भाग 1: राज्यों के प्रमुख लोकनृत्य
| राज्य | प्रमुख लोकनृत्य |
| झारखण्ड | छऊ, सरहुल, जट-जटिन, करमा, डांगा, विदेशिया, सोहराई |
| उत्तराखंड | गढ़वाली, कुमायूँ, कजरी, झोरा, रासलीला, चपादी |
| आन्ध्र प्रदेश | कुचीपुड़ी (शास्त्रीय), घंटामर्दाला, मोहिनीअट्टम (शास्त्रीय), कुम्मी, सीद्धि मधुरी, छड़ी |
| छत्तीसगढ़ | पण्डवानी, गौडी, करमा, झूमर, डागला, पाली, टपाली, नवरानी, दिवारी |
| अरुणाचल प्र. | मुखौटा नृत्य, युद्ध नृत्य |
| हिमाचल प्र. | धमान, छपेली, महाथू, नटी, डांगी, चम्बा, थाली, झैंता, डफ, डंडानाच |
| गोवा | माण्डी, झागोर, खोल, ढकनी |
| असम | बिहू, बिछुआ, नटपूजा, महारास, खेल गोपाल, झुमुरा, कलिगोपाल, नागानृत्य, बुगुरूम्बा, अंकियानाट |
| प० बंगाल | काठी, गम्भीरा, ढाली, जात्रा, बाउल, मरसिया, कीर्तन |
| केरल | कथकली (शास्त्रीय), ओट्टम, थुलाल, मोहिनीअट्टम (शास्त्रीय), कालीअट्टम, पादयानी |
| मेघालय | लाहो, बांग्ला |
| मणिपुर | मणिपुरी (शास्त्रीय), राखाल, नटरास, महारास, रॉखत |
| नागालैंड | चोंग, खैवा, लीम, नुरालीम |
| ओड़ीशा | ओडिसी (शास्त्रीय), सवारी, धूमरा, पैंका, मुणरी, छऊ, अया |
| महाराष्ट्र | लावनी, नकटा, कोली, लेझिम, गफा, बोहदा, गौरीचा, ललिता, तमाशा, मौनी, पोवाड़ा |
| कर्नाटक | यक्षगान, कुनीता, कर्गा, लाम्बी, वीरगास्से |
| गुजरात | गरबा, डाण्डिया, टिप्पानी, भवई, रासलीला, लास्या, पणिहारी |
| पंजाब | भाँगड़ा, गिद्धा, डफ, धमान |
| राजस्थान | घूमर, घापाल, फूंदी, पणिहारी, जिन्दाद, नेजा, गणगौर, कालबेलिया |
| मिजोरम | खानट्म, पाखुपिला, चेरोकान |
| जम्मू-कश्मीर | राउफ, हिकात, मंदजास, कूद, दण्डीनाच, दमाली |
| तमिलनाडु | भरतनाट्यम (शास्त्रीय), कुमी, कोलट्टम, कावड़ी |
| उत्तर प्रदेश | रासलीला, नौटंकी, झूला, कजरी, जद्दा, चाचरी, जैता |
भाग 2: प्रमुख लोक कलाएँ
| लोक कला | राज्य |
| रंगोली | महाराष्ट्र |
| साथिया | गुजरात |
| गोदना | बिहार |
| अहपन | बिहार |
| मांडणा | राजस्थान |
| मेहंदी | राजस्थान |
| चौक पूरना | उत्तर प्रदेश |
भाग 3: विशेष लोकनृत्य (विवरण)
-
बिहू (असम): कचारी व कछारी जनजातियों में प्रचलित, वर्ष में 3 बार आयोजित।
-
राउफ (जम्मू-कश्मीर): ग्रामीण स्त्रियाँ दो पंक्तियों में आमने-सामने खड़ी होकर नृत्य करती हैं।
-
गरबा (गुजरात): नवरात्रि के अवसर पर, जिसमें मिट्टी के दीपक युक्त पात्र के चारों ओर नृत्य किया जाता है।
-
कालबेलिया (राजस्थान): कालबेलिया जनजाति की स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला नृत्य।
-
घूमर (राजस्थान): केवल स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला प्रचलित लोकनृत्य।
-
पण्डवानी (छत्तीसगढ़): पांडवों की कथा पर आधारित एकल लोकनृत्य। तीजनबाई इसकी प्रसिद्ध कलाकार हैं।
-
भाँगड़ा (पंजाब): पुरुषों द्वारा किया जाने वाला लोकनृत्य।
-
तमाशा (महाराष्ट्र): एक नृत्य नाटिका, जिसे विकसित करने का श्रेय वंशीधर भट्ट को जाता है।
-
टिप्पानी (गुजरात): महिलाओं द्वारा सौराष्ट्र के चोरवाड में किया जाने वाला नृत्य।