श्यानता (Viscosity) एवं तरल गतिकी

श्यानता तरल पदार्थों का वह महत्वपूर्ण गुण है जो उनके बहाव की गति और व्यवहार को निर्धारित करता है। आइए इसे बिंदुवार समझते हैं:

1. श्यानता और श्यान बल की अवधारणा

  • श्यान बल (Viscous Force): किसी द्रव या गैस की दो क्रमागत परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करने वाले घर्षण बल को ‘श्यान बल’ कहते हैं।
  • श्यानता (Viscosity): तरल का वह गुण जिसके कारण वह अपनी परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य:
    • श्यानता केवल द्रवों और गैसों का गुण है (ठोसों में श्यानता नहीं होती)।
    • एक ‘आदर्श तरल’ (Ideal Fluid) की श्यानता शून्य होती है।
    • द्रवों में श्यानता ‘संसंजक बलों’ (Cohesive Forces) के कारण होती है, जबकि गैसों में यह अणुओं के एक परत से दूसरी परत में स्थानांतरण के कारण होती है।
    • गैसों की श्यानता द्रवों की तुलना में अत्यंत कम होती है।

2. ताप का प्रभाव

पदार्थ ताप बढ़ने पर श्यानता
द्रव (Liquids) घट जाती है
गैस (Gases) बढ़ जाती है

मापन: श्यानता को ‘श्यानता गुणांक’ (coefficient of viscosity – η) द्वारा मापा जाता है। इसका S.I. मात्रक डेकाप्वॉइज (Decapoise), प्वॉजली (PI) या पास्कल-सेकेण्ड (Pa.s) है।

3. सीमान्त वेग (Terminal Velocity)

जब कोई वस्तु किसी श्यान द्रव में गिरती है, तो प्रारंभ में उसका वेग बढ़ता है, लेकिन कुछ समय बाद वह एक ‘नियत वेग’ से गिरने लगती है। इसी नियत वेग को सीमान्त वेग कहते हैं।

  • इस स्थिति में वस्तु पर कार्य करने वाले सभी बलों (भार, श्यान बल और उत्प्लावन बल) का योग शून्य होता है।
  • सीमान्त वेग, वस्तु की त्रिज्या के वर्ग (r2) के अनुक्रमानुपाती होता है। अतः बड़ी वस्तुएं तेजी से और छोटी वस्तुएं धीरे गिरती हैं।

4. द्रव प्रवाह के प्रकार एवं बरनौली प्रमेय

  • धारा रेखीय प्रवाह (Stream Line Flow): ऐसा प्रवाह जिसमें द्रव का प्रत्येक कण उसी बिंदु से गुजरता है जहाँ से पिछला कण गुजरा था। इसमें प्रवाह की चाल और दिशा नियत रहती है।
  • क्रांतिक वेग (Critical Velocity): धारा रेखीय प्रवाह की वह महत्तम सीमा, जिसके बाद द्रव का प्रवाह ‘विक्षुब्ध’ (Turbulent) हो जाता है।

विशेष नोट:

  • यदि वेग क्रांतिक वेग से कम है, तो प्रवाह ‘श्यानता’ पर निर्भर करता है।
  • यदि वेग क्रांतिक वेग से अधिक है, तो प्रवाह ‘घनत्व’ (Density) पर निर्भर करता है। (यही कारण है कि ज्वालामुखी का लावा गाढ़ा होने पर भी तेजी से बहता है क्योंकि उसका घनत्व कम होता है)।

5. बरनौली का प्रमेय (Bernoulli’s Theorem)

जब कोई आदर्श द्रव किसी नली में धारा रेखीय प्रवाह में बहता है, तो उसके मार्ग के प्रत्येक बिंदु पर एकांक आयतन की कुल ऊर्जा (दाब ऊर्जा + गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) का योग नियत रहता है।

इस प्रमेय पर आधारित वेण्टुरीमीटर (Venturimeter) का उपयोग नली में द्रव के प्रवाह की दर ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

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