Skip to content
- राबर्ट क्लाइव: इसने मुगल राजा शाह आलम द्वितीय के साथ 1765 ई० में ‘इलाहाबाद की दूसरी संधि’ की और उसे कंपनी की सुरक्षा में ले लिया। क्लाइव ने बंगाल के लिए मुहम्मद रजा खाँ और बिहार के लिए राजा शिताब राय को उप-दीवान (राजस्व अधिकारी) बनाया।
- अन्य गवर्नर: बरेलास्ट (1767-69 ई०), कार्टियर (1769-72 ई०) और वारेन हेस्टिंग्स (1772-74 ई०)।
- वारेन हेस्टिंग्स (1774-85 ई०): यह 1773 ई० के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत भारत (बंगाल) का पहला गवर्नर जनरल बना।
- इसने सरकारी खजाने को मुर्शिदाबाद से हटाकर कलकत्ता पहुँचाया।
- 1772 ई० में हर जिले में एक फौजदारी (क्रिमिनल) और एक दीवानी (सिविल) अदालत बनाई।
- 1781 ई० में मुसलमानों की शिक्षा के लिए कलकत्ता में पहला मदरसा खोला।
- 1782 ई० में जोनाथन डंकन ने बनारस में संस्कृत विद्यालय बनाया।
- 1784 ई० में विलियम जोंस ने ‘द एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल’ की स्थापना की।
- 1780 ई० में जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने भारत का पहला अखबार ‘द बंगाल गजट’ निकाला।
- इसके समय प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-82 ई०) और द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1780-84 ई०) हुए।
- इसने मुगल राजा की 26 लाख की सालाना पेंशन बंद कर दी।
- सर जॉन मैकफरसन (1785-86 ई०): इसे कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया था।
- लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786-93 ई०): इसने जिले की सारी शक्तियाँ कलेक्टर को दे दीं। इसने 1793 ई० में ‘कॉर्नवालिस कोड’ बनाया जो शक्तियों के बँटवारे के सिद्धांत पर था।
- लॉर्ड कॉर्नवालिस (जारी): इसने पुलिस थाने बनवाए और दरोगा को उसका प्रभारी बनाया। इसने 1793 ई० में ‘स्थायी बंदोबस्त’ (खेती का पक्का समझौता) लागू किया, जिसमें जमींदारों को कर का 90% कंपनी को देना होता था। इसे भारत में ‘नागरिक सेवा’ (Civil Service) का पिता माना जाता है।
- सर जॉन शोर (1793-98 ई०): इसने राज्यों के मामलों में दखल न देने (अहस्तक्षेप) की नीति अपनाई।
- लॉर्ड वेलेजली (1798-1805 ई०): इसने ‘सहायक संधि’ (मदद का समझौता) शुरू की। इस संधि को सबसे पहले हैदराबाद (1798) ने अपनाया, फिर मैसूर, तंजौर (1799), अवध (1801), पेशवा (1801), भोंसले (1803) और सिंधिया (1804) ने अपनाया।
- इसने कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज खोला। वह खुद को ‘बंगाल का शेर’ कहता था।
- सर जार्ज वालों (1805-1807 ई०): इसके समय 1806 ई० में वेल्लोर में सैनिकों ने विद्रोह किया था।
- लार्ड मिन्टो प्रथम (1807-1813 ई०): इसके समय 1809 ई० में महाराजा रणजीत सिंह के साथ ‘अमृतसर की संधि’ हुई।
- लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-1823 ई०): इसके समय 1814-16 ई० में नेपाल युद्ध हुआ जो ‘संगोली की संधि’ से खत्म हुआ। इसने पिंडारियों (लुटेरों) का खात्मा किया और मराठों की शक्ति को पूरी तरह खत्म कर दिया।
- लॉर्ड एमहर्स्ट (1823-1828 ई०): इसके समय पहला आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824-26) हुआ और 1824 में बैरकपुर में सैन्य विद्रोह हुआ।
- लॉर्ड विलियम बैंटिक (1828-1835 ई०): 1833 ई० में इसे पूरे भारत का पहला गवर्नर जनरल बनाया गया।
- 1829 ई० में राजा राम मोहन राय की मदद से सती प्रथा को खत्म किया।
- 1830 ई० तक कर्नल सलीमन की मदद से ठगी प्रथा खत्म की।
- 1835 ई० में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज बनवाया और मैकाले की सलाह पर अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाया।
- चार्ल्स मेटकॉफ (1835-36 ई०): इसे ‘भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता’ (अखबारों को आजाद करने वाला) कहा जाता है।
- लॉर्ड ऑकलैण्ड (1836-42 ई०): इसके समय पहला आंग्ल-अफगान युद्ध हुआ और इसने जी.टी. रोड (ग्रांड ट्रंक रोड) की मरम्मत करवाई।
- लॉर्ड एलिनबरो (1842-44 ई०): इसने 1843 ई० में दास प्रथा (गुलामी) को खत्म किया।
- लॉर्ड हार्डिंग (1844-1848 ई०): इसके समय पहला आंग्ल-सिक्ख युद्ध हुआ और इसने नरबलि (इंसानों की बलि) पर रोक लगाई।
- लॉर्ड डलहौजी (1848-56 ई०): इसने 1849 ई० में पंजाब को अंग्रेजी राज में मिलाया और कोहिनूर हीरा महारानी विक्टोरिया को भेज दिया।
- लॉर्ड डलहौजी (जारी): इसने ‘व्यपगत सिद्धान्त’ (राज्यों को हड़पने की नीति) के तहत सतारा (1848), झाँसी (1853) और नागपुर (1854) जैसे कई राज्यों को मिलाया।
- रेलवे: भारत की पहली रेल 16 अप्रैल, 1853 को बम्बई से थाणे के बीच चली।
- डाक/तार: 1854 में नया पोस्ट ऑफिस एक्ट आया और डाक टिकट शुरू हुए। कलकत्ता से आगरा के बीच बिजली से चलने वाला तार (Telegraph) शुरू हुआ।
- शिक्षा: 1854 का ‘वुड डिस्पैच’ (शिक्षा का नियम) लागू किया।
- लॉर्ड कैनिंग (1856-62 ई०): यह कंपनी का आखिरी गवर्नर जनरल और भारत का पहला वायसराय था।
- इसके समय 1857 का महान विद्रोह हुआ, जिसके बाद शासन सीधा ब्रिटिश सरकार के हाथ में चला गया।
- 1856 में विधवा पुनर्विवाह कानून बनाया और 1861 में हाई कोर्ट एक्ट लाकर बम्बई, कलकत्ता, मद्रास में उच्च न्यायालय बनाए।
- लॉर्ड एल्गिन (1862-63 ई०): इसने वहाबी आन्दोलन को कुचला।
- लॉर्ड लारेंस (1864-69 ई०): इसने यूरोप के साथ समुद्री टेलीग्राफ सेवा शुरू की और अकाल के लिए एक आयोग बनाया।
- लॉर्ड मेयो (1869-72 ई०): अजमेर में मेयो कॉलेज और कृषि विभाग बनाया। 1872 में इसकी चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
- लॉर्ड नार्थब्रुक (1872-76 ई०): इसके समय पंजाब का कूका आन्दोलन हुआ और स्वेज नहर खुलने से व्यापार बढ़ा।
- लॉर्ड लिटन (1876-80 ई०): इसे ‘ओवन मेरिडिथ’ के नाम से भी जाना जाता था। इसने 1878 में ‘वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट’ लाकर अखबारों पर पाबंदी लगाई और शस्त्र अधिनियम (हथियार रखने का नियम) बनाया।
- लॉर्ड रिपन (1880-84 ई०): इसने प्रेस की आजादी लौटाई और 1881 में पहली बार नियमित जनगणना शुरू करवाई।
- लॉर्ड रिपन (जारी): इसने 1881 में पहला कारखाना अधिनियम (मजदूरों के लिए नियम) लाया। इसके समय इल्बर्ट बिल का विवाद हुआ जिसे ‘श्वेत विद्रोह’ कहते हैं। फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने इसे ‘भारत का रक्षक’ कहा।
- लॉर्ड डफरिन (1884-88 ई०): इसके समय 28 दिसम्बर, 1885 को भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना हुई।
- लॉर्ड लैन्सडाऊन (1888-94 ई०): इसके समय भारत और अफगानिस्तान के बीच डूरण्ड रेखा (सीमा) तय हुई।
- लॉर्ड कर्जन (1899-05 ई०): इसने सिंचाई, पुलिस और विश्वविद्यालय के लिए आयोग बनाए। इसने भारतीय पुरातत्त्व विभाग (पुरानी इमारतों की सुरक्षा के लिए) बनाया। इसका सबसे विवादित काम 1905 में बंगाल का बँटवारा था।
- लॉर्ड मिन्टो द्वितीय (1905-10 ई०): 1906 में मुस्लिम लीग बनी और 1907 में काँग्रेस दो हिस्सों में बँट गई।
- लॉर्ड मिन्टो द्वितीय (जारी): 1909 में मुसलमानों के लिए अलग चुनाव प्रणाली शुरू की।
- लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय (1910-15 ई०): 1911 के दिल्ली दरबार में बंगाल का बँटवारा रद्द हुआ और राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली लाने की घोषणा हुई (जो 1912 में राजधानी बनी)।
- लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916-21 ई०): इसके समय 1919 में रौलेट एक्ट और जालियाँवाला बाग हत्याकांड हुआ। खिलाफत और असहयोग आन्दोलन भी इसी दौरान शुरू हुए।
- लॉर्ड रीडिंग (1921-26 ई०): 1922 के चौरी-चौरा काण्ड के बाद गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया। 1923 में स्वराज्य पार्टी बनी।
- लॉर्ड इरविन (1926-31 ई०): 1928 में साइमन कमीशन आया और 1930 में गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन (नमक कानून तोड़ना) शुरू किया। लाहौर अधिवेशन (1929) में ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग की गई।
- लॉर्ड इरविन (जारी): इसके समय लंदन में पहला गोलमेज सम्मेलन हुआ (1930) और 5 मार्च, 1931 को गांधी-इरविन समझौता हुआ।
- लॉर्ड वेलिंगटन (1931-36 ई०): इसके समय दूसरा और तीसरा गोलमेज सम्मेलन हुआ। 1932 में ‘पूना समझौता’ और 1935 का ‘भारत सरकार अधिनियम’ पास हुआ।
- लॉर्ड लिनलिथगो (1936-43 ई०): पहली बार चुनाव हुए। 1939 में दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ और सुभाष चन्द्र बोस ने ‘फारवर्ड ब्लॉक’ बनाया। 1942 में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ शुरू हुआ।
- लॉर्ड वेवेल (1944-47 ई०): इसके समय शिमला समझौता (1945) और कैबिनेट मिशन (1946) भारत आए।
- लॉर्ड माउण्टबेटन (मार्च, 1947 से जून, 1948 ई०): 15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद हुआ। वह आजाद भारत के पहले गवर्नर जनरल बने।
- चक्रवर्ती राजगोपालाचारी: ये आजाद भारत के पहले और आखिरी भारतीय गवर्नर जनरल थे।
Scroll to Top