जर्मनी का एकीकरण: बिस्मार्क और प्रशा का नेतृत्व

जर्मनी का एकीकरण बिखरे हुए छोटे राज्यों को एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में संगठित करने की प्रक्रिया थी, जिसका मुख्य श्रेय बिस्मार्क को जाता है।

1. पृष्ठभूमि और विचार

  • प्रशा (Prussia): यह जर्मनी का सबसे शक्तिशाली राज्य था और बिस्मार्क चाहता था कि एकीकरण इसी के नेतृत्व में हो।

  • वैचारिक आधार:

    • जर्मनी में राष्ट्रीयता का संदेशवाहक नेपोलियन बोनापार्ट को माना जाता है।

    • आर्थिक राष्ट्रवाद के पिता फ्रेडरिक लिस्ट थे।

    • दार्शनिकों में राके, बोमर और लसर ने राष्ट्रीय निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई।

  • राजनीतिक स्थिति: 1815 से 1850 के बीच जर्मन साम्राज्य पर ऑस्ट्रिया का आधिपत्य था, जिसका चांसलर मैटरनिख था। जर्मन राष्ट्रीय सभा, जिसे ‘डायट’ कहा जाता था, फ्रैंकफर्ट में आयोजित होती थी।

2. बिस्मार्क का उदय

  • जन्म: बिस्मार्क का जन्म 1 अप्रैल, 1815 को ब्रेडनबर्ग में हुआ था।

  • नियुक्ति: 23 सितंबर, 1862 को वे प्रशा के चांसलर बने। वे प्रशा के शासक विलियम प्रथम के प्रधानमंत्री थे।

  • व्यक्तित्व: विलियम प्रथम ने बिस्मार्क को ‘बाजीगर’ कहा था। प्रशा की सैन्य शक्ति बढ़ाने में युद्ध मंत्री वानरून और सेनापति वान माल्टेक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

3. एकीकरण के प्रमुख चरण और युद्ध

बिस्मार्क ने कूटनीति और युद्ध के माध्यम से एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया:

  • ऑस्ट्रिया के साथ संघर्ष: 1866 ई. के सेरेजोवा (सेडोवा) युद्ध में ऑस्ट्रिया ने प्रशा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। 23 अगस्त, 1866 की प्राग संधि के तहत ऑस्ट्रिया जर्मन संघ में शामिल हो गया।

  • फ्रांस के साथ संघर्ष: बिस्मार्क को सबसे अधिक भय फ्रांस से था।

    • सेडान का युद्ध: 15 जुलाई, 1870 को फ्रांस और प्रशा के बीच यह युद्ध हुआ।

    • आत्मसमर्पण: 1 सितंबर, 1870 को फ्रांस के शासक नेपोलियन तृतीय ने प्रशा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

    • परिणाम: सेडान के युद्ध के बाद ही जर्मनी का एकीकरण संभव हो सका।

4. अंतिम परिणति

  • राज्याभिषेक: बिस्मार्क ने विलियम प्रथम का राज्याभिषेक फ्रांस के वर्साय के राजमहल में किया। 8 फरवरी, 1871 को विलियम प्रथम को ‘जर्मन संघ के सम्राट’ का ताज पहनाया गया।

  • फ्रैंकफर्ट की संधि: 10 मई, 1871 को फ्रांस और प्रशा के बीच इस संधि के साथ एकीकरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूर्ण हुई।

संक्षेप में: मई 1848 में फ्रैंकफर्ट संविधान सभा के गठन के प्रयासों से शुरू हुई यह यात्रा 1871 में एक विशाल जर्मन राष्ट्र के उदय के साथ सफल हुई।

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