1. मेंडलीव का आवर्त नियम (Mendeleev’s Periodic Law)
इतिहास: 19वीं शताब्दी के मध्य में रशियन वैज्ञानिक डी० आई० मेंडलीव (D.I. Mendeleev, 1869 ई०) ने तत्त्वों तथा उनके यौगिकों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर एक नियम प्रस्तुत किया।
मूल नियम: “तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों (Atomic Masses) के आवर्त फलन होते हैं।”
मेंडलीव की आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताएँ:
- इस सारणी में कुल 9 वर्ग (Groups) और 7 आवर्त (Periods) थे।
- मेंडलीव ने उस समय तक ज्ञात सभी तत्त्वों को सारणी में शामिल करने के साथ-साथ बहुत से अज्ञात (भविष्य के) तत्त्वों के लिए रिक्त स्थान छोड़ दिए थे।
मेंडलीव की आवर्त सारणी के प्रमुख दोष (Drawbacks):
- हाइड्रोजन की स्थिति: हाइड्रोजन के क्षार धातु और हैलोजन जैसे दोहरे व्यवहार के कारण उसे दोनों वर्गों में रखा गया।
- समान गुणों वाले तत्त्वों का पृथक्करण: समान गुण वाले तत्त्वों को अलग-अलग रख दिया गया; जैसे— Cu और Hg, Ag और Tl, Au और Pt तथा Ba और Pb।
- परमाणु भार का गलत क्रम (विसंगति): कुछ स्थानों पर उच्च परमाणु भार वाले तत्त्वों को कम परमाणु भार वाले तत्त्वों से पहले रखा गया। उदाहरण के लिए, आयोडीन (126.92) को कम भार वाले टेल्यूरियम (127.61) के बाद स्थान दिया गया।
- समस्थानिकों (Isotopes) के लिए स्थान नहीं: एक ही तत्व के विभिन्न परमाणु भार वाले समस्थानिकों के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं था।
- 8वें वर्ग की त्रुटि: आठवें वर्ग में तीन-तीन तत्त्वों को एक साथ समूहित कर दिया गया था।
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2. आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table)
आधार: आधुनिक आवर्त सारणी अंग्रेज वैज्ञानिक मोसले (Moseley, 1913 ई०) के नियम पर आधारित है।
आधुनिक नियम: “तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनकी परमाणु संख्या (Atomic Numbers) के आवर्त फलन होते हैं।”
[Image of modern periodic table showing periods and groups]
आधुनिक आवर्त सारणी की संरचना:
- इसमें आवर्त (क्षैतिज पंक्तियाँ) की संख्या 7 होती है।
- इसमें वर्गों (ऊर्ध्वाधर स्तंभ) की संख्या 9 होती है। वर्ग I से लेकर VII तक दो उपवर्गों ‘A’ एवं ‘B’ में बँटे हैं। इस प्रकार उपवर्गों सहित कुल वर्गों की संख्या 18 है।
- आवर्त के लक्षण: प्रत्येक आवर्त का प्रथम सदस्य एक ‘क्षार धातु’ (Alkali Metal) होता है और अंतिम सदस्य कोई ‘अक्रिय गैस’ (Inert Gas) होती है। (अपवाद: पहले आवर्त का पहला सदस्य हाइड्रोजन है, जो एक अधातु है)।
- विशेष श्रेणियाँ: परमाणु संख्या 57 से 71 तक के तत्त्वों को लैंथेनाइड श्रेणी (Lanthanides) तथा परमाणु संख्या 89 से 103 तक के तत्त्वों को ऐक्टिनाइड श्रेणी (Actinides) कहा जाता है। इन्हें मुख्य सारणी के नीचे अलग से रखा गया है।
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3. आवर्त सारणी में आवर्ती प्रवृत्तियाँ (Periodic Trends)
आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे जाने पर या बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्वों के गुणों में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:
| तत्त्वों के गुण | वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर | आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर |
|---|---|---|
| 1. परमाणु का आकार (Atomic Size) | बढ़ता है | घटता है |
| 2. विद्युत धनात्मकता (Electropositivity) | बढ़ती है | घटती है |
| 3. आयनन ऊर्जा (Ionization Energy) | घटती है | बढ़ती है |
| 4. विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) | घटती है | बढ़ती है |
| 5. इलेक्ट्रॉन प्रीति / बंधुता (Electron Affinity) | घटती है | बढ़ती है |
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4. प्रमुख परिभाषाएँ एवं महत्वपूर्ण तथ्य
(A) आयनन विभव / आयनन ऊर्जा (Ionization Potential / Energy)
- परिभाषा: ऊर्जा की वह न्यूनतम मात्रा जो किसी तत्त्व के एक विलगित गैसीय परमाणु की बाह्यतम कक्षा (Outer shell) से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है।
(B) इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron Affinity)
- परिभाषा: जब कोई उदासीन गैसीय परमाणु एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो उसके फलस्वरूप मुक्त होने वाली ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं।
- महत्वपूर्ण तथ्य: वर्ग VII A (हैलोजन) के तत्त्वों की इलेक्ट्रॉन बंधुता उच्च होती है। पूरी आवर्त सारणी में सबसे अधिक इलेक्ट्रॉन बंधुता क्लोरीन (Cl) की होती है।
(C) विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity)
- परिभाषा: किसी तत्त्व के परमाणु की वह क्षमता जिससे वह सहसंयोजक बंध में साझेदारी की इलेक्ट्रॉन जोड़ी को अपनी ओर आकर्षित करती है।
- संबंध सूत्र: विद्युत ऋणात्मकता = (आयनन विभव + इलेक्ट्रॉन बंधुता) / 5.6
- महत्वपूर्ण तथ्य: पूरी आवर्त सारणी में फ्लोरीन (F) की विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है।
(D) गलनांक (Melting Point) से जुड़े तथ्य:
- निष्क्रिय गैसों (Inert gases) का गलनांक अत्यंत निम्न (कम) होता है।
- वर्ग IV A (Group 14) के तत्त्वों का गलनांक आवर्त सारणी में उच्चतम होता है।