1. अधातुएँ (Non-metals): एक नजर में

आधुनिक आवर्त सारणी के अनुसार कुल 22 अधातु तत्त्व हैं, जिन्हें उनकी भौतिक अवस्था के आधार पर निम्न प्रकार वर्गीकृत किया गया है:

  • गैस: कुल 11 तत्त्व गैसीय अवस्था में हैं।
  • द्रव: केवल 1 अधातु द्रव अवस्था में पाई जाती है, जो कि ब्रोमीन (Br) है।
  • ठोस: शेष 10 अधातुएँ ठोस अवस्था में उपस्थित हैं।
  • विद्युत चालकता: अधातुएँ सामान्यतः ऊष्मा और विद्युत की कुचालक (Bad conductors) होती हैं। अपवाद: ग्रेफाइट (यह कार्बन का अपरूप है और विद्युत का सुचालक है)।

—

2. हाइड्रोजन (Hydrogen) और जल की कठोरता

हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्त्व है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • समस्थानिक (Isotopes): हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं—प्रोटियम (1H), ड्यूटीरियम (2H या D) और ट्राइटियम (3H या T)।
  • भारी जल (D2O): ड्यूटीरियम के ऑक्साइड को भारी जल कहते हैं।
    • खोज: सन् 1932 ई. में यूरे और वाशबर्न ने की थी।
    • विशेषता: साधारण जल के लगभग 7000 भागों में 1 भाग भारी जल का होता है। यह 3.8°C पर जमता है।
    • उपयोग: नाभिकीय रिएक्टरों में न्यूट्रॉन मंदक (Moderator) के रूप में, ड्यूटीरियम यौगिक बनाने में, ट्रेसर के रूप में और आयनिक व अन-आयनिक हाइड्रोजन में अंतर करने में।

जल की कठोरता (Hardness of Water)

  • मृदु जल (Soft Water): वह जल जो साबुन के साथ आसानी से और प्रचुर मात्रा में झाग देता है।
  • कठोर जल (Hard Water): वह जल जो साबुन के साथ कठिनाई से झाग देता है। जल की कठोरता दो प्रकार की होती है:
कठोरता का प्रकार मुख्य कारण दूर करने के उपाय
अस्थायी कठोरता (Temporary) जल में कैल्सियम और मैग्नीशियम के बाईकार्बोनेट घुले होने के कारण। जल को उबालने से, या जल में बुझा चूना (दुधिया चूना) डालने से।
स्थायी कठोरता (Permanent) जल में कैल्सियम और मैग्नीशियम के सल्फेट, क्लोराइड और नाइट्रेट घुले होने के कारण। यह उबालने से दूर नहीं होती। इसे सोडियम कार्बोनेट डालकर उबालने से या परम्यूटिट विधि (सोडियम जीओलाइट) द्वारा दूर किया जाता है।

—

3. ऑक्सीजन (Oxygen) एवं ओजोन (Ozone)

  • समस्थानिक: ऑक्सीजन के मुख्य रूप से तीन समस्थानिक पाए जाते हैं—8O16 (99.76%), 8O17 (0.037%), तथा 8O18 (0.204%)।
  • ओजोन (O3): यह ऑक्सीजन का एक त्रि-परमाणुक अपरूप (Allotrope) है। समुद्र तट से 30-32 किमी की ऊँचाई पर वायुमंडल में इसकी सांद्रता सबसे अधिक होती है। यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV Rays) को अवशोषित कर हमारी रक्षा करती है।

—

4. सल्फर (Sulphur)

पृथ्वी के पटल (Crust) में सल्फर की मात्रा लगभग 0.05% है।

  • सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4): यह सल्फर से प्राप्त सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायन है, जिसे ‘रसायनों का राजा’ भी कहते हैं। प्रयोगशाला में प्रयुक्त सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल 98% शुद्ध होता है और इसकी मोलरता 18 M होती है।
  • H2SO4 के मुख्य उपयोग:
    1. रासायनिक उर्वरकों (जैसे- अमोनियम सल्फेट, सुपर फास्फेट) के औद्योगिक निर्माण में।
    2. पेट्रोलियम के शोधन (Refining) में।
    3. लेड संचायक बैटरी (Lead Storage Batteries) में विद्युत अपघट्य के रूप में बड़े पैमाने पर।
    4. डिटरजेन्ट उद्योग में तथा रंजक (Dyes), पेन्ट व रंगों के संश्लेषण में।

—

5. नाइट्रोजन (Nitrogen)

वायुमंडल में आयतन की दृष्टि से सर्वाधिक 78% आण्विक नाइट्रोजन (N2) पाई जाती है। भारानुसार पृथ्वी और वायुमंडल को मिलाकर इसका बाहुल्य 0.01% है।

  • सामान्य उपयोग: रासायनिक क्रियाओं में निष्क्रिय वातावरण (Inert atmosphere) बनाने के लिए (जैसे- लोहा व इस्पात उद्योग में तनुकारक के रूप में)।
  • द्रव नाइट्रोजन (Liquid N2): इसका उपयोग जैविक पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने (प्रशीतक), भोजन को तुरंत जमाने और निम्न ताप शल्य चिकित्सा (Cryosurgery) में होता है।
  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण: दलहनी (लेगुमिनस) पौधों की जड़ों की ग्रंथियों में राइजोबियम (Rhizobium) नामक जीवाणु पाए जाते हैं, जो वायुमंडलीय मुक्त नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदलते हैं।
  • अमोनिया (NH3): औद्योगिक स्तर पर अमोनिया का निर्माण हैबर विधि (Haber’s Process) द्वारा किया जाता है।

    उपयोग: बर्फ बनाने के कारखानों में, नाइट्रिक अम्ल के निर्माण में, यूरिया व अमोनियम सल्फेट जैसे उर्वरक बनाने में, और कृत्रिम रेशम व विस्फोटक निर्माण में।

प्रकाश-रासायनिक धूम/कुहरा (Photochemical Smog): वाहनों और कारखानों से निकलने वाले नाइट्रोजन के ऑक्साइडों (NOx) और अधूरे जले हाइड्रोकार्बनों पर सूर्य के प्रकाश (UV विकिरण) की क्रिया से यह उत्पन्न होता है। इसमें NO रासायनिक अभिक्रिया कर NO2 (भूरे रंग की गैस) बनाता है, जिससे हवा में तीखी भूरी धुंध छा जाती है। यह मानव श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचाता है और आँखों में तीव्र जलन पैदा करता है।

—

6. फॉस्फोरस (Phosphorus)

यह प्राणियों और वनस्पतियों का एक अत्यंत आवश्यक अवयव है, जो मुख्यतः जीवों की हड्डियों, दांतों तथा जीव-कोशिकाओं के न्यूक्लिक अम्ल (DNA व RNA) में उपस्थित रहता है।

  • अपरूपता (Allotropy): इसके मुख्य तीन अपरूप हैं— श्वेत (या पीला) फॉस्फोरस, लाल फॉस्फोरस और काला फॉस्फोरस।
  • विशेषता: माचिस उद्योग में प्रयुक्त होने वाला लाल फॉस्फोरस, श्वेत फॉस्फोरस की तुलना में काफी कम क्रियाशील, गंधहीन और अम्ल में अविलेय होता है।

—

7. हैलोजन (Halogens – वर्ग XVII / Group 17)

आवर्त सारणी के वर्ग 17 के तत्वों को हैलोजन (लवण उत्पादक) कहा जाता है:

  • फ्लोरीन (F): इसका उपयोग UF6 (परमाणु ऊर्जा उत्पादन में यूरेनियम संवर्धन हेतु) और SF6 (परावैद्युतिकी/Dielectric में) बनाने में होता है। इसके द्वारा क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC – जिसे फ्रियोन कहते हैं) तथा टेफ्लॉन (Polytetrafluoroethylene) बहुलक बनाया जाता है। नॉन-स्टिक (ना चिपकने वाले) बर्तनों की ऊपरी सुरक्षा परत टेफ्लॉन की ही बनी होती है।
  • क्लोरीन (Cl): इसका उपयोग प्लास्टिक उद्योग में PVC (पॉलिवाइनिल क्लोराइड), कीटनाशी (DDT) और शाकनाशी दवाओं के निर्माण तथा जल को रोगाणुमुक्त करने में होता है।
  • ब्रोमीन (Br): इसका उपयोग एथिलीन ब्रोमाइड बनाने में होता है, जिसे एंटी-नॉक एजेंट के रूप में सीसाकृत पेट्रोल (Leaded Petrol) में मिलाया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr) बनाने में होता है, जो फोटोग्राफी फिल्मों में प्रयुक्त होता है।

—

8. अक्रिय गैसें / नोबल गैसें (Noble Gases – Group 18)

आवर्त सारणी के शून्य वर्ग (Group 18) में कुल 6 तत्व हैं: हीलियम (He), निऑन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टॉन (Kr), जीनॉन (Xe) और रेडॉन (Rn)। ये पूर्ण पूरित विन्यास के कारण रासायनिक रूप से उत्कृष्ट या निष्क्रिय होते हैं।

  • रेडॉन (Rn): रेडॉन को छोड़कर अन्य सभी अक्रिय गैसें वायुमंडल में पाई जाती हैं। रेडॉन वायुमंडल में मुक्त रूप से नहीं पाई जाती है (यह एक रेडियोएक्टिव गैस है)।
  • आर्गन (Ar): वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली अक्रिय गैस है। इसका उपयोग उच्च-तापीय धातुकर्म प्रक्रियाओं, स्टील निर्माण, आर्क वेल्डिंग में निष्क्रिय वातावरण उत्पन्न करने तथा बिजली के बल्बों में भरने के लिए किया जाता है।
  • हीलियम (He): यह ब्रह्मांड में दूसरी सबसे हल्की और एक अज्वलनशील गैस है। इसका उपयोग मौसम संबंधी अध्ययनों के गुब्बारों में, ठंडी वायु वाली नाभिकीय भट्टियों में और प्रयोगशालाओं में निम्न-तापीय अभिकर्मक (Cryogenic agent) के रूप में होता है।
  • निऑन (Ne): इसका उपयोग व्यावसायिक विज्ञापनों को चमकाने वाले (Advertising signs) निऑन विसर्जन लैंपों, कोहरे को भेदने वाली ट्यूबों (वायुयान के सिग्नलों के लिए) और प्रतिदीप्ति बल्बों में किया जाता है।
Scroll to Top