 35 °C से नीचे और 42 °C से ऊपर नहीं जाता।
‘भारत की मौसम विदुषी’ किसे कहा जाता है?
भारतीय वैज्ञानिक अन्ना मणी को ‘भारत की मौसम विदुषी’ कहा जाता है।
परम शून्य ताप (Absolute Zero) का मान कितना है?
यह -273.15 °C या 0 केल्विन के निकट होता है।
सूर्य के करोड़ (Core) का तापमान लगभग कितना है?
सूर्य के करोड़ का तापमान लगभग 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस है।
तापमापी के आविष्कार से पूर्व ज्वर का पता कैसे लगाया जाता था?
प्राचीन समय में ज्वर का पता नाड़ी-दर (Pulse rate) के आधार पर लगाया जाता था।
तापमापी पढ़ते समय आँख की सही स्थिति क्या होनी चाहिए?
आँख द्रव स्तंभ के स्तर की सीध में होनी चाहिए।
ताप के मात्रकों के संकेत (जैसे C, F, K) किस प्रकार के अक्षरों में लिखे जाते हैं?
ये हमेशा अंग्रेजी के बड़े अक्षरों (Capital letters) में लिखे जाते हैं।
तापमापी को कहाँ से नहीं पकड़ना चाहिए?
तापमापी को उसके अग्रभाग या बल्ब से नहीं पकड़ना चाहिए।
क्या हम केवल स्पर्श करके किसी वस्तु के ताप का सही अनुमान लगा सकते हैं? क्रियाकलाप 7.1 के आधार पर समझाएँ।
नहीं, स्पर्श-इंद्रिय हमेशा विश्वसनीय नहीं होती। यदि एक हाथ गर्म पानी में और दूसरा ठंडे पानी में डालकर फिर दोनों को सामान्य पानी में डालें, तो दोनों हाथ अलग-अलग अनुभव (एक गर्म और एक ठंडा) करेंगे।
अंकीय (Digital) तापमापी, पारे वाले तापमापी से बेहतर क्यों माने जाते हैं?
क्योंकि पारा विषैला होता है और तापमापी टूटने पर इसका निपटान कठिन होता है। अंकीय तापमापी में पारा नहीं होता, ये सुरक्षित हैं और इनमें संख्या पढ़ना आसान होता है।
प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग करते समय बल्ब की स्थिति कैसी होनी चाहिए?
बल्ब पूरी तरह उस द्रव में डूबा होना चाहिए जिसका ताप मापना है, लेकिन यह बर्तन की तली या दीवारों को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
डॉक्टरी तापमापी और प्रयोगशाला तापमापी में मुख्य अंतर क्या है?
डॉक्टरी तापमापी केवल मानव शरीर का ताप मापने (35-42 °C) के लिए है, जबकि प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग अन्य वस्तुओं के ताप मापने के लिए होता है और इसका परिसर (-10 से 110 °C) बड़ा होता है।
ताप के मात्रकों को लिखने के किन्हीं दो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लेख करें।
(i) संख्या और मात्रक के बीच हमेशा एक रिक्त स्थान छोड़ा जाता है (जैसे 37.0 °C)। (ii) संकेतों के बाद वाक्य के अंत के अलावा कहीं बिंदु नहीं लगाया जाता।
किसी व्यक्ति के शरीर का ताप किन कारकों पर निर्भर करता है?
शरीर का तापमान उम्र, दिन के समय और व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि के स्तर जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
अल्पतम मान (Least Count) कैसे ज्ञात किया जाता है? उदाहरण दें।
दो बड़े चिन्हों के बीच के ताप अंतर को उनके बीच के छोटे भागों की संख्या से विभाजित करके। जैसे 10 °C अंतर और 10 भाग होने पर अल्पतम मान 1 °C होगा।
अवरक्त (Infrared) तापमापी का उपयोग कोविड-19 महामारी के दौरान क्यों बढ़ गया?
क्योंकि ये संपर्क रहित होते हैं और किसी व्यक्ति के शरीर को छुए बिना दूर से ही ताप माप सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
वैज्ञानिक अध्ययनों में किस ताप स्केल का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है और क्यों?
वैज्ञानिक कार्यों के लिए ‘केल्विन स्केल’ का उपयोग किया जाता है क्योंकि केल्विन ताप का SI मात्रक है।
अन्ना मणी के योगदान ने भारत को किस क्षेत्र में अग्रणी बनाया?
उनके द्वारा विकसित मौसम-मापन उपकरणों के कारण भारत नवीकरणीय ऊर्जा (पवन और सौर ऊर्जा) के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में सम्मिलित हो गया।
प्रयोगशाला तापमापी से ताप मापने की सही विधि और सावधानियों का विस्तार से वर्णन करें।
प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग करते समय उसे ऊर्ध्वाधर (सीधा) रखना चाहिए। इसका बल्ब उस पदार्थ से पूरी तरह घिरा हो जिसका ताप मापना है, पर वह बर्तन को न छुए। पाठ्यांक तभी लेना चाहिए जब बल्ब द्रव के भीतर हो, क्योंकि बाहर निकालते ही पारा गिरने लगता है। साथ ही, इसे सावधानी से उपयोग करना चाहिए ताकि यह कठोर वस्तु से टकराकर टूटे नहीं।
ताप के तीनों प्रमुख स्केलों (सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन) के नामकरण और उनके संकेतों के नियमों की व्याख्या करें।
इन स्केलों के नाम इन्हें विकसित करने वाले वैज्ञानिकों (सेल्सियस, फारेनहाइट, केल्विन) के सम्मान में रखे गए हैं। संकेतों में °C, °F और K का प्रयोग होता है, जहाँ केल्विन के साथ डिग्री (°) नहीं लगती। लिखते समय मात्रक का नाम छोटे अक्षरों (जैसे kelvin) से शुरू होता है, लेकिन सेल्सियस और फारेनहाइट के नाम बड़े अक्षरों से शुरू होते हैं।
“ताप एक विश्वसनीय माप है।” इस कथन को स्पष्ट करते हुए समझाएँ कि विभिन्न परिस्थितियों में ताप का मापन क्यों आवश्यक है।
स्पर्श द्वारा केवल सापेक्ष गरमाहट का पता चलता है जो भ्रामक हो सकता है। सटीक जानकारी के लिए तापमापी आवश्यक है। उदाहरण के लिए, अस्पताल में मरीज के इलाज के लिए सटीक ज्वर मापना, प्रयोगशाला में रसायनों की प्रतिक्रिया के लिए निश्चित ताप बनाए रखना और मौसम पूर्वानुमान के लिए वायु का सटीक ताप जानना अनिवार्य है।
अंकीय डॉक्टरी तापमापी का उपयोग करते समय बरती जाने वाली मुख्य सावधानियों की एक विस्तृत सूची तैयार करें।
उपयोग से पहले और बाद में अग्रभाग (टिप) को साबुन और जल से धोना चाहिए। इसे कभी बल्ब से नहीं पकड़ना चाहिए। उपयोग से पहले ‘रीसेट’ बटन दबाना चाहिए। जीभ के नीचे रखने के बाद ‘बीप’ की ध्वनि या प्रकाश चमकने तक प्रतीक्षा करनी चाहिए। यह ध्यान रखना चाहिए कि इसके प्रदर्शन (डिस्प्ले) वाले हिस्से पर पानी न गिरे।
वायु के तापमान और मौसम के बीच संबंध को स्पष्ट करें। इसमें ‘अन्वेषक’ या ‘वैज्ञानिक’ की भूमिका क्या होती है?
वायु का ताप प्रतिदिन और ऋतुओं के अनुसार बदलता है; गर्मियों में यह बढ़ता है और सर्दियों में घटता है। मौसम पूर्वानुमान के लिए अधिकतम और न्यूनतम तापमान का विश्लेषण महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक (जैसे अन्ना मणी) ऐसे उपकरण विकसित करते हैं जो सटीक डेटा प्रदान कर सकें, जिससे मौसम स्टेशनों पर निरंतर निगरानी संभव होती है और भविष्य की जलवायु परिस्थितियों का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।