उत्तरकालीन मुगल सम्राट और उनके शासन की मुख्य बातें
- बहादुरशाह: मुगल सिंहासन के लिए हुई लड़ाई (उत्तराधिकार युद्ध) में गुरु गोबिन्द सिंह ने बहादुरशाह का साथ दिया था। बहादुरशाह का पुराना नाम मुअज्जम था और उन्हें ‘शाह-ए-बेखबर’ (लापरवाह राजा) के नाम से भी पुकारा जाता था।
- जहाँदारशाह: इन्होंने अपने शासन के कामों में लाल कुमारी नाम की एक महिला (वेश्या) को दखल देने का अधिकार दे रखा था। इन्हें इतिहास में ‘लम्पट मूर्ख’ (बड़ा बेवकूफ) भी कहा गया है।
- सैय्यद बन्धु: मुगल इतिहास में हुसैन अली खाँ और अब्दुल्ला खाँ को ‘शासक निर्माता’ (राजा बनाने वाले) के रूप में जाना जाता है। 9 अक्टूबर, 1720 को हैदरवेग नामक एक सैनिक ने हुसैन अली खाँ की हत्या कर दी थी।
- फर्रुखसियर: इन्हें मुगल वंश का ‘घृणित कायर’ (नफरत के काबिल डरपोक) कहा गया है।
- मुहम्मदशाह: सुंदर युवतियों के प्रति बहुत अधिक लगाव होने के कारण इन्हें ‘रंगीला बादशाह’ कहा जाता था। ये एक संगीतकार भी थे और इन्होंने कई ‘ख़यालों’ (गीतों) की रचना की। इनके समय में ही चिन कुलीच खान (निजामुलमुल्क) ने 1725 ई० में स्वतंत्र हैदराबाद राज्य की नींव रखी। तख्ते ताऊस (मयूर सिंहासन) पर बैठने वाले ये आखिरी मुगल राजा थे।
- शाह आलम-द्वितीय: इनके समय में 1803 ई० में अंग्रेजों ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया था। 1806 ई० में गुलाम कादिर खां ने इनकी हत्या करवा दी।
- बहादुरशाह-द्वितीय (जफर): ये अंतिम मुगल सम्राट थे। 1857 ई० की क्रांति में शामिल होने के कारण अंग्रेजों ने इन्हें पकड़कर रंगून भेज दिया था।
मुगलों से अलग हुए स्वतंत्र राज्य और उनके संस्थापक
मुगल शासन कमजोर होने पर कई स्वतंत्र राज्य बने, जिनकी सूची नीचे दी गई है:
| राज्य | संस्थापक |
|---|---|
| 1. अवध | सआदत खाँ (असली नाम: मीर मुहम्मद अमीन; उपाधि: बुरहान-उल-मुल्क) |
| 2. हैदराबाद | चिनकिलिच खाँ या निजाम उल मुल्क आसफ जाह |
| 3. रुहेलखंड | वीर दाऊद एवं अली मुहम्मद खाँ |
| 4. बंगाल | मुर्शिदकुली |
| 5. कर्नाटक | सादुल्ला खाँ |
| 6. भरतपुर | चूरामन एवं बदन सिंह |
नोट: हैदराबाद की स्थापना तुरानियों ने और अवध की स्थापना ईरानियों ने की थी।
विदेशी आक्रमण
- नादिरशाह: ईरान के इस सम्राट को ‘ईरान का नेपोलियन’ कहा जाता है। इन्होंने 1739 ई० में दिल्ली पर हमला किया और वापस जाते समय लगभग 70 करोड़ रुपये, शाहजहाँ का बनवाया हुआ तख्ते ताऊस और कोहिनूर हीरा साथ ले गए।
- अहमदशाह अब्दाली: इनका असली नाम अहमद खाँ था और इन्होंने भारत पर 8 बार हमला किया। इनके और मराठों के बीच 1761 ई० में पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ, जिसमें मराठों की हार हुई।
उत्तरकालीन मुगल सम्राटों का समय (कालक्रम)
| सम्राट | शासन काल |
|---|---|
| बहादुरशाह | 1707-1712 ई० |
| जहाँदार शाह | 1712-1713 ई० |
| फर्रुखसियर | 1713-1719 ई० |
| मुहम्मदशाह | 1719-1748 ई० |
| अहमदशाह | 1748-1754 ई० |
| आलमगीर-II | 1754-1759 ई० |
| शाहआलम-II | 1759-1806 ई० |
| अकबर-II | 1806-1837 ई० |
| बहादुरशाह जफर | 1837-1857 ई० |
भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन
- पुर्तगाली: 17 मई, 1498 ई० को वास्कोडिगामा ने भारत के कालीकट बंदरगाह पहुँचकर यूरोप से भारत के लिए नए समुद्री रास्ते की खोज की।
- वायसराय: 1505 ई० में फ्रांसिस्को द अल्मेडा भारत में पहला पुर्तगाली वायसराय बना। इसके बाद 1509 ई० में अल्फांसो द अल्बुकर्क वायसराय बना, जिसने 1510 ई० में बीजापुर के युसुफ आदिल शाह से गोवा को जीत लिया।
- व्यापारिक केंद्र: पुर्तगालियों ने अपना पहला व्यापारिक केंद्र (कोठी) कोचीन में स्थापित किया।